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  • महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित

    महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित


    खजुराहो में शिवसागर तालाब पिछले कुछ समय से मगरमच्छ के लगातार दिखाई देने से चर्चा में था। यह तालाब भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आता है और शहर के पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मगरमच्छ की उपस्थिति ने स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच भय पैदा कर दिया था। खासकर विदेशी पर्यटक इस दृश्य से डरे हुए थे और पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना थी।

    स्थानीय लोगों की शिकायत और सुरक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने 3 फरवरी को आयोजित मेला महाशिवरात्रि की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिवरात्रि से पहले तालाब से मगरमच्छ को निकालकर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

    इस आदेश के बाद वन मंडल अधिकारी ऋषि मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग और जिला आपदा प्रबंधन अमला, जिला छतरपुर ने संयुक्त रूप से कार्य शुरू किया। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तालाब का निरीक्षण किया और मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से पकड़ने की योजना बनाई।

    वन विभाग की टीम ने सावधानी और कुशलता के साथ मगरमच्छ को पकड़कर उसके जीवन और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा का ध्यान रखा। तालाब से मगरमच्छ को हटाकर अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस कार्य के पूरा होने के बाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों में राहत की लहर दौड़ गई। अब शिवसागर तालाब के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बिना किसी डर के हो सकेंगी।

    वन विभाग ने कहा कि यह कार्य पर्यावरण और पर्यटन दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण था। मगरमच्छ को केवल खतरनाक माना जाता है, लेकिन उसका जीवन भी संरक्षण योग्य है। इस कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि पर्यटक सुरक्षित रहें और तालाब का पारिस्थितिकी संतुलित रहे।

    स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि मगरमच्छ की वजह से पिछले दिनों पर्यटक डर कर दौरे कम कर रहे थे, लेकिन अब सुरक्षा सुनिश्चित होने से पर्यटन में वृद्धि होगी। वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यह भी चेतावनी दी कि तालाब के पास जाते समय सतर्क रहें और वन्यजीवों को परेशान न करें।

    इस तरह, महाशिवरात्रि 2026 से पहले खजुराहो में वन विभाग ने कुशलता से मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करके न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि पर्यटन नगरी की प्रतिष्ठा और स्थानीय विश्वास भी बनाए रखा।

  • जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल

    जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल


    जबलपुर । इन दिनों जबलपुर में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया हैबल्कि वन्य प्राणियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर दी हैं। जलचर प्राणीविशेष रूप से मगरमच्छठंड से राहत पाने के लिए धूप सेंकने की आदत बना रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य जबलपुर जिले के परियट जलाशय से लगे गांवों में देखा जा रहा मटामरघानारिठौरीपिपरिया और आसपास की कालोनियों में मगरमच्छों का आना बढ़ गया हैजिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है।

    परियट जलाशय मगरमच्छों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान बन चुका है। इस क्षेत्र में लगभग 1000 मगरमच्छ रहते हैंऔर इनकी संख्या समय के साथ बढ़ी है। ये जलचरजो आमतौर पर जल में रहते हैंअब ठंड से बचने के लिए धूप में आराम करने निकल आते हैं। परियट नदी में मगरमच्छों की अधिकता के कारण वे शिकार की तलाश में और अपने निवास स्थान से बाहर भी भटकने लगे हैं। अब ये मगरमच्छ गांवों के नजदीक आकर मानव बस्तियों तक पहुंच रहे हैंजो लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

    इन मगरमच्छों ने पहले कुछ पालतू जानवरों पर हमले किए हैंजिनमें श्वान और मवेशी शामिल हैं। हालांकिअभी तक किसी मनुष्य पर हमला नहीं हुआ हैलेकिन स्थानीय लोग इस खतरे को लेकर बेहद चिंतित हैं। कई बार गांवों के सरपंचों ने वन विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपील की हैलेकिन वन विभाग की टीम की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वे केवल रेस्क्यू का आश्वासन देकर अपना काम निपटा लेते हैंजबकि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाएंगेलेकिन अब तक इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। इस खतरनाक स्थिति में वन विभाग की ढिलाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गयातो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

    मगरमच्छों के बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी दखल की वजह से इनका प्राकृतिक निवास क्षेत्र घटता जा रहा हैजिसके कारण वे रहवासी इलाकों में घुसने लगे हैं। इस समस्या का समाधान वन विभाग के समुचित और तत्काल प्रयासों में हैलेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा