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  • गमले या आंगन में उगाएं जामुन का पेड़, पौधा लगाने से लेकर खाद-पानी और प्रूनिंग तक जानें आसान देखभाल के तरीके

    गमले या आंगन में उगाएं जामुन का पेड़, पौधा लगाने से लेकर खाद-पानी और प्रूनिंग तक जानें आसान देखभाल के तरीके

    नई दिल्ली । घर के आंगन, किचन गार्डन या बड़े गमले में फलदार पौधे लगाने का शौक रखने वालों के लिए जामुन का पौधा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जामुन गर्म जलवायु में अच्छी तरह विकसित होने वाला फलदार पेड़ है और उचित देखभाल मिलने पर लंबे समय तक बढ़ता रहता है। मानसून के दौरान मिट्टी में नमी रहने के कारण पौधे को नई जगह पर स्थापित होने में मदद मिल सकती है। हालांकि पौधा लगाने से पहले जगह, मिट्टी, पानी और धूप से जुड़ी कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

    घर पर जामुन उगाने के लिए बीज के बजाय अच्छी नर्सरी से स्वस्थ पौधा लेना अधिक सुविधाजनक हो सकता है। बीज से तैयार पौधे को फल देने में ज्यादा समय लग सकता है, जबकि अच्छी किस्म का ग्राफ्टेड या नर्सरी से प्राप्त पौधा अपेक्षाकृत जल्दी फल देने की स्थिति में पहुंच सकता है। पौधा खरीदते समय उसकी किस्म, उम्र और फल आने की संभावित अवधि की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

    जामुन का पौधा लगाने के लिए ऐसी जगह का चुनाव करें जहां रोजाना पर्याप्त मात्रा में धूप पहुंचती हो। सीधी धूप मिलने से पौधे की बढ़त बेहतर हो सकती है। अगर इसे जमीन में लगाया जा रहा है तो आसपास पर्याप्त खुली जगह होना जरूरी है, क्योंकि समय के साथ जामुन का पेड़ काफी बड़ा हो सकता है। इसे दीवार, पाइप, फर्श या दूसरी स्थायी संरचनाओं से उचित दूरी पर लगाना बेहतर रहता है।

    मिट्टी का चुनाव भी पौधे की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। जामुन के पौधे के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर रहती है जिसमें पानी आसानी से निकल सके। जिस मिट्टी में लंबे समय तक पानी जमा रहता है, वहां जड़ों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। पौधा लगाने से पहले मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद या कंपोस्ट मिलाने से मिट्टी की संरचना बेहतर करने और शुरुआती पोषण देने में मदद मिल सकती है।

    जमीन में पौधा लगाने के लिए उसकी जड़ों के आकार से थोड़ा बड़ा गड्ढा तैयार करें। गड्ढे में मिट्टी और कंपोस्ट का मिश्रण डालकर पौधे को सावधानी से रखें। इस दौरान जड़ों को मोड़ने या दबाने से बचें। पौधा लगाने के बाद आसपास की मिट्टी को हल्के हाथ से दबाएं और पर्याप्त पानी दें। हालांकि शुरुआती दिनों में मिट्टी को लगातार बहुत ज्यादा गीला रखने से बचना चाहिए।

    अगर जामुन का पौधा गमले में लगाना चाहते हैं तो सामान्य छोटे गमले के बजाय बड़ा और मजबूत कंटेनर चुनना बेहतर रहेगा। गमले के नीचे पानी की निकासी के लिए पर्याप्त छेद होने चाहिए। जैसे-जैसे पौधे की जड़ें और आकार बढ़ें, जरूरत के अनुसार उसे बड़े कंटेनर में स्थानांतरित किया जा सकता है। गमले में उगाए गए पौधे के लिए धूप और पानी की मात्रा पर विशेष नजर रखना जरूरी है।

    नए लगाए गए पौधे को शुरुआत में नियमित सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन हर बार पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत की नमी जांचना बेहतर है। यदि मिट्टी पहले से नम है तो तुरंत पानी देने की आवश्यकता नहीं होती। पौधे के स्थापित होने के बाद पानी की जरूरत मौसम, मिट्टी और पौधे की स्थिति के अनुसार बदल सकती है।

    अच्छी ग्रोथ के लिए समय-समय पर जैविक कंपोस्ट या उपयुक्त खाद दी जा सकती है। बहुत अधिक खाद देने से बचना चाहिए। सूखी, कमजोर और आपस में रगड़ खाने वाली शाखाओं को समय-समय पर हटाने से पौधे का आकार व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है। फल आने का समय जामुन की किस्म, पौधे की उम्र, मौसम और देखभाल पर निर्भर करता है। इसलिए पौधा लगाते समय धैर्य रखना जरूरी है। सही पौधा, पर्याप्त धूप, अच्छी जल निकासी और संतुलित देखभाल के साथ घर में लगाया गया जामुन का पौधा आने वाले वर्षों में फलदार पेड़ का रूप ले सकता है।

  • नवरात्रि व्रत में नहीं होगी थकान: ये 4 सुपरफूड्स रखेंगे आपको दिनभर एनर्जेटिक

    नवरात्रि व्रत में नहीं होगी थकान: ये 4 सुपरफूड्स रखेंगे आपको दिनभर एनर्जेटिक


    नई दिल्ली । शक्ति की उपासना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं कोई पहले और आखिरी दिन तो कोई पूरे नौ दिन उपवास करता है। हालांकि अक्सर गलत खान पान के कारण व्रत के दौरान कमजोरी थकान सिरदर्द और सुस्ती महसूस होने लगती है जिसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है।

    दरअसल व्रत का असली लाभ तभी मिलता है जब आपका आहार संतुलित सात्विक और पोषण से भरपूर हो। अगर सही चीजों का चुनाव किया जाए तो न केवल शरीर ऊर्जावान बना रहता है बल्कि मन भी शांत और एकाग्र रहता है। ऐसे में आइए जानते हैं 4 ऐसे सुपरफूड्स के बारे में जिन्हें व्रत की थाली में शामिल कर आप पूरे दिन एनर्जी से भरपूर रह सकते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं मखाना की जिसे व्रत का सबसे हेल्दी और गिल्ट फ्री स्नैक माना जाता है। इसमें कैलोरी कम और प्रोटीन अधिक होता है। साथ ही यह फाइबर मैग्नीशियम और पोटैशियम का अच्छा स्रोत है। मखाना खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती और यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। आप इसे हल्के घी में भूनकर या खीर बनाकर खा सकते हैं।

    दूसरा सुपरफूड है साबूदाना। जब शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है तब यह सबसे बेहतर विकल्प बन जाता है। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर और ग्लूटेन फ्री साबूदाना जल्दी पचता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। हालांकि इसमें प्रोटीन कम होता है इसलिए इसे दही या मूंगफली के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। साबूदाने की खिचड़ी या वड़ा स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संयोजन है।

    तीसरा महत्वपूर्ण आहार है कुट्टू का आटा । यह पोषण का खजाना माना जाता है जिसमें मैग्नीशियम आयरन जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके कॉम्प्लेक्स कार्ब्स शरीर को धीरे धीरे ऊर्जा देते हैं जिससे दिनभर कमजोरी महसूस नहीं होती। कुट्टू से बनी पूरी चीला या कढ़ी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।

    चौथा और सबसे जरूरी हिस्सा है फल। व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी होता है। सेब केला संतरा और अनार जैसे फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। केला तुरंत ऊर्जा देता है जबकि संतरा और अनार शरीर में पानी की कमी पूरी कर ठंडक प्रदान करते हैं। फलों का सेवन शरीर को डिटॉक्स करने और इम्युनिटी मजबूत बनाने में भी मदद करता है।

    नवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं बल्कि यह अनुशासन और संतुलित जीवनशैली अपनाने का अवसर है। अगर आप सही और पौष्टिक आहार लेते हैं तो न केवल आपका शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि आपकी पूजा और साधना में भी मन एकाग्र रहेगा। इस नवरात्रि इन 4 सुपरफूड्स को अपनी व्रत की थाली में जरूर शामिल करें और भक्ति के साथ साथ अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखें।

  • जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'

    जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'


    जयपुर । जयपुर(Jaipur) में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल (Chemical)और ब्लीच मिला पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सवाल यह है कि जो हरी सब्जियां(green vegetables) और फल लोग सेहत के लिए खाते हैं, क्या वे सच में उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं या धीरे-धीरे बीमार कर रहे हैं.

    अगर इन सब्जियों और फलों की खेती ऐसे पानी से हो रही हो, जिसमें फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा और रसायन मिले हों, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है. ऐसा पानी किडनी फेल होने, दिल की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

    स्लो पॉइजन का काम कर रही सब्जियां
    जयपुर के सांगानेर इलाके में सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं. यहां कपड़ों की रंगाई, छपाई और ब्लीच का काम करने वाली फैक्ट्रियां आसपास के जल स्रोतों में केमिकल और ब्लीच वाला पानी छोड़ रही हैं. इससे पूरे इलाके में भारी प्रदूषण फैल गया है. जानकारी के मुताबिक, इस दूषित पानी से उगाई गई फसलें धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं.

    काली हो चुकी है खेतों की मिट्टी
    मीडिया की टीम जब जयपुर की सांगानेर तहसील के शिकारपुरा और मुहाना समेत कई इलाकों में पहुंची, तो वहां काले रंग का पानी खेतों में पंप किया जा रहा था. इन खेतों में पत्तागोभी, बैंगन, पालक और लगभग हर तरह की मौसमी सब्जियों की खेती हो रही थी. कई जगहों पर इस गंदे पानी की वजह से मिट्टी का रंग भी ग्रे और काला हो चुका है. किसान सीताराम का कहना है कि इससे खाने वाली सभी फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं आया है.

    ‘कई साल से छोड़ा जा रहा पानी, कोई कार्रवाई नहीं’
    जानकारी यह भी है कि कुछ फैक्ट्रियों में गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूर है, लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियां बिना किसी सफाई के केमिकल और रंग मिला पानी सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ रही हैं. इसका असर सीधे खेतों और फसलों पर पड़ रहा है.

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी इन खेतों में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. एक फैक्ट्री कर्मचारी सिकंदर का दावा है कि उनके यहां गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है और फिल्टर के बाद ही पानी बाहर छोड़ा जाता है. हालांकि, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.