Tag: freedom fighter

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पुण्यतिथि पर किया भावपूर्ण नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पुण्यतिथि पर किया भावपूर्ण नमन


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान स्वतंत्रता सेनानी, कवि, लेखक और पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। वे ऐसे युगद्रष्टा साहित्यकार थे, जिनकी लेखनी में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और लोक कल्याण की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी प्रदेश की माटी के सच्चे सपूत थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी कलम को राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाया और जनमानस को जागृत करने का कार्य किया। उनकी रचनाएं आज भी युवाओं को देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा दी और राष्ट्रीय चेतना को सशक्त किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धेय चतुर्वेदी का जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि अपने विचारों और लेखन से देश के करोड़ों लोगों के मन में स्वाधीनता की लौ जलाए रखी। उनकी कविताएं और लेख आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे। उनके शब्दों में समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण की शक्ति थी।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता को मिशन के रूप में अपनाया। उन्होंने सत्य, साहस और जनहित को पत्रकारिता की आधारशिला बनाया। उनके संपादन और लेखन ने पत्रकारिता को केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त औजार बनाया। उन्होंने जिस निर्भीकता के साथ अपने विचार रखे, वह आज के समय में भी पत्रकारों और लेखकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कृतियां राष्ट्रसेवा, समाज के नवनिर्माण और लोक कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करती हैं। उनका साहित्य हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और राष्ट्रीय एकता व अखंडता को मजबूत करता है। ऐसे महान व्यक्तित्वों का स्मरण करना और उनके विचारों को आत्मसात करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

    अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और राष्ट्र व समाज के हित में कार्य करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय चतुर्वेदी अपने प्रखर विचारों, ओजस्वी लेखनी और राष्ट्रभक्ति के कारण सदैव स्मरणीय रहेंगे।

  • पंजाब केसरी' लाला लाजपत राय की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अर्पित की भावांजलि: राष्ट्र सदा कृतज्ञ रहेगा

    पंजाब केसरी' लाला लाजपत राय की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अर्पित की भावांजलि: राष्ट्र सदा कृतज्ञ रहेगा


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के स्तंभ रहे ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन किया है। बुधवार को भोपाल में जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लाला जी के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और उनके महान बलिदान को याद करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय एक ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा और स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, “श्रद्धेय लाला लाजपत राय जी का बलिदान और उनके द्वारा दिया गया नेतृत्व भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने गुलामी की बेड़ियों में जकड़े लाखों भारतीयों के भीतर आजादी की अलख जगाई और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।

    स्वतंत्रता संग्राम के लाल को सलाम

    लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध ‘लाल-बाल-पाल’ लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल की तिकड़ी के प्रमुख सदस्य थे। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों का भी मार्गदर्शक रहा है।

    सांयकाल की लाठी और ब्रिटिश साम्राज्य का पतन डॉ. यादव ने उन ऐतिहासिक क्षणों को भी याद किया जब साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला जी ने अंग्रेजों की लाठियां खाते हुए कहा था कि मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की अंतिम कील साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके इन शब्दों ने भारतीय जनमानस में वह ऊर्जा भरी जिसने अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

    बलिदान के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता

    मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज का आत्मनिर्भर भारत उन्हीं महान बलिदानियों के सपनों का भारत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लाला लाजपत राय जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। डॉ. यादव ने ट्वीट और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से भी चित्र साझा कर ‘पंजाब केसरी’ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत माता के सच्चे सपूत थे : सीएम योगी..

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत माता के सच्चे सपूत थे : सीएम योगी..


    नई दिल्ली :लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर नेताजी सुभाष चौक हजरतगंज लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि नेताजी भारत की आजादी का ऐसा नाम हैं जो प्रत्येक भारतीय के मन में सर्वोच्च सम्मान के साथ किसी भी विपरीत परिस्थिति में देशद्रोही तत्वों के सामने न झुकने का दृढ़ संकल्प उत्पन्न करता है भारत माता के सच्चे सपूत नेताजी का नाम लेते ही हर भारतीय के मन में श्रद्धा सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना स्वतः जाग्रत हो जाती है

    सीएम योगी ने कहा कि नेताजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी उनका आह्वान तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा भारत की आजादी का मंत्र बन गया उनका प्रत्येक शब्द स्वतंत्रता संग्राम का संदेश बन जाता था दिल्ली चलो का उद्घोष हर भारतीय को प्रेरित करता है उनका कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा गीत आज भी भारतीय सेना के दीक्षांत समारोह में बड़ी शान से गाया जाता है नेताजी का योगदान महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले आंदोलन को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नेताजी ने क्रांतिकारियों के सिरमौर के रूप में आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया भारत के अंदर और बाहर जाकर स्वतंत्रता के लिए जो संघर्ष किया वह अविस्मरणीय है जर्मनी जापान और अन्य देशों में जाकर उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया यह हमारे लिए प्रेरणा की गाथा है

    मुख्यमंत्री ने नेताजी के जीवन पर भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि नेताजी का जन्म 1897 में कटक में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता परिवार में हुआ बचपन में ही उन्हें उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन भेजा गया आईसीएस की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों की चाकरी करने से इनकार कर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े उनका विराट व्यक्तित्व और देश के प्रति अमूल्य योगदान आज भी हम सबको प्रेरणा देता हैसीएम योगी ने कहा कि हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनके श्रीचरणों में प्रदेशवासियों की ओर से नमन करते हैं उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनका आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रह

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा

    प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा


    नई दिल्ली/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अदम्य साहसपूर्ण भूमिका और आजादी के बाद समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया। स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर नायिका प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि पार्वती गिरि जी ने विदेशी शासन के खिलाफ आंदोलन में बेहद सराहनीय भूमिका निभाई थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी करने वाली पार्वती गिरि अपनी अटूट देशभक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्हें उनके सेवा भाव के कारण ‘ओडिशा की मदर टेरेसा’ के नाम से भी जाना जाता है।

    महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय कार्य प्रधानमंत्री ने पार्वती गिरि के सामुदायिक सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्कृति के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को ही अपना धर्म माना। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पिछले महीने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी पार्वती गिरि जी के जीवन संघर्ष और उनकी महानता का विशेष उल्लेख किया था।   एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व पार्वती गिरि जी का जन्म 19 जनवरी 1926 को हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों की सेवा और जेल सुधार जैसे रचनात्मक कार्यों में समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी जन्म शताब्दी पर देशवासी उनके आदर्शों को अपनाकर एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेंगे।