Tag: Free Trade Agreement

  • पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन

    पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन


    नई दिल्ली| भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने सोमवार को विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में निर्यात को मजबूत बनाने और वैश्विक व्यापार अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    मंत्री Piyush Goyal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में क्षेत्र-विशेष प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों की रचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सुनी गईं।

    बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हाल ही में भारत द्वारा किए गए विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) देश के निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं। इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाकर भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर फोकस किया गया।

    मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार निर्यातकों को मजबूत बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत सहयोग प्रदान कर रही है।

    इससे पहले, Piyush Goyal ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत का बड़ा बाजार, कुशल कार्यबल, डिजिटल क्षमता और विनिर्माण शक्ति न्यूजीलैंड की कृषि-तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और फिनटेक विशेषज्ञता के साथ मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का है, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह पहल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देते हुए एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में आयात-निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले लगभग सभी उत्पादों को टैरिफ छूट का लाभ मिलेगा। इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को होगा, क्योंकि उनके उत्पाद वहां के बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड से भारत आने वाले अधिकतर उत्पादों पर भी टैरिफ कम किया जाएगा या समाप्त किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

    यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद अंतिम रूप में पहुंचा है और इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने वाला अहम समझौता माना जा रहा है। इससे व्यापार की रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ नए निवेश के अवसर भी पैदा होंगे।

    समझौते में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश और मानव संसाधन से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत न्यूजीलैंड आने वाले वर्षों में भारत में बड़े स्तर पर निवेश करने की योजना बना सकता है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा इस समझौते में छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को भी आसान बनाने पर जोर दिया गया है। भारतीय छात्रों को न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और बाद में रोजगार के अवसरों तक पहुंच मिलने की सुविधा इस समझौते का अहम हिस्सा है।

    कौशल आधारित भारतीय पेशेवरों के लिए भी अस्थायी वर्क वीजा की सुविधा रखी गई है, जिससे वे निर्धारित अवधि तक न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के बीच स्किल एक्सचेंज और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि भारत ने अपने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते में सुरक्षित रखा है, ताकि घरेलू उद्योगों पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े।

  • भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौते से वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा: सीपी राधाकृष्णन

    भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौते से वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा: सीपी राधाकृष्णन


    नई दिल्ली।
    उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौता वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।
    सीपी राधाकृष्णन ने यह बात आज तमिलनाडु के सलेम स्थित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) के नवनिर्मित शैक्षणिक भवन का उद्घाटन के अवसर पर कही। इस अवसर पर उन्होंने भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को तकनीक के साथ जोड़ने और इसे भविष्य के लिए तैयार एक ‘रचनात्मक उद्योग’ बनाने पर जोर दिया।
    उपराष्ट्रपति ने हथकरघा को भविष्य के लिए तैयार रचनात्मक उद्योग में बदलने का आह्वान करते हुए कहा कि आईआईएचटी सलेम स्वदेशी शिल्प कौशल और आधुनिक वस्त्र विज्ञान के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। पारंपरिक ज्ञान को समकालीन तकनीक के साथ मिलाकर संस्थान ने उत्पादकता बढ़ाई है गुणवत्ता मानकों में सुधार किया है और बाजार-उन्मुख उत्पादन को सक्षम बनाया है।साथ ही हाथ से बुने हुए वस्त्रों की प्रामाणिकता को भी संरक्षित किया है।
    भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वाराणसी के रेशमी ब्रोकेड, बंगाल के जामदानी असम के मूगा रेशम कश्मीर के कानी शॉल आंध्र प्रदेश के वेंकटगिरी और मंगलगीरी बुनाई से लेकर मध्य प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियों तक भारतीय हथकरघा उत्पादों ने अपनी शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत के लिए वैश्विक मान्यता अर्जित की है।
    उन्होंने तमिलनाडु की जीवंत बुनाई परंपराओं को भी रेखांकित किया जिनमें चेट्टीनाडु कंडांगी साड़ियां कांचीपुरम रेशम अरानी रेशम थिरुबुवनम रेशम चेन्निमलाई कंबल नागरकोइल वेष्टि तौलिए और मदुरै सुंगुडी साड़ियां शामिल हैं।
    इस क्षेत्र की वृद्धि पर भरोसा जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सलेम से यूरोपीय संघ को होने वाले वस्त्र निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। अंबूर से चमड़े के निर्यात में भी काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि 56 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते न केवल वस्त्र क्षेत्र को लाभ पहुंचाएंगे बल्कि चमड़ा और अन्य विनिर्माण उद्योगों जैसे संबद्ध क्षेत्रों के लिए भी विकास के अवसर पैदा करेंगे।
    केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आईएचटी सलेम में नए अकादमिक ब्लॉक का उद्घाटन केवल एक इमारत का उद्घाटन नहीं है बल्कि बुनकरों को सशक्त बनाने और हथकरघा क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने की दृष्टि को सुदृढ़ करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सादगी परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक सामूहिक कदम है।
    इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने सलेम स्थित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए।
    उपराष्ट्रपति ने आईआईएचटी में आयोजित एक प्रदर्शनी का भी दौरा किया जहां देश भर के हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया था।
    इसका मुख्य उद्देश्य संस्थागत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और शिक्षण अनुसंधान और कौशल विकास के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान छात्रों में नवाचार उद्यमिता और उद्योग-अनुकूल दक्षताओं को बढ़ावा देना है।
    इस भवन में आधुनिक इंटरैक्टिव कक्षाएं एक सुसज्जित पुस्तकालय और डिजिटल पुस्तकालय एक सेमिनार हॉल संकाय कक्ष प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं और एक बोर्ड रूम हैं। साथ ही इसमें 11 भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिए परीक्षा नियंत्रक का कार्यालय और अन्य आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाएं भी हैं।
    इस अवसर पर पर्यटन राज्य मंत्री आर. राजेंद्रन, सांसद टी.एम. सेल्वगनपति, सांसद एस.आर. शिवलिंगम, विधायक श्री ई. बालासुब्रमण्यम और वस्त्र मंत्रालय में विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना (आईएएस) उपस्थित रहीं।

  • PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता

    PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता


    नई दिल्ली। भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते FTA को लेकर एक बार फिर सकारात्मक हलचल शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को दो दिवसीय इजरायल दौरे से ठीक पहले दोनों देशों ने FTA पर औपचारिक चर्चा का पहला दौर शुरू कर दिया है।

    मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की गई कि द्विपक्षीय वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वार्ता आगे बढ़ाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष नवंबर में दोनों देशों ने इस समझौते के लिए संदर्भ की शर्तों टीओआर पर हस्ताक्षर किए थे।

    23 फरवरी से नई दिल्ली में शुरू हुई वार्ता

    वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत-इजरायल FTA के लिए बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ जो 26 फरवरी तक चलेगा। इससे पहले दोनों देशों के बीच आठ दौर की बातचीत हो चुकी थी लेकिन अक्टूबर 2021 के बाद यह प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। अब एक बार फिर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

    तकनीकी स्तर पर गहन चर्चा

    इस दौर में दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ अलग-अलग सत्रों में समझौते के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू कर रहे हैं जबकि इजरायल की ओर से वरिष्ठ निदेशक यिफ़ात अलोन पेरेल वार्ता की अगुवाई कर रही हैं।

    व्यापार में गिरावट समझौते से उम्मीद

    ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों में आमतौर पर अधिकतम वस्तुओं पर आयात शुल्क में भारी कटौती या पूरी तरह समाप्ति की व्यवस्था की जाती है। साथ ही सेवाओं और निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया जाता है।

    वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से इजरायल को निर्यात 52% घटकर 2.14 अरब डॉलर रह गया जबकि आयात भी 26.2% की गिरावट के साथ 1.48 अरब डॉलर पर आ गया। ऐसे में FTA से दोनों देशों के व्यापार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

  • भारत-इजराइल ने मुक्त व्यापार समझौता के लिए बातचीत का पहला दौर शुरू किया

    भारत-इजराइल ने मुक्त व्यापार समझौता के लिए बातचीत का पहला दौर शुरू किया


    नई दिल्ली।
    भारत-इजराइल के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) के लिए बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी को नई दिल्ली में शुरू हो गया है, यह दौर 26 फरवरी तक चलेगा।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्राल ने मंगलवार को जारी एक बयान में बताया कि इस दौर के दौरान दोनों तरफ के तकनीकी विशेषज्ञ एफटीए के अलग-अलग पहलुओं जैसे कि सामान का व्यापार, सर्विस का व्यापार, ओरिजिन के नियम, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी उपाय, व्यापार में तकनीकी रुकावटें, कस्टम प्रक्रिया और व्यापार सुविधा, बौद्धिक संपदा अधिकार वगैरह को कवर करने वाले सत्र में शामिल होंगे।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी बयान में लिखा है, इजराइल के एक प्रतिनिधिमंडल से आज मिला, जो इंडिया-इजराइल मुक्त व्यापार समझौता वार्ता (23-26 फरवरी, 2026) के पहले दौर के लिए भारत आया है। गोयल ने आगे कहा कि एफटीए पर बातचीत भारत-इजराइल द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है, जिसका मकसद दोनों तरफ के बिजनेस और लोगों के लिए ज्यादा मौके बनाना है।

    मंत्रालय के मुताबिक भारत-इजरायल के बीच संदर्भ की शर्तें (टीओआर) पर नवंबर, 2025 में हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए पहचाने गए एरिया पर वार्ता के लिए एक संरचित ढांचा बनाया गया था।

    वित्त वर्ष 2024-2025 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापारिक व्यापार 3.62 बिलियन यूएस डॉलर। भारत और इजराइल कई सेक्टर में एक-दूसरे को पूरा करते हैं, और एफटीए एमएसएमई समेत बिजनेस को निश्चितता और अनुमान लगाकर दोनों देशों के व्यापार को और बढ़ाने में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा।

  • वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर

    वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर


    नई दिल्ली।
    ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारत-ईयू एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए वैश्विक मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक जीत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को करीब लाएगा, बल्कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25% हिस्सा भी कवर करेगा। पीएम ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विश्व स्तर पर मजबूती देगी और सर्विस सेक्टर के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। साथ ही, यह पिछले साल ब्रिटेन के साथ हुए समझौते को भी और अधिक शक्ति प्रदान करेगा।

    ऊर्जा अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उदय पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आज भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की एक महाशक्ति बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति दुनिया के लिए मिसाल है। कार्यक्रम में मौजूद संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों और वैश्विक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हो रहे निरंतर सुधारों ने निवेश के माहौल को दुनिया में सबसे बेहतर बना दिया है।

    इंडिया एनर्जी वीक 2026: क्या है खास? गोवा में 30 जनवरी तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऊर्जा जगत का सबसे बड़ा आयोजन है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और गोवा के सीएम प्रमोद सावंत की मौजूदगी में शुरू हुए इस सम्मेलन में 75,000 से अधिक एनर्जी प्रोफेशनल्स हिस्सा ले रहे हैं। 700 से अधिक प्रदर्शक और 550 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हैं। इसमें तेल, गैस के साथ-साथ AI, डिजिटलाइजेशन और नेट-जीरो पाथवे जैसे 11 थीमेटिक जोन बनाए गए हैं। 12 से ज्यादा देशों के पवेलियन और 120 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन भारत के उस विजन को दर्शाता है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण नेट-जीरो एक साथ चलते हैं। इस समझौते और समिट से भारत में करोड़ों के विदेशी निवेश और हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।