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  • उमरिया में अवैध रेत खनन पर बवाल, वनकर्मियों को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास

    उमरिया में अवैध रेत खनन पर बवाल, वनकर्मियों को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र में अवैध रेत खनन रोकने पहुंची वन विभाग की टीम पर खनन माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया। मामला सलैया गांव के जंगल क्षेत्र का है, जहां सोमवार शाम यह खतरनाक घटना हुई। वन विभाग की उड़नदस्ता टीम को पनिया नाला क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां से अवैध रेत से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली निकलते दिखाई दिए।

    वनकर्मियों को कुचलने की कोशिश, ट्रैक्टर लेकर फरार हुए आरोपी
    वनकर्मियों ने जब ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया तो चालकों ने रफ्तार बढ़ा दी। आरोप है कि रेत माफिया ने वनकर्मियों की ओर ट्रैक्टर मोड़कर उन्हें कुचलने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वनकर्मी किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए। हालांकि, वन विभाग की टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर लिया है।

    पहले भी हुई है मारपीट की घटनाएं
    चंदिया परिक्षेत्र अधिकारी नीलेश द्विवेदी ने बताया कि फरार आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वनरक्षक रमाशंकर ने बताया कि यह गिरोह पहले भी वनकर्मियों पर हमला कर चुका है। कुछ समय पहले भी इसी क्षेत्र में वनरक्षक के साथ मारपीट कर जब्त ट्रैक्टर छुड़ा लिया गया था।

    वन विभाग में आक्रोश, बढ़ाई गई सख्ती
    घटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश है। विभाग ने कहा है कि अवैध रेत खनन और माफियाओं की बढ़ती गुंडागर्दी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है।

    पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हमले
    यह पहला मामला नहीं है जब रेत माफिया ने प्रशासनिक टीमों पर हमला किया हो। इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में वनकर्मियों और अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं-

    वनरक्षक से मारपीट, सिर में गंभीर चोट (उमरिया)
    ट्रैक्टर जब्ती के दौरान वनकर्मियों पर हमला (टीकमगढ़)
    लाठी-डंडों से वनकर्मियों की पिटाई (सिंगरौली)
    SDM की गाड़ी पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश (भिंड)

    उमरिया की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अवैध रेत खनन पर रोक लगाना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। वन विभाग की सख्ती के बावजूद माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

  • बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता

    बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता


    उमरिया । मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है जहां पनपथा कोर क्षेत्र की बीट बघडो में एक बाघ शावक का शव मिलने से वन महकमे में हलचल मच गई है। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती है बल्कि बाघों के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर भी संकेत करती है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मृत शावक का शव अत्यंत क्षतविक्षत अवस्था में पाया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि शावक की मौत किसी अन्य बाघ के साथ हुए आपसी संघर्ष के कारण हुई है जिसे वैज्ञानिक भाषा में इंट्रास्पेसिफिक फाइट कहा जाता है। जंगल के भीतर क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच इस प्रकार के संघर्ष असामान्य नहीं माने जाते लेकिन हाल के समय में ऐसी घटनाओं की बढ़ती संख्या ने चिंता जरूर बढ़ा दी है।

    घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेरकर गहन जांच शुरू की गई। डाग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर की मदद से हर संभावित पहलू की बारीकी से जांच की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस घटना में किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या शिकार शामिल नहीं है। जांच के दौरान ऐसे कोई संकेत नहीं मिले जिससे यह प्रतीत हो कि शावक की मौत के पीछे अवैध शिकार या बाहरी गतिविधि जिम्मेदार है।

    नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए शावक के शव का मौके पर ही दाह संस्कार कर दिया गया ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अन्य खतरे से बचा जा सके। वन विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत अंजाम दिया और सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण भी किया गया है।

    घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया है। विभागीय हाथियों की मदद से आसपास के घने जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि अन्य बाघों और शावकों की स्थिति का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि वे हर संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लिया जा रहा है।

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है जहां बाघों की अच्छी खासी आबादी पाई जाती है। हालांकि हाल के वर्षों में शावकों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं जो वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के कारण क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं जिससे कमजोर शावक अधिक प्रभावित होते हैं।

    वन विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और इसकी रिपोर्ट जल्द ही नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भेजी जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर जंगल के भीतर की जटिल वास्तविकताओं को उजागर कर दिया है जहां जीवन और संघर्ष साथ साथ चलते हैं और संरक्षण के प्रयासों के बीच कई अनदेखी चुनौतियां सामने आती रहती हैं।