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  • जंगल से ‘गुलेल’ की तरह मिसाइल-ड्रोन लॉन्च कर रहे हूती, सऊदी की तेल फैसिलिटी पर हमला

    जंगल से ‘गुलेल’ की तरह मिसाइल-ड्रोन लॉन्च कर रहे हूती, सऊदी की तेल फैसिलिटी पर हमला


    नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब और यमन के रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का वीडियो जारी किया है। फुटेज में हूती लड़ाके खुले मैदानों और जंगल जैसे इलाकों से एक के बाद एक मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते दिखाई दे रहे हैं। लॉन्चिंग का तरीका ऐसा नजर आता है, मानो किसी गुलेल से निशाना साधकर प्रोजेक्टाइल छोड़ा जा रहा हो। हूतियों की ओर से यह वीडियो ऐसे समय जारी किया गया है, जब संगठन ने सऊदी अरब की एक अहम तेल सुविधा और यमन के मोखा बंदरगाह को निशाना बनाने का दावा किया है।

    जिजान में अरामको रिफाइनरी से जुड़ी सुविधा पर ड्रोन हमला
    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि हमलों में सऊदी सैनिकों की मौजूदगी वाले इलाकों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया। इसी दौरान सऊदी अरब के जिजान में स्थित अरामको रिफाइनरी से जुड़ी एक सुविधा पर ड्रोन हमला किए जाने का भी दावा किया गया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने एक सुविधा में आग लगने की पुष्टि की। हालांकि, आग पर बाद में काबू पा लिया गया। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

    मोखा बंदरगाह पर हमले में 7 लोगों की मौत
    हूतियों के हमले का दूसरा बड़ा निशाना यमन का मोखा बंदरगाह बना। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के नियंत्रण में है और लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के करीब स्थित है। यमनी सरकार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई। मृतकों में चार सैनिक और तीन नागरिक शामिल हैं। वहीं, 30 नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले में बंदरगाह की इमारतों, पियर्स और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचा।

    मिसाइल और ड्रोन के साथ मानवरहित नाव का भी दावा
    हूतियों ने इन हमलों को सऊदी ड्रोन के यमन के हज्जाह और सादा प्रांतों में घुसने की कार्रवाई का जवाब बताया है। यमनी सेना के मुताबिक, हमले में मिसाइल और ड्रोन के अलावा विस्फोटकों से लदी एक मानवरहित नाव के इस्तेमाल की कोशिश भी की गई। जारी वीडियो में हूती लड़ाकों को अलग-अलग स्थानों से मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते हुए दिखाया गया है। इससे संगठन की हमले करने की रणनीति और इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

    2022 के बाद फिर बढ़ सकती है क्षेत्रीय अशांति
    इन घटनाओं ने यमन में 2022 के बाद से बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोखा बंदरगाह बाब-अल-मंदेब के नजदीक है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ऐसे में यदि इलाके में हूती हमले और जवाबी सैन्य कार्रवाई बढ़ती है, तो इसका असर केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। लाल सागर के समुद्री व्यापार मार्गों के साथ-साथ क्षेत्र की शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ सकता है।

  • फ्रांस के जंगल में लगी भीषण आग के बाद मिले वर्ल्ड वॉर-2 के 400 से ज्यादा गोले और अन्य विस्फोट

    फ्रांस के जंगल में लगी भीषण आग के बाद मिले वर्ल्ड वॉर-2 के 400 से ज्यादा गोले और अन्य विस्फोट


    पेरिस
    । फ्रांस (France) के दक्षिण-पश्चिम (South-west) में बसे ले पोर्ज (Le Porge) गांव में जंगल की भीषण आग के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है. यहां 400 से ज्यादा वर्ल्ड वॉर 2 (World War II) के गोले और दूसरे विस्फोटक मिले हैं. जुलाई में लगी आग के दौरान गांव के करीब 3,500 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे. आग शांत होने के बाद जब अधिकारी इलाके की जांच कर रहे थे, तब जमीन के नीचे दबा यह गोला-बारूद मिला. अधिकारियों का कहना है कि आग की तेज गर्मी की वजह से कुछ गोले फट गए और तभी उनके बारे में पता चला।

    आग लगने के दौरान गांव के पास कई धमाकों की आवाज भी सुनाई दी थी. इसके बाद बम निरोधक टीम मौके पर पहुंची. पहले एक खेत से 75 गोले मिले. फिर पूरे इलाके की जांच की गई, जिसमें 400 से ज्यादा गोले और दूसरे विस्फोटक बरामद हुए. लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कुछ समय के लिए इस इलाके में आने-जाने पर रोक लगा दी गई।


    आग की गर्मी से मिला सुराग

    अधिकारियों के मुताबिक, मिले गोलों में फ्रांस और जर्मनी दोनों के मोर्टार शेल शामिल हैं. माना जा रहा है कि ये वर्ल्ड वॉर 2 के समय के हैं. ये गोले कई सालों से जमीन के नीचे दबे थे. जंगल की आग के दौरान जमीन बहुत ज्यादा गर्म हो गई. इसी गर्मी की वजह से कुछ गोले फट गए और अधिकारियों को उनका पता चल गया।

    अधिकारियों ने कहा कि इन पुराने गोलों में अब भी धमाका होने का खतरा था. अगर इनमें विस्फोट होता, तो इनके टुकड़े काफी दूर तक जा सकते थे और लोगों को नुकसान पहुंचा सकते थे. इसलिए पहले पूरे इलाके को सुरक्षित किया गया. इसके बाद बम निरोधक टीम ने सभी गोले और दूसरे विस्फोटकों को हटाया। जांच पूरी होने के बाद लोगों को अपने घर लौटने की इजाजत दे दी गई।


    इस साल फ्रांस में रिकॉर्ड जंगल की आग

    इस साल फ्रांस में जंगल की आग ने 1.6 लाख हेक्टेयर (160,000 हेक्टेयर) से ज्यादा जमीन जला दी है. यह देश में अब तक की सबसे बड़ी जंगल की आग मानी जा रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप में जंगल की आग पहले से ज्यादा बड़ी और तेजी से फैल रही है. बढ़ती गर्मी, लंबे समय तक सूखा और तेज हवाएं ऐसी आग को और खतरनाक बना रही हैं।

    वर्ल्ड वॉर 2 खत्म हुए 80 साल से ज्यादा हो चुके हैं. इसके बाद भी यूरोप के कई इलाकों में आज भी पुराने बम और गोले जमीन के नीचे दबे मिल जाते हैं. कई बार निर्माण का काम, सूखा या जंगल की आग जैसी घटनाओं के बाद ये सामने आ जाते हैं. हाल ही में हंगरी में डेन्यूबे नदी का पानी कम होने पर भी वर्ल्ड वॉर 2 के कई बम दिखाई दिए थे।

  • सागर के हिलगन के जंगल में मृत मिला बाघ, वन विभाग में मचा हड़कंप

    सागर के हिलगन के जंगल में मृत मिला बाघ, वन विभाग में मचा हड़कंप

    सागर। मध्‍य प्रदेश के सागर जिले के ढाना वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम हिलगन के जंगल में रविवार को एक बाघ मृत अवस्था में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। दोपहर करीब 2 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच प्रक्रिया शुरू की गई।

    ग्रामीणों द्वारा दी गई सूचना पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव का एक ग्रामीण जंगल की ओर गया हुआ था। इसी दौरान उसकी नजर जंगल में पड़े एक मृत बाघ पर पड़ी। बाघ को इस हालत में देखकर वह घबरा गया और तत्काल गांव लौटकर अन्य ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को जानकारी दिए जाने पर अधिकारी और कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे।

    मृत शेर का शरीर काफी फूला हुआ पाया

    मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, मृत बाघ का शरीर काफी फूला हुआ पाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसकी मौत एक या दो दिन पहले हो चुकी होगी। हालांकि बाघ की मौत किन कारणों से हुई, इसका स्पष्ट खुलासा फिलहाल नहीं हो सका है। वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही संभव हो पाएगी

    समीप ही रानी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का क्षेत्र

    वन विभाग ने बताया कि जिस स्थान पर बाघ मृत मिला है, उसके समीप ही रानी वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का क्षेत्र आता है। इस रिजर्व में बाघ, तेंदुआ सहित कई बड़े वन्य जीवों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह बाघ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से भटककर हिलगन के जंगल तक पहुंचा होगा।

    वरिष्ठ वन अधिकारी भी मौके पर

    घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ वन अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया है और आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वन विभाग द्वारा सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।

    वन विभाग का क्या है कहना?वन विभाग के अनुसार प्राथमिक जांच में मृत बाघ के शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट या संघर्ष के निशान नहीं पाए गए हैं। ऐसे में बाघ की मौत को लेकर रहस्य बना हुआ है। फिलहाल मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। ढाना रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि मृत बाघ की उम्र करीब 8 से 10 वर्ष है और वह मादा है। बाघ का शव हिलगन गांव के पास जंगल क्षेत्र में मिला है। वन विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही शेर की मौत के कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।