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  • दस साल के लंबे इंतजार के बाद शादी के बंधन में बंधे दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो

    दस साल के लंबे इंतजार के बाद शादी के बंधन में बंधे दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अपनी लंबे समय से साथी रही जॉर्जिना रोड्रिगेज के साथ विवाह कर लिया है। दोनों का विवाह समारोह पुर्तगाल के तटीय शहर कास्काइस में आयोजित किया गया। इस अत्यंत निजी सिविल सेरेमनी में परिवार के करीबी सदस्यों की मौजूदगी रही।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग एक दशक लंबे रिश्ते के बाद दोनों ने एक-दूसरे को जीवनसाथी चुना है। इस खास अवसर पर कपल के पांचों बच्चे भी मौजूद रहे। रोनाल्डो ने सोशल मीडिया के माध्यम से विवाह की अंगूठियों की तस्वीर साझा कर इस घटनाक्रम की पुष्टि की है।

    दोनों की पहली मुलाकात वर्ष 2016 में मैड्रिड में हुई थी जिसके बाद से वे लगातार साथ हैं। खेल जगत में इस बहुप्रतीक्षित विवाह को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं। अगस्त 2025 में सगाई की घोषणा के बाद से ही इस समारोह का इंतजार किया जा रहा था।

    मध्य प्रदेश सहित भारत भर में फुटबॉल फैंस के बीच रोनाल्डो की शादी की खबर काफी चर्चा में बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस गोपनीय विवाह समारोह की पुष्टि की है। रोनाल्डो पूर्व में दिए साक्षात्कार में सादगीपूर्ण तरीके से विवाह करने की इच्छा जाहिर कर चुके थे।

    पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक यह आयोजन किसी भव्य पार्टी या दिखावे से पूरी तरह दूर रखा गया। केवल अति निकटतम लोगों की उपस्थिति में विवाह की औपचारिकताएं पूरी की गईं। 41 वर्षीय रोनाल्डो और 32 वर्षीय जॉर्जिना अब आधिकारिक तौर पर दंपति बन चुके हैं।

  • दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    नई दिल्ली । विश्व फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी और अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी का 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में लंबी बीमारी से जूझने के बाद अंतिम सांस ली। खेल जगत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से शनिवार को उनके निधन की दुखद खबर सामने आई।

    जॉर्ज मेसी का अपने बेटे लियोनेल मेसी के जीवन और पेशेवर करियर में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे केवल एक पिता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने वर्षों तक मेसी के आधिकारिक एजेंट के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। मेसी के बचपन से लेकर पेशेवर फुटबॉल में वैश्विक पहचान बनाने और करियर से जुड़े बड़े फैसलों को आकार देने में उनकी मुख्य भूमिका मानी जाती है।

    बीते जून महीने में जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य को लेकर विभिन्न प्रकार की खबरें सामने आने लगी थीं, जिसके बाद मेसी परिवार को सार्वजनिक रूप से एक बयान जारी करना पड़ा था। उस समय परिवार ने पुष्टि की थी कि वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं और चिकित्सकों की सख्त देखरेख में इलाज करा रहे हैं। परिवार ने उस वक्त लोगों और मीडिया से निजता का सम्मान करने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की थी।

    पिता की गंभीर स्थिति का प्रभाव लियोनेल मेसी की खेल गतिविधियों पर भी देखा गया था। एक महत्वपूर्ण मैच के दौरान गोल करने के बाद वे काफी भावुक नजर आए थे और उन्होंने स्वीकार किया था कि व्यक्तिगत जीवन में उनके लिए समय कठिन चल रहा है। इसके अलावा, हाल ही में आयोजित एक प्रमुख प्रदर्शनी मैच से भी उन्होंने दूरी बनाई थी, जिसे उनके पिता के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया था।

