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  • ग्वालियर में युवक की दर्दनाक मौत से पहले लिखा 5 पन्नों का पत्र, तीन नामों के खुलासे ने बढ़ाए कई सवाल

    ग्वालियर में युवक की दर्दनाक मौत से पहले लिखा 5 पन्नों का पत्र, तीन नामों के खुलासे ने बढ़ाए कई सवाल

    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर जिले में कथित लोन ठगी से परेशान एक युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान जसपाल सिंह यादव के रूप में हुई है, जिसने ट्रेन के सामने छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद पुलिस को मौके से एक विस्तृत सुसाइड नोट मिला है, जिसमें तीन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने नोट को जांच का महत्वपूर्ण आधार बनाते हुए संबंधित व्यक्तियों की तलाश और पूरे मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, जसपाल सिंह यादव बीते कुछ समय से आर्थिक संकट और कथित धोखाधड़ी के कारण मानसिक तनाव में था। परिजनों ने बताया कि वह शनिवार से लापता था। रविवार देर रात झांसी रोड रेलवे लाइन के पास एक शव मिलने की सूचना मिली, जिसकी सोमवार सुबह पहचान जसपाल सिंह यादव के रूप में हुई। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

    सुसाइड नोट में मृतक ने दावा किया है कि कुछ लोगों ने उसकी करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की जमीन पर 3.45 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिलाया था। आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर उससे लगभग 23 लाख रुपये ले लिए गए। कथित तौर पर उसे बैंक का स्वीकृति पत्र भी दिखाया गया, जिससे उसे विश्वास हो गया कि लोन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, लंबे समय तक कोई कार्यवाही नहीं हुई और बाद में संबंधित लोग पैसे लौटाने से भी बचते रहे।

    मृतक ने अपने पत्र में लिखा है कि फरवरी 2025 से जुलाई 2026 तक उसे लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन न तो लोन मिला और न ही उसकी रकम वापस की गई। उसने यह भी उल्लेख किया कि पैसे जुटाने के लिए उसने अपनी बुलेट मोटरसाइकिल, कार, सोना और अन्य संपत्तियां गिरवी रखीं तथा ऊंची ब्याज दर पर उधार लिया। उसके अनुसार, ब्याज मिलाकर उसकी आर्थिक देनदारी लगभग 35 लाख रुपये तक पहुंच गई थी, जिससे वह पूरी तरह टूट चुका था।

    सुसाइड नोट में तीन व्यक्तियों के नाम, मोबाइल नंबर और उनसे जुड़े अन्य विवरण भी दर्ज किए गए हैं। मृतक ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोगों ने केवल उसके साथ ही नहीं बल्कि अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की कथित ठगी की है। पत्र में कुछ स्थानों और परिचितों का भी उल्लेख किया गया है, जहां आरोपियों के छिपे होने की बात कही गई है। पुलिस अब इन सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही है।

    अपने अंतिम पत्र में जसपाल सिंह यादव ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी उल्लेख करते हुए अपील की है कि उसके परिवार को न्याय दिलाया जाए और उसके पिता को कथित रूप से फंसी हुई रकम वापस दिलाने में सहायता की जाए। उसने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट को फोरेंसिक परीक्षण सहित अन्य साक्ष्यों के साथ जांच में शामिल किया गया है। पत्र में दर्ज मोबाइल नंबरों, पतों और अन्य जानकारियों के आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • बैंक फ्रॉड की जांच तेज, 1109 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में सीबीआई ने चार राज्यों के छह ठिकानों पर चलाया सर्च अभियान

    बैंक फ्रॉड की जांच तेज, 1109 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में सीबीआई ने चार राज्यों के छह ठिकानों पर चलाया सर्च अभियान


    नई दिल्ली ।
    देश के बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में शामिल 1109 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जांच को तेज करते हुए चार राज्यों में एक साथ व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य सामग्री जब्त की गई है, जिन्हें जांच के लिए अहम माना जा रहा है। एजेंसी अब इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे लेनदेन, कर्ज के उपयोग और कथित धोखाधड़ी की प्रक्रिया की विस्तार से जांच कर रही है।

    जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला एक निजी कंपनी द्वारा बैंक से वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने के दौरान कथित रूप से गलत और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने फंड आधारित और नॉन-फंड आधारित ऋण सुविधाएं हासिल करने के लिए अपने वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर किया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने स्टॉक का मूल्य वास्तविक से अधिक दर्शाया, व्यापारिक बकाया को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया और वित्तीय स्थिति को वास्तविकता से बेहतर दिखाकर अधिक क्रेडिट सीमा प्राप्त करने का प्रयास किया।

    सीबीआई का कहना है कि बैंक से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया गया। जांच में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि धनराशि को अन्य संस्थाओं अथवा अलग-अलग व्यावसायिक गतिविधियों में स्थानांतरित किया गया। साथ ही खातों को नियमित दर्शाने के लिए कथित रूप से एवरग्रीनिंग जैसी वित्तीय प्रक्रिया अपनाई गई। इन अनियमितताओं के कारण संबंधित बैंक को लगभग 1109 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होने का आरोप है।

    विशेष अदालत से प्राप्त तलाशी वारंट के आधार पर सीबीआई ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तराखंड में कुल छह स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान कंपनी से जुड़े निदेशकों के आवासों, पंजीकृत कार्यालय तथा विभिन्न विनिर्माण इकाइयों की तलाशी ली गई। तलाशी अभियान के दौरान एजेंसी ने कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं, जिनका परीक्षण किया जा रहा है।

    जांच अधिकारियों के अनुसार जब्त किए गए रिकॉर्ड से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बैंक से प्राप्त ऋण राशि का वास्तविक उपयोग किन गतिविधियों में हुआ, वित्तीय लेनदेन की प्रकृति क्या रही और कथित धोखाधड़ी में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही। एजेंसी संबंधित वित्तीय दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान भी कर रही है ताकि पूरे मामले की सटीक तस्वीर सामने लाई जा सके।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े बैंक ऋण मामलों में कथित अनियमितताओं की समयबद्ध और विस्तृत जांच बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य, धन के प्रवाह और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण जांच का प्रमुख आधार बनता है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच के दौरान प्राप्त होने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी का उद्देश्य पूरे प्रकरण में कथित वित्तीय अनियमितताओं की परत-दर-परत जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करना और बैंकिंग प्रणाली को हुए संभावित नुकसान के सभी पहलुओं का तथ्यात्मक आकलन करना है।

  • नेमावर में शातिर महिला ने भरोसे का उठाया फायदा, जेवर चमकाने और बर्तन बदलने के बहाने 20 लाख के आभूषण लेकर फरार

    नेमावर में शातिर महिला ने भरोसे का उठाया फायदा, जेवर चमकाने और बर्तन बदलने के बहाने 20 लाख के आभूषण लेकर फरार


    मध्य प्रदेश : के देवास जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल नेमावर में महिलाओं को निशाना बनाकर ठगी की एक बड़ी घटना सामने आई है। आरोप है कि एक महिला ने पुराने बर्तनों के बदले नए बर्तन देने और सोने-चांदी के आभूषणों को चमकाने तथा नया डिज़ाइन तैयार करने का झांसा देकर करीब 20 लाख रुपये मूल्य के जेवर अपने कब्जे में ले लिए और फरार हो गई। घटना के बाद पीड़ित महिलाओं ने पुलिस से शिकायत कर आरोपी की गिरफ्तारी और आभूषण बरामद कराने की मांग की है।

    शिकायत के अनुसार, ठगी की शुरुआत 7 जुलाई को हुई, जब एक महिला अपनी गोद में एक छोटे बच्चे को लेकर पीड़ितों के घर पहुंची। उसने स्वयं को भरोसेमंद बताते हुए पुराने बर्तनों के बदले नए बर्तन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा। बातचीत के दौरान उसने महिलाओं का विश्वास जीतने की कोशिश की और अगले दिन फिर आने की बात कहकर वहां से चली गई।

    पीड़ितों का आरोप है कि 8 जुलाई को वही महिला दोबारा उनके घर पहुंची। इस बार उसने सोने और चांदी के आभूषणों को नया रूप देने, चमकाने और आकर्षक डिज़ाइन तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उसने भरोसा दिलाया कि वह जेवर देखकर तुरंत वापस कर देगी। महिला की बातों पर विश्वास करते हुए पीड़ितों ने अपने कीमती आभूषण उसे सौंप दिए।

    आरोप है कि जेवर लेने के बाद महिला वहां से चली गई और फिर वापस नहीं लौटी। काफी देर तक इंतजार करने के बाद जब उसका कोई पता नहीं चला, तब पीड़ितों को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित महिलाओं के अनुसार, गायब हुए सोने-चांदी के आभूषणों की कुल कीमत लगभग 20 लाख रुपये है। घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच भी चिंता का माहौल है और स्थानीय नागरिकों ने ऐसे गिरोहों से सतर्क रहने की अपील की है।

    मामले की जानकारी मिलते ही पीड़ित महिलाएं नेमावर थाने पहुंचीं और लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच करने, आरोपी महिला की पहचान कर उसे शीघ्र गिरफ्तार करने तथा उनके आभूषण बरामद कराने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    प्राथमिक जांच के तहत पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही घटनास्थल के आसपास आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी महिला किसी संगठित ठग गिरोह का हिस्सा है या उसने अकेले इस वारदात को अंजाम दिया। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति के झांसे में आकर अपने कीमती आभूषण या अन्य बहुमूल्य सामान किसी को न सौंपें। यदि कोई व्यक्ति जेवर चमकाने, बदलने या अन्य किसी बहाने से घर पहुंचता है तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने से ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। यह मामला एक बार फिर सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि इस प्रकार की ठगी से आम नागरिकों को बचाया जा सके।

  • फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से कथित फर्जी पहचान के जरिए शादी करने का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर युवक से विवाह किया। बाद में जब उसके दावों की सत्यता पर सवाल उठे तो पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, युवक और महिला की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। बातचीत के दौरान महिला ने स्वयं को IAS अधिकारी बताया और दावा किया कि एक न्यायिक मामले के कारण उसकी नियुक्ति लंबित है। युवक का आरोप है कि महिला और उसके परिजनों ने भी इसी बात की पुष्टि करते हुए भरोसा दिलाया कि मामला समाप्त होते ही वह प्रशासनिक सेवा में कार्यभार संभाल लेगी। इन दावों पर विश्वास करने के बाद दोनों ने विवाह कर लिया।

    शिकायत में कहा गया है कि विवाह के शुरुआती दिनों के बाद महिला का व्यवहार बदलने लगा। पति का आरोप है कि उसने परिवार के बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती सामान अपने कब्जे में ले लिया। आरोप यह भी है कि बाद में परिवार पर बड़ी धनराशि की मांग का दबाव बनाया गया और आर्थिक लाभ के लिए जमीन बेचने का सुझाव दिया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

    पति ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि एक रात महिला ने कथित रूप से उसका गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। उसने तत्काल पुलिस सहायता ली, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास भी किया गया। हालांकि विवाद समाप्त नहीं हुआ और बाद में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    मामले में दर्ज प्राथमिकी में महिला के साथ उसके पिता, भाई और एक अन्य रिश्तेदार को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी ने मिलकर महिला की पहचान और नौकरी को लेकर गलत जानकारी देकर विवाह कराया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं और क्या अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की घटनाएं हुई हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच और दर्ज मुकदमे के आधार पर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। साथ ही नामजद अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन पहचान और वैवाहिक संबंधों में तथ्यों के सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले संबंधों में व्यक्तिगत और पेशेवर दावों की पुष्टि करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम किया जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

  • US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर

    US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने H-1B और पर्म (PERM) वर्क वीजा में चल रही कथित धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ा जांच अभियान छेड़ दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस बड़े फर्जीवाड़े की जांच के रडार पर दिग्गज भारतीय आईटी कंपनी ‘कॉग्निजेंट’ (Leading Indian IT company ‘Cognizant’) समेत कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं।


    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुआ एक्शन

    वीजा से जुड़े इस बड़े गोरखधंधे के खिलाफ यह सख्त कदम अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President JD Vance) के नेतृत्व वाली ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ के तहत उठाया गया है।


    कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?

    श्रम विभाग के तहत काम करने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (OIG) ने बड़े स्तर पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। OIG के आधिकारिक बयान में जांच से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं।

    कई नियोक्ताओं और लेबर ब्रोकर्स ने मिलकर वीजा के लिए फर्जी आवेदन जमा किए। विदेशी कामगारों का शोषण किया गया, उनसे जबरन कम वेतन पर काम कराया गया और उनके पैसों में अवैध कटौती की गई। कम मजदूरी वाले विदेशी कर्मचारियों से बाजार को भर दिया गया, जिसका सीधा नुकसान अमेरिकी कामगारों को हुआ और उनकी नौकरियां छिन गईं।


    ‘दर्जनों कंपनियों को जारी किए गए समन’

    बुधवार को फॉक्स बिजनेस से बातचीत के दौरान श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथोनी डी एस्पोसिटो ने इस कार्रवाई को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में पहले ही दर्जनों समन जारी कर दिए हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम जांच में मिले हर एक सुराग की तह तक जाएं।”

    आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, “हमारे पास ऐसे व्हिसलब्लोअर्स मौजूद हैं जो ‘कॉग्निजेंट’ जैसी कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। ये कंपनियां पर्म और H-1B वीजा से जुड़े मुद्दों में पहले से ही काफी चर्चा में रही हैं।”


    अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों से समझौता नहीं

    OIG ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि ऐसे जालसाज उन श्रम कार्यक्रमों की साख को नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्हें देश में श्रमिकों की वास्तविक कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। इन कार्यक्रमों का मकसद अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की कीमत पर भ्रष्ट लोगों की जेब भरना बिल्कुल नहीं है।

    जांच एजेंसी ने कहा कि वह विदेशी गेस्ट वर्कर वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने वाले मानव तस्करी और जबरन मजदूरी कराने वाले पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्था का साफ कहना है कि वह उन सभी साजिशों को जड़ से खत्म करेगी जो मजबूर मजदूरों का शोषण करते हैं और अमेरिकी नागरिकों के हक की नौकरियां छीनते हैं।

  • जबलपुर में नकली DAP खाद बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़, घर के अंदर चल रहा था अवैध कारोबार, नामचीन कंपनी के नाम पर बिक्री की थी तैयारी

    जबलपुर में नकली DAP खाद बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़, घर के अंदर चल रहा था अवैध कारोबार, नामचीन कंपनी के नाम पर बिक्री की थी तैयारी

    मध्यप्रदेश: के जबलपुर जिले में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली डीएपी खाद बनाने के एक अवैध कारोबार का खुलासा किया है। यह पूरा मामला पाटन क्षेत्र के ग्राम करौंदी का है, जहां एक घर के भीतर ही गुपचुप तरीके से नकली खाद तैयार की जा रही थी। छापेमारी के बाद सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को संचालित कर रहा था और किसानों तक घटिया गुणवत्ता की खाद पहुंचाने की योजना बना रहा था।

    कृषि विभाग की टीम को इस संबंध में पहले से सूचना मिली थी, जिसके आधार पर अचानक मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को घर के अंदर भारी मात्रा में नकली डीएपी खाद और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हुई। इसके अलावा कई प्रकार के रसायन और पैकिंग से जुड़े उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

    जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से नामचीन कंपनी के ब्रांडेड बैग की नकल तैयार करता था और उन्हीं में नकली खाद को पैक कर बाजार में सप्लाई करने की योजना बना रहा था। इसका उद्देश्य किसानों को असली खाद बताकर अधिक कीमत पर बेचना था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस तरह की गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और धीरे-धीरे इसका नेटवर्क भी फैलाया जा रहा था।

    कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार खरीफ सीजन के दौरान डीएपी खाद की मांग बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। किसान अपनी फसलों की बुवाई के लिए खाद पर निर्भर रहते हैं, ऐसे में मिलावटी या नकली खाद उनकी फसल और आर्थिक स्थिति दोनों पर गंभीर असर डाल सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग लगातार निगरानी और जांच अभियान चला रहा है।

    छापेमारी के दौरान जब्त किए गए सभी नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि तैयार की जा रही खाद की गुणवत्ता कैसी थी और इसमें किन-किन रसायनों का उपयोग किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई और सख्त की जाएगी।

    इस मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस भी इस बात की जांच कर रही है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ है।

    कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय केवल अधिकृत विक्रेताओं और प्रमाणित स्रोतों से ही सामग्री लें। साथ ही किसी भी संदिग्ध पैकेजिंग या कम कीमत वाले उत्पादों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों पर लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज

    तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश:
    की आर्थिक राजधानी इंदौर में व्यापारिक निवेश के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। तुअर दाल के कारोबार में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर एक कारोबारी से 65 लाख रुपए की राशि हासिल कर ली गई। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो माल की आपूर्ति की गई और न ही निवेश की गई राशि लौटाई गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार भंवरकुआं थाना क्षेत्र निवासी कारोबारी गिरीश रामनानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पहचान महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी गुरुशांतलिंग कुंभार और सोमनाथ हलगोदे से कई वर्ष पहले हुई थी। दोनों व्यापारियों से पूर्व में भी विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक लेन-देन हो चुका था। इसी पुराने परिचय और विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें नए व्यापारिक निवेश का प्रस्ताव दिया।

    शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को तुअर दाल के बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया और अपनी फर्म के माध्यम से व्यापार में निवेश करने पर आकर्षक मुनाफा मिलने का दावा किया। फरवरी 2026 में एक आरोपी इंदौर पहुंचा और कारोबारी से मुलाकात की। इस दौरान उसने मोबाइल फोन पर बड़े पैमाने पर तुअर दाल के स्टॉक की तस्वीरें और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विवरण दिखाए। साथ ही निवेश करने पर कम समय में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा भी दिलाया।

    व्यापारिक अवसर को लाभदायक मानते हुए गिरीश रामनानी ने निवेश का निर्णय लिया। शिकायत के अनुसार उन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लेकर कुल 65 लाख रुपए की व्यवस्था की। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में यह पूरी राशि आरोपियों द्वारा संचालित फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। लेन-देन के दौरान कारोबारी को भरोसा दिलाया गया था कि तय समय के भीतर माल की आपूर्ति कर दी जाएगी और व्यापारिक लाभ भी मिलेगा।

    फरियादी का आरोप है कि रकम जमा होने के बाद आरोपियों का व्यवहार बदलने लगा। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद तुअर दाल की खेप नहीं भेजी गई। जब माल की आपूर्ति को लेकर लगातार संपर्क किया गया तो आरोपियों ने विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगना शुरू कर दिया। कई बार बातचीत के बावजूद न तो व्यापार पूरा हुआ और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई।

    समय बीतने के साथ कारोबारी को संदेह हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने अपने स्तर पर आरोपियों से संपर्क कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और उपलब्ध दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी तथा अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया है। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब धनराशि के लेन-देन, व्यापारिक दस्तावेजों और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।

    यह मामला व्यापारिक निवेश के दौरान सतर्कता बरतने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति, फर्म और कारोबार की स्वतंत्र जांच करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका तथा धनराशि के उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे के साथ व्हाट्सएप पर हुआ देश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, शातिर ठगों ने डीपी बदलकर कंपनी के अधिकारियों से ऐंठे 7.8 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । देश की राजधानी में एक बेहद हैरान करने वाला और अब तक का सबसे बड़ा हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल के परिवार और उनकी कंपनी को निशाना बनाकर साइबर अपराधियों ने करीब 7.8 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय चूना लगाया है। शातिर ठगों ने इस पूरे स्कैम को व्हाट्सएप मैसेंजर के जरिए बेहद चालाकी और लंबी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया। इस सनसनीखेज मामले के उजागर होने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर कॉर्पोरेट जगत और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

    इस बेहद शातिर ठगी की शुरुआत नरेश गुजराल की कंपनी में कार्यरत एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी के मोबाइल पर आए एक अज्ञात व्हाट्सएप मैसेज से हुई। ठगों ने चालाकी का परिचय देते हुए उस अनजान नंबर पर पूर्व सांसद नरेश गुजराल की ही प्रोफाइल फोटो यानी डीपी लगा रखी थी। वरिष्ठ अधिकारी ने जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पर अपने बॉस की तस्वीर देखी, उन्हें रत्ती भर भी अंदेशा नहीं हुआ कि यह कोई जालसाज हो सकता है। ठग ने खुद को नरेश गुजराल के रूप में पेश करते हुए बेहद कड़क और पेशेवर अंदाज में अधिकारी से चैट शुरू की और कंपनी के काम का हवाला देते हुए एक अज्ञात बैंक खाते में तुरंत एक बड़ी रकम ट्रांसफर करने का सख्त निर्देश दे दिया।

    व्हाट्सएप पर मिले इस कथित निर्देश के बाद अधिकारी ने बिना कोई प्रामाणिक जांच किए तुरंत पहली किश्त के रूप में करीब 1.5 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से बताए गए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए। ठगों का हौसला यहीं नहीं रुका; उन्होंने अधिकारी के इसी अटूट भरोसे का फायदा उठाते हुए अगले चार दिनों तक लगातार सिलसिलेवार ढंग से अलग-अलग बहानों से और पैसों की मांग की। बॉस की डीपी और उनके बात करने के लहजे से पूरी तरह आश्वस्त अधिकारी लगातार ट्रांजैक्शन करता रहा, जिसके चलते महज 96 घंटों के भीतर कंपनी के खाते से कुल 7.8 करोड़ रुपये ठगों के हवाले कर दिए गए।

    इस अभूतपूर्व वित्तीय धोखाधड़ी के दौरान सुरक्षा के तमाम दावों के बीच बैंक और कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी यानी सीएफओ भी गच्चा खा गए। लगातार हो रहे करोड़ों रुपये के इस बड़े लेन-देन को देखकर बैंक प्रबंधन को कुछ संदेह अवश्य हुआ था, जिसके बाद उन्होंने तत्काल कंपनी के सीएफओ से इस संबंध में संपर्क भी साधा। हालांकि, सीएफओ ने भी आंतरिक रूप से बिना किसी क्रॉस-वेरिफिकेशन के यह मान लिया कि यह वित्तीय निर्देश स्वयं नरेश गुजराल की ओर से ही जारी किए गए हैं, जिसके कारण यह संदिग्ध ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट के जारी रहा।

    इस पूरे काले खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब 16 जून को लगातार पैसे भेजने से परेशान वरिष्ठ अधिकारी को कुछ गंभीर संदेह हुआ। उन्होंने सीधे नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके पिता लगातार बड़ी रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दे रहे हैं। यह सुनते ही दीक्षा के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई भी संदेश नहीं भेजा था। परिवार को तुरंत साइबर फ्रॉड का अहसास हुआ और उन्होंने बिना समय गंवाए उसी दिन दिल्ली पुलिस में ई-एफआईआर दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल साइबर टीम आईएफएसओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तकनीकी जांच शुरू की और उस बैंक खाते को ट्रैक कर लिया, जिसमें पैसे भेजे गए थे। पुलिस की तत्परता के चलते ठगी गई कुल राशि में से करीब 4 करोड़ रुपये को उसी खाते में समय रहते फ्रीज कर दिया गया है, जबकि शेष राशि की रिकवरी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए देशव्यापी छापेमारी जारी है।

  • जेल से बाहर निकला उम्रकैद का कैदी, बाद में खुला सच: जाली दस्तावेजों के इस खेल ने मचाया हड़कंप

    जेल से बाहर निकला उम्रकैद का कैदी, बाद में खुला सच: जाली दस्तावेजों के इस खेल ने मचाया हड़कंप

    नई दिल्ली। देश की न्याय और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक प्रक्रियाओं और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित एक केंद्रीय जेल में ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। बताया जा रहा है कि उम्रकैद की सजा काट रहे एक खतरनाक कैदी को जेल से बाहर निकालने के लिए कथित तौर पर उच्च न्यायिक आदेश का फर्जी इस्तेमाल किया गया। जब पूरे मामले की सच्चाई सामने आई तो जेल प्रशासन और जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया।

    मामले की जानकारी सामने आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पूरा घटनाक्रम किसी सामान्य लापरवाही का नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। आरोप है कि एक जाली दस्तावेज तैयार किया गया, जिसे आधिकारिक आदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया। पहली नजर में दस्तावेज पूरी तरह वास्तविक दिखाई दिया, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर उस पर भरोसा कर लिया गया। इसी आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की गई और कैदी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

    जानकारी के अनुसार संबंधित कैदी गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी पाया गया था और वह उम्रकैद की सजा काट रहा था। उस पर अपहरण और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप साबित हुए थे। अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के तहत उसे लंबे समय तक जेल में रहना था। लेकिन कथित तौर पर फर्जी आदेश के आधार पर उसकी रिहाई संभव हो गई। यह मामला इसलिए और गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करने वाली प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है।

    घटना के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की साजिश किसी एक व्यक्ति के स्तर पर संभव नहीं हो सकती। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किया, किन लोगों ने उसकी मदद की और क्या इस पूरे नेटवर्क में अंदरूनी सहयोग भी शामिल था। मामले में कई लोगों से पूछताछ की जा सकती है और तकनीकी पहलुओं की भी गहराई से जांच की जा रही है।

    यह घटना केवल एक कैदी की रिहाई तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्यायिक आदेशों की सत्यता जांचने की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक संभव है तो भविष्य में इससे और भी गंभीर सुरक्षा खतरे पैदा हो सकते हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए डिजिटल सत्यापन और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    फिलहाल यह मामला जांच के केंद्र में है और प्रशासन इस बात की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि तकनीक और दस्तावेज आधारित व्यवस्थाओं के दौर में भी सतर्कता और सत्यापन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। आने वाले दिनों में जांच के बाद कई बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।