Tag: Forest Department dispute

  • भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब

    भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वन विभाग द्वारा उनकी जमीनों के कथित अधिग्रहण की कार्रवाई से नाराज थे। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी जमीनों पर अधिकार बहाल करने की मांग उठाई।

    प्रदर्शन का केंद्र रीठी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम ललितपुर रहा, जहां के कई आदिवासी परिवार वर्षों से खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। धरने में शामिल ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनके भू-अधिकार पट्टे वापस नहीं किए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    1989 से काबिज जमीन पर अब विवाद, वन विभाग पर आरोप
    प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा उन्हें वर्ष 1989 में विधिवत भू-अधिकार पट्टे दिए गए थे। इन पट्टों के आधार पर वे लगातार लगभग तीन दशकों से अधिक समय से जमीन पर काबिज हैं और खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।आदिवासी परिवारों का आरोप है कि अब वन विभाग उनकी इसी जमीन को अपना बताकर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

    पीड़ितों का दर्द: “रोजी-रोटी छीनी जा रही है”
    प्रदर्शन में शामिल पीड़ित बृजलाल ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस जमीन पर मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस जमीन पर खून-पसीना बहाया है। शासन ने ही हमें पट्टा दिया था, अब वन विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है। यह हमारे साथ अन्याय है और हमारी रोजी-रोटी छीनी जा रही है।”

    कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, उच्च स्तरीय जांच की मांग
    धरना प्रदर्शन के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसे डिप्टी कलेक्टर को दिया गया। ज्ञापन में वन विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने अपने भू-अधिकार पट्टों को यथावत रखने और वन विभाग के हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि उन्हें उनकी जमीन पर शांतिपूर्वक खेती करने का अधिकार फिर से सुनिश्चित किया जाए।

    प्रशासन पर निगाहें, आंदोलन की चेतावनी
    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • वन अमले से भिड़े भाजपा नेता राजन गुप्ता: मुनारा निर्माण रुकवाया, मौके पर हुआ हंगामा

    वन अमले से भिड़े भाजपा नेता राजन गुप्ता: मुनारा निर्माण रुकवाया, मौके पर हुआ हंगामा


    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी क्षेत्र में उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब भाजपा नेता और ब्यौहारी नगर पालिका अध्यक्ष राजन गुप्ता का वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से तीखा विवाद हो गया। यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब वन विभाग की टीम वन सीमा को चिन्हित करने के लिए मुनारा निर्माण का काम कर रही थी। विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें नगर पालिका अध्यक्ष कर्मचारियों से बहस करते और काम रुकवाते हुए नजर आ रहे हैं।

    जानकारी के मुताबिक वन विभाग द्वारा ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के बीट बेढरा में पीसीडी कार्य के तहत मुनारा निर्माण कराया जा रहा था। इस निर्माण कार्य का उद्देश्य वन क्षेत्र की सीमा को स्पष्ट रूप से चिन्हित करना और भविष्य में होने वाले अतिक्रमण को रोकना बताया गया। इसके लिए विभागीय टीम मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीन की मदद से गड्ढे खुदवा रही थी ताकि वहां मुनारे लगाए जा सकें।

    इसी दौरान नगर पालिका अध्यक्ष राजन गुप्ता मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य पर आपत्ति जताने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उन्होंने मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारियों से तीखी बहस शुरू कर दी और तत्काल काम बंद करने को कहा। बताया जा रहा है कि उन्होंने जेसीबी मशीन को भी वहां से हटाने और उसे नगर परिषद ले जाने की बात कही। इस दौरान मौके पर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ उनकी बहस काफी देर तक चलती रही जिससे वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    वन विभाग के कर्मचारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए अध्यक्ष से कहा कि रेंजर के आने तक इंतजार कर लिया जाए और उनके सामने ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। कुछ देर बाद रेंजर भी मौके पर पहुंच गए लेकिन विवाद शांत होने के बजाय और बढ़ गया। नगर पालिका अध्यक्ष ने रेंजर से भी सख्त लहजे में सवाल करते हुए खुदाई की अनुमति से जुड़े दस्तावेज दिखाने की मांग कर दी। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस चलती रही।

    मौके पर बढ़ते तनाव को देखते हुए वन विभाग की टीम ने फिलहाल काम रोक देना ही उचित समझा। इसके बाद विभागीय अधिकारी पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को देने की बात कह रहे हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसके बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

    गौरतलब है कि नगर पालिका अध्यक्ष राजन गुप्ता पहले भी विवादों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। इससे पहले भी टोल नाके पर कर्मचारियों के साथ गाली-गलौच और धमकी देने का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसने काफी विवाद खड़ा किया था।

    हालांकि इस मामले में राजन गुप्ता का कहना है कि उन्होंने जनप्रतिनिधि होने के नाते आम लोगों के हित में आवाज उठाई है। उनका आरोप है कि वन विभाग द्वारा एक गरीब चाय-पान की दुकान के सामने जबरदस्ती निर्माण कराया जा रहा था जबकि वह जमीन राजस्व और नगर पालिका की बताई जा रही है। उनका कहना है कि जब तक जमीन और अनुमति से जुड़े दस्तावेज स्पष्ट नहीं होंगे तब तक वहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।