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  • भारत-चिली व्यापार समझौता अंतिम चरण में, कनाडा और अन्य देशों के साथ भी बातचीत तेज

    भारत-चिली व्यापार समझौता अंतिम चरण में, कनाडा और अन्य देशों के साथ भी बातचीत तेज

    नई दिल्ली । भारत और चिली के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कनाडा के साथ भी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अच्छी गति से आगे बढ़ रही है। भारत विभिन्न देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने के लिए समझौतों पर काम कर रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाना है।

    नीदरलैंड्स की दो दिवसीय यात्रा के दौरान गोयल ने बताया कि दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के साथ भी औपचारिक वार्ता शुरू हो चुकी है। अगस्त में भारत और एसएसीयू ने वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत शुरू करने के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए थे। इस समूह में बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

    गोयल के मुताबिक, चिली के साथ समझौता लगभग निष्कर्ष तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। कनाडा के साथ बातचीत भी अच्छी प्रगति कर रही है, जबकि एसएसीयू के साथ चर्चा अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए इस समूह के साथ समझौते की प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है।

    भारत मेक्सिको के साथ भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गोयल ने बताया कि मेक्सिको भारत के साथ शुरुआती चरण के व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने का इच्छुक है। इसके अलावा ब्