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  • फर्जी IAS मामले में नया VIDEO वायरल: विधानसभा में प्रोबेशनर होने का दावा, कथित ठगी के बाद अब सहेलियों की भूमिका पर सवाल

    फर्जी IAS मामले में नया VIDEO वायरल: विधानसभा में प्रोबेशनर होने का दावा, कथित ठगी के बाद अब सहेलियों की भूमिका पर सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में फर्जी IAS बनकर कथित तौर पर लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़े नए VIDEO सामने आने के बाद पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। अशोकनगर के चंदेरी से शुरू हुए इस मामले की कड़ियां अब भोपाल तक पहुंच चुकी हैं और विधानसभा परिसर में बनाए गए एक VIDEO ने तृप्ति की कथित फर्जी अफसर वाली पहचान पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। VIDEO में तृप्ति अपनी दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर के बाहर घूमती और ब्लॉग बनाती नजर आ रही है। लाल साड़ी में दिखाई दे रही तृप्ति को उसकी एक सहेली सीनियर अधिकारी बताती है जबकि तृप्ति खुद को प्रोबेशनर बताते हुए मजाक में कहती नजर आती है कि उनकी हरकतों को देखकर कोई उन्हें अधिकारी नहीं मानेगा।

    विधानसभा परिसर के बाहर शूट किए गए VIDEO में तृप्ति की सहेली कहती है कि वे विधानसभा अटेंड करने आई हैं और उन्होंने अपना पहला ब्लॉग बनाने का फैसला किया है। बातचीत के दौरान तृप्ति और उसकी सहेलियों के बीच हंसी मजाक भी होता है। एक सहेली कहती है कि वे दोनों प्रोबेशनर्स हैं जबकि तृप्ति पहले से उनकी सीनियर हैं। तृप्ति भी इस बातचीत में खुद को सीनियर बताते हुए अपनी सहेलियों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने की बात कहती है। यह VIDEO सामने आने के बाद पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या ऐसे वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों का इस्तेमाल लोगों के बीच खुद को असली सरकारी अधिकारी साबित करने के लिए किया जाता था।

    तृप्ति पर आरोप है कि वह अलग अलग जगहों पर खुद को IAS अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन निगम की बड़ी अधिकारी बताकर लोगों का भरोसा जीतती थी। चंदेरी में उसके खिलाफ चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 9 लाख 80 हजार रुपए लेने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच के दौरान भोपाल में भी उसके खिलाफ 39 लाख 17 हजार रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया। शिकायत के अनुसार एक व्यक्ति से होटल और रिसॉर्ट की संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35 लाख 30 हजार रुपए और नौकरी लगवाने के नाम पर 3 लाख 87 हजार रुपए लिए गए।

    जांच में यह भी सामने आया है कि तृप्ति के पास कथित तौर पर सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री मौजूद थी। पुलिस को CBI लिखा पहचान पत्र और सरकारी लेटरहेड जैसे दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा भारत सरकार लिखा एक इनोवा वाहन भी पुलिस जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन चीजों का इस्तेमाल लोगों पर सरकारी अधिकारी होने का प्रभाव डालने के लिए किया जाता था या नहीं।

    पुलिस जांच में मंत्रालय और IAS अधिकारियों के नामों की सूची मिलने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि तृप्ति जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के नाम लेकर खुद को उनके करीब बताती थी जिससे लोगों का भरोसा आसानी से जीता जा सके। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इस कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और कितने लोग इसके प्रभाव में आए।

    भोपाल के मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो होटल रिसॉर्ट की लीज दिलाई गई और न ही नौकरी लग सकी। पैसे वापस मांगने पर कथित तौर पर केवल 1 लाख रुपए लौटाए गए जबकि बाकी रकम को लेकर विवाद बढ़ने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले में तृप्ति के भाई और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    विधानसभा परिसर के VIDEO सामने आने के बाद अब पुलिस की नजर तृप्ति के पूरे नेटवर्क पर है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि उसकी सहेलियों और अन्य सहयोगियों को कथित फर्जी पहचान के बारे में कितनी जानकारी थी। चंदेरी से भोपाल तक फैले मामलों और विधानसभा परिसर के VIDEO ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस पूछताछ और जांच से इस कथित फर्जी IAS नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।

  • सलमान खान को कोर्ट का समन जैसा नोटिस! शोरूम में कथित धोखाधड़ी के मामले में बहन अलवीरा भी तलब

    सलमान खान को कोर्ट का समन जैसा नोटिस! शोरूम में कथित धोखाधड़ी के मामले में बहन अलवीरा भी तलब


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। चंडीगढ़ की जिला अदालत ने सलमान खान और उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री समेत कई लोगों को कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में नोटिस जारी किया है। यह विवाद मनीमाजरा इलाके में Being Human ब्रांड के ज्वेलरी शोरूम खोलने से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले में शिकायतकर्ता स्थानीय बिजनेसमैन अरुण गुप्ता हैं जिन्होंने आरोप लगाया है कि शोरूम शुरू करने को लेकर उनके साथ किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया और उन्हें कथित तौर पर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि अभी अदालत ने आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और मामले की शुरुआती कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
    शिकायत के मुताबिक यह मामला Style Quotient Jewellery Private Limited से जुड़ा है। इसी कंपनी के साथ शोरूम को लेकर कारोबारी समझौता किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें Being Human ब्रांड के तहत ज्वेलरी शोरूम शुरू करने के लिए तैयार किया गया था लेकिन बाद में परिस्थितियां उनके लिए मुश्किल होती चली गईं। उनका दावा है कि जिस तरह से कारोबार को लेकर बातें और आश्वासन दिए गए थे उन्हें उस रूप में पूरा नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया और अपनी शिकायत के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

    इस मामले में अदालत ने सिर्फ सलमान खान को ही नोटिस नहीं भेजा है बल्कि उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री का नाम भी इसमें शामिल है। इसके अलावा Style Quotient Jewellery Private Limited से जुड़े डायरेक्टर संतोष श्रीवास्तव और प्रसाद बिंदु माधव कापड़े को भी नोटिस जारी किया गया है। अदालत का उद्देश्य फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष जानना है ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे बढ़ाई जा सके।

    खास बात यह है कि अदालत की ओर से जारी नोटिस BNSS की धारा 223 के तहत बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि सलमान खान या अन्य संबंधित लोगों को इस मामले में दोषी ठहरा दिया गया है। यह प्रक्रिया शिकायत पर आगे बढ़ने से पहले संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने से जुड़ी है। इसलिए इस मामले में आरोप और अदालत के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    अदालत ने सभी संबंधित लोगों को 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे उपस्थित होने का निर्देश दिया है। वे खुद या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। अब इस तारीख पर होने वाली कार्यवाही काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी दौरान शिकायत से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्ष अपनी सफाई पेश कर सकते हैं।

    यह विवाद सलमान खान के चर्चित Being Human ब्रांड से जुड़ा होने के कारण भी खासा चर्चा में है। Being Human ब्रांड का नाम सलमान खान से लंबे समय से जुड़ा रहा है और इसके तहत फैशन तथा ज्वेलरी से जुड़े उत्पादों का कारोबार भी किया जाता है। ऐसे में शोरूम से जुड़ा यह कानूनी विवाद अभिनेता के लिए एक और चुनौती बनकर सामने आया है। फिलहाल मामले में अदालत की अगली सुनवाई का इंतजार है और 5 अक्टूबर को होने वाली कार्यवाही से साफ होगा कि इस शिकायत पर आगे किस दिशा में कानूनी कदम बढ़ता है।

  • शादी का झांसा देकर महिलाओं से करोड़ों ऐंठने वाला गिरफ्तार ज्वेलरी दुकान पर हुई थी मुलाकात 1.27 करोड़ की ठगी का खुलासा

    शादी का झांसा देकर महिलाओं से करोड़ों ऐंठने वाला गिरफ्तार ज्वेलरी दुकान पर हुई थी मुलाकात 1.27 करोड़ की ठगी का खुलासा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में महिलाओं को कथित तौर पर प्रेम जाल में फंसाकर शादी का झांसा देने और उनसे मोटी रकम ऐंठने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने जयपुर निवासी एक युवक को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोप है कि आरोपी महिलाओं से पहले नजदीकी बढ़ाता था और शादी का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम लेता था। इसके बाद जब महिलाएं शादी के लिए दबाव बनाती थीं तो वह उनसे दूरी बनाने लगता और अपना ठिकाना बदलकर फरार हो जाता था। उज्जैन में सामने आए मामले में आरोपी पर एक महिला से करीब 1 करोड़ 27 लाख रुपये लेने का आरोप है।
    मामले की शिकायत उज्जैन निवासी महिला ने 13 मई 2026 को माधवनगर थाने में दर्ज कराई थी। महिला के मुताबिक उसकी मुलाकात आरोपी मनीष से एक ज्वेलरी की दुकान पर हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे धीरे नजदीकियां हो गईं। महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा और भरोसा दिलाया कि दोनों जल्द शादी करेंगे। इसी भरोसे के आधार पर उसने महिला से अलग अलग समय पर बड़ी रकम ली। शिकायत के अनुसार करीब चार महीने तक संपर्क में रहने के दौरान आरोपी ने महिला से लगभग 1 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च करा लिए।

    महिला का आरोप है कि मार्च 2026 में जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद कथित तौर पर उसने महिला को धमकी भी दी और वहां से फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए माधवनगर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर आरोपी को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार कर लिया गया। न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस ने पूछताछ और बरामदगी के लिए उसे पुलिस अभिरक्षा में लिया।

    उज्जैन पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर नकदी दो महंगे मोबाइल फोन और ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए खरीदा गया सामान बरामद किया गया है। पुलिस को शक है कि यह मामला केवल एक महिला तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में आरोपी के मध्य प्रदेश के धार और नीमच में भी युवतियों के संपर्क में रहने और उनसे लाखों रुपये लेने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन दावों की जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी कथित तौर पर अपना ठिकाना बदलकर किराए के मकानों में रहता था और महिलाओं से बातचीत के जरिए नजदीकी बढ़ाता था। इसके बाद शादी का वादा कर उनसे पैसे लेने का तरीका अपनाता था। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन ऑनलाइन खरीदारी बैंकिंग और पैसों के लेन देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। साथ ही उसके संपर्क में रही महिलाओं के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि उसने कितनी महिलाओं को कथित तौर पर अपना शिकार बनाया।

    उज्जैन पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूछताछ के बाद इस मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर ठगी गई रकम कहां इस्तेमाल की गई और आरोपी के साथ इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही ठगी के पूरे नेटवर्क और रकम का वास्तविक आंकड़ा सामने आ सकेगा।

  • आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा, युवक से 5.60 लाख की ठगी: खुद को वकील बताने वाले आरोपी पर केस दर्ज

    आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा, युवक से 5.60 लाख की ठगी: खुद को वकील बताने वाले आरोपी पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश । इंदौर में सरकारी आवास योजना के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आजाद नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने आरोप लगाया है कि खुद को वकील बताने वाले व्यक्ति ने उसकी मां के नाम पर आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा देकर 5 लाख 60 हजार रुपए हड़प लिए। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार रामनगर मुसाखेड़ी निवासी कपिल उईके ने नीलगिरी परिसर दूधिया निवासी दीपक शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कपिल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान उसकी पहचान दीपक शर्मा से हुई थी। उस समय दीपक ने स्वयं को पेशे से वकील बताया था और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता देने का भरोसा दिलाया था। इसी परिचय का फायदा उठाकर उसने परिवार का विश्वास जीत लिया।

    कपिल के मुताबिक जून 2026 में दीपक शर्मा ने उसकी मां अवंतीबाई के नाम पर सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने की बात कही। आरोपी उन्हें जिला न्यायालय परिसर स्थित कैंटीन में ले गया, जहां एक महिला के माध्यम से आवेदन फार्म भरवाया गया। इसके बाद कुछ राशि भी जमा कराई गई। अगले दिन आरोपी ने अवंतीबाई के मोबाइल में 311 ऐप डाउनलोड कर यह विश्वास दिलाया कि आवास योजना से जुड़ी सारी जानकारी और अपडेट इसी माध्यम से प्राप्त होंगे।

    कुछ दिनों बाद आरोपी ने दावा किया कि आवंटित होने वाला मकान किसी अन्य व्यक्ति को अधिक कीमत पर बेचा जा सकता है। उसने पूरे सौदे की प्रक्रिया कलेक्टर कार्यालय में पूरी कराने की बात कही। 10 जून को कथित खरीदार पक्ष और पीड़ित परिवार को कलेक्टर कार्यालय बुलाया गया, जहां लगभग 9 लाख 60 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। आरोप है कि खरीदार पक्ष ने उसी समय 5 लाख 60 हजार रुपए नकद दिए, जबकि शेष राशि खाते में जमा कराने की बात कही गई।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि यहीं से ठगी का खेल शुरू हुआ। आरोपी दीपक शर्मा उसी शाम उनके घर पहुंचा और रकम गिनने के बहाने नकदी अपने कब्जे में ले ली। अगले दिन वह एक महिला के साथ दोबारा घर आया और नगर निगम द्वारा सत्यापन किए जाने की बात कहकर परिवार को भ्रमित करता रहा। बाद में उसने कहा कि अधिकारी आने वाले हैं, इसलिए रकम तैयार रखी जाए।

    कपिल के अनुसार आरोपी ने चालाकी से पूरी रकम एक बैग में रखवाई और फिर उसे नाश्ता लेने के बहाने घर से बाहर भेज दिया। इसके बाद वह कपिल को नगर निगम कार्यालय ले गया। वहां बैग लेकर अंदर जाने की बात कहकर वह भवन में प्रवेश कर गया, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। काफी देर इंतजार करने के बाद जब कपिल ने उसे तलाशने की कोशिश की तो उसका कोई पता नहीं चला।

    घर लौटकर जांच करने पर परिवार को एहसास हुआ कि पूरी नकदी गायब हो चुकी है। इसके बाद आरोपी को लगातार फोन किए गए, लेकिन उसने कॉल उठाना बंद कर दिया। खुद को ठगा महसूस करने के बाद कपिल ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

    मामले की जांच के बाद आजाद नगर पुलिस ने आरोपी दीपक शर्मा के खिलाफ चोरी और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपी की तलाश कर रही है और यह भी जांच कर रही है कि कहीं उसने इसी तरह अन्य लोगों को भी सरकारी योजनाओं का झांसा देकर ठगी का शिकार तो नहीं बनाया। यह मामला एक बार फिर लोगों को सावधान करता है कि सरकारी योजनाओं से जुड़े किसी भी काम के लिए केवल अधिकृत माध्यमों और अधिकारियों पर ही भरोसा करें।

  • रुपए दोगुने करने का झांसा, सैकड़ों निवेशक परेशान: दंपती पर करोड़ों की कथित ठगी का आरोप

    रुपए दोगुने करने का झांसा, सैकड़ों निवेशक परेशान: दंपती पर करोड़ों की कथित ठगी का आरोप


    मध्यप्रदेश। रीवा में निवेश पर रकम दोगुनी करने का लालच देकर कथित रूप से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक दंपती ने लोगों को आकर्षक निवेश योजना का भरोसा दिलाकर बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया और बाद में फरार हो गया। मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज पीड़ित बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    पीड़ितों के अनुसार असलम और उसकी पत्नी अबला सुल्ताना उर्फ नंदा ने लोगों को कम समय में रकम दोगुनी होने का भरोसा दिलाया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान कर उनका विश्वास जीता गया, जिससे क्षेत्र के अन्य लोग भी इस योजना से जुड़ते चले गए। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी। आरोप है कि बाद में जब निवेशकों ने अपनी राशि वापस मांगनी शुरू की तो आरोपियों ने टालमटोल करना शुरू कर दिया और फिर संपर्क से बाहर हो गए।

