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  • एम्बाप्पे का गोल्डन रिकॉर्ड दो लगातार विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बने फ्रांस के कप्तान

    एम्बाप्पे का गोल्डन रिकॉर्ड दो लगातार विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बने फ्रांस के कप्तान


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक खिताबी जीत के साथ हुआ लेकिन व्यक्तिगत उपलब्धियों की बात करें तो सबसे बड़ी चर्चा फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे के नाम रही। अपनी विस्फोटक फॉर्म और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर एम्बाप्पे ने इस टूर्नामेंट में गोल्डन बूट अपने नाम किया और इसके साथ ही विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। लगातार दूसरे विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले वह दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले कोई भी फुटबॉलर लगातार दो विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने का सम्मान हासिल नहीं कर पाया था।

    पूरे टूर्नामेंट में एम्बाप्पे ने अपनी तेज रफ्तार शानदार फिनिशिंग और आक्रामक खेल से विरोधी टीमों के डिफेंस को लगातार परेशान किया। उन्होंने विश्व कप 2026 में कुल 10 गोल दागे और 4 गोल में अपने साथियों की मदद करते हुए असिस्ट भी किए। उनकी यही निरंतरता उन्हें गोल्डन बूट का सबसे बड़ा दावेदार बनाती रही और अंत में उन्होंने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार पर कब्जा जमाकर अपनी महानता को फिर साबित कर दिया।

    विश्व कप के दौरान गोल्डन बूट की दौड़ बेहद रोमांचक रही। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी शानदार लय में थे और उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 8 गोल किए। फाइनल मुकाबले से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि यदि मेसी स्पेन के खिलाफ गोल करते हैं तो वह एम्बाप्पे को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। हालांकि स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति ने मेसी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और वह फाइनल में गोल करने में सफल नहीं हो सके। इसी के साथ एम्बाप्पे ने गोल्डन बूट की रेस में अपनी बढ़त बरकरार रखी।

    फ्रांस ने भले ही विश्व कप का खिताब नहीं जीता लेकिन तीसरे स्थान के लिए इंग्लैंड के खिलाफ हुए मुकाबले में एम्बाप्पे ने दो शानदार गोल दागकर अपने अभियान का शानदार अंत किया। इन दो गोलों ने उन्हें न केवल मेसी से आगे पहुंचाया बल्कि विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर का रिकॉर्ड भी उनके नाम कर दिया। अब एम्बाप्पे के नाम फीफा विश्व कप में कुल 22 गोल दर्ज हो चुके हैं जबकि लियोनेल मेसी 21 गोल के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। यह उपलब्धि बताती है कि एम्बाप्पे ने बेहद कम उम्र में विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर कितनी बड़ी छाप छोड़ी है।

    दूसरी ओर विश्व कप का खिताब स्पेन के नाम रहा जिसने फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 16 साल बाद फिर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। दोनों टीमों के बीच निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं हुआ और मुकाबला अतिरिक्त समय तक पहुंचा। आखिरकार फेरान टोरेस ने निर्णायक गोल करते हुए स्पेन को दूसरी बार विश्व चैंपियन बना दिया। इस हार के साथ अर्जेंटीना का लगातार दूसरी बार और कुल चौथी बार विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया।

    भले ही फ्रांस ट्रॉफी नहीं जीत सका लेकिन किलियन एम्बाप्पे ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि वह मौजूदा दौर के सबसे प्रभावशाली फुटबॉलरों में शामिल हैं। लगातार दो विश्व कप में गोल्डन बूट जीतना और विश्व कप इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनना उनकी महान उपलब्धियों में शामिल हो गया है। आने वाले वर्षों में भी दुनिया की नजरें इस स्टार स्ट्राइकर के प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।

  • एम्बाप्पे का जादू बरकरार, पैराग्वे पर जीत के साथ फ्रांस अंतिम आठ में, अब मोरक्को से भिड़ंत

    एम्बाप्पे का जादू बरकरार, पैराग्वे पर जीत के साथ फ्रांस अंतिम आठ में, अब मोरक्को से भिड़ंत


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने अपने चैंपियन अंदाज का शानदार प्रदर्शन करते हुए राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में पैराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। फिलाडेल्फिया में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे ने पेनल्टी पर मैच का एकमात्र गोल दागकर टीम को जीत दिलाई। इस जीत के साथ फ्रांस अब अंतिम आठ में मोरक्को का सामना करेगा।

    मुकाबले की शुरुआत से ही फ्रांस ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रमण किए लेकिन पैराग्वे की अनुशासित रक्षापंक्ति ने पहले हाफ में उसे कोई स्पष्ट मौका नहीं दिया। फ्रांस के अधिकांश प्रयास दूर से लगाए गए शॉट तक सीमित रहे जिन्हें पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार ढंग से रोक दिया। मजबूत डिफेंस के दम पर पैराग्वे ने पहले हाफ में फ्रांस को गोल करने से रोके रखा।

    दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी गति और आक्रामकता बढ़ा दी। ओस्मान डेम्बेले ने कॉर्नर से बने मौके पर गोल करने की कोशिश की लेकिन गेंद साइड नेटिंग में चली गई। इसके बाद मनु कोने के लंबी दूरी के शक्तिशाली शॉट को भी ऑरलैंडो गिल ने बेहतरीन डाइव लगाकर बचा लिया।

    लगातार बढ़ते दबाव के बीच 69वें मिनट में फ्रांस को निर्णायक मौका मिला। डिजायर डूए को पेनल्टी बॉक्स के भीतर फाउल किए जाने पर रेफरी ने पेनल्टी दे दी। किलियन एम्बाप्पे ने बिना किसी गलती के गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद फ्रांस ने संयमित खेल दिखाते हुए यह बढ़त अंत तक कायम रखी और क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया।

    एम्बाप्पे के लिए यह मुकाबला कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। उन्होंने इस विश्व कप में अपना सातवां गोल दागा और गोल्डन बूट की दौड़ में अपनी दावेदारी और मजबूत कर ली। इसके अलावा विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में यह उनका 11वां गोल रहा। वह लगातार तीन अलग-अलग विश्व कप के राउंड ऑफ 16 मुकाबलों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए।

    मैच के बाद एम्बाप्पे ने कहा कि टीम को पहले से अंदाजा था कि पैराग्वे के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस मैच ने साबित किया कि फ्रांस केवल आक्रामक फुटबॉल खेलने वाली टीम नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी जीत हासिल करना जानती है। उन्होंने कहा कि अब पूरी टीम का ध्यान क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर है क्योंकि मोरक्को एक बेहद मजबूत और संतुलित टीम है।

    अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें क्वार्टर फाइनल पर होंगी जहां फ्रांस और मोरक्को के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। दोनों टीमों ने राउंड ऑफ 16 में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है और सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी।