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  • आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    आजादी के 80वें पर्व पर स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का निधन, रीवा में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

    मध्य प्रदेश: के रीवा जिले में स्वतंत्रता दिवस का दिन एक ओर देशभक्ति के उत्सव और दूसरी ओर एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की अंतिम विदाई का गवाह बना। जवा तहसील के डोरी-भितरी गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह का 15 अगस्त 2026 को निधन हो गया। जिस दिन देश आजादी का 80वां पर्व मना रहा था, उसी दिन गांव ने उस सेनानी को अंतिम विदाई दी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए जेल की सजा भुगती थी।

    जवाहर सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1932 के राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें छह महीने के कारावास की सजा हुई थी। इसके साथ ही उन पर 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य चरणों में भी योगदान दिया और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तथा नमक आंदोलन से जुड़े रहे।

    स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल जाने और आर्थिक दंड भुगतने के बावजूद जवाहर सिंह की देश के प्रति प्रतिबद्धता कम नहीं हुई। आजादी के बाद भी उन्होंने सामाजिक जीवन में अपनी जिम्मेदारियों को महत्व दिया और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों और उसके मूल्यों के बारे में बताते रहे।

    उनके परिवार के अनुसार, जवाहर सिंह स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को अपने बच्चों और पोतों तक पहुंचाते रहे। उनका मानना था कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि देश को स्वतंत्रता आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए अनेक लोगों ने संघर्ष, त्याग और कठिनाइयों का सामना किया था।

    स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मिलने वाली सम्मान निधि को लेकर भी जवाहर सिंह की सोच अलग रही। बताया जाता है कि उन्होंने शुरुआती दौर में सम्मान निधि लेने से इनकार कर दिया था। उनका विचार था कि शासन की राशि का उपयोग जनहित और देशहित के कार्यों में किया जाना चाहिए। बाद में उन्होंने इस उम्मीद के साथ सम्मान निधि स्वीकार की कि उनके परिवार को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के रूप में सम्मान और पहचान मिलती रहे।

    जवाहर सिंह के तीन पुत्र कमल नारायण सिंह, कमलाकर सिंह और प्रभाकर सिंह हैं। परिवार ने उनके जीवन से जुड़े स्वतंत्रता आंदोलन के अनुभवों और मूल्यों को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके निधन के बाद परिवार के साथ क्षेत्र के लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    15 अगस्त को उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया राजकीय सम्मान के साथ पूरी की गई। अंतिम यात्रा में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने पुष्पचक्र और पुष्प अर्पित कर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पुलिस जवानों की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।

    अंतिम संस्कार में सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, राज्यसभा सांसद राजमणि सिंह पटेल, युवराज घनश्याम सिंह बसरेही, संचार निर्माण समिति अध्यक्ष प्रवल पाण्डेय, जवा तहसीलदार राजेश शुक्ला और अतरैला थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। जवाहर सिंह के बड़े पुत्र कमल नारायण सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    जवाहर सिंह के अंतिम संस्कार में हजारों ग्रामीणों के शामिल होने की बात सामने आई। लोगों ने उनकी पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए और अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता दिवस के दिन गांव में तिरंगे और देशभक्ति के वातावरण के बीच शोक का माहौल भी दिखाई दिया।

    जवाहर सिंह का सार्वजनिक जीवन में भी क्षेत्र के कई प्रमुख लोगों से संपर्क रहा। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी उनका संपर्क रहा था। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी और सामाजिक जीवन में सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई।

    जवाहर सिंह की अंतिम विदाई उस पीढ़ी को सम्मान देने का अवसर भी बनी, जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा संघर्ष में बिताया। 15 अगस्त को जब देश आजादी का उत्सव मना रहा था, उसी दिन रीवा के डोरी-भितरी गांव ने एक स्वतंत्रता सेनानी को अंतिम सलामी देकर उनके योगदान को याद किया।

  • वीर सावरकर की वीरता और समर्पण: अमित शाह सहित मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का सम्मान

    वीर सावरकर की वीरता और समर्पण: अमित शाह सहित मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का सम्मान


    नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण हर राष्ट्रप्रेमी के लिए राष्ट्रप्रथम का ज्योति स्तंभ बना रहेगा। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर आजादी के आंदोलन के उन नायकों में थे जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से स्वतंत्रता व सांस्कृतिक स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया।

    सावरकर ने क्रांतिकारी विचारों से स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक आधार दिया और देश से लेकर इंग्लैंड तक अपने साहसी अभियानों से युवाओं को प्रेरित किया। उनके त्याग समर्पण और वीरता की गाथाएं अनंत काल तक राष्ट्रप्रेमियों के लिए प्रेरणा स्तंभ बनी रहेंगी।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने उन्हें ओजस्वी क्रांतिकारी और तेजस्वी विचारक बताते हुए लिखा कि उनका संघर्ष भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने वीर सावरकर को प्रखर क्रांतिकारी एवं दूरदर्शी चिंतक बताया जिनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठ चिंतन देशवासियों के लिए कर्तव्यबोध और आत्मसम्मान की प्रेरणा है।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने उन्हें मां भारती के अमर सपूत और महान विचारक बताते हुए उनके जीवन को साहस और धैर्य का पर्याय बताया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि वीर सावरकर का त्याग और तप हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने लिखा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र के प्रति अनन्य निष्ठा की अमर गाथा है जिसने जनता में स्वाभिमान का भाव जागृत किया। केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chauhan और Manohar Lal ने भी वीर सावरकर के त्याग साहस और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अदम्य योगदान को कोटिशः नमन अर्पित किया।इस प्रकार स्वातंत्र्यवीर वीर सावरकर का बहुआयामी व्यक्तित्व-साहस साहित्य समाज सुधार और राष्ट्रभक्ति-देशभर में आज भी प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा और आदर्श बना हुआ है।