    प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस कथित ठगी से करीब 200 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। कई परिवारों ने वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई बचत निवेश की थी, जबकि कुछ लोगों ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर भी रकम लगाई थी। आरोपियों के कथित रूप से फरार होने के बाद अब इन परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    पीड़ित असलम अंसारी ने बताया कि दंपती ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया था। शुरुआती दौर में कुछ लोगों को भुगतान मिलने से लोगों का भरोसा बढ़ गया और अधिक लोग निवेश करने लगे। हालांकि बाद में रकम वापस मांगने पर उन्हें लगातार आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आरोपियों के गायब होने की बात सामने आई।

    एक अन्य पीड़िता जन्नत खान ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्षों की बचत इस योजना में निवेश की थी। उनके कहने पर परिवार के अन्य सदस्यों ने भी रकम लगाई थी। अब न तो पैसा वापस मिल रहा है और न ही आरोपियों के बारे में कोई जानकारी मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खोने के कारण गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा निवेशकों की राशि वापस दिलाने की मांग की। कई महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि कथित ठगी के कारण उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।

    मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच की जाएगी और तथ्यों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से पीड़ितों को जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

    फिलहाल पीड़ितों का कहना है कि जब तक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती और उनकी राशि वापस दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। मामले की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।

  • PM मोदी का करीबी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तीन साल जेल में बिताने के बाद मिली जमानत

    PM मोदी का करीबी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तीन साल जेल में बिताने के बाद मिली जमानत

    नई दिल्ली में सामने आए एक चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग और ठगी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी काशिफ को जमानत देकर बड़ी राहत प्रदान की है। आरोपी पर आरोप है कि उसने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों को प्रभाव में लिया और सरकारी नौकरी, ठेके तथा सरकारी विभागों में मदद दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की। यह मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में था और आरोपी बीते लगभग तीन वर्षों से जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी लंबी न्यायिक हिरासत को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की है।

    सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका पहले खारिज कर दी गई थी। अदालत ने माना कि आरोपी काफी लंबा समय जेल में गुजार चुका है और मामले की सुनवाई अभी जारी है। इसी आधार पर उसे सशर्त जमानत देने का फैसला लिया गया। हालांकि अदालत ने आरोपी को सख्त चेतावनी भी दी कि वह भविष्य में किसी भी संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं करेगा।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है या जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता, तो प्रवर्तन निदेशालय उसकी जमानत रद्द कराने के लिए दोबारा अदालत का रुख कर सकता है। अदालत ने आरोपी को जांच और ट्रायल की हर प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है।

    यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा हुआ है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया पर अपनी कई एडिट और मॉर्फ की गई तस्वीरें साझा की थीं, जिनमें वह प्रधानमंत्री और कई बड़े नेताओं के साथ दिखाई दे रहा था। इन तस्वीरों के जरिए उसने लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि उसकी पहुंच सत्ता के सबसे ऊंचे स्तर तक है।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने, बड़े सरकारी ठेके हासिल कराने और विभिन्न सरकारी विभागों में प्रभाव का इस्तेमाल कर काम करवाने का भरोसा देता था। इसके बदले वह लोगों से मोटी रकम वसूलता था। एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ने अपनी फर्जी पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल कर कई लोगों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया।

    प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी, जहां से लगभग 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बरामद होने का दावा किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह रकम कथित तौर पर अपराध से अर्जित की गई कमाई का हिस्सा थी। मामले की जांच अभी भी जारी है और एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।

    इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए बनाई जा रही फर्जी छवि और प्रभाव के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश के जरिए साफ संकेत दिया है कि कानून ऐसे मामलों को गंभीरता से देखता है, लेकिन लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी जैसे पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • कैलाश खेर के नाम पर संगीत सहयोग का झांसा देकर लाखों की ठगी का आरोप..

