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  • फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच कौन फैला रहा हिंसा, नकाबपोश 'कैसर्स' की भूमिका से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच कौन फैला रहा हिंसा, नकाबपोश 'कैसर्स' की भूमिका से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    नई दिल्ली ।फ्रांस में महंगाई, आर्थिक असमानता और सरकारी नीतियों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक घटनाओं के कारण चर्चा में हैं। लगातार तीसरे सप्ताहांत हजारों लोग सड़कों पर उतरे। देश के अधिकांश हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन 31 अक्टूबर को रैलियां समाप्त होने के दौरान पेरिस सहित कई शहरों में नकाबपोश लोगों के समूहों की पुलिस से झड़प हो गई। इन घटनाओं के बाद सवाल उठने लगा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच हिंसा फैलाने वाले ये लोग कौन हैं और उनका विरोध करने का तरीका क्या है?

    फ्रांस में ऐसे उपद्रवियों के लिए ‘कैसर्स’ शब्द इस्तेमाल किया जाता है। फ्रांसीसी भाषा में इसका अर्थ तोड़फोड़ करने वाले होता है। ये किसी एक पंजीकृत संगठन या राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग छोटे समूहों में सक्रिय रहते हैं। प्रदर्शन के दौरान इनकी गतिविधियों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, पुलिस से भिड़ना और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करना शामिल बताया जाता है।

    इन समूहों में अक्सर युवा और कट्टर वामपंथी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बताई जाती है। इन्हें कई बार अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों के रूप में भी पहचाना जाता है। हालांकि, इनका कोई केंद्रीय नेतृत्व या साझा सदस्यता व्यवस्था सामने नहीं आई है। अलग-अलग समूहों में सक्रिय रहने के कारण इनकी पहचान और संगठनात्मक ढांचे का पता लगाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहता है।

    कैसर्स आमतौर पर बड़े प्रदर्शनों के दौरान रैलियों के किनारे या उनके अंतिम पड़ाव पर सक्रिय होते हैं। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने के बजाय ये पुलिस के साथ टकराव और तोड़फोड़ की घटनाओं में शामिल होते हैं। पहचान छिपाने के लिए नकाब, चश्मे और काले कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ घटनाओं में इनके पास हथौड़े और आतिशबाजी से जुड़ी सामग्री भी देखी गई है। बैंकों, रियल एस्टेट कार्यालयों और बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की घटनाएं भी इनके विरोध के तरीकों में शामिल बताई जाती हैं।

    31 अक्टूबर को फ्रांस के विभिन्न शहरों में करीब 3.20 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। इनमें लगभग 70 हजार लोग अकेले पेरिस में सड़कों पर उतरे थे। अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन राजधानी में पोर्टे डी शारांटों के आसपास स्थिति बिगड़ गई। काले कपड़े पहने दर्जनों नकाबपोश लोगों ने हथौड़ों से सड़क के पत्थर उखाड़कर पुलिस पर फेंके। सुरक्षा बलों पर एक आग लगाने वाला उपकरण भी फेंका गया। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस, स्टन ग्रेनेड और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ सौ उपद्रवियों का एक समूह लगातार सुरक्षा बलों पर हमले कर रहा था। पेरिस में 400 से 800 कट्टर वामपंथी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, यह अनुमानित संख्या थी और इससे सभी उपद्रवियों की प्रमाणित पहचान नहीं होती।

    इस बार हैलोवीन के त्योहार ने भी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। कई प्रदर्शनकारी स्पाइडरमैन और फ्रैंकेंस्टाइन जैसे किरदारों की पोशाक पहनकर पहुंचे। कुछ लोगों ने हैलोवीन के मुखौटों से चेहरे ढके। गृह मंत्री लॉरां नूनेज ने चेतावनी दी थी कि पहचान छिपाने के लिए चेहरा ढकने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर हैलोवीन की रात क्रांति शुरू करने की अपील वाले संदेश भी सामने आए थे।

    इन घटनाओं के बीच कैसर्स को अप्रवासी समुदाय से जोड़ने की कोशिशों पर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन हिंसक समूहों को सीधे अप्रवासी समुदाय से जोड़ने का कोई ठोस आधार नहीं है। इनमें फ्रांसीसी नागरिकों और कट्टर वामपंथी विचारधारा से जुड़े युवाओं की भी बड़ी संख्या बताई गई है।

    दरअसल, मौजूदा आंदोलन की शुरुआत महंगाई, बढ़ती जीवनयापन लागत, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति के विरोध में हुई थी। इसमें छात्र, ट्रेड यूनियन और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हैं। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद नागरिक स्वतंत्रता तथा विरोध के अधिकार की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बन गई।

    17 अक्टूबर को हुए शुरुआती बड़े प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों में आगजनी हुई थी। अब छात्र संगठनों ने नवंबर के पहले सप्ताह में स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद कराने तथा 5 नवंबर को मजदूर संगठनों के साथ प्रदर्शन करने की घोषणा की है। ऐसे में फ्रांस में आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी रहेगी।

  • फ्रांस में फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार

    फ्रांस में फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार


    नई दिल्ली। फ्रांस में महंगाई, रोजगार, वेतन, पेंशन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी मांगों को लेकर शनिवार, 24 अक्टूबर को एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस समेत देश के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 4 लाख 10 हजार लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जबकि लगभग 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पेरिस में मार्च के अंतिम चरण में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को सबसे बड़ा प्रदर्शन पेरिस में हुआ, जहां करीब 1 लाख 10 हजार लोग मार्च में शामिल हुए। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में कुछ जगहों पर स्थिति बिगड़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।

    पेरिस में मार्च के दौरान पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
    प्रशासन ने पेरिस में प्रदर्शन का मार्ग शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक सीमित रखा था। मार्च पोर्त द’इटली से शुरू होकर पोर्त द विन्सेन्स तक पहुंचा। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्लास द ला नासियों की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कुछ स्थानों पर तनाव बढ़ गया और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस तथा पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

    पेरिस अभियोजक कार्यालय के मुताबिक, शनिवार के प्रदर्शन के सिलसिले में 64 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 40 लोगों को पुलिस हिरासत में रखा गया। गिरफ्तार लोगों में छह नाबालिग भी शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर पर हथियार रखने या हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की तैयारी करने वाले समूहों में शामिल होने का संदेह है।

    लियोन, स्ट्रासबर्ग और मार्सेय में भी तनाव
    पेरिस के अलावा लियोन, क्लेरमोंट-फेरां और स्ट्रासबर्ग में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। नीस और नांतेस में पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को तैनात किया गया। मार्सेय में प्रदर्शन के अंतिम हिस्से के पास कुछ दर्जन लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई।

    प्रदर्शन को देखते हुए फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पहले ही देशभर में 70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती का ऐलान किया था। सुरक्षा व्यवस्था के तहत हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को भी लगाया गया।

    यह प्रदर्शन पिछले सप्ताह हुई हिंसा के बाद हुआ है। इससे पहले शनिवार को 5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे थे। उस दौरान फ्रांसभर में करीब 3 हजार दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया था या उन्हें लूट लिया गया था।

    स्कूलों में शिक्षकों की कमी और महंगाई के खिलाफ आंदोलन
    फ्रांस में यह आंदोलन पिछले महीने पेरिस के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक हाई स्कूल में कर्मचारियों की कमी के विरोध से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, जबकि कर्मचारियों की मांगों में ज्यादा वेतन और बेहतर पेंशन शामिल हैं।

    शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में सरकारी मिडिल और हाई स्कूलों में शिक्षकों की गैरमौजूदगी के कारण 1 करोड़ 54 लाख शिक्षण घंटे प्रभावित हुए। यह कुल निर्धारित शिक्षण समय का 7.5 प्रतिशत था।

    छात्र संगठन उच्च शिक्षा में 2 लाख 50 हजार अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय प्रवेश व्यवस्था के तहत होने वाली चयन प्रक्रिया को खत्म करने, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति करने और शैक्षणिक संस्थानों की मरम्मत कराने की भी मांग कर रहे हैं।

    इसके अलावा छात्र हर महीने छात्रवृत्ति में 200 यूरो की बढ़ोतरी और सरकारी छात्र आवासों का किराया रोकने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन में महंगाई, रोजगार के अवसर और आम लोगों की आर्थिक परेशानियां भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

    प्रदर्शन पर प्रतिबंध से ट्रेड यूनियन नाराज
    फ्रांस के प्रशासन ने लियोन, नीस और मोंपेलिए समेत कुछ शहरों में प्रदर्शनों पर रोक लगा दी थी। ट्रेड यूनियनों ने इन प्रतिबंधों का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह की रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती है।

    इस बीच, येलो वेस्ट मूवमेंट से जुड़े संगठनों ने 31 अक्टूबर को फिर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। शिक्षा, महंगाई, वेतन और पेंशन से जुड़ी मांगों को लेकर जारी आंदोलन के कारण फ्रांस में आने वाले दिनों में भी विरोध प्रदर्शन होने की संभावना बनी हुई है।

  • फ्रांस में आज बड़े विरोध-प्रदर्शन की तैयारी…., सुरक्षा के कड़े इंतजाम…. 70 हजार पुलिस जवान तैनात

    फ्रांस में आज बड़े विरोध-प्रदर्शन की तैयारी…., सुरक्षा के कड़े इंतजाम…. 70 हजार पुलिस जवान तैनात


    पेरिस।
    फ्रांस (France) में आज शनिवार को एक बार फिर बड़े विरोध प्रदर्शन (Protest) होने जा रहे हैं. पिछले सप्ताह देश में हुई हिंसा और लूटपाट को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. सरकार की कोशिश है कि इस बार प्रदर्शन के दौरान हिंसा और दंगों जैसी स्थिति दोबारा न बने. इसके लिए देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों (70,000 Police Personnel) को तैनात किया गया है.

    फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान विशेष पुलिस बल, हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन, पुलिस डॉग स्क्वॉड (Police Dog Squad) और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां भी तैनात रहेंगी. प्रशासन ने किसी भी तरह की हिंसा और तोड़फोड़ से सख्ती से निपटने की तैयारी की है।

    गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज (Home Minister Laurent Nuñez) ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगी. उन्होंने कहा कि हिंसा और नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


    आज पेरिस में होगा बड़ा प्रदर्शन

    शनिवार दोपहर पेरिस में बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया गया है. फ्रांस की मुख्य छात्र यूनियन UNEF ने इसका आयोजन किया है. देश की बड़ी ट्रेड यूनियन CGT ने भी इसमें शामिल होने का ऐलान किया है. किसानों, जलवायु कार्यकर्ताओं और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों के भी प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद है।

    पेरिस में होने वाले इस प्रदर्शन को प्रशासन ने मंजूरी दी है. हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को ट्रेड यूनियनों से जुड़े प्रदर्शनों के अलावा दूसरे विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद देश में बढ़ रही अशांति को नियंत्रित करना है।


    पिछले सप्ताह हुई थी हिंसा और लूटपाट

    फ्रांस में पिछले कुछ हफ्तों से शिक्षा व्यवस्था, रोजगार के खराब अवसर और बढ़ती महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे और इनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे. लेकिन बाद में कई जगहों पर हालात बिगड़ गए और हिंसा शुरू हो गई. पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों के दौरान देश के कई हिस्सों में हिंसा और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं. इसे हाल के वर्षों में देश में हुई सबसे गंभीर और व्यापक हिंसा में से एक माना गया।


    70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के लिए फ्रांस में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. पुलिस के साथ विशेष सुरक्षा इकाइयों और भारी हथियारों से लैस मोबाइल दस्तों को भी तैनात किया गया है.अधिकारियों को आशंका है कि कट्टरपंथी समूह और कुछ युवा हिंसा और लूटपाट का फायदा उठाकर स्थिति बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं. इसी वजह से सुरक्षा बलों की बड़े स्तर पर तैनाती की गई है।


    प्रवासियों और कट्टरपंथी इस्लाम पर आरोप

    फ्रांस में जारी हिंसा को लेकर कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने प्रवासियों और कट्टरपंथी इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इन आरोपों को खारिज किया है. सरकार का पूरा फोकस अब शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है. पुलिस के अलावा हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को भी तैयार रखा गया है।


    पेरिस में सुरक्षा बढ़ाई गई

    प्रदर्शनों के बीच पेरिस में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है. शुक्रवार को शहर के कई हिस्सों में पुलिस की तैनाती देखी गई. फ्रांस की आतंकवाद रोधी व्यवस्था के तहत पेरिस में आम तौर पर गश्त करने वाले सेना के जवानों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है. इसका मकसद पुलिस को स्थायी सुरक्षा ड्यूटी से मुक्त करना है, ताकि उन्हें प्रदर्शन वाले इलाकों में तैनात किया जा सके. प्रशासन अब शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान किसी भी तरह की हिंसा और लूटपाट को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और कर्फ्यू के बीच भारतीय दूतावास की एडवाइजरी, नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

    फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और कर्फ्यू के बीच भारतीय दूतावास की एडवाइजरी, नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह


    नई दिल्ली ।
    फ्रांस में जारी हिंसक प्रदर्शनों और कई शहरों में लगाए गए कर्फ्यू के बीच पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें फ्रांस में रह रहे भारतीयों और वहां यात्रा की योजना बना रहे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। दूतावास ने नागरिकों से प्रदर्शन स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। साथ ही, बदलते हालात पर नजर रखने के लिए स्थानीय समाचारों और फ्रांस सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लेते रहने को कहा गया है।

    दूतावास की सलाह के अनुसार, भारतीय नागरिकों को ऐसे स्थानों पर जाने से बचना चाहिए, जहां प्रदर्शन हो रहे हैं या बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हैं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाओं को देखते हुए सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें और परिस्थितियों के अनुसार अपनी आवाजाही तय करें।

    फ्रांस में स्थिति से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए नागरिक gouvernement.fr वेबसाइट देख सकते हैं। किसी आपात स्थिति में भारतीय नागरिक पेरिस स्थित भारतीय दूतावास या मार्सिले स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क कर सकते हैं। एडवाइजरी में बदलते हालात के बीच सूचनाओं की नियमित निगरानी और सतर्कता को महत्वपूर्ण बताया गया है।

    फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ने के बीच विभिन्न संगठनों ने आगे भी आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। प्रमुख छात्र संघों और येलो वेस्ट आंदोलन ने शनिवार को रैलियां निकालने का आह्वान किया है। येलो वेस्ट आंदोलन इससे पहले वर्ष 2018 और 2019 में ईंधन की बढ़ती कीमतों के विरोध में बड़े प्रदर्शन कर चुका है। उस समय आंदोलन का प्रभाव फ्रांस के कई हिस्सों में देखने को मिला था।

    इसके अलावा, ट्रेड यूनियनों ने महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के विरोध में 5 नवंबर को हड़ताल का ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों और जन आंदोलनों की गतिविधियां जारी रहने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, इन कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों की स्थिति स्थानीय निर्देशों पर निर्भर करेगी।

    प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के बाद अधिकारियों ने कई शहरों में प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। 17 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद पेरिस के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगाया गया। लिली, लियोन और नीस में भी स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लागू किए जाने की जानकारी सामने आई, जबकि मार्सिले में सभाओं और प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगाई गईं। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित इलाकों में व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है।

    हिंसा के दौरान गिरफ्तारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, सप्ताहांत में हुई घटनाओं के दौरान हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया और सैकड़ों पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना मिली। हालांकि, इन आंकड़ों की विस्तृत आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

    फ्रांस में मौजूदा आंदोलन की शुरुआत सितंबर के अंतिम दिनों में छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी बताई गई है। छात्रों ने स्कूलों की खराब स्थिति, संसाधनों की कमी और कक्षाओं में बढ़ती भीड़भाड़ के खिलाफ विरोध शुरू किया था। बाद में आंदोलन का दायरा बढ़ा और महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत तथा सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित चिंताएं भी इसमें शामिल हो गईं। विभिन्न स्थानों पर लूटपाट, आगजनी और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    ऐसे हालात में भारतीय नागरिकों के लिए दूतावास की एडवाइजरी महत्वपूर्ण है। फ्रांस में मौजूद भारतीयों और वहां जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों को स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेते रहने, संवेदनशील स्थानों से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

  • फ्रांस अकेले बनाएगा राफेल से भी उन्नत छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, जर्मनी से अलग होने के बाद भारत से सहयोग की उम्मीद

    फ्रांस अकेले बनाएगा राफेल से भी उन्नत छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, जर्मनी से अलग होने के बाद भारत से सहयोग की उम्मीद

    नई दिल्ली । फ्रांस अब छठी पीढ़ी का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी अपने दम पर आगे बढ़ा रहा है। जर्मनी और स्पेन के साथ मिलकर विकसित किए जा रहे भविष्य के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में मतभेदों के बाद फ्रांस ने अपनी रणनीति बदल दी है। इस नई योजना के तहत वह ऐसा विमान विकसित करना चाहता है, जो तकनीक और युद्धक क्षमताओं के मामले में मौजूदा राफेल लड़ाकू विमान से अधिक उन्नत हो। फ्रांस की सशस्त्र बल मंत्री कैथरीन वौत्रिन ने संसदीय सुनवाई के दौरान पुष्टि की कि जुलाई 2026 में परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। अब फ्रांस तकनीकी विकास और उत्पादन पर अपना नियंत्रण बनाए रखते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करना चाहता है।

    इस नई परियोजना का नाम अवियन डी कॉम्बैट डू फ्यूचर (ACF) रखा गया है, जिसका अर्थ भविष्य का लड़ाकू विमान है। इससे पहले यह कार्यक्रम फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) के नाम से जाना जाता था। जर्मनी और स्पेन के साथ संयुक्त रूप से आगे बढ़ने की योजना में मतभेद सामने आने के बाद फ्रांस ने अलग रास्ता चुना। फ्रांसीसी वायुसेना प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर के मुताबिक, अब इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विमान के विकास से जुड़े अहम फैसलों और तकनीकी क्षमताओं पर फ्रांस का नियंत्रण बनाए रखना है।

    योजना के अनुसार, फ्रांस 2027 में नए विमान के प्रदर्शनकारी मॉडल यानी एयरक्राफ्ट डेमोंस्ट्रेटर पर काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस परियोजना में पहले से विकसित तकनीकों और राफेल के प्रस्तावित F5 संस्करण से मिलने वाली क्षमताओं का उपयोग किए जाने की योजना है। हालांकि, नए विमान के विकास के लिए विस्तृत तकनीकी कार्य और अन्य तैयारियां भी जरूरी होंगी। परियोजना का लक्ष्य 2040 के शुरुआती वर्षों तक इस छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को तैयार करना है। यदि तय समयसीमा के अनुसार काम आगे बढ़ता है, तो यह फ्रांस की वायुसेना के लिए भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नए विमान की योजना केवल एक लड़ाकू जेट तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसमें ड्रोन, निर्देशित हथियारों और कॉम्बैट क्लाउड जैसी तकनीकों पर भी काम जारी रखने की बात कही गई है। कॉम्बैट क्लाउड का उद्देश्य युद्ध के दौरान विमान, ड्रोन और अन्य सैन्य प्रणालियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वय को बेहतर बनाना है। इस तरह की तकनीकें भविष्य के हवाई अभियानों में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, इन सभी क्षमताओं के अंतिम स्वरूप और नए विमान में उनके इस्तेमाल से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

    फ्रांस के सामने इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक इसका भारी वित्तीय खर्च है। देश के पास लड़ाकू विमान बनाने से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी क्षमताएं हैं, लेकिन छठी पीढ़ी के विमान को अकेले विकसित करने के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। फ्रांस आर्थिक चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। ऐसे में परियोजना को तय समय पर पूरा करने और विकास का खर्च उठाने के लिए उसे अतिरिक्त वित्तीय सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।

    इसी वजह से फ्रांस अब केवल तकनीकी साझेदारों के बजाय वित्तीय निवेशकों की तलाश कर रहा है। इस संदर्भ में भारत का नाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत पहले ही फ्रांस के साथ इस परियोजना में जुड़ने की इच्छा जता चुका है। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को देखते हुए भारत की भागीदारी पर चर्चा की गुंजाइश बनी हुई है। हालांकि, भारत की भूमिका किस रूप में होगी, कितना निवेश किया जाएगा और दोनों देशों के बीच किस तरह की व्यवस्था बनेगी, इसे लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    स्वीडन के साथ भी संभावित सहयोग को लेकर चर्चा होने की जानकारी दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फ्रांस अपनी नई रणनीति के तहत किन देशों को वित्तीय या अन्य सहयोग के लिए अपने साथ जोड़ता है। फिलहाल उसका प्रमुख लक्ष्य छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को 2040 के शुरुआती वर्षों तक तैयार करना है। जर्मनी और स्पेन के साथ संयुक्त परियोजना से अलग होने के बाद फ्रांस की यह नई योजना उसकी रक्षा नीति और भविष्य की सैन्य विमानन क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • यूरोप में महंगाई और कम वेतन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, फ्रांस में हिंसा और आगजनी के बाद हजार से ज्यादा गिरफ्तार

    यूरोप में महंगाई और कम वेतन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, फ्रांस में हिंसा और आगजनी के बाद हजार से ज्यादा गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।
    यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, कम वेतन, महंगे मकानों और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति के खिलाफ 17 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। फ्रांस, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल में हजारों से लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने जीवनयापन की बढ़ती लागत और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को लेकर नाराजगी जताई। फ्रांस में कई जगह प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग किया। फ्रांस में अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनों में 5.5 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों के अनुमान इससे ज्यादा बताए गए।

    फ्रांस में प्रदर्शन की शुरुआत स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के साथ हुई थी। बाद में आंदोलन का दायरा बढ़ा और इसमें ईंधन की बढ़ती कीमतों, महंगाई, कम वेतन तथा जीवनयापन की लागत जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए। पेरिस, मार्सेई, नीस, नांत, बोर्डो, लिमोज, लिली, टूलूज और स्ट्रासबर्ग समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कई दुकानों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ तथा लूटपाट की घटनाएं भी दर्ज की गईं।

    लिमोज शहर में 143 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई। इस घटना में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, आग के कारण उसकी छत नीचे की मंजिलों पर गिर गई। शुरुआती जानकारी में इमारत के बाहरी हिस्से का करीब दो-तिहाई भाग नष्ट होने की बात कही गई। अधिकारियों ने इसे शहर की ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ा नुकसान बताया। हिंसा के दौरान कई अन्य स्थानों पर भी आगजनी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च में भी हिस्सा लिया।

