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  • जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान

    जबलपुर के डॉक्टरों का चमत्कार 22 साल की महिला के पेट से निकाला 22 किलो का ट्यूमरनया जीवन दान



    जबलपुर । जबलपुर संस्कारधानी के चिकित्सा इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। यहाँ के सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी निपुणता का परिचय देते हुए एक 22 वर्षीय युवती को नया जीवन प्रदान किया है। युवती के पेट में पिछले काफी समय से एक विशालकाय गांठ पल रही थीजिसे एक बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।

    22 किलो का विशालकाय ट्यूमर देख कर डॉक्टर भी रह गए हैरान
    मरीज जब अस्पताल पहुँचीतो उसका पेट काफी फूल चुका था और उसे सांस लेने व चलने-फिरने में गंभीर समस्या हो रही थी। जांच के बाद पता चला कि उसके पेट में इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर है। इस ट्यूमर का आकार और वजन इतना अधिक था कि इसने शरीर के अन्य अंगों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। ऑपरेशन के बाद जब ट्यूमर का वजन किया गयातो वह लगभग 22 किलो निकला। युवती की उम्र और ट्यूमर के वजन का यह दुर्लभ संयोग चिकित्सा क्षेत्र में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

    आयुष्मान भारत योजना बनी मददगार

    इस मामले की सबसे सुखद बात यह रही कि गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस युवती को इलाज के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा। आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना AB-PMJAY के तहत यह पूरी सर्जरीदवाइयाँ और अस्पताल का खर्च पूरी तरह निःशुल्क रहा। इस योजना ने एक बार फिर साबित किया कि यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    अनुभवी टीम का समन्वय और सफलता

    यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थीक्योंकि इतने बड़े ट्यूमर को निकालते समय रक्तस्राव और अंगों की क्षति का खतरा बना रहता है। अस्पताल की अनुभवी सर्जिकल टीमएनेस्थीसिया विशेषज्ञों और ओटी स्टाफ के बेहतर तालमेल और तकनीकी दक्षता के कारण यह ऑपरेशन सफल रहा। सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया हैजहाँ उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।

    संस्थान का संकल्प सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज

    सुखसागर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है। संस्थान ने दोहराया कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इस सफल ऑपरेशन ने न केवल अस्पताल का मान बढ़ाया हैबल्कि जबलपुर को चिकित्सा हब के रूप में भी मजबूती दी है मरीज 22 वर्षीय युवती। ट्यूमर का वजन लगभग 22 किलोग्राम। अस्पताल सुखसागर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटलजबलपुर। योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज। र्जरी का प्रकार दुर्लभ इंट्रा-एब्डॉमिनल पेल्विक ट्यूमर।

  • आयुष्मान कार्ड: साल भर मुफ्त इलाज की सच्चाई और 5 लाख रुपये की सीमा

    आयुष्मान कार्ड: साल भर मुफ्त इलाज की सच्चाई और 5 लाख रुपये की सीमा


    भारत / सरकार ने आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें आयुष्मान भारत योजना सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में गिना जाता है।

    क्या सच में साल भर मुफ्त इलाज मिलता है?

    आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अक्सर लाभार्थियों के मन में यही सवाल उठता है कि क्या वे पूरे साल अस्पताल में मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। असल में, योजना तकनीकी रूप से साल में असीमित भर्ती की सुविधा देती है, लेकिन 5 लाख रुपये की वार्षिक सीमा तक ही कैशलेस इलाज संभव है।

    5 लाख की वार्षिक सीमा का मतलब

    यह राशि पूरा परिवार के लिए होती है, न कि प्रति व्यक्ति।

    उदाहरण: यदि परिवार में 6 सदस्य हैं, तो 5 लाख रुपये किसी एक सदस्य के इलाज या सभी के इलाज में साझा किए जा सकते हैं।

    वार्षिक सीमा पूरी होने के बाद का खर्च मरीज को खुद वहन करना होगा।

    किस इलाज में मिलता है लाभ?

    योजना मुख्य रूप से गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती इलाज के लिए है।

    OPD, ब्लड टेस्ट, एक्स-रे या मामूली दवाइयाँ योजना में शामिल नहीं।

    गंभीर इलाज जैसे:

    हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट

    प्रोस्टेट कैंसर

    किडनी ट्रांसप्लांट

    कोरोनरी एंजियोप्लास्टी

    न्यूरो सर्जरी

    सभी प्रक्रियाएं कैशलेस होती हैं और मरीज भारी बिल से राहत पाता है।

    घर बैठे बनाएं अपना आयुष्मान कार्ड

    पहले कार्ड बनवाने के लिए कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो गई है।

    Ayushman App डाउनलोड करें और अपने स्मार्टफोन से कार्ड बनवाएं।

    लॉगिन के लिए मोबाइल नंबर और आधार का उपयोग होता है।

    राज्य और जिले का चयन कर परिवार की पात्रता (Eligibility) चेक की जा सकती है।

    यदि किसी सदस्य का नाम लिस्ट में है लेकिन कार्ड जनरेट नहीं हुआ है, तो ‘Authenticate’ विकल्प से e-KYC पूरी की जा सकती है।

    वेरिफिकेशन के एक हफ्ते के भीतर कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है।

    आयुष्मान कार्ड गंभीर बीमारियों के लिए साल में कैशलेस इलाज प्रदान करता है, लेकिन यह सुविधा 5 लाख रुपये की वार्षिक सीमा तक ही है और पूरे परिवार के लिए साझा होती है।