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  • अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    अभिनेता से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी तक, राहुल बोस का बहुआयामी जीवन प्रेरणा का उदाहरण

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में अपनी गंभीर और प्रभावशाली अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले राहुल बोस का व्यक्तित्व केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। अभिनेता, फिल्म निर्माता, अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी और समाजसेवी के रूप में उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर एक बहुआयामी पहचान बनाई है। 27 जुलाई 1967 को कोलकाता में जन्मे राहुल बोस ने अपने जीवन की दिशा केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रखी, बल्कि खेल और सामाजिक सरोकारों को भी बराबर महत्व दिया।

    राहुल बोस की शुरुआती शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। बचपन में उनकी मां ने उन्हें बॉक्सिंग और रग्बी जैसे खेलों से परिचित कराया। इसी दौरान उन्होंने क्रिकेट का प्रशिक्षण भी लिया और बॉक्सिंग प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया। हालांकि आगे चलकर रग्बी उनका सबसे बड़ा जुनून बन गया और उन्होंने इसी खेल में देश का प्रतिनिधित्व करने का निर्णय लिया।

    वर्ष 1998 से 2009 तक राहुल बोस भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम का हिस्सा रहे और लगभग 11 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। अभिनय के व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने अपने फिल्मी काम और खेल के बीच संतुलन बनाए रखा। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग भी रग्बी प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अनुसार तय की, जिससे दोनों क्षेत्रों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

    रग्बी से उनका जुड़ाव खिलाड़ी के रूप में ही समाप्त नहीं हुआ। बाद के वर्षों में उन्होंने खेल के विकास के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभाली। भारतीय महिला रग्बी टीम की उपलब्धियों और देश में खेल को नई पहचान मिलने के दौर में उन्होंने रग्बी इंडिया के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इस भूमिका में उन्होंने खेल के विस्तार और युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय योगदान दिया।

    अभिनय की दुनिया में राहुल बोस ने बचपन में स्कूल के एक नाटक से शुरुआत की थी। बाद में विज्ञापन क्षेत्र में कॉपीराइटर के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया। पहली ही प्रमुख फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने अभिनय को पूर्णकालिक पेशा बना लिया। उन्होंने हमेशा ऐसी फिल्मों को प्राथमिकता दी जिनमें मजबूत कहानी, सामाजिक संदेश और सशक्त अभिनय की गुंजाइश हो। यही कारण रहा कि उन्होंने समानांतर सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई और कई चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों की सराहना हासिल की।

    राहुल बोस ने निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उनकी पहली निर्देशित फिल्म को सीमित संसाधनों के बावजूद पूरा किया गया और बाद में उन्होंने एक ऐसी प्रेरणादायक जीवनी पर आधारित फिल्म बनाई, जिसमें कम उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारतीय बालिका की उपलब्धि को पर्दे पर प्रस्तुत किया गया। उनके निर्देशन में भी सामाजिक संवेदनशीलता और प्रेरक विषयों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

    सिनेमा और खेल के साथ-साथ समाज सेवा राहुल बोस के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। वर्ष 2004 की सुनामी के दौरान राहत कार्यों में भाग लेने के बाद उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए स्थायी रूप से काम करने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से उन्होंने एक सामाजिक संस्था की स्थापना की, जिसके माध्यम से दूरदराज और संसाधनों से वंचित क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हजारों शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने जैसे अभियान भी संचालित किए गए हैं। अभिनय, खेल और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाकर राहुल बोस ने यह साबित किया है कि सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने से भी मापी जाती है।

  • बंगाल में आज 'बाबरी मस्जिद' का शिलान्यास…HC का निर्देश- तनाव रोके सरकार, CISF तैनात

    बंगाल में आज 'बाबरी मस्जिद' का शिलान्यास…HC का निर्देश- तनाव रोके सरकार, CISF तैनात