    फ्रांस में हिंसा के बाद गिरफ्तारियों का आंकड़ा एक हजार से अधिक पहुंच गया। अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में गिरफ्तारी की संख्या में अंतर रहा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। कुछ रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों के घायल होने और नाबालिगों के साथ पुलिस के व्यवहार पर विवाद का उल्लेख किया गया। इन मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक जानकारी पर निर्भर करेगी।

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर करते हुए सार्वजनिक इमारतों, दुकानों और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सरकार ने स्पष्ट किया कि आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों को कानून के तहत जवाबदेह बनाया जाएगा।

    बेल्जियम में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव देखने को मिला। राजधानी ब्रसेल्स में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं और आगजनी की घटनाएं भी हुईं। लीज शहर में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। वहां शिक्षा की बढ़ती लागत और उच्च शिक्षा तक पहुंच को लेकर चिंताएं भी विरोध के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं।

    पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन समेत कई शहरों में हजारों लोगों ने महंगाई, कम वेतन और आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने बेहतर वेतन, पेंशन और सार्वजनिक सेवाओं की मांग उठाई। मकानों की कीमतों और किराये में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों के लिए घर खरीदना या किराये पर लेना मुश्किल हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद से वहां मकानों की कीमतें दोगुने से अधिक हो चुकी हैं। नए किरायेदारी समझौतों में भी किराये में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार के संसदीय मामलों के मंत्री कार्लोस अब्रू अमोरिम ने कहा था कि सरकार सड़कों पर उठने वाले नारों के दबाव में नहीं झुकेगी। प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेतृत्व पर आम लोगों की समस्याओं से दूर रहने का आरोप लगाया।

    इटली के मिलान और बोलोन्या में भी जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और अधिकारियों के साथ झड़प की, जबकि अन्य स्थानों पर मार्च शांतिपूर्ण रहे। अलग-अलग देशों में विरोध के स्थानीय मुद्दे भले ही अलग थे, लेकिन महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर असंतोष प्रमुख रहा। इन प्रदर्शनों ने यूरोपीय सरकारों पर आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बढ़ाया है।

  • राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त

    राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त


    नई दिल्ली।
    भारत और फ्रांस (India and France) के बीच राफेल विमानों (Rafale Aircraft) की खरीद को लेकर बातचीत की प्रक्रिया जारी है। इस बीच भारत ने एक ऐसी शर्त रखी है, जिसे लेकर फ्रांस पसोपेश में है। भारत ने कहा है कि वह इन लड़ाकू विमानों में स्वदेशी हथियार (Indigenously Developed Weapons) प्रणाली लगाएगा। हालांकि, फ्रांस इसके लिए अब तक तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि भारत ने फ्रांस को दो टूक कह दिया है कि अगर यह शर्त नहीं मानी गई तो सौदा भी नहीं हो सकता।

    राफेल लड़ाकू विमान खरीद प्रक्रिया से जुड़े वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते के तहत 18 विमान फ्रांस से बनकर आने हैं, जबकि 96 विमान भारत में बनने हैं। भारत इन विमानों में स्वदेशी रक्षा प्रणाली यानी देश में निर्मित मिसाइल, राडार आदि स्थापित करना चाहता है।


    फ्रांस सहमत नहीं

    वहीं, फ्रांस का कहना है कि भारत को राफेल में जोड़ी जाने वाली रक्षा प्रणालियां भी फ्रांस से ही लेनी चाहिए। इसे लेकर जारी बातचीत में भारत ने स्पष्ट तौर पर यह संकेत दे दिए हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर हो रहा है और स्वदेशी हथियारों को तरजीह दे रहा है। ऐसे में फ्रांस को यह शर्त माननी ही होगी। इससे राफेल सौदे में नया मोड़ आ गया है।


    ऐतराज नहीं होना चाहिए

    वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा बिना सोर्स कोड दिए भारतीय हथियार प्रणाली राफेल में लगाने पर फ्रांस को कोई एतराज नहीं होना चाहिए।


    50% स्वदेशी सामग्री पर तैयार था फ्रांस

    इससे पूर्व भारत ने यह शर्त रखी थी कि जिन 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा, उनमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। फ्रांस पहले इसके लिए भी तैयार नहीं था, लेकिन बाद में उसने यह बात मान ली थी। हाल ही में वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने कहा है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे इस वित्त वर्ष के आखिर तक हो सकता है। इस पर जल्द फैसला लिए जाने की उम्मीद है।


    सोर्स कोड नहीं देना चाहती दसाल्ट एविएशन

    सूत्रों के अनुसार, राफेल विमानों का निर्माण करने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन भारत की शर्त मानने के लिए इसलिए भी तैयार नहीं है, क्योंकि इसके लिए उसे सोर्स कोड देना पड़ेगा। सोर्स कोड ऐसा सॉफ्टेवयर होता है, जो विमान के साथ-साथ उसमें लगी हर प्रणाली के संचालन के लिए जिम्मेदार है। अगर सोर्स कोड भारत को मिल गया, तो फिर भारत राफेल जैसा विमान खुद भी बना सकता है। इसीलिए दसाल्ट तैयार नहीं है।


    भारत बिना कोड के हथियार लगाने में सक्षम

    वायुसेना का मानना है कि कोई भी कंपनी क्रेता को कभी अपना सोर्स कोड नहीं देती है। ऐसे में दसाल्ट एविएशन का रुख स्वाभाविक है। वायुसेना के अनुसार, भारत दसाल्ट से सोर्स कोड की मांग कर भी नहीं रहा है। वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘हमने फ्रांस से कहा है कि हम सोर्स कोड के बिना भी राफेल में भारतीय हथियार प्रणाली स्थापित करने में सक्षम हैं। वायुसेना और डीआरडीओ ने इसका रास्ता निकाल लिया है।’

  • फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज, स्कूलों में भीड़ और शिक्षकों की कमी से सड़कों पर उतरे छात्र

    फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज, स्कूलों में भीड़ और शिक्षकों की कमी से सड़कों पर उतरे छात्र

    नई दिल्ली ।फ्रांस की राजधानी पेरिस से शुरू हुआ शिक्षा व्यवस्था में सुधार का छात्र आंदोलन अब देश के कई हिस्सों तक फैल गया है। स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या, कक्षाओं की कमी, शिक्षकों की कमी और अन्य सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्र सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल का एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। एक अन्य छात्र के सिर में आंसू गैस का गोला लगने और जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है।

    आंदोलन से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 190 छात्र घायल हुए हैं, जबकि पुलिस ने लगभग 5 हजार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में करीब 85 प्रतिशत छात्र नाबालिग बताए गए हैं। छात्र संगठनों ने मंगलवार को होने वाले आंदोलन में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की थी। कई शिक्षक संगठनों ने भी प्रदर्शन को समर्थन देने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुपात में कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी जरूरी सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं।

    आंदोलन के बीच फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने छात्रों और शिक्षकों की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने का ऐलान किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि हिंसक प्रदर्शन के मामले में सरकार की ओर से नरमी नहीं बरती जाएगी। शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ की गई और कुछ स्कूलों को आग के हवाले भी किया गया।

    इस आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी। छात्रों ने स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी को दूर करने की मांग उठाई थी। जब उनकी मांगें पूरी हुईं तो संबंधित छात्रों ने हड़ताल खत्म कर दी, लेकिन तब तक आंदोलन दूसरे इलाकों तक पहुंच चुका था। धीरे-धीरे इसका विस्तार कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक भी हो गया। पिछले दो दशकों में फ्रांस के माध्यमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है, जबकि उसके अनुपात में शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ सकी है। इस अवधि में छात्रों की संख्या करीब ढाई लाख बढ़ने की बात सामने आई है।

    फ्रांस में 2010 में करीब साढ़े 8 लाख बच्चों का जन्म हुआ था, जो 1980 के दशक के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है। बच्चों के जन्म में इस बढ़ोतरी के पीछे 30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में बढ़ी प्रजनन दर को प्रमुख कारण बताया गया है। 2010 में जन्मे बच्चे अब करीब 15 से 16 साल के हो चुके हैं और हाई स्कूलों में पढ़ रहे हैं। छात्रों की संख्या बढ़ने के बावजूद स्कूलों में कक्षाओं, सुविधाओं और शिक्षकों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।

    फ्रांस में जारी विरोध केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। सरकारी कर्मचारी, फायर फाइटर, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी भी वेतन बढ़ोतरी समेत अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। देश इस समय ईरान और यूक्रेन युद्ध की वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज बताया गया है, जो उसकी सालाना अर्थव्यवस्था के करीब 119 प्रतिशत के बराबर है। आबादी के बूढ़े होने के कारण पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।

  • फ्रांस के जंगल में लगी भीषण आग के बाद मिले वर्ल्ड वॉर-2 के 400 से ज्यादा गोले और अन्य विस्फोट

    फ्रांस के जंगल में लगी भीषण आग के बाद मिले वर्ल्ड वॉर-2 के 400 से ज्यादा गोले और अन्य विस्फोट


