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  • पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    मध्य प्रदेश:के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई के बाद भूमि अधिकार और बेदखली को लेकर नया विवाद सामने आया है। वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के आशियाने प्रभावित हुए, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से संबंधित भूमि पर निवास और खेती करते आ रहे हैं तथा अब अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    ग्रामीणों का दावा है कि उनके परिवार वर्ष 1969 से इस भूमि पर रह रहे हैं और पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर जीवनयापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को अब वन विभाग अतिक्रमित बता रहा है, उसी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, हैंडपंप स्थापित किए गए और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों के अनुसार इन परिस्थितियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनका निवास और खेती वैध प्रक्रिया के दायरे में है।

    मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग के एक बीट गार्ड पर पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। आरोप है कि एक ग्रामीण से नकद राशि और एक बकरा कथित रूप से लिए गए, लेकिन इसके बावजूद भूमि का पट्टा नहीं मिला। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि ग्रामीणों ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विभाग की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रभावित परिवारों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है और बेदखली की कार्रवाई के बाद उनके सामने रोजगार और आवास दोनों का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्थायी समाधान और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों के निष्पक्ष निपटारे की है।

    विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के लिए राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है और पात्रता की शर्तें पूरी करता है तो नियमानुसार उसे भूमि से संबंधित लाभ दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिन परिवारों के मकान कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही बरसात के मौसम को देखते हुए प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने और भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    यह मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ, वन भूमि पर निवास, प्रशासनिक कार्रवाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के दावों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति के अधिकार प्रभावित न हों और कानून के अनुरूप उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • सौंसर में मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड को मिली नई दिशा, वन विभाग ने 9.5 करोड़ रुपये एनपीवी जमा कराने और नए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की रखी शर्त

    सौंसर में मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड को मिली नई दिशा, वन विभाग ने 9.5 करोड़ रुपये एनपीवी जमा कराने और नए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की रखी शर्त

    मध्य प्रदेश। पांढुर्ना जिले के सौंसर क्षेत्र में वर्षों से प्रस्तावित स्पेशल इकोनामिक जोन (एसईजेड) परियोजना को अब नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी नहीं हो सकी थी। अब इसे पारंपरिक एसईजेड के बजाय मल्टी प्रोडक्ट स्पेशल इकोनामिक जोन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस बदलाव से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और रोजगार की संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    करीब आठ हजार एकड़ अधिगृहित भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना में अब राज्य की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। इसके लिए राज्य के औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट की स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया है। सरकार का मानना है कि मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड का स्वरूप निवेशकों को अधिक आकर्षित करेगा और क्षेत्र में विविध उद्योगों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    हालांकि परियोजना के नए स्वरूप के साथ ही वन विभाग ने महत्वपूर्ण शर्तें भी सामने रख दी हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वैकल्पिक वृक्षारोपण के लिए नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) के रूप में 9 करोड़ 50 लाख रुपये जमा कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही भू-उपयोग में बदलाव होने के कारण परियोजना के लिए नए सिरे से वन स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। वन विभाग का यह अभिमत परियोजना की आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    जानकारी के अनुसार प्रस्तावित एसईजेड का एक बड़ा हिस्सा वन भूमि से जुड़ा हुआ है। पहले चरण में इस भूमि के उपयोग के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराकर प्रारंभिक वन स्वीकृति प्राप्त कर ली गई थी, लेकिन उस समय निर्धारित नेट प्रेजेंट वैल्यू की राशि जमा नहीं कराई गई थी। अब परियोजना का स्वरूप बदलने के बाद पूर्व में मिली स्वीकृतियां पर्याप्त नहीं मानी जाएंगी और पूरी प्रक्रिया को संशोधित नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा।

    इस नई स्थिति में परियोजना विकसित करने वाली कंपनी को वन विभाग की सभी शर्तों का पालन करते हुए आवश्यक दस्तावेज, स्वीकृतियां और वित्तीय दायित्व पूरे करने होंगे। इसके बाद ही परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो सकेगा। प्रशासनिक स्तर पर भी विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी आवश्यक अनुमतियां समय पर मिल जाती हैं तो मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड क्षेत्र के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे विनिर्माण, प्रसंस्करण और अन्य औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत संरचना, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों का भी विस्तार हो सकता है।

    फिलहाल परियोजना का भविष्य वन विभाग की शर्तों के पालन और राज्य सरकार की अंतिम स्वीकृति पर निर्भर है। यदि सभी औपचारिकताएं तय समय पर पूरी होती हैं तो लंबे समय से प्रतीक्षित यह औद्योगिक परियोजना एक नए स्वरूप के साथ आगे बढ़ सकती है और पांढुर्ना तथा आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

  • 'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव

    'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय दहशत फैल गई, जब देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे दो बाइक सवारों पर झपट्टा मारा और इसके बाद एक मकान के बाथरूम में जा घुसा। इस दौरान घर में मौजूद बुजुर्ग महिला मुन्नीबाई और उनका मानसिक रूप से बीमार पोता करीब एक घंटे तक घर के भीतर कैद रहने को मजबूर हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर रात तक दहशत में रहे।

    मुन्नीबाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह घर में खाना बना रही थीं। तभी बाहर अचानक शोर सुनाई दिया। जब उन्होंने दरवाजे से झांककर देखा तो सामने तेंदुआ बैठा था। यह नजारा देखते ही उन्होंने तुरंत घर के दोनों दरवाजे बंद कर दिए। उस समय उनका मानसिक रूप से बीमार पोता भी घर में मौजूद था। दोनों करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। बाहर लोगों की आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देती रही, लेकिन डर के कारण बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना बिचौली मर्दाना इलाके में रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार पर हमला किया। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद तेंदुआ भागते हुए पास के एक मकान में घुस गया और बाथरूम के पास जाकर बैठ गया। इससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई।

    घटना की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन तेंदुए के डर से कोई भी घर के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तेंदुआ बाथरूम के पास बनी दीवार फांदकर बाहर निकल गया और श्रीजी वैली की दिशा में चला गया।

    वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। जब अधिकारियों को पूरी तरह भरोसा हो गया कि तेंदुआ वहां से जा चुका है, तब परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।

    स्थानीय निवासी अभिषेक जाधव ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई बड़ी बिल्ली होगी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह तेंदुआ है। इसके बाद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सतर्क किया और पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

    वन विभाग के रेंजर योगेश के अनुसार तेंदुआ संभवतः देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। घटनास्थल जंगल से करीब आधा किलोमीटर दूर है और इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही होती रही है। विभाग का मानना है कि तेंदुआ रात में ही वापस जंगल की ओर लौट गया और बुधवार सुबह तक उसके दोबारा दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली।

  • महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित

    महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित


    खजुराहो में शिवसागर तालाब पिछले कुछ समय से मगरमच्छ के लगातार दिखाई देने से चर्चा में था। यह तालाब भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आता है और शहर के पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मगरमच्छ की उपस्थिति ने स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच भय पैदा कर दिया था। खासकर विदेशी पर्यटक इस दृश्य से डरे हुए थे और पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना थी।

    स्थानीय लोगों की शिकायत और सुरक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने 3 फरवरी को आयोजित मेला महाशिवरात्रि की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिवरात्रि से पहले तालाब से मगरमच्छ को निकालकर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

    इस आदेश के बाद वन मंडल अधिकारी ऋषि मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग और जिला आपदा प्रबंधन अमला, जिला छतरपुर ने संयुक्त रूप से कार्य शुरू किया। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तालाब का निरीक्षण किया और मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से पकड़ने की योजना बनाई।

    वन विभाग की टीम ने सावधानी और कुशलता के साथ मगरमच्छ को पकड़कर उसके जीवन और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा का ध्यान रखा। तालाब से मगरमच्छ को हटाकर अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस कार्य के पूरा होने के बाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों में राहत की लहर दौड़ गई। अब शिवसागर तालाब के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बिना किसी डर के हो सकेंगी।

    वन विभाग ने कहा कि यह कार्य पर्यावरण और पर्यटन दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण था। मगरमच्छ को केवल खतरनाक माना जाता है, लेकिन उसका जीवन भी संरक्षण योग्य है। इस कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि पर्यटक सुरक्षित रहें और तालाब का पारिस्थितिकी संतुलित रहे।

    स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि मगरमच्छ की वजह से पिछले दिनों पर्यटक डर कर दौरे कम कर रहे थे, लेकिन अब सुरक्षा सुनिश्चित होने से पर्यटन में वृद्धि होगी। वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यह भी चेतावनी दी कि तालाब के पास जाते समय सतर्क रहें और वन्यजीवों को परेशान न करें।

    इस तरह, महाशिवरात्रि 2026 से पहले खजुराहो में वन विभाग ने कुशलता से मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करके न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि पर्यटन नगरी की प्रतिष्ठा और स्थानीय विश्वास भी बनाए रखा।

  • जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल

    जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल


    जबलपुर । इन दिनों जबलपुर में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया हैबल्कि वन्य प्राणियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर दी हैं। जलचर प्राणीविशेष रूप से मगरमच्छठंड से राहत पाने के लिए धूप सेंकने की आदत बना रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य जबलपुर जिले के परियट जलाशय से लगे गांवों में देखा जा रहा मटामरघानारिठौरीपिपरिया और आसपास की कालोनियों में मगरमच्छों का आना बढ़ गया हैजिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है।

    परियट जलाशय मगरमच्छों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान बन चुका है। इस क्षेत्र में लगभग 1000 मगरमच्छ रहते हैंऔर इनकी संख्या समय के साथ बढ़ी है। ये जलचरजो आमतौर पर जल में रहते हैंअब ठंड से बचने के लिए धूप में आराम करने निकल आते हैं। परियट नदी में मगरमच्छों की अधिकता के कारण वे शिकार की तलाश में और अपने निवास स्थान से बाहर भी भटकने लगे हैं। अब ये मगरमच्छ गांवों के नजदीक आकर मानव बस्तियों तक पहुंच रहे हैंजो लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

    इन मगरमच्छों ने पहले कुछ पालतू जानवरों पर हमले किए हैंजिनमें श्वान और मवेशी शामिल हैं। हालांकिअभी तक किसी मनुष्य पर हमला नहीं हुआ हैलेकिन स्थानीय लोग इस खतरे को लेकर बेहद चिंतित हैं। कई बार गांवों के सरपंचों ने वन विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपील की हैलेकिन वन विभाग की टीम की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वे केवल रेस्क्यू का आश्वासन देकर अपना काम निपटा लेते हैंजबकि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाएंगेलेकिन अब तक इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। इस खतरनाक स्थिति में वन विभाग की ढिलाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गयातो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

    मगरमच्छों के बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी दखल की वजह से इनका प्राकृतिक निवास क्षेत्र घटता जा रहा हैजिसके कारण वे रहवासी इलाकों में घुसने लगे हैं। इस समस्या का समाधान वन विभाग के समुचित और तत्काल प्रयासों में हैलेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा