Tag: Friday Fast

  • संतोषी माता व्रत का पूरा विधान जानें कब रखें कैसे करें पूजा और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

    संतोषी माता व्रत का पूरा विधान जानें कब रखें कैसे करें पूजा और किन बातों का रखें विशेष ध्यान


    नई दिल्ली । संतोषी माता का व्रत हिंदू धर्म में सबसे लोकप्रिय और श्रद्धा से किए जाने वाले व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से शुक्रवार के दिन रखा जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से संतोषी माता का व्रत करते हैं उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख शांति समृद्धि तथा संतोष का वास होता है। यह व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते हैं। विवाह में बाधा संतान सुख आर्थिक परेशानियों और पारिवारिक कलह जैसी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।

    संतोषी माता का व्रत किसी भी शुक्रवार से शुरू किया जा सकता है। सामान्य रूप से लगातार 16 शुक्रवार तक यह व्रत रखने की परंपरा है। यदि किसी कारणवश बीच में व्रत छूट जाए तो अगले शुक्रवार से फिर श्रद्धापूर्वक व्रत जारी रखा जा सकता है। व्रत की शुरुआत से पहले माता का स्मरण कर अपनी मनोकामना का संकल्प लिया जाता है।

    व्रत वाले दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल में संतोषी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। माता को लाल या पीला वस्त्र अर्पित करें और धूप दीप जलाकर पूजा करें। गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाना इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। इसके बाद संतोषी माता की व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण या पाठ करें। कथा के बाद आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें।

    संतोषी माता के व्रत में सबसे महत्वपूर्ण नियम खट्टी वस्तुओं का त्याग है। व्रत करने वाला स्वयं तो खट्टी चीजें नहीं खाता ही है साथ ही व्रत के दिन किसी अन्य को भी खट्टी वस्तु खिलाने से बचना चाहिए। नींबू इमली आमचूर अचार दही में खट्टापन और अन्य अम्लीय खाद्य पदार्थों से इस दिन परहेज किया जाता है। मान्यता है कि इस नियम का पालन करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

    व्रत के दौरान श्रद्धालु दिनभर फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। पूजा में माता के समक्ष अपनी मनोकामना व्यक्त करते हुए परिवार की सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। पूरे व्रत काल में संयम सकारात्मक सोच और संतोष का भाव बनाए रखना भी इस व्रत का प्रमुख संदेश माना जाता है।

    जब 16 शुक्रवार का व्रत पूरा हो जाए तब उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के दिन संतोषी माता की विशेष पूजा की जाती है और गुड़ चने का प्रसाद वितरित किया जाता है। परंपरा के अनुसार आठ बच्चों को भोजन कराया जाता है और उन्हें दक्षिणा तथा उपहार भी दिए जाते हैं। भोजन में भी किसी प्रकार की खट्टी वस्तु शामिल नहीं की जाती। इसके बाद माता का आशीर्वाद लेकर व्रत का समापन किया जाता है।

    धार्मिक मान्यता है कि संतोषी माता का व्रत केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का माध्यम नहीं बल्कि जीवन में संतोष धैर्य और सकारात्मकता का संदेश भी देता है। जो व्यक्ति श्रद्धा विश्वास और नियमों के साथ यह व्रत करता है उसके जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है तथा परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

  • वैभव लक्ष्मी व्रत: समृद्धि और सुख-शांति का पावन उपाय, जानें सही विधि और जरूरी नियम

    वैभव लक्ष्मी व्रत: समृद्धि और सुख-शांति का पावन उपाय, जानें सही विधि और जरूरी नियम


    नई दिल्ली
    ।हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। वैभव लक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी के उसी स्वरूप की उपासना का विशेष माध्यम है, जो जीवन में आर्थिक स्थिरता, मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली प्रदान करता है। यह व्रत मुख्य रूप से शुक्रवार के दिन रखा जाता है और इसे विशेष रूप से व्यापार, नौकरी, पारिवारिक कलह और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से की जा सकती है। व्रत करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में 11 या 21 शुक्रवारों तक व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए। हालांकि, मलमास या खरमास में इस व्रत की शुरुआत या उद्यापन नहीं करना चाहिए।

    वैभव लक्ष्मी व्रत की सही पूजा विधि

    व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। पूजा हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए।लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही श्रीयंत्र, कलश और चांदी का सिक्का रखें। माता लक्ष्मी को सिंदूर, रोली, मौली, लाल फूल, फल और खीर का भोग अर्पित करें। इसके बाद विधिपूर्वक वैभव लक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें। कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।पूजा के अंत में माता लक्ष्मी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों की सुख-समृद्धि की कामना करें।

    व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

    वैभव लक्ष्मी व्रत के दिन सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज़ करें। प्याज, लहसुन, मांसाहार और खट्टी चीज़ों का सेवन न करें। फल, दूध, मखाने और हल्का सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता आवश्यक है। नकारात्मक विचारों से दूर रहें और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए श्रद्धा बनाए रखें। व्रत के दिन जरूरतमंदों को दान देना और सेवा करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

    वैभव लक्ष्मी व्रत के लाभ

    वैभव लक्ष्मी व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से व्यक्ति को आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानसिक तनाव कम होता है और आत्मिक शुद्धता प्राप्त होती है।इसके साथ ही व्यवसाय और नौकरी में उन्नति के नए अवसर बनते हैं। पारिवारिक कलह दूर होती है और पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है। कुल मिलाकर, वैभव लक्ष्मी व्रत जीवन में समृद्धि, खुशहाली और स्थिरता लाने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली धार्मिक अनुष्ठान है।