    उल्लेखनीय है कि लियोनेल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना की टीम ने वर्ष 2022 में कतर में आयोजित फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। इसके अलावा हालिया दौर में भी उनकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं के फाइनल तक का सफर तय किया है। पिता के निधन की खबर से वैश्विक फुटबॉल समुदाय और मेसी के प्रशंसकों में शोक की लहर व्याप्त है।

  • फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक

    फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक


    नई दिल्ली। विश्व फुटबॉल के इतिहास में जब भी महान डिफेंडरों का नाम लिया जाएगा तब फ्रेंको बारेसी का नाम हमेशा सबसे सम्मान के साथ लिया जाएगा। इटली के पूर्व कप्तान और एसी मिलान की पहचान बन चुके फ्रेंको बारेसी का 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों में शोक की लहर दौड़ गई। एसी मिलान ने आधिकारिक बयान जारी कर अपने सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल बारेसी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि क्लब ने सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि अपनी आत्मा को खो दिया है।

    फ्रेंको बारेसी का पूरा करियर समर्पण अनुशासन और वफादारी का प्रतीक रहा। ऐसे दौर में जब खिलाड़ी बेहतर अनुबंध और बड़ी रकम के लिए क्लब बदलते रहते हैं तब बारेसी ने अपने पूरे पेशेवर करियर में केवल एसी मिलान की जर्सी पहनी। उन्होंने 1974 में क्लब की युवा अकादमी से सफर शुरू किया और 1978 में सीनियर टीम में पदार्पण किया। इसके बाद लगभग दो दशकों तक उन्होंने एसी मिलान की रक्षा पंक्ति को मजबूती प्रदान की और क्लब को कई ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं।

    महज 22 वर्ष की उम्र में उन्हें टीम का कप्तान बना दिया गया था। कप्तान के रूप में उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल से पूरी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एसी मिलान के लिए उन्होंने 719 मुकाबले खेले जो लंबे समय तक क्लब का रिकॉर्ड रहा। उनके सम्मान में क्लब ने उनकी प्रतिष्ठित नंबर 6 जर्सी को हमेशा के लिए रिटायर कर दिया जो किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।

    फ्रेंको बारेसी ने डिफेंडर की भूमिका को नई पहचान दी। उनकी बेहतरीन पोजिशनिंग खेल को पढ़ने की क्षमता और शांत स्वभाव उन्हें दुनिया के बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता था। पाओलो माल्डिनी माउरो टैसोटी और एलेसांद्रो कोस्टाकुर्ता के साथ उन्होंने ऐसी रक्षापंक्ति बनाई जिसे फुटबॉल इतिहास की सबसे मजबूत डिफेंस लाइन में गिना जाता है। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत एसी मिलान ने छह सीरी ए खिताब और तीन यूरोपीय कप जीतकर यूरोपीय फुटबॉल में अपना दबदबा कायम किया।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका योगदान बेहद यादगार रहा। वे 1982 में विश्व कप जीतने वाली इटली की टीम का हिस्सा थे। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय टीम की कप्तानी भी संभाली और 1994 फीफा विश्व कप में इटली को फाइनल तक पहुंचाया। हालांकि ब्राजील के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार के कारण उनका दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया लेकिन उनके प्रदर्शन की आज भी मिसाल दी जाती है।

    पिछले वर्ष उनके फेफड़े में गांठ मिलने के बाद सर्जरी हुई थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वे लगातार एसी मिलान के मुकाबलों में दिखाई देते रहे और खेल से जुड़े आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे। हाल ही में आयोजित विंटर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में भी उन्होंने मशाल लेकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

    फ्रेंको बारेसी सिर्फ एक महान फुटबॉलर नहीं बल्कि अनुशासन समर्पण और खेल भावना की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने यह साबित किया कि महान खिलाड़ी केवल ट्रॉफियों से नहीं बल्कि अपने चरित्र और मूल्यों से भी पहचाने जाते हैं। उनका जाना फुटबॉल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है लेकिन उनकी उपलब्धियां और प्रेरणादायक विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।

  • स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर

    स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद स्पेन सिर्फ ट्रॉफी का ही नहीं बल्कि रिकॉर्ड इनामी राशि का भी हकदार बन गया। फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने वाली स्पेनिश टीम पर करोड़ों रुपए की बारिश हुई। फीफा ने चैंपियन टीम को 50 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 480 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की। पिछले विश्व कप की तुलना में इस बार विजेता टीम की इनामी राशि में 8 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की गई थी जिससे इस जीत का महत्व और भी बढ़ गया।

    फाइनल में हारने के बावजूद अर्जेंटीना भी खाली हाथ नहीं लौटा। उपविजेता टीम को 33 मिलियन डॉलर यानी लगभग 318 करोड़ रुपए की इनामी राशि मिली। वहीं तीसरे स्थान पर रहने वाली इंग्लैंड को 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 279 करोड़ रुपए और चौथे स्थान पर रही फ्रांस को 27 मिलियन डॉलर यानी लगभग 260 करोड़ रुपए दिए गए। क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली प्रत्येक टीम को 19 मिलियन डॉलर जबकि प्री क्वार्टर फाइनल यानी राउंड ऑफ 16 में बाहर होने वाली टीमों को 15 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई।

    फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया। मैच का फैसला 106वें मिनट में हुआ जब स्पेन के स्टार खिलाड़ी फेरान टोरेस ने शानदार गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यही गोल निर्णायक साबित हुआ और स्पेन ने 16 वर्षों बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इससे पहले स्पेन ने वर्ष 2010 में पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता था।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन संतुलित और अनुशासित रहा। टीम की मजबूत रक्षापंक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। स्पेन ने पूरे विश्व कप अभियान में केवल एक गोल खाया जो उसकी शानदार डिफेंसिव रणनीति का प्रमाण है। आक्रमण और रक्षा के बेहतरीन तालमेल ने टीम को लगातार जीत दिलाई और आखिरकार विश्व विजेता बना दिया।

    स्पेन की सफलता में मिडफील्डर रोड्री की भूमिका भी बेहद अहम रही। पूरे टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और प्रतिष्ठित गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रोड्री ने अपनी सूझबूझ शानदार पासिंग और खेल पर नियंत्रण की क्षमता से स्पेन के अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक जीत के साथ हुआ जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत टीम वर्क अनुशासित खेल और प्रभावी रणनीति किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।

  • फीफा फाइनल का जुनून, केरल में सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद; छात्रों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला

    फीफा फाइनल का जुनून, केरल में सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद; छात्रों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले से पहले केरल में फुटबॉल का जुनून अपने चरम पर पहुंच गया है। स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होने वाले खिताबी मुकाबले को लेकर राज्यभर में ऐसा माहौल है, मानो कोई बड़ा त्योहार मनाया जा रहा हो। फुटबॉल प्रेमियों के इसी उत्साह को देखते हुए केरल सरकार ने सोमवार को सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया है।

    मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन के निर्देश पर लिया गया यह फैसला छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद सामने आया। सोशल मीडिया पर हजारों छात्रों ने देर रात होने वाले फाइनल मुकाबले के कारण अगले दिन छुट्टी देने की अपील की थी। सरकार ने छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया, ताकि वे बिना किसी चिंता के विश्व कप फाइनल का आनंद ले सकें और अगली सुबह कक्षाओं में उपस्थित होने की परेशानी न झेलें।

    भारतीय समयानुसार स्पेन और अर्जेंटीना के बीच विश्व कप फाइनल सोमवार तड़के 12:30 बजे शुरू होगा। इसी वजह से सरकार ने जनरल एजुकेशन विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों और हायर एजुकेशन विभाग के सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा प्रोफेशनल संस्थानों में अवकाश घोषित किया है।

    उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुविधा और खेल के प्रति उनके उत्साह को ध्यान में रखकर लिया गया है। वहीं, सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में लिखा, “अब खुश हो, बच्चों?” इस संदेश के साथ उन्होंने छुट्टी की आधिकारिक घोषणा भी की।

    केरल में फुटबॉल की लोकप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। राज्य के शहरों और गांवों में स्पेन और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के विशाल कटआउट लगाए गए हैं। सड़कों और चौराहों पर दोनों टीमों के झंडे, बैनर और सजावटी तोरण द्वार नजर आ रहे हैं। विभिन्न फैन क्लबों ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग, एलईडी स्क्रीन, रैलियों और जश्न के विशेष कार्यक्रमों की तैयारियां भी पूरी कर ली हैं। पूरे राज्य में विश्व कप फाइनल को लेकर उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

    सरकारी घोषणा से पहले एर्नाकुलम सहित कई जिलों के कुछ निजी और सरकारी स्कूल छात्रों तथा अभिभावकों की मांग पर पहले ही छुट्टी घोषित कर चुके थे। राज्य सरकार के फैसले के बाद पूरे केरल में एक समान व्यवस्था लागू हो गई, जिससे किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति भी समाप्त हो गई।

    फीफा विश्व कप फाइनल को लेकर केरल में दिख रहा यह उत्साह एक बार फिर साबित करता है कि यहां फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि लोगों की संस्कृति, भावना और पहचान का अहम हिस्सा है। लाखों फुटबॉल प्रेमी अब देर रात होने वाले इस महामुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और सेमीफाइनल मुकाबलों से पहले फुटबॉल जगत की निगाहें चारों दावेदार टीमों पर टिकी हुई हैं। इसी बीच जर्मनी के महान गोलकीपर ओलिवर कान ने टूर्नामेंट को लेकर बड़ी भविष्यवाणी करते हुए फ्रांस को विश्व चैंपियन बनने का सबसे प्रबल दावेदार बताया है। कान का मानना है कि फ्रांस के पास संतुलित टीम गहराई से भरा स्क्वॉड और हर परिस्थिति में मुकाबला जीतने की क्षमता है जो उसे बाकी टीमों से थोड़ा आगे खड़ा करती है।

    फ्रांस का मुकाबला 15 जुलाई को डलास स्टेडियम में स्पेन से होने वाले पहले सेमीफाइनल में होगा। यह मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे बड़े और रोमांचक मुकाबलों में गिना जा रहा है। विश्व कप के नॉकआउट चरण में दोनों टीमें दूसरी बार आमने सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2006 के राउंड ऑफ 16 में फ्रांस ने स्पेन को 3 1 से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था। अब एक बार फिर दोनों यूरोपीय दिग्गज विश्व कप के फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए आमने सामने होंगे।

    ओलिवर कान ने कहा कि यदि अब तक के प्रदर्शन के आधार पर किसी एक टीम को चुनना हो तो उनकी पहली पसंद फ्रांस होगी। उनके अनुसार फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका संतुलन है। टीम के पास मजबूत डिफेंस रचनात्मक मिडफील्ड और तेज आक्रमण करने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं। इसके साथ ही बेंच स्ट्रेंथ भी बेहद मजबूत है जिससे किसी भी समय मैच का रुख बदला जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीमें खिताब जीतने की पूरी क्षमता रखती हैं और उनके बीच बहुत कम अंतर है।

    कान के अनुसार स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाला मुकाबला रणनीति और धैर्य की सबसे बड़ी परीक्षा होगा। स्पेन अपनी तेज पासिंग और गेंद पर नियंत्रण रखने वाली शैली के लिए जाना जाता है जबकि फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज पलटवार है। ऐसे में जो टीम मिडफील्ड पर नियंत्रण बनाए रखेगी और विपक्षी टीम की रणनीति को सफल नहीं होने देगी वही फाइनल का टिकट हासिल कर सकती है।

