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  • PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता

    PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ईरान (Iran) के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन (President Dr. Masoud Pezeshkian) से मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया (West Asia) की हालिया घटनाओं और आगे की दिशा की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। पीएम मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए भारत की स्थिर नीति को दोहराया कि क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्य की सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व को भी सामने रखा गया।

    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात हुई। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार कोशिशों से इस इलाके में स्थायी शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया।’ इससे पहले, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने वाला है। खबरों के मुताबिक, सरकार भारत के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को इन समारोह में भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी।


    भारत-ईरान के रिश्ते में उतार-चढ़ाव

    भारत और ईरान के मौजूदा संबंध काफी जटिल और रणनीतिक महत्व वाले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक गहराई है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए ऑपरेट करने का समझौता किया, जिसमें 120 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल था। 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने पोर्ट पर अपनी गतिविधियां कम कीं और वादा किया राशि का भुगतान पूरा कर लिया।

    होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया, जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु पर भारत ने शोक व्यक्त किया और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखा। ऊर्जा आयात लगभग बंद हो गया है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया पहुंच के लिए चाबहार अभी भी अहम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित हैं। भारत ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मानता है, जबकि ईरान भारत को बड़े बाजार और निवेशक के रूप में देखता है।

  • सुप्रीम व्याख्या में नया दृष्टिकोण, हिंदुत्व को बताया जीवन जीने का तरीका..

    सुप्रीम व्याख्या में नया दृष्टिकोण, हिंदुत्व को बताया जीवन जीने का तरीका..

    नई दिल्ली । धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दों पर चल रही एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान न्यायिक दृष्टिकोण से एक ऐसा विचार सामने आया है, जिसने धार्मिक पहचान और उसके स्वरूप को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी धर्म को केवल बाहरी क्रियाओं या अनुष्ठानों के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन जीने के तरीके और उसकी आंतरिक आस्था से भी जुड़ा होता है।

    सुनवाई के दौरान यह कहा गया कि
    Hinduism
    को केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक स्थलों पर जाने तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसे एक जीवनशैली के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें व्यक्ति अपने विश्वास को विभिन्न तरीकों से व्यक्त करता है। आस्था किसी एक निश्चित ढांचे में बंधी हुई नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति के व्यवहार, सोच और दैनिक जीवन में भी झलकती है।

    इस विचार के अनुसार किसी व्यक्ति को अपने धर्म को साबित करने के लिए मंदिर जाना या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान का पालन करना अनिवार्य नहीं है। धार्मिक पहचान को बाहरी प्रदर्शन से नहीं बल्कि आंतरिक विश्वास से समझा जाना चाहिए। यहां तक कि घर में दीपक जलाना भी आस्था की अभिव्यक्ति का एक सरल और व्यक्तिगत रूप माना जा सकता है।

    सुनवाई के दौरान यह भी चर्चा हुई कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार हर व्यक्ति को अपने तरीके से आस्था व्यक्त करने की अनुमति देता है। किसी भी व्यक्ति पर यह दबाव नहीं डाला जा सकता कि वह केवल एक ही तरीके से अपने धर्म का पालन करे। यह विचार धार्मिक विविधता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मजबूत आधार देता है।

    यह मामला उन कई याचिकाओं से जुड़ा है जिनमें धार्मिक परंपराओं और सामाजिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की मांग की गई है। इनमें कुछ विवाद ऐसे हैं जो वर्षों से धार्मिक स्थलों में प्रवेश और परंपरागत प्रथाओं को लेकर समाज में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन मामलों ने यह सवाल भी उठाया है कि आधुनिक संवैधानिक मूल्यों और पारंपरिक आस्थाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

    सुनवाई में यह भी चिंता जताई गई कि यदि हर धार्मिक प्रथा को लगातार कानूनी चुनौती दी जाती रही, तो इससे समाज में अनावश्यक विवाद बढ़ सकते हैं और धार्मिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए यह जरूरी माना गया कि धर्म से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और समझदारी के साथ दृष्टिकोण अपनाया जाए।

    पुराने एक महत्वपूर्ण धार्मिक विवाद का संदर्भ भी इस चर्चा से जुड़ा रहा, जिसने पहले भी देशभर में व्यापक बहस को जन्म दिया था। उस विवाद ने धार्मिक परंपराओं और समानता के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी

    मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी: कहा‑ भारत ने मुझे धोखा दिया, काम मिलना बंद, ईरान आज़ाद होते ही लौटूंगी



    नई दिल्ली। ईरानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मंदाना करीमी ने बड़ा बयान दिया है कि वह जल्द ही भारत छोड़कर अपने देश ईरान लौटने का निर्णय कर चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि भारत में अब उनकी कोई आवाज़ नहीं बची है और उन्हें ‘भारत ने धोखा दिया’ जैसा महसूस हो रहा है।

    मंदाना, जिन्होंने कई फिल्मों और रियलिटी शो में अपनी पहचान बनाई थी, ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने अपना सारा सामान पहले से ही पैक कर लिया है और जैसे ही ईरान में मौजूदा शासन बदलने का ऐलान होगा, वह तुरंत वहीं लौट जाएँगी। उन्होंने कहा कि वह भारत से अब अपना नाता तोड़ रही हैं।

    क्या कहा मंदाना ने?
    मंदाना ने कहा, “मैं भारत से ब्रेकअप कर रही हूँ। भारत ने मुझे मॉडलिंग और एक्टिंग करियर दिया, लेकिन अब मुझे लगता है कि यहाँ मेरी आवाज़ नहीं सुनी जाती।
    उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्हें काम बिल्कुल नहीं मिल रहा और उनके कई कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं। इसका कारण वह अपनी खुली राय और ईरान के समर्थन में प्रदर्शन मानती हैं।

    मंदाना ने कहा कि मुंबई में अकेलापन महसूस हुआ, और कुछ पुराने दोस्त भी उनसे दूर हो गए क्योंकि उन्होंने बहुत खुले तौर पर राय व्यक्त की।

    ईरान के प्रति उनकी राय
    मंदाना ने कहा कि उनका सपना एक ऐसा ईरान है जहाँ महिलाएं आज़ाद हों, अपनी मर्जी के कपड़े पहन सकें और किसी भी यूनिवर्सिटी में पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि ईरान में राजनीतिक बदलाव आने पर वह तुरंत वापस चली जाएँगी।

    काम और मीडिया में गिरावट
    एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया, और कई कॉन्ट्रैक्ट भी कैंसिल हो गए। मंदाना ने यह अपने राजनीतिक बयान और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से जोड़कर बताया।
    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उन्होंने भारतीय मीडिया पर ‘एकतरफ़ा कवरेज़’ का आरोप लगाया है और चाहती हैं कि वैकल्पिक आवाज़ों को भी मंच मिले।


    उनका बॉलीवुड सफर
    मंदाना करीमी का जन्म तेहरान, ईरान में हुआ।
    वह 2010 में मॉडलिंग के लिए भारत आईं और 2013 से मुंबई में ही बस गईं।
    उन्होंने ‘क्या कूल हैं हम 3’, ‘मैं और चार्ल्स’, ‘भाग जॉनी’ जैसी फिल्मों में काम किया और ‘बिग बॉस’ और ‘लॉकअप’ जैसे रियलिटी शो में भी हिस्सा लिया।
    2017 में उनका भारतीय बिजनेसमैन गौरव गुप्ता से विवाह हुआ, लेकिन 2021 में उनका तलाक हो गया था।
    मंदाना करीमी ने कहा है कि वह भारत छोड़ेंगी क्योंकि उन्हें लगता है कि यहाँ उनकी आवाज़ दब गई है और उन्हें धोखा महसूस हुआ है। उन्होंने कहा है कि काम मिलना बंद हो गया है और कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो गए हैं। वह ईरान में बदलाव आने पर वापस लौटना चाहती हैं, खासकर महिलाओं के अधिकारों और आज़ादी के लिए।उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की है कि रिपोर्टिंग एकतरफ़ा है।
  • दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत

    दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत


    नई दिल्ली। 12 फरवरी, 2026 को अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले ICC T20 वर्ल्ड कप मैच के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मेट्रो समय सारिणी में खास बदलाव किया है। मैच के कारण स्टेडियम और आसपास भारी भीड़ के मद्देनजर DMRC ने प्रमुख मेट्रो लाइनों पर आखिरी ट्रेन का समय लगभग 90 मिनट तक बढ़ा दिया है, ताकि दर्शक और सामान्य यात्री आसानी से घर लौट सकें।

    रेड लाइन (लाइन 1) पर शहीद स्थल से रिठाला रूट की आखिरी ट्रेन अब रात 12:10 से 12:15 बजे तक चलेगी। येलो लाइन (लाइन 2) पर समयपुर बादली से गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर तक ट्रेन 12:20 बजे तक उपलब्ध रहेगी। ब्लू लाइन (लाइन 3 और 4) की नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से द्वारका सेक्टर 21 तक की आखिरी ट्रेनें 11:35 और 11:45 बजे तक चलेंगी। ग्रीन लाइन (लाइन 5) की कुछ ट्रेनें 1:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। वायलेट, पिंक, मैजेंटा, ग्रे लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी ट्रेन समय में बदलाव किया गया है।

    DMRC ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल 12 फरवरी के लिए है। 13 फरवरी से मेट्रो टाइमिंग पहले की तरह सामान्य हो जाएगी। इस निर्णय से न केवल मैच देखने वाले दर्शकों को सुविधा मिली है, बल्कि देर रात सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिली है।

    DMRC के इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि मैच खत्म होने के बाद भी लोग सुरक्षित और समय पर घर पहुंच सकें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार बनाएं और भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त समय रखें।

  • रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं

    रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं


    मास्को।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच नए व्यापार समझौते (New trade Agreements.) के बाद एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा या नहीं? हालांकि, इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस (Russia) ने अब इस पर स्पष्ट जवाब दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने हाल ही में दावा किया था कि भारत अब रूसी तेल की खरीद रोक देगा, लेकिन रूस ने इस पर प्रतिकार करते हुए कहा है कि भारत पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह किस देश से तेल खरीदे।

    रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत कोई एकमात्र देश नहीं है जो रूस से तेल खरीदता है। भारत हमेशा से विभिन्न देशों से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता रहा है, और इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ जानते हैं कि भारत रूस का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है। यह बयान ट्रंप के उस दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से तेल खरीदने पर सहमति जताई है। पेस्कोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस को इस मामले में नई दिल्ली से कोई जानकारी नहीं मिली है, और रूस अपने भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है।

    ट्रंप का दावा और भारत का रुख
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते में भारत के लिए टैरिफ में कमी शामिल है, और इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, इस पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, और न ही प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट में रूस से तेल खरीदने पर कोई उल्लेख किया गया है। रूसी तेल आयात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान में कोई प्रतिबद्धता या समझौता नहीं था, जबकि ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद यह तय हुआ कि भारत अमेरिकी तेल का आयात बढ़ाएगा और रूस से तेल खरीदने की मात्रा घटाएगा।

    भारत और रूस के ऊर्जा संबंध
    रूस के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रूस से प्रतिदिन 15 लाख से 20 लाख बैरल तेल आयात करता है, जो अमेरिका से प्राप्त शेल तेल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। शेल तेल हल्के ग्रेड का होता है, जबकि रूस का यूराल तेल भारी और सल्फर युक्त होता है। इस वजह से भारत को अमेरिकी कच्चे तेल को अन्य ग्रेड के तेल के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। इसलिए, रूस का कहना है कि ट्रंप का दावा एक तरह से दिखावा हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी तेल रूस के तेल का सीधे विकल्प नहीं बन सकता। यह स्थिति दिखाती है कि भारत और रूस के बीच तेल संबंधों में कोई तत्काल बदलाव होने की संभावना नहीं है, और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विभिन्न स्रोतों से आपूर्ति पर निर्भर रहेगा।

  • आजादी भीख से नहीं, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी…आतंकी अबू मूसा ने PoK में उगला जहर…

    आजादी भीख से नहीं, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी…आतंकी अबू मूसा ने PoK में उगला जहर…


