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  • शिवपुरी में वन भूमि पर चला प्रशासन का बुलडोजर 8 से 10 झोपड़ियां हटाईं मौके से मिली कच्ची शराब

    शिवपुरी में वन भूमि पर चला प्रशासन का बुलडोजर 8 से 10 झोपड़ियां हटाईं मौके से मिली कच्ची शराब


    शिवपुरी। शिवपुरी शहर के देहात थाना क्षेत्र में वन भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कब्रिस्तान के पास वन भूमि पर बनी करीब 8 से 10 झोपड़ियों को संयुक्त टीम ने जेसीबी की मदद से हटाया। कार्रवाई के दौरान मौके पर कच्ची शराब भी मिली जिसे आबकारी विभाग की टीम ने जब्त कर लिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में काफी देर तक हलचल बनी रही।

    जानकारी के अनुसार वन भूमि पर कुछ परिवारों ने झोपड़ियां बनाकर रहना शुरू कर दिया था। प्रशासन को इन लोगों के खिलाफ शिकायतें मिली थीं। शिकायतों में वन भूमि पर अतिक्रमण करने के साथ ही बाहर से कच्ची शराब लाकर बेचने और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल होने की बात कही गई थी। शिकायतों के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व विभाग वन विभाग आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाई।

    संयुक्त टीम जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर मौके पर पहुंची। अधिकारियों की मौजूदगी में वन भूमि पर बनी झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। जेसीबी की मदद से करीब 8 से 10 झोपड़ियों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। प्रशासन की टीम ने मौके पर मौजूद सामान और आसपास के क्षेत्र की भी जांच की।

    इसी दौरान आबकारी विभाग की टीम को मौके से बड़ी मात्रा में कच्ची शराब मिली। शराब बरामद होने के बाद उसे जब्त कर लिया गया। आबकारी विभाग ने मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। अब विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि बरामद शराब किसकी थी और इसे कहां से लाकर यहां रखा या बेचा जा रहा था।

    प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के बाद वन भूमि से अतिक्रमण पूरी तरह हटाने का दावा किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं अवैध शराब से जुड़े मामलों में आबकारी विभाग भी जांच कर रहा है।

    इस पूरी कार्रवाई में राजस्व विभाग वन विभाग आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त भूमिका रही। जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ पहुंची टीम ने पहले मौके का निरीक्षण किया और इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। झोपड़ियां हटाए जाने के बाद क्षेत्र को खाली कराया गया।

    वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध शराब की शिकायतों को लेकर हुई इस कार्रवाई से प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि सरकारी जमीन पर कब्जे और अवैध गतिविधियों को लेकर सख्ती बरती जाएगी। फिलहाल आबकारी विभाग द्वारा दर्ज मामले की जांच जारी है। पुलिस और संबंधित विभाग यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि इस पूरे मामले में कौन लोग शामिल थे।

  • सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई

    सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई


    नई दिल्ली । विदिशा वन मंडल में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। ग्राम पंचायत बीजूखेड़ी, जनपद पंचायत लटेरी के पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई वन भूमि पर कब्जे के गंभीर आरोपों और जांच में दोष सिद्ध होने के बाद की गई है।
    मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वन परिक्षेत्र उत्तर लटेरी की देहरीपामा बीट के कक्ष क्रमांक पी-410 में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत सामने आई। इस पर वन विभाग ने 21 जुलाई 2024 को वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर पर ही इस अतिक्रमण का आरोप था।
    वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80 ‘अ’ के तहत संबंधित सचिव को दो बार कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन आरोपी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे मामला और गंभीर हो गया।
    जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद वनमंडलाधिकारी विदिशा ने अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद भूमि से कब्जा नहीं हटाया गया। आदेश की अवहेलना के बाद विभाग ने जिला पंचायत को कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।
    इसके बाद जिला पंचायत ने कार्रवाई करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश पर 8 मई 2026 को पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।
    वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हों।
    इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर एक सख्त संदेश दिया गया है।