    कोलकाता।
    कोलकाता हाईकोर्ट (Kolkata High Court) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) को निर्देश दिया कि मुर्शिदाबाद जिले (Murshidabad district) के बेलडांगा में संभावित सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए जो भी आवश्यक हो, वह कदम तुरंत उठाए जाएं। यह निर्देश निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर (TMC MLA Humayun Kabir) द्वारा 6 दिसंबर को प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम के मद्देनजर दिया गया है। यह वही तारीख है जब 1992 में अयोध्या में बाबरी का ढांचा ढहाया गया था।

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपने रुख के अनुसार कार्य करना होगा… मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था कड़ाई से कायम रखी जानी चाहिए और नागरिकों के जीवन व संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।


    8 महीने पहले भड़के थे दंगे

    हुमायूं कबीर का यह मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मुर्शिदाबाद आठ महीने पहले वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से उबरा है। इस पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरतने का दावा किया है।

    राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए पर्याप्त पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। उधर, उप सॉलिसिटर-जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि सीआईएसएफ की 19 कंपनियां पहले से इलाके में मौजूद हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, 3500 की संयुक्त सुरक्षा टुकड़ी, जिसमें आरएएफ की यूनिटें शामिल हैं, वे शुक्रवार शाम से रेजीनगर और आसपास के इलाकों में मोर्चा संभाल चुकी है। बीएसएफ की दो कंपनियां एनएच-12 की सुरक्षा के लिए तैयार रखी गई हैं। इसी बीच, निलंबन के एक दिन बाद विधायक कबीर को रेजीनगर थाने तलब किया गया, जहां उनसे कई घंटे पूछताछ हुई।


    कबीर का दावा- कुरान पढ़ी जाएगी, कोई राजनीति नहीं होगी

    पूरे विवाद के बीच हुमायूं कबीर दिनभर कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी करते रहे। उन्होंने अपनी टीम से 30000 बिरयानी पैकेट मेहमानों के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए। साथ ही वे जमीअत उलेमा-ए-हिंद के कुछ अलग हुए गुटों और ऑल बंगाल इमाम मुअज्जिन एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से भी मिले।

    उन्होंने पत्रकारों से कहा- मुख्य कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा। दो घंटे तक कुरान पढ़ी जाएगी। कोई भाषण नहीं होगा, कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं होगा, न पार्टी के झंडे, न कोई राजनीतिक बयानबाजी। मैं 2,000 स्वयंसेवकों के साथ उपस्थित रहूंगा। सब जानते हैं… यह कोई नई बात नहीं है।


    टीएमसी का आरोप- विपक्ष की साजिश

    टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि राज्य चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहा है और प्रतिद्वंदी दल टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियाँ दोनों ही सतर्क मोड पर आ गई हैं। चौतरफ़ा सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार को होने वाले इस कार्यक्रम पर पूरे प्रदेश की नज़र रहेगी।

    राज्यपाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की
    राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने बंगाल के लोगों से शांति बनाए रखने और भड़काऊ बयानों व अफवाहों से प्रभावित न होने का आग्रह किया। उन्होंने यह आग्रह तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनाई गई मस्जिद की आधारशिला रखने से पहले किया है।

    लोक भवन द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, बोस ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करे कि कहीं भी कोई अशांति न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने लोकभवन में तत्काल प्रभाव से 24×7 कार्यरत रहने वाला एक ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ बनाने का भी निर्देश दिया है। इसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस के पटनायक होंगे।

    पोस्ट में कहा गया है, “लोग फोन या ईमेल के माध्यम से लोक भवन ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ से संपर्क करने और किसी भी अप्रिय घटना, धमकी या किसी के द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ बयान की सूचना देने के लिए स्वतंत्र हैं।” पोस्ट में कहा गया है कि राज्यपाल समूची स्थिति पर निगरानी रखेंगे। राज्यपाल को विश्वास है कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी कि कानून और व्यवस्था को कोई खतरा न हो।