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  • SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा

    SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने पैक फूड (Packaged food) पर शिंकजे की तैयारी शुरू कर दी है। जिन खाद्य पदार्थों में चीनी (Sugar), फैट और नमक की मात्रा तय मानक से अधिक होगी, उनके पैकेट या डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट के रूप में चेतावनी लाल रंग में अंकित करना अनिवार्य किया जा सकता है।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) ने जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ के समक्ष दाखिल छह पन्नों के हलफनामे में यह जानकारी दी। कोर्ट को बताया गया कि इससे जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। एफएसएसएआई ने कहा कि यह चेतावनी तस्वीर (षट्भुजाकार) के रूप में अंकित होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि किन खाद्य पदार्थ में नमक या चीनी जैसे पदार्थ अधिक ‌मात्रा में हैं। इसका फॉन्ट साइज पैकेट के पीछे न्यूट्रिशन की जानकारी देने वाली टेबल में इस्तेमाल होने वाले फॉन्ट साइज से एक पॉइंट बड़ा होगा।


    जनहित याचिका पर सुनवाई

    एफएसएसएआई ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में लगाई गई फटकार के बाद दाखिल किया है। कोर्ट गैर सरकारी संस्था ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा है।


    दो चरणों में लागू होगा

    प्रस्तावित नियम दो चरण में लागू किए जाएंगे, ताकि इंडस्ट्री को उत्पाद दोबारा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले। पहले चरण में उन उत्पादों पर नियम लागू होंगे, जिनमें दो या अधिक विशिष्ट पोषक तत्व एडेड फैट, एडेड शुगर या नमक अधिक मात्रा में हों। दूसरे चरण में वे उत्पाद शामिल होंगे, जिनमें एक पोषक तत्व अधिक मात्रा में हो।


    इन उत्पादों को छूट मिलेगी

    हलफनामे में एफएसएसएआई ने कहा है कि सिंगल-इंग्रीडिएंट यानी एक ही चीज से बने खाद्य पदार्थों और उन चीजों को प्रस्तावित नियम से छूट दी जाएगी, जिनमें प्राकृतिक रूप से वसा, चीनी या नमक अधिक होता है। जैसे घी, खाद्य तेल, गुड़ और शहद आदि। हालांकि, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग के बाकी नियमों से छूट नहीं मिलेगी।

  • स्वास्थ्य और पोषण दावों पर सख्ती के बाद कई कंपनियों ने उत्पाद लेबल सुधारे, ऑनलाइन लिस्टिंग हटाईं और अनुपालन रिपोर्ट दी

    स्वास्थ्य और पोषण दावों पर सख्ती के बाद कई कंपनियों ने उत्पाद लेबल सुधारे, ऑनलाइन लिस्टिंग हटाईं और अनुपालन रिपोर्ट दी

    नई दिल्ली ।भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की ओर से खाद्य उत्पादों पर भ्रामक स्वास्थ्य, पोषण, व्यापारिक और उत्पाद संबंधी दावों के खिलाफ जारी नोटिस के बाद कई कंपनियों ने अपने स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई की है। कंपनियों ने उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले दावों को हटाने, विज्ञापन वापस लेने, ऑनलाइन उत्पाद लिस्टिंग हटाने और पैकेजिंग में बदलाव करने जैसे कदम उठाए हैं।

    नियामक ने स्पष्ट किया है कि खाद्य उत्पादों के लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में ऐसे दावे नहीं किए जा सकते, जिनसे उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति, गुणवत्ता, पोषण संबंधी विशेषताओं या अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को लेकर गलत धारणा बन सकती है। कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना है।

    मोंडेलेज इंडिया फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के कुछ उत्पादों के संबंध में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े तुलनात्मक दावों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी। नोटिस के बाद कंपनी ने संबंधित दावों और विज्ञापन सामग्री को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से हटाने की कार्रवाई की। इसके साथ ही नियमों के अनुरूप आवश्यक संशोधन भी किए गए।

    एक अन्य मामले में सैपियंस लैब्स को भी भ्रामक दावे से संबंधित नोटिस दिया गया था। इसके बाद कंपनी ने नियामक को अपना जवाब सौंपा और उत्पाद से जुड़े संबंधित दावों तथा प्रचार सामग्री को वापस लेने की जानकारी दी। इससे यह संकेत मिलता है कि नोटिस के बाद संबंधित कंपनियां अपने विपणन दावों की समीक्षा कर रही हैं।

    विची एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक मामले में विपणन किए जा रहे उत्पाद और मिसेज जानकी जय बारोट यानी जेजे फूड्स द्वारा प्रसंस्कृत एवं पैक किए गए उत्पाद के व्यापारिक नाम को लेकर आपत्ति सामने आई। नियामकीय हस्तक्षेप के बाद संबंधित ऑनलाइन उत्पाद लिस्टिंग को हटाने की कार्रवाई की गई।

    एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के मामले में उत्पाद के नाम में 100 परसेंट प्योर कोकोनट ऑयल शब्दावली के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया। नियामक के अनुसार नाम में 100 परसेंट शब्द का उपयोग खाद्य सुरक्षा कानून, विज्ञापन एवं दावे संबंधी नियमों और इस तरह की शब्दावली के इस्तेमाल को रोकने संबंधी परामर्श के अनुरूप नहीं था।

    नोटिस मिलने के बाद एमवे इंडिया ने अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की। कंपनी ने बताया कि उसने अपने उत्पाद की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री से 100 परसेंट शब्द स्वेच्छा से हटा दिया है। कंपनी ने पुराने स्टॉक की बिक्री रोकने और संशोधित पैकेजिंग के साथ नए उत्पाद बाजार में उपलब्ध कराने की भी पुष्टि की।

    एफएसएसएआई की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाली भाषा पर नियामकीय निगरानी बढ़ाई जा रही है। खासतौर पर स्वास्थ्य, पोषण, गुणवत्ता और उत्पाद की विशेषताओं से जुड़े दावों को लेकर कंपनियों को अधिक सावधानी बरतनी होगी।

    नियामक का जोर इस बात पर है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदने से पहले लेबल और प्रचार सामग्री के माध्यम से स्पष्ट तथा तथ्यात्मक जानकारी मिले। भ्रामक दावों से उपभोक्ता की खरीद संबंधी धारणा प्रभावित हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    एफएसएसएआई ने संकेत दिया है कि उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और खाद्य बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भ्रामक दावों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। इससे खाद्य कंपनियों के लिए पैकेजिंग, विज्ञापन और ऑनलाइन बिक्री सामग्री को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

  • डेयरी, ड्रिंक्स, तेल और घी समेत कई खाद्य कंपनियां जांच के घेरे में, नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होने का खतरा

    डेयरी, ड्रिंक्स, तेल और घी समेत कई खाद्य कंपनियां जांच के घेरे में, नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होने का खतरा

    नई दिल्ली । खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और लेबलिंग में किए जाने वाले दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य नियामक ने हाल के महीनों में 150 से अधिक फूड ब्रांड्स और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई मुख्य रूप से भ्रामक विज्ञापनों, बिना पर्याप्त आधार किए गए दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई है।

    नियामक की कार्रवाई में कई बड़े और जाने-पहचाने ब्रांड्स के नाम भी सामने आए हैं। इनमें नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया, डैनोन इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी इंडिया, हेल एनर्जी, मोंडेलेज इंडिया, कोका-कोला इंडिया, डियाजियो, पेरनोड रिकार्ड, फेरेरो इंडिया और केनव्यू जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि नोटिस जारी होना अपने आप में किसी कंपनी को दोषी ठहराने के बराबर नहीं है। संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

    FSSAI की नजर ऐसे विज्ञापनों पर है जिनमें खाद्य और पेय उत्पादों को लेकर ऐसे दावे किए जाते हैं, जिन्हें पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण या निर्धारित नियमों के आधार पर साबित करना जरूरी होता है। इनमें उत्पाद को 100 प्रतिशत प्राकृतिक बताना, किसी तरह की मिलावट नहीं होने का दावा करना, वजन घटाने में प्रभावी बताना या प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने जैसे दावे शामिल हो सकते हैं।

    खाद्य उत्पादों के प्रचार में किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों का उपभोक्ताओं के फैसले पर सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से नियामक ने कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि विज्ञापन और पैकेजिंग पर दी गई जानकारी वास्तविक, स्पष्ट और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।

    इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लेबलिंग से जुड़ा है। पैकेट पर उत्पाद की सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। यदि लेबल पर दी गई जानकारी नियमों के अनुरूप नहीं है या उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है, तो नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।

    FSSAI ने केवल कंपनियों के पारंपरिक विज्ञापनों तक अपनी निगरानी सीमित नहीं रखी है। खाद्य उत्पादों के प्रचार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फूड डिलीवरी ऐप और प्रभावशाली लोगों यानी इंफ्लुएंसर्स के माध्यम से किए जाने वाले दावों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इसका उद्देश्य विज्ञापन के अलग-अलग माध्यमों में उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली जानकारी की निगरानी करना है।

    नियामक के अनुसार, खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित मानकों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। यदि नोटिस के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं और उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कारोबारियों पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में विनिर्माण लाइसेंस के निलंबन या रद्द किए जाने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

    इस कार्रवाई से खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए यह संकेत स्पष्ट है कि उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसके विज्ञापन और पैकेजिंग में दी जाने वाली जानकारी भी नियामकीय निगरानी के दायरे में है। वहीं उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर लिखी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी दावों को सावधानी से देखें।

    FSSAI की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब खाद्य और पेय कंपनियां अपने उत्पादों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से जोड़कर बड़े पैमाने पर प्रचारित कर रही हैं। ऐसे में वैज्ञानिक प्रमाण और नियमों के अनुरूप दावे करना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले समय में नियामक की निगरानी और कार्रवाई से खाद्य विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

  • कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार ने पनीर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में दूध से तैयार नहीं होने वाले ऐसे पनीर उत्पादों की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। यह आदेश 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है। अब कर्नाटक में पनीर के नाम से वही उत्पाद बेचा जा सकेगा, जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार दूध से तैयार किया गया हो।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर के अलावा कई तरह के नॉन-डेयरी और एनालॉग उत्पाद भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी के साथ उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जांच के दौरान लिए गए कुछ नमूनों में मिलावट नहीं पाए जाने के बावजूद नॉन-डेयरी पनीर के स्वरूप और उसकी बिक्री को लेकर नियामकीय स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

    एनालॉग पनीर और सामान्य पनीर में मुख्य अंतर उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के प्रोटीन और वसा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को पनीर के नाम से बाजार में बेचे जाने पर अब कर्नाटक में रोक रहेगी।

    नए नियम के तहत खाद्य कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को ऐसे एनालॉग पनीर को बेचने के साथ-साथ उसका भंडारण, वितरण, आपूर्ति या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो गैर-डेयरी सामग्री से तैयार पनीर जैसे उत्पादों को सामान्य पनीर के तौर पर बाजार में उपलब्ध कराते हैं।

    हालांकि, सरकार की ओर से लगाई गई यह रोक हर तरह के नॉन-डेयरी खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से पहले से अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं, वे इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं को उनके निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के तहत बेचा जा सकेगा।

    इस फैसले के बाद कर्नाटक में खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही पहचान और लेबलिंग का महत्व और बढ़ गया है। पनीर के नाम पर ऐसे उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी, जो निर्धारित दूध आधारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की जानकारी उपलब्ध कराना है।

    राज्य में यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच के जरिए नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक का यह कदम ऐसे उत्पादों को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है, जिनके नाम और स्वरूप को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

  • FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की ओर से भ्रामक दावों, गैर-मानकीकृत उत्पादों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर जारी नोटिसों के बाद कई खाद्य कारोबारियों ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं। नियामक की ओर से रविवार को बताया गया कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित कंपनियों ने अपने उत्पादों और पैकेजिंग में आवश्यक बदलाव शुरू किए हैं।