    उन्होंने कहा कि स्पेन के लिए फ्रांस की मजबूत रक्षापंक्ति को तोड़ना आसान नहीं होगा। स्पेन को लगातार धैर्य के साथ आक्रमण करना होगा तेज पासिंग करनी होगी और मैदान के अहम हिस्सों में अतिरिक्त खिलाड़ियों की मौजूदगी बनाए रखनी होगी। साथ ही उसे अपने डिफेंस को भी मजबूत रखना होगा क्योंकि फ्रांस दुनिया की सबसे खतरनाक काउंटर अटैक करने वाली टीमों में शामिल है और छोटी सी गलती भी मैच का परिणाम बदल सकती है।

    कान ने यह भी कहा कि बड़े मुकाबलों का फैसला अक्सर छोटे छोटे पलों से होता है। केवल लगातार दबाव बनाना ही काफी नहीं होता बल्कि सही समय पर समझदारी से प्रेसिंग करना और मिडफील्ड में नियंत्रण बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो टीम विपक्षी को खुलकर खेलने का मौका नहीं देगी उसके जीतने की संभावना अधिक होगी।

    अपने लंबे गोलकीपिंग अनुभव को साझा करते हुए ओलिवर कान ने आधुनिक फुटबॉल में गोलकीपर की बदलती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का गोलकीपर केवल गोल बचाने वाला खिलाड़ी नहीं रह गया है बल्कि वह टीम के आक्रमण की शुरुआत करने वाला पहला खिलाड़ी और अंतिम रक्षक दोनों की भूमिका निभाता है। गोलकीपर का एक सही फैसला मैच जितवा सकता है जबकि एक छोटी सी गलती पूरी टीम की मेहनत पर पानी फेर सकती है।

    उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में वही टीमें सफल होती हैं जो दबाव के बीच भी शांत रहती हैं अपने गेम प्लान पर कायम रहती हैं और भावनाओं के बजाय सही समय पर सही फैसले लेती हैं। यही विशेषताएं फ्रांस की टीम में साफ दिखाई देती हैं और यही वजह है कि वह इस बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने की सबसे मजबूत दावेदार नजर आती है।

  • स्पेन ने 16 साल बाद रचा इतिहास, बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में एंट्री

    स्पेन ने 16 साल बाद रचा इतिहास, बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में एंट्री


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेल्जियम को 2-1 से हराकर 16 साल बाद विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बना ली। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले का फैसला अंतिम मिनटों में हुआ, जब सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी मिकेल मेरिनो ने निर्णायक गोल कर स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिलाई। अब सेमीफाइनल में स्पेन की भिड़ंत पिछले विश्व कप की फाइनलिस्ट फ्रांस से होगी।

    लॉस एंजिल्स में खेले गए मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने आक्रामक रवैया अपनाया और बेल्जियम के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। गेंद पर बेहतर नियंत्रण और तेज पासिंग के दम पर स्पेन ने कई मौके बनाए। आखिरकार 30वें मिनट में उसकी मेहनत रंग लाई। लैमिन यामल के शानदार मूव के बाद पेड्रो पोरो ने बॉक्स में सटीक लो क्रॉस दिया। गोलकीपर थिबॉट कोर्टुआ ने डैनी ओल्मो का पहला प्रयास रोक लिया, लेकिन रिबाउंड पर फैबियन रुइज ने गेंद को गोल में पहुंचाकर स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी।

    हालांकि बेल्जियम ने भी शानदार वापसी की। 41वें मिनट में टिमोथी कास्टेग्ने के बेहतरीन क्रॉस पर चार्ल्स डी केटेलेयर ने दमदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के साथ स्पेन के गोलकीपर उनाई साइमन की लगातार छह क्लीन शीट का सिलसिला भी समाप्त हो गया। साथ ही विश्व कप में बिना गोल खाए उनके लगातार 650 मिनट खेलने का रिकॉर्ड भी टूट गया।

    दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई हमले किए, लेकिन गोल नहीं हो सका। मैच के 71वें मिनट में बेल्जियम को बड़ा झटका तब लगा, जब अनुभवी गोलकीपर थिबॉट कोर्टुआ चोट के कारण मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। उनकी जगह युवा गोलकीपर सेने लैमेंस को उतारा गया। कोर्टुआ का यह विश्व कप में 21वां मुकाबला था और वह टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले गोलकीपरों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था, तभी स्पेन के कोच ने 86वें मिनट में मिकेल मेरिनो को मैदान पर उतारा। महज दो मिनट बाद ही मेरिनो ने अपनी मौजूदगी का असर दिखा दिया। पाउ क्यूबार्सी के दूर से लगाए गए शॉट को बेल्जियम के नए गोलकीपर ठीक से नियंत्रित नहीं कर सके। गेंद उनके हाथों से छिटक गई और मेरिनो ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यही गोल स्पेन की जीत का कारण बना।

    यह लगातार दूसरा मुकाबला रहा, जिसमें मिकेल मेरिनो ने सब्स्टीट्यूट के तौर पर उतरकर स्पेन के लिए निर्णायक गोल किया। इससे पहले उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में पुर्तगाल के खिलाफ भी अंतिम समय में विजयी गोल दागकर टीम को जीत दिलाई थी।

    इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। टीम का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है और अब उसकी नजर फ्रांस को हराकर फाइनल का टिकट हासिल करने पर होगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और पहली बार इस वैश्विक मंच पर खेल रही केप वर्डे की टीम के बीच मियामी गार्डन्स में खेला गया मुकाबला फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण मुकाबले में अर्जेंटीना ने अंततः केप वर्डे को 3-2 से पराजित कर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली है। पश्चिमी अफ्रीका के तट पर स्थित एक बेहद छोटे से द्वीपीय देश केप वर्डे ने विश्व विजेता टीम को आखिरी पलों तक कड़ी टक्कर दी, जिससे चैंपियन टीम टूर्नामेंट से बाहर होते-होते बची।

    मैच का फैसला निर्धारित 90 मिनटों में नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में खींचा गया। अर्जेंटीना की जीत का निर्णायक मोड़ एक्स्ट्रा टाइम के 111वें मिनट में आया, जब क्रिस्टियन रोमेरो के एक दमदार हेडर को रोकने के प्रयास में गेंद केप वर्डे के डिफेंडर डाइनी बोर्जेस से टकराकर सीधे नेट में चली गई। बोर्जेस का यह ओन गोल अर्जेंटीना के लिए जीवनदान साबित हुआ, जिसने टीम को 3-2 की निर्णायक बढ़त दिला दी, जो मैच के अंतिम समय तक बरकरार रही।

    इससे पहले, मुकाबले की शुरुआत में अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी और कप्तान लियोनेल मेसी ने मैच के 29वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज के एक बेहतरीन लॉन्ग पास को नियंत्रित करते हुए गोलकीपर वोजिन्हा के ऊपर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई थी। इसके बाद एक्स्ट्रा टाइम के 103वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज ने खुद गोल दागकर टीम का स्कोर 2-1 कर दिया था। हालांकि, केप वर्डे की जुझारू टीम ने मैच में दो बार शानदार वापसी की। सिडनी लोपेस कैब्राल और डेरॉय डुआर्टे ने अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति को भेदते हुए दो बार बराबरी के गोल दागे, जिसने स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।

    हार का सामना करने के बावजूद केप वर्डे की टीम ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप अभियान से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया है। इस छोटे से देश ने ग्रुप चरण में स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ ड्रॉ खेलकर नॉकआउट चरण का टिकट कटाया था। अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भी केप वर्डे के 40 वर्षीय अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा ने अद्भुत खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच के दौरान मेसी के पांच तीखे प्रहारों सहित कुल 10 शानदार गोल होने से रोके, जिसने अर्जेंटीना को लंबे समय तक बैकफुट पर रखा।

    इस मैच में किए गए गोल के साथ ही कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज कर लिए हैं। यह मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 20वां वर्ल्ड कप गोल था, जिसके साथ ही वह मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे से आगे निकल गए हैं। मेसी का वर्ल्ड कप के लगातार आठ मैचों में स्कोर करने का रिकॉर्ड भी अब और मजबूत हो गया है, जिसमें वे अब तक कुल 12 गोल कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना का सामना मिस्र की टीम से आगामी मंगलवार को अटलांटा में होगा।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 बना सबसे धमाकेदार टूर्नामेंट 59वें मैच में टूटा सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अभी कई मुकाबले बाकी

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 बना सबसे धमाकेदार टूर्नामेंट 59वें मैच में टूटा सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अभी कई मुकाबले बाकी


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 ने गोलों के मामले में नया इतिहास रच दिया है। अमेरिका कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट ने अभी आधा सफर भी पूरा नहीं किया है लेकिन एक संस्करण में सबसे ज्यादा गोल होने का रिकॉर्ड पहले ही टूट चुका है। नए 48 टीमों वाले प्रारूप ने विश्व कप को पहले से अधिक रोमांचक बना दिया है और मैदान पर गोलों की लगातार बारिश देखने को मिल रही है।

    टूर्नामेंट के 59वें मुकाबले में अमेरिका और तुर्किये के बीच खेले गए मैच के दौरान विश्व कप का 173वां गोल दर्ज हुआ। इसके साथ ही कतर में आयोजित 2022 विश्व कप में बने 172 गोल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया गया। इसके बाद गोलों की संख्या लगातार बढ़ती रही और अब तक कुल 177 गोल हो चुके हैं। खास बात यह है कि नॉकआउट चरण के कई बड़े मुकाबले अभी बाकी हैं जिससे यह आंकड़ा और आगे जाने की पूरी संभावना है।

    इस रिकॉर्ड के पीछे सबसे बड़ा कारण विश्व कप का नया प्रारूप माना जा रहा है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमों को शामिल किया गया है। इससे पहले 1930 से 2022 तक विश्व कप में 32 टीमें हिस्सा लेती थीं और कुल 64 मुकाबले खेले जाते थे। अब मैचों की संख्या बढ़कर 104 हो गई है जिससे खिलाड़ियों को गोल करने के अधिक अवसर मिल रहे हैं और दर्शकों को अधिक रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं।

    इस विश्व कप में कई स्टार खिलाड़ियों ने भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पुर्तगाल के दिग्गज क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने उज्बेकिस्तान के खिलाफ गोल कर लगातार छह अलग अलग विश्व कप में गोल करने वाले पहले पुरुष फुटबॉलर बनने का गौरव हासिल किया। 41 वर्ष की उम्र में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी है।

    फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे ने भी अपनी शानदार फॉर्म बरकरार रखते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक छह बार किसी मैच में दो या उससे अधिक गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उनके कुल विश्व कप गोलों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। वहीं अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी 18 गोल के साथ बेहतरीन लय में बने हुए हैं।

    ब्राजील के विनिसियस जूनियर भी गोल्डन बूट की दौड़ में मजबूती से शामिल हो गए हैं। स्कॉटलैंड के खिलाफ उनके दो गोलों ने ब्राजील को अगले दौर में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नए प्रारूप के तहत हर टीम को ग्रुप चरण में कम से कम तीन मैच मिलने से खिलाड़ियों के पास बेहतर प्रदर्शन और अधिक गोल करने के अवसर भी बढ़ गए हैं।