    कैलाश खेर के नाम पर संगीत सहयोग का झांसा देकर लाखों की ठगी का आरोप..


    नई दिल्ली।मनोरंजन जगत से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर के नाम का गलत इस्तेमाल कर एक गीतकार से लाखों रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला न केवल डिजिटल भरोसे की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह पहचान और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है।

    संगीत सहयोग के नाम पर रची गई ठगी की योजना
    पीड़ित गीतकार चैतन्य गोविंद कन्हैया, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वर्तमान में मुंबई में रहते हैं, एक परिचित के माध्यम से आरोपी से जुड़े थे। आरोपी ने खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जो कैलाश खेर से उनका गाना रिकॉर्ड करवा सकता है। शुरुआती बातचीत के दौरान कुछ ऐसी स्थितियां बनाई गईं जिससे पीड़ित का विश्वास धीरे धीरे मजबूत होता गया और उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि यह अवसर पूरी तरह वास्तविक है।

    ऑनलाइन बातचीत और मुलाकात से बढ़ा भरोसा
    आरोपी ने कथित रूप से पीड़ित की ऑनलाइन बातचीत एक ऐसे व्यक्ति से करवाई, जिसे कैलाश खेर बताया गया। बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया गया कि आगे की प्रक्रिया उनके मैनेजर के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके बाद दोनों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई, जहां रिकॉर्डिंग और कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप देने के नाम पर वित्तीय मांग की गई। इस दौरान पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि यह एक पेशेवर संगीत प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

    एडवांस भुगतान के बाद टूटा भरोसा
    विश्वास में आकर पीड़ित ने आरोपी द्वारा बताए गए खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। भुगतान के बाद आरोपी ने संपर्क बनाए रखना बंद कर दिया। जब पीड़ित ने दबाव बनाना शुरू किया, तो उन्हें एक चेक दिया गया जो बाद में बाउंस हो गया। इस घटना के बाद उन्हें संदेह हुआ और जब उन्होंने वास्तविक मैनेजमेंट टीम से संपर्क किया, तो सामने आया कि इस तरह की किसी भी परियोजना या बातचीत की कोई पुष्टि नहीं थी।

    पुलिस में शिकायत और जांच शुरू
    सच्चाई सामने आने के बाद पीड़ित ने संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह की ठगी में और कौन कौन शामिल हो सकता है।

    डिजिटल युग में बढ़ते फ्रॉड पर चेतावनी
    यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि डिजिटल और पेशेवर संपर्कों में बिना पूरी पुष्टि के किसी भी वित्तीय लेनदेन से बचना चाहिए। खासकर जब मामला किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ा हो, तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।

  • शिक्षा व्यवस्था से लेकर अपराध तक जबलपुर में कई मोर्चों पर कार्रवाई और धोखाधड़ी के मामले उजागर

    शिक्षा व्यवस्था से लेकर अपराध तक जबलपुर में कई मोर्चों पर कार्रवाई और धोखाधड़ी के मामले उजागर

    जबलपुर में एक साथ कई अलग अलग घटनाओं ने प्रशासन और आम लोगों को सतर्क कर दिया है जहां एक ओर शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर सख्त रुख अपनाया है वहीं दूसरी ओर ठगी और धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं

    शिक्षा विभाग की ओर से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने पर 400 से अधिक प्राचार्यों और शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है जिला शिक्षा अधिकारी ने उन शिक्षकों से जवाब मांगा है जो निर्धारित समय पर मूल्यांकन केंद्रों पर उपस्थित नहीं हुए 22 फरवरी से शुरू हुए इस कार्य में करीब 441 शिक्षक अनुपस्थित पाए गए जिनमें पीएम श्री और मॉडल स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हैं यदि इन नोटिसों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है इस सख्ती से शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया गया है