    खाद्य नियामक के अनुसार, सुधारात्मक कार्रवाई में उत्पादों के लेबल पर किए गए भ्रामक दावों को हटाना, उत्पादों के नाम में बदलाव करना और पैकेजिंग को लागू नियमों के अनुरूप बनाना शामिल है। इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

    कुछ कंपनियों को भ्रामक ट्रेडमार्क के इस्तेमाल को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। इनमें ऑनेस्ट इनोवेशन फॉर यू प्राइवेट लिमिटेड और हेलियोस्टोन स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। नोटिस मिलने के बाद दोनों कंपनियों ने अपने संबंधित उत्पादों के नाम में बदलाव किया।

    राजस्थान एग्रो एंड जनरल इंडस्ट्रीज के मामले में भी भ्रामक ट्रेडमार्क से जुड़ी आपत्ति सामने आई थी। कंपनी ने नियामकीय निर्देशों के अनुरूप उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावों को हटाया। इसके अलावा उत्पादों से संबंधित संचार में पीपीएम शब्द का इस्तेमाल भी बंद कर दिया गया।

    एक अन्य मामले में आयोटा नैनोटेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को गैर-मानकीकृत उत्पाद से संबंधित नियमों के उल्लंघन के लिए चिन्हित किया गया। कंपनी ने संबंधित उत्पाद के लेबल से भ्रामक दावों को हटाने के साथ गैर-मानकीकृत पानी का उत्पादन भी बंद कर दिया।

    पंचामृत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया गया था। नियामकीय कार्रवाई के बाद कंपनी ने संबंधित उत्पाद को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। यह कदम कंपनी की ओर से नोटिस के बाद की गई सुधारात्मक कार्रवाई का हिस्सा रहा।

    लिव्योर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के उत्पाद ‘लिव्योर रोस्टेड एडामे बीन्स’ के लेबल पर किए गए ‘वीगन’ और ‘हेल्थी’ दावों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। कंपनी ने इन दावों को नियमों के अनुरूप नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाए।

    कंपनी के अनुसार, लागू नियमों की जानकारी के अभाव में ये दावे अनजाने में उत्पाद के लेबल पर दर्ज हो गए थे। कंपनी ने इस मामले पर खेद जताते हुए माफी मांगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होने का आश्वासन दिया।

    इसके साथ ही कंपनी ने संशोधित लेबल भी तैयार किया। नियमों का उल्लंघन करने वाले दावों वाली मौजूदा पैकेजिंग सामग्री को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई। कंपनी ने अपने उत्पादों के लेबल की समीक्षा और संशोधन का काम भी शुरू कर दिया है।

    खाद्य उत्पादों के लेबल पर लिखी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद की प्रकृति, दावे और संबंधित विवरण में किसी तरह की गलत या भ्रामक जानकारी उपभोक्ता के फैसले को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में नियामकीय निगरानी का उद्देश्य कंपनियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कारोबार करने के लिए बाध्य करना है।

    नोटिसों के बाद कंपनियों की ओर से किए गए बदलाव यह दिखाते हैं कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में नियमों के पालन पर निगरानी बढ़ रही है। आने वाले समय में कंपनियों के लिए लेबलिंग दावों की सटीकता और नियामकीय अनुपालन पहले से अधिक महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

  • मेघालय और ओडिशा की तीन खाद्य कंपनियों पर कार्रवाई, निरीक्षण में स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी

    मेघालय और ओडिशा की तीन खाद्य कंपनियों पर कार्रवाई, निरीक्षण में स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी

    नई दिल्ली ।भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन खाद्य व्यवसाय संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने मेघालय की ए.बी. एंटरप्राइज तथा ओडिशा की जाइका ऑर्गेनिक्स और नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के खाद्य कारोबार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।

    नियामक के अनुसार इन कंपनियों के खिलाफ निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन सामने आए। इनमें भ्रामक स्वास्थ्य संबंधी दावे, खराब स्वच्छता व्यवस्था, अनुचित भंडारण, कीट नियंत्रण की कमियां और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं करना शामिल है।

