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  • आज से वक्री हुए बुध, इन 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के रास्ते, धन लाभ और प्रमोशन के बन रहे योग

    आज से वक्री हुए बुध, इन 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के रास्ते, धन लाभ और प्रमोशन के बन रहे योग


    नई दिल्ली। बुद्धि, तर्क, संवाद और व्यापार के कारक ग्रह बुध 29 जून 2026 यानी आज से वक्री हो गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध की चाल में बदलाव का प्रभाव सभी 12 राशियों के साथ-साथ व्यापार, अर्थव्यवस्था और संचार से जुड़े क्षेत्रों पर भी पड़ता है। हालांकि सामान्य तौर पर बुध की वक्री चाल को चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार यह परिवर्तन कुछ राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आने वाला है। आइए जानते हैं किन राशियों को इसका विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

    मेष राशि (Aries)

    मेष राशि के जातकों के लिए बुध का वक्री होना आर्थिक दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि के संकेत हैं। व्यापारियों के लिए बड़ी डील फाइनल होने के योग बन रहे हैं। लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। निवेश के लिए भी समय अनुकूल माना जा रहा है। आपकी वाणी का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे हो सकते हैं।

    मिथुन राशि (Gemini)

    बुध मिथुन राशि के स्वामी ग्रह हैं, इसलिए उनकी वक्री चाल का सकारात्मक प्रभाव इस राशि पर अधिक देखने को मिल सकता है। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी और नए विचारों पर काम करने के अवसर मिलेंगे। परिवार में चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं और रिश्तों में मधुरता आएगी। अचानक आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं। पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने की संभावना है।

    सिंह राशि (Leo)

    सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की सराहना कर सकते हैं। प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी संभावनाएं मजबूत होंगी। सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। व्यापार से जुड़े लोगों की यात्राएं भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती हैं।

    तुला राशि (Libra)

    तुला राशि वालों के लिए बुध की वक्री चाल सुख-सुविधाओं और आर्थिक स्थिति में सुधार का संकेत दे रही है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं। आय के नए स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विद्यार्थियों के लिए यह समय पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना है।

    नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जीवन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।

  • टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना

    टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना


    नई दिल्ली।
    टाटा संस (Tata Sons) के नए कारोबारों (New Businesses) में बढ़ते घाटे (Growing losses) ने ग्रुप के अंदर चिंता बढ़ा दी है। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इन बजनेसों का कुल घाटा करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान ₹5,700 करोड़ से बहुत ज्यादा है। यह बढ़ता नुकसान अब समूह की रणनीति और निवेश फैसलों पर सवाल खड़े कर रहा है।


    9 महीनों में ही ₹21,700 करोड़ पार

    एक खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह ₹16,550 करोड़ था। इससे साफ है कि नुकसान का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते घाटे में सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजस नेटवर्क जैसे नए बिजनेस से आ रहा है।


    नोएल टाटा की चिंता, बोर्ड स्तर पर बढ़ा दबाव

    नोएल टाटा (Noel Tata) ने इन नए प्रोजेक्ट्स के बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यही कारण रहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया गया। अब उम्मीद है कि जून की बैठक में घाटा कम करने की ठोस रणनीति पेश की जाएगी।


    टाटा डिजिटल बना सबसे बड़ी चिंता

    टाटा ग्रुप का डिजिटल कारोबार, जिसमें बिग बॉस्केट, Tata 1mg, क्रोमा और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, अभी तक फायदे में नहीं आ पाया है। FY26 में इस यूनिट का घाटा ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर ग्रोथ, लीडरशिप में बदलाव और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले धीमी रणनीति इसके पीछे मुख्य कारण हैं।


    एयर इंडिया पर सबसे बड़ा बोझ

    घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है। तेल की ऊंची कीमतें, पाकिस्तान एयरस्पेस का बंद होना और ग्लोबल टेंशन जैसे बाहरी कारणों ने कंपनी की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सेवा सुधार की गति अभी भी अपेक्षा से धीमी है।


    अन्य बिजनेस भी दबाव में

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर कारोबार में FY26 में करीब ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। वहीं तेजस नेटवर्क्स, जो FY25 में मुनाफे में थी, अब FY26 में ₹1,000 करोड़ के नुकसान में जा सकती है। यह दिखाता है कि समूह के कई नए निवेश अभी शुरुआती चरण में हैं और उन्हें स्थिर होने में समय लगेगा।


    क्या है आगे की चुनौती?

    टाटा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन नए व्यवसायों को मुनाफे की राह पर लाना है। लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों और बोर्ड दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जल्द ही रणनीतिक बदलाव नहीं किए गए, तो यह घाटा आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।