    इस्लामाबाद।
    पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) सुधरने का नाम नहीं ले रहा। वह आतंक का पर्याय बना हुआ है। भारत (India) की तमाम हिदायतों के बावजूद वह आतंकियों (Terrorists) को ना सिर्फ पाल पोश रहा है बल्कि उसे सुरक्षित ठिकाना दे रहा है। उसी का नतीजा है कि वहां के आतंकियों ने फिर से भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Terrorist organization Lashkar-e-Taiba) के आतंकी अबू मूसा कश्मीरी (Abu Musa Kashmiri) ने हिन्दुओं की गर्दन काटने की धमकी दी है। उसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह खुले तौर पर हिंदुओं को मौत के घाट उतारने की बात कर रहा है।

    उसने यह बयान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दिया है। इसका वीडियो भी सामने आया है। हालांकि ये वीडियो कब का है? इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। इस वीडियो में मूसा को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि “कश्मीर मुद्दे का हल सिर्फ आतंकवाद और जिहाद से ही हो सकता है। आजादी भीख मांगने से नहीं, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी। हमें जिहाद का झंडा उठाना होगा।” इस वायरल वीडियो में मूसा अपने भड़काऊ भाषण में यहां तक कह रहा है कि वो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने भी कत्लेआम की बात करता है।


    आतंकी की पहुंच PM शहबाज तक

    हालांकि, हम इस वीडियो की पुष्टि नहीं करते, लेकिन सोशल मीडिया पर इस वीडियो के पोस्ट में दावा किया गया है कि मूसा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सीनियर मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से बताया है कि उसके विचार में कश्मीर मुद्दे को “जिहाद की आड़ में किए गए आतंकवाद के ज़रिए ही” सुलझाया जा सकता है। उसका यह दावा, इस बात की तस्दीक है कि इन आतंकवादियों की पहुंच पाकिस्तान सरकार और सेना के आलाकमान तक है।


    कौन है आतंकी अबू मूसा कश्मीरी?

    अबू मूसा कश्मीरी लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है। वह LeT से जुड़े संगठन जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट (JKUM) का सीनियर कमांडर है। उसका नाम पिछले साल अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले से भी जुड़ा था। वह तब पहलगाम में हमलावर आतंकियों को आदेश दे रहा था। उसके साथ दूसरा आतंकी रिजवान हनीफ भी इसमें सामिल था। सूत्रों का दावा है कि पहलगाम अटैक का मास्टरमाइंड अबू मूसा ही है। ये सैफुल्लाह कसूरी का करीबी भी है।


    पाकिस्तानी नेताओं पर भी गंभीर आरोप

    अपने भाषण में अबू मूसा ने पाकिस्तानी नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि पाकिस्तान के नेता इस्लामी सिद्धांतों से भटक चुके हैं और जिहाद के रास्ते पर नहीं चल रहे हैं। उसने कहा जो नेता जिहाद के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, उसे पाकिस्तान पर हुकूमत करने का कोई अधिकार नहीं है। मूसा ने दावा किया कि वह पहले भी ऐसे ही बयान मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुई एक बैठक में दे चुका है।


    भारत की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

    पाक अधिकृत कश्मीर में दिए गए इस भड़काऊ भाषण का वीडियो सामने आने के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अबू मूसा ने यह बयान तब दिया है, जब हाल ही में LeT के टॉप कमांडर अबू कताल की मौत हुई है। कताल को शनिवार रात पाकिस्तान के सिंध के झेलम इलाके में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। LeT ​​के संस्थापक हाफिज सईद के करीबी सहयोगी, कताल इस ग्रुप का चीफ ऑपरेशनल कमांडर था। जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों की योजना बनाने के लिए उसे जाना जाता था। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने राजौरी आतंकी हमले से जुड़ी अपनी चार्जशीट में कताल के साथ-साथ लश्कर-ए-तैयबा के चार अन्य लोगों का नाम भी शामिल किया है। यह मामला 1 जनवरी, 2023 को राजौरी के ढांगरी गांव पर हुए हमले से जुड़ा है, जिसमें आतंकवादियों ने एक जानलेवा हमला किया था जिसमें सात लोग मारे गए थे।