    पेरिस
    । फ्रांस (France) के दक्षिण-पश्चिम (South-west) में बसे ले पोर्ज (Le Porge) गांव में जंगल की भीषण आग के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है. यहां 400 से ज्यादा वर्ल्ड वॉर 2 (World War II) के गोले और दूसरे विस्फोटक मिले हैं. जुलाई में लगी आग के दौरान गांव के करीब 3,500 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे. आग शांत होने के बाद जब अधिकारी इलाके की जांच कर रहे थे, तब जमीन के नीचे दबा यह गोला-बारूद मिला. अधिकारियों का कहना है कि आग की तेज गर्मी की वजह से कुछ गोले फट गए और तभी उनके बारे में पता चला।

    आग लगने के दौरान गांव के पास कई धमाकों की आवाज भी सुनाई दी थी. इसके बाद बम निरोधक टीम मौके पर पहुंची. पहले एक खेत से 75 गोले मिले. फिर पूरे इलाके की जांच की गई, जिसमें 400 से ज्यादा गोले और दूसरे विस्फोटक बरामद हुए. लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कुछ समय के लिए इस इलाके में आने-जाने पर रोक लगा दी गई।


    आग की गर्मी से मिला सुराग

    अधिकारियों के मुताबिक, मिले गोलों में फ्रांस और जर्मनी दोनों के मोर्टार शेल शामिल हैं. माना जा रहा है कि ये वर्ल्ड वॉर 2 के समय के हैं. ये गोले कई सालों से जमीन के नीचे दबे थे. जंगल की आग के दौरान जमीन बहुत ज्यादा गर्म हो गई. इसी गर्मी की वजह से कुछ गोले फट गए और अधिकारियों को उनका पता चल गया।

    अधिकारियों ने कहा कि इन पुराने गोलों में अब भी धमाका होने का खतरा था. अगर इनमें विस्फोट होता, तो इनके टुकड़े काफी दूर तक जा सकते थे और लोगों को नुकसान पहुंचा सकते थे. इसलिए पहले पूरे इलाके को सुरक्षित किया गया. इसके बाद बम निरोधक टीम ने सभी गोले और दूसरे विस्फोटकों को हटाया। जांच पूरी होने के बाद लोगों को अपने घर लौटने की इजाजत दे दी गई।


    इस साल फ्रांस में रिकॉर्ड जंगल की आग

    इस साल फ्रांस में जंगल की आग ने 1.6 लाख हेक्टेयर (160,000 हेक्टेयर) से ज्यादा जमीन जला दी है. यह देश में अब तक की सबसे बड़ी जंगल की आग मानी जा रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप में जंगल की आग पहले से ज्यादा बड़ी और तेजी से फैल रही है. बढ़ती गर्मी, लंबे समय तक सूखा और तेज हवाएं ऐसी आग को और खतरनाक बना रही हैं।

    वर्ल्ड वॉर 2 खत्म हुए 80 साल से ज्यादा हो चुके हैं. इसके बाद भी यूरोप के कई इलाकों में आज भी पुराने बम और गोले जमीन के नीचे दबे मिल जाते हैं. कई बार निर्माण का काम, सूखा या जंगल की आग जैसी घटनाओं के बाद ये सामने आ जाते हैं. हाल ही में हंगरी में डेन्यूबे नदी का पानी कम होने पर भी वर्ल्ड वॉर 2 के कई बम दिखाई दिए थे।

  • निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    नई दिल्ली ।भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापार विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच को मजबूत करना है।

    एसोचैम के अनुसार, इन समझौतों के माध्यम से विभिन्न देशों के उद्योगों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, निवेश के अवसरों की पहचान, नई तकनीकों के उपयोग और संयुक्त कारोबारी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    बिजनेस फ्रांस के साथ हुए समझौते में भारत और फ्रांस की कंपनियों के बीच व्यापार एवं निवेश के नए अवसर विकसित करने की योजना बनाई गई है। दोनों संस्थाएं तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने, बाजार से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और व्यापारिक आयोजनों के संयुक्त संचालन में सहयोग करेंगी।

    समझौते के तहत व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और अन्य कारोबारी गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के उद्यमों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती भागीदारी उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अरब देशों के साथ हुई ये साझेदारियां मजबूत संस्थागत संबंध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कंपनियों को नए बाजार तलाशने, निवेश बढ़ाने और लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी।

    बिजनेस फ्रांस के कृषि निर्यात प्रभाग के प्रमुख वियानी मेनिएर ने इस साझेदारी को भारत और फ्रांस के कारोबारी संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के कार्यवाहक महासचिव डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद ने कहा कि यह समझौता भारत और अरब क्षेत्र के बीच व्यापारिक संवाद को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके जरिए निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

    इस समझौते के तहत व्यापारिक सूचनाओं का साझा उपयोग, निवेश संबंधी अवसरों की पहचान, संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक साझेदारियां तेजी से बदल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के समझौते भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।