    ए.बी. एंटरप्राइज के मामले में उत्पादों के लेबल और प्रचार सामग्री पर स्वास्थ्य लाभ से जुड़े ऐसे दावे पाए गए, जिन्हें खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन और दावे संबंधी नियमों का उल्लंघन माना गया। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी आवश्यक विनिर्माण स्वीकृति के बिना खाद्य उत्पादों का कारोबार कर रही थी।

    कंपनी को सुधार नोटिस जारी करने के साथ अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया था। हालांकि, नियामक के मुताबिक कंपनी की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके बाद खाद्य कारोबार से जुड़ी सभी गतिविधियों को अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया गया।

    ओडिशा स्थित जाइका ऑर्गेनिक्स के संयंत्र में निरीक्षण के दौरान स्वच्छता और सैनिटेशन से संबंधित कई गंभीर कमियां सामने आईं। खाद्य पदार्थों के निर्माण, पैकेजिंग और भंडारण की परिस्थितियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।

    निरीक्षण में खराब हाउसकीपिंग, कीट नियंत्रण की समस्याएं, जंग लगे उपकरण, कच्चे माल और तैयार उत्पादों का अनुचित भंडारण तथा उत्पादन प्रक्रिया में आवश्यक नियंत्रण की कमी पाई गई। कुछ उत्पादों और सामग्रियों पर निर्माण तिथि, बैच नंबर और उपयोग की अंतिम तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी अंकित नहीं थीं।

    अनुपालन मूल्यांकन में जाइका ऑर्गेनिक्स को 90 में से केवल 10 अंक मिले। 12 प्रतिशत के इस स्कोर के आधार पर कंपनी को गैर-अनुपालन श्रेणी में रखा गया। नियामक ने कहा कि ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक और जैविक जोखिम पैदा कर सकती हैं।

    नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के उत्पादन परिसर में भी स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं। निरीक्षण के दौरान प्रसंस्करण और भंडारण क्षेत्रों में मक्खियां, मकड़ी के जाले, कीटों के प्रवेश के रास्ते और जल स्रोतों के आसपास शैवाल की मौजूदगी दर्ज की गई।

    इसके अलावा जंग लगे उपकरण, खाद्य सामग्री के पास कचरे का जमाव और तैयार उत्पादों के अनुचित भंडारण जैसी कमियां भी सामने आईं। कंपनी के रिकॉर्ड में खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और नियंत्रण नमूनों से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का भी अभाव पाया गया।

    नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज को अनुपालन मूल्यांकन में 80 में से 20 अंक मिले, यानी कंपनी का स्कोर 25 प्रतिशत रहा। इसे भी गैर-अनुपालन श्रेणी में रखा गया और लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

    खाद्य नियामक ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण और नियामकीय कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • खाने की चीजों में गंदगी मिलने पर दो कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड, FSSAI ने लिया सख्त एक्शन

    खाने की चीजों में गंदगी मिलने पर दो कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड, FSSAI ने लिया सख्त एक्शन

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की दो खाद्य कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। जांच के दौरान खाद्य पदार्थों में जिंदा कीड़े, फंगस, चूहे की बीट और गंदगी जैसी गंभीर खामियां मिलने की बात सामने आई है। खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को देखते हुए दोनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें उत्तर प्रदेश की वीकेसी नट्स प्राइवेट लिमिटेड और महाराष्ट्र की छेड़ा स्पेशियलिटीज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। संबंधित इकाइयों में खाद्य पदार्थों के उत्पादन और रखरखाव से जुड़े मानकों की जांच की गई थी। निरीक्षण के दौरान ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जिन्हें खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया।

    जांच के दौरान पिस्ता समेत कुछ खाद्य सामग्री में जिंदा कीड़े पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा फंगस और चूहे की बीट मिलने की बात भी कही गई है। खाद्य पदार्थों के आसपास गंदगी की स्थिति भी निरीक्षण के दौरान सामने आई। ऐसे हालात में तैयार या संग्रहित खाद्य सामग्री की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

    खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने इन खामियों को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए संभावित खतरा माना है। खाद्य पदार्थों में कीड़े, फंगस या चूहों से जुड़ी गंदगी की मौजूदगी खाद्य स्वच्छता के बुनियादी मानकों के विपरीत है। इसी वजह से संबंधित कंपनियों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की गई।

    खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन परिसर की साफ-सफाई, कच्चे माल का सुरक्षित भंडारण, कीट नियंत्रण और तैयार उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी होता है। निरीक्षण के दौरान इन क्षेत्रों में गंभीर कमियां मिलने पर नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है। मौजूदा मामले में भी खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन में कमी को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

    उत्तर प्रदेश की वीकेसी नट्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में सूखे मेवों और अन्य खाद्य सामग्री से संबंधित जांच के दौरान गंभीर कमियां सामने आईं। पिस्ता में कीड़े और अन्य संदूषण से जुड़ी स्थिति को लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठे। इसके बाद कंपनी के लाइसेंस को निलंबित करने का फैसला लिया गया।

    महाराष्ट्र की छेड़ा स्पेशियलिटीज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई। जांच के दौरान खाद्य सामग्री और परिसर में स्वच्छता से जुड़ी खामियों की जानकारी सामने आई। जिंदा कीड़े, फंगस और चूहे की बीट जैसी स्थितियां मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।

    प्राधिकरण की इस कार्रवाई को खाद्य कारोबारियों के लिए नियमों के पालन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। खाद्य पदार्थों के उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और भंडारण तक हर स्तर पर स्वच्छता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना जरूरी है। लापरवाही मिलने पर लाइसेंस निलंबन सहित अन्य नियामकीय कदम उठाए जा सकते हैं।

    खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में नियमित निरीक्षण का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानक के अनुरूप खाद्य सामग्री पहुंचाना है। दो कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए जाने की कार्रवाई इसी निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है। आने वाले समय में जांच के आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ आगे की नियामकीय कार्रवाई भी हो सकती है।

  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के शराब से जुड़े लेबलिंग और उत्पाद मानकों को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। कुछ बड़ी शराब कंपनियों ने नियामक के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनके तहत कुछ प्रकार के भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा उत्पादों की बिक्री पर आपत्ति जताई गई है। मामले में अदालत में अगली सुनवाई सोमवार को होने वाली है, जिस पर कंपनियों और नियामक दोनों की नजर बनी हुई है।

    विवाद का केंद्र शराब की लेबलिंग, फ्लेवर और उत्पाद की उम्र से जुड़े दावे हैं। FSSAI का कहना है कि कुछ कंपनियां ऐसे उत्पादों को रम या व्हिस्की के रूप में बाजार में पेश कर रही हैं, जिनमें अतिरिक्त या कृत्रिम फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया है। नियामक के अनुसार, यदि किसी स्पिरिट में अलग से फ्लेवर मिलाया गया है, तो उपभोक्ताओं को इसकी स्पष्ट जानकारी लेबल पर दी जानी चाहिए।

    नियामकीय आपत्ति के अनुसार ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग पर रम या व्हिस्की के बजाय संबंधित उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना बताया गया है। इसी बिंदु को लेकर शराब कंपनियों और नियामक के बीच कानूनी विवाद गहराया है।

    विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू शराब की उम्र से संबंधित दावों का है। कुछ उत्पादों पर उन्हें कैस्क में पुरानी या परिपक्व स्पिरिट के तौर पर प्रस्तुत किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। नियामक का तर्क है कि किसी ब्लेंड में इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट को ध्यान में रखकर ही उम्र संबंधी दावा किया जाना चाहिए। इससे उन उत्पादों की लेबलिंग प्रभावित हो सकती है, जिनमें अलग-अलग उम्र की स्पिरिट का मिश्रण किया गया है।

    इस मामले में United Spirits और Mohan Meakin समेत कई कंपनियों ने अदालत का रुख किया है। कंपनियों की ओर से दलील दी गई है कि अचानक बिक्री रोकने या लेबल बदलने के निर्देश से कारोबार पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इन उत्पादों का निर्माण लंबे समय से निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है और अचानक बदलाव लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।

    कंपनियों का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि शराब की बोतलों के लेबल में बदलाव केवल प्रिंटिंग तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए कई मामलों में राज्य आबकारी विभागों से आवश्यक मंजूरी लेनी पड़ती है। इसलिए कंपनियों के मुताबिक यदि उन्हें तुरंत नए नियमों के अनुसार लेबल बदलने और मौजूदा स्टॉक की बिक्री रोकने के लिए कहा जाता है, तो इससे तैयार माल और वितरण व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अचानक पूरे उद्योग की गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना को लेकर चिंता जताई। अदालत ने संकेत दिया कि किसी पूरे उद्योग को रातोंरात बंद करने से व्यावहारिक और आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शराब के निर्माण, जांच और मार्केटिंग के तकनीकी मानक तय करना न्यायपालिका का काम नहीं है।

    अदालत ने केंद्र सरकार के वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से FSSAI से इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि अदालत कंपनियों की बिक्री संबंधी मांग और नियामक के खाद्य सुरक्षा तथा लेबलिंग मानकों के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

    इस विवाद का असर केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब उद्योग में उत्पादों की लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन को लेकर आगे की दिशा भी इससे तय हो सकती है। फिलहाल अंतिम स्थिति अदालत की आगामी सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को लेकर देश में नियामकीय सख्ती के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कई लोकप्रिय शराब उत्पादों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने नियमों के कथित उल्लंघन, भ्रामक दावों और बिना अनुमति वाले फ्लेवर के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में कई प्रसिद्ध शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई के बाद शराब उद्योग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित कंपनियों से जवाब भी मांगा जा रहा है।

    एफएसएसएआई के अनुसार जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ उत्पादों में ऐसे बाहरी फ्लेवर का उपयोग किया गया, जिनकी अनुमति निर्धारित मानकों के तहत नहीं थी। नियामक का कहना है कि रम और व्हिस्की जैसे उत्पादों में स्वाद और खुशबू का विकास उत्पादन की प्राकृतिक प्रक्रिया, जैसे फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरेशन के माध्यम से होना चाहिए। यदि किसी उत्पाद में कृत्रिम या बाहरी फ्लेवर मिलाए जाते हैं, तो उसे उसी श्रेणी के अनुरूप स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना आवश्यक है।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ उत्पाद मुख्य रूप से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल या न्यूट्रल स्पिरिट से तैयार किए गए थे और बाद में उनमें स्वाद तथा खुशबू के लिए अतिरिक्त फ्लेवर मिलाए गए। नियामक का मानना है कि ऐसे उत्पादों को सामान्य रम या व्हिस्की के रूप में प्रस्तुत करना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। इसलिए ऐसे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने के लिए उचित लेबलिंग अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

    कार्रवाई के दौरान जिन उत्पादों पर रोक लगाई गई है उनमें ओल्ड मॉन्क के कुछ वेरिएंट, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की, रॉयल चैलेंज व्हिस्की, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम, सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर XXX रम सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। नियामक का कहना है कि इन उत्पादों की बिक्री तब तक प्रतिबंधित रहेगी, जब तक संबंधित नियमों और मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता।

    एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि कुछ उत्पादों पर किए गए आयु और गुणवत्ता संबंधी दावे उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाते थे। ऐसे दावों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक माना गया है। नियामक ने स्पष्ट किया कि खाद्य और पेय पदार्थों की पैकेजिंग पर दी जाने वाली प्रत्येक जानकारी सत्य, प्रमाणित और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद में फ्लेवर आधारित विशेषताएं हैं तो उन्हें उसी रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, न कि मानक श्रेणी के उत्पाद के रूप में।

    इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण, पारदर्शी लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन पर अधिक जोर दिया जाएगा। आने वाले समय में संबंधित कंपनियां नियामकीय निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सुधार कर सकती हैं, जबकि उपभोक्ताओं को भी उत्पाद खरीदते समय लेबल और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।