    दूसरी ओर शहर में धोखाधड़ी के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है कोतवाली थाना क्षेत्र में एक ज्वेलर्स पर 35 लाख रुपये की ठगी का आरोप सामने आया है आरोपी ने चांदी में मुनाफे का झांसा देकर निवेश के नाम पर यह रकम ली पीड़ित मनोज पांडे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है इस मामले में आरोपी विनोद सोनी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है

    इसी तरह संजीवनी नगर थाना क्षेत्र में एक और गंभीर मामला सामने आया है जहां एक सहकर्मी युवती को शादी का झांसा देकर आरोपी ने उससे 17 लाख रुपये ऐंठ लिए पीड़िता के अनुसार आरोपी ने न केवल पैसे लिए बल्कि शादी के नाम पर शारीरिक संबंध भी बनाए बाद में शादी से इनकार कर दिया और जब पीड़िता ने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने उसे ब्लॉक कर दिया इतना ही नहीं दिए गए चेक भी बाउंस करा दिए गए जिससे मामला और गंभीर हो गया

    इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर में एक तरफ जहां शिक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बरती जा रही है वहीं दूसरी तरफ धोखाधड़ी और अपराध के मामलों पर भी पुलिस सक्रिय हो गई है प्रशासन अब ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके और आम जनता को सुरक्षित माहौल मिल सके

  • विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में 30 करोड़ धोखाधड़ी मामला

    विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में 30 करोड़ धोखाधड़ी मामला


    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री के जानेमाने फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को 30 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में उदयपुर की एक कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह मामला एक बड़े धोखाधड़ी कांड से जुड़ा हुआ है जिसमें दोनों पर उदयपुर के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों के फाउंडर डॉ. अजय मुर्डिया के साथ मिलकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

    मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम बेल की याचिका खारिज

    9 दिसंबर को विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को सात दिन की पुलिस हिरासत के बाद कोर्ट में पेश किया गया। कपल के वकील ने इस दौरान मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की याचिका दी थी। उनका तर्क था कि दोनों को मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए रिहा किया जाए। हालांकि कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। एडवोकेट मंजूर हुसैन ने कोर्ट के फैसले से पहले ANI को बताया “हमने कोर्ट से मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की रिक्वेस्ट की है। अगर जमानत मिलती है तो वे मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए कुछ समय के लिए बाहर आ सकते हैं लेकिन यह पूरी तरह से कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा।”

    उदयपुर की सेंट्रल जेल में भेजे जाएंगे

    कोर्ट ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इसके बाद पुलिस ने जानकारी दी कि दोनों को अब उदयपुर की सेंट्रल जेल में भेजा जाएगा। DSP सूर्यवीर सिंह ने मीडिया को बताया “कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उदयपुर की सेंट्रल जेल में रखा जाएगा।”

    30 करोड़ का धोखाधड़ी मामला

    विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर को मुंबई में अरेस्ट किया गया था। गिरफ्तार करने के बाद उन्हें उदयपुर लाया गया जहां 8 दिसंबर को कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद 9 दिसंबर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। इस मामले में विक्रम भट्ट उनकी पत्नी और छह अन्य आरोपियों पर इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों के फाउंडर डॉ. अजय मुर्डिया के साथ मिलकर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। यह मामला अब पूरे फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है। विक्रम भट्ट का नाम इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने से उनकी छवि को भी नुकसान पहुंच सकता है।

    न्यायिक प्रक्रिया और आगे की कानूनी कार्रवाई

    अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई चल रही है और आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद उनकी फिल्म इंडस्ट्री में छवि को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं लेकिन फिलहाल मामले की जांच चल रही है। अगले कुछ दिनों में इस मामले में और अधिक जानकारी सामने आ सकती है जिसमें आरोपियों की जमानत या उनके खिलाफ कोर्ट में चल रहे मुकदमे के बारे में निर्णय लिया जाएगा।