Tag: foreign investment india

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंथन

    बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंथन


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार मौजूदा 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी बैंकों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। इससे बैंकिंग सेक्टर में पूंजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति और विकास योजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा भी नहीं की गई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में प्रारूप कैबिनेट नोट तैयार किया है। प्रस्तावित बदलाव को आगे बढ़ाने से पहले अन्य मंत्रालयों से उनकी राय मांगी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने भी सरकारी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर जल्द विचार करने की सिफारिश की थी। ऐसे में आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फिलहाल भारत में निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए एफडीआई की अधिकतम सीमा 74 प्रतिशत है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत तक निर्धारित है। इस अंतर को कम करने के उद्देश्य से सरकारी बैंकों में निवेश की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। देश के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में सबसे अधिक 11.07 प्रतिशत विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। इसके बाद केनरा बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 10.55 प्रतिशत है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी बैंकों के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    इस प्रस्ताव पर विचार ऐसे समय में किया जा रहा है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश छह प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 18.62 अरब डॉलर था। मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल में एफडीआई लगभग दोगुना होकर 12.1 अरब डॉलर पहुंच गया जबकि एक साल पहले इसी महीने यह 6.6 अरब डॉलर था। मई में निवेश घटकर 2.8 अरब डॉलर रहा लेकिन जून में फिर बढ़कर 4.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

    क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार सेवा क्षेत्र विदेशी निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र में 7.04 अरब डॉलर का निवेश आया। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र को 2.84 अरब डॉलर तथा व्यापार क्षेत्र को 1.92 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला। इसके अलावा गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 1.24 अरब डॉलर और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 62.2 करोड़ डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। इक्विटी निवेश पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी को शामिल करने वाला कुल एफडीआई अप्रैल से जून के दौरान लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर हो गया।

    राज्यों की बात करें तो तमिलनाडु 5.95 अरब डॉलर के निवेश के साथ पहले स्थान पर रहा। महाराष्ट्र में 4.22 अरब डॉलर दिल्ली में 2.67 अरब डॉलर कर्नाटक में 2.11 अरब डॉलर और गुजरात में 1.3 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। अब सरकारी बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश की भूमिका बढ़ सकती है।

  • भारत न्यूजीलैंड एफटीए से खुलेगा व्यापार .का नया दौर निर्यात निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट

    भारत न्यूजीलैंड एफटीए से खुलेगा व्यापार .का नया दौर निर्यात निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा है कि यह समझौता आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा उन्होंने स्पष्ट किया कि यह करार केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि इससे कई नए क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं खुलेंगी

    मंत्री के अनुसार इस एफटीए के तहत भारत से न्यूजीलैंड निर्यात होने वाले अधिकांश उत्पादों पर अब शून्य शुल्क लागू होगा इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात में तेजी आएगी खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है

    पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते के जरिए न्यूजीलैंड का बाजार भारत के लिए करीब 140 सेवा क्षेत्रों में खुल गया है इसमें शिक्षा खेल संस्कृति कृषि उत्पादकता और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर शामिल हैं उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बौद्धिक संपदा और पारंपरिक चिकित्सा विशेष रूप से आयुष से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा

    फार्मास्यूटिकल सेक्टर को लेकर उन्होंने इसे बेहद अहम करार दिया मंत्री ने बताया कि यदि भारत में बनी कोई दवा पहले से अमेरिका या यूरोप जैसे विकसित देशों में स्वीकृत है तो न्यूजीलैंड में उसे तेज प्रक्रिया के जरिए मंजूरी मिल सकेगी इससे भारतीय दवा कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश आसान होगा और उनकी पहुंच मजबूत होगी

    निवेश के क्षेत्र में भी इस समझौते को गेम चेंजर माना जा रहा है मंत्री के अनुसार पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड ने भारत में करीब 70 मिलियन डॉलर का निवेश किया है लेकिन अब अगले 15 वर्षों में लगभग 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई जा रही है यह निवेश देश में उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    उन्होंने यह भी बताया कि इस समझौते को जल्द ही न्यूजीलैंड की संसद में पेश किया जाएगा जहां इसे सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इसे मंजूरी मिलने के बाद इस वर्ष के अंत तक लागू कर दिया जाएगा

    पीयूष गोयल ने कहा कि यह एफटीए भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा और अमृत काल के दौरान देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेगा उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा और व्यापारिक साझेदारी को नए आयाम देगा