    विश्व कप के इतिहास पर नजर डालें तो 1930 के पहले टूर्नामेंट में कुल 70 गोल हुए थे। इसके बाद 1998 और 2014 में 171 गोल तथा 2022 में 172 गोल का रिकॉर्ड बना था। अब 2026 विश्व कप ने इन सभी उपलब्धियों को पीछे छोड़ दिया है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो फाइनल तक कुल गोलों की संख्या 200 के आंकड़े को भी पार कर सकती है। इससे यह विश्व कप गोलों और रोमांच दोनों के लिहाज से अब तक का सबसे यादगार संस्करण बनने की ओर बढ़ रहा है।

  • फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री

    फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपना दमखम दिखाते हुए इराक को 3 0 से हराकर नॉकआउट राउंड में जगह पक्की कर ली। फिलाडेल्फिया में खेले गए इस मुकाबले में बारिश और खराब मौसम भी खेल का रोमांच कम नहीं कर सके और पूरे मैच में फ्रांस का दबदबा बना रहा। इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे Kylian Mbappé जिन्होंने दो गोल दागकर टीम को आसान जीत दिलाई।

    मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक खेल दिखाया। एम्बाप्पे ने 14वें मिनट में पहला गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद इराक की टीम संभलने की कोशिश करती रही लेकिन फ्रांस का दबाव लगातार बढ़ता गया। दूसरे हाफ में 54वें मिनट में एम्बाप्पे ने एक और गोल कर स्कोर 2 0 कर दिया। यह गोल इराकी डिफेंडर की गलती का फायदा उठाकर किया गया, जिसमें एम्बाप्पे ने अपनी तेज रफ्तार और सटीक फिनिशिंग का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

    इसके बाद उस्मान डेम्बेले ने तीसरा गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी। इस जीत के साथ फ्रांस ने न केवल नॉकआउट राउंड में जगह बनाई बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत दावेदार टीमों में शामिल है।

    यह मुकाबला मौसम की वजह से भी चर्चा में रहा। पहले हाफ के बाद तेज बारिश और तूफान की चेतावनी के चलते मैच को करीब दो घंटे तक रोकना पड़ा। मैदान पर पानी भर जाने के कारण खेल दोबारा शुरू कराना चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन ग्राउंड स्टाफ की मेहनत के बाद मैच फिर से शुरू हुआ और फ्रांस ने अपनी लय बनाए रखी।

    इस मुकाबले में एम्बाप्पे के लिए यह और भी खास रहा क्योंकि यह उनका 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर उन्होंने दो गोल कर इसे यादगार बना दिया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने विश्व कप में अपने गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।

    एम्बाप्पे ने इस उपलब्धि के साथ जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज की बराबरी कर ली और ब्राजील के दिग्गज रोनाल्डो को पीछे छोड़ दिया। अब उनसे आगे केवल अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हैं जिनके नाम 18 विश्व कप गोल दर्ज हैं।

    इराक की टीम के लिए यह मैच निराशाजनक रहा। टीम के प्रमुख स्ट्राइकर अयमेन हुसैन चोट के कारण मैदान छोड़ने को मजबूर हुए जिससे टीम की आक्रामक क्षमता कमजोर पड़ गई। इराक के लिए यह विश्व कप में सिर्फ दूसरा ही मौका था और इस हार के बाद उनका आगे का सफर काफी मुश्किल हो गया है।

    दूसरी ओर ग्रुप I से नॉर्वे ने भी नॉकआउट में जगह बना ली है। इस ग्रुप में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा जिसमें नॉर्वे ने सेनेगल को 3 2 से हराया। नॉर्वे की जीत में एर्लिंग हालैंड ने दो गोल दागे जबकि मार्कस पेडरसन ने एक गोल किया। सेनेगल की ओर से इस्माइला सार ने दोनों गोल किए।

    इस तरह फ्रांस और नॉर्वे दोनों ने नॉकआउट में प्रवेश कर लिया है और अब आगे के मुकाबलों में खिताब की दौड़ और भी दिलचस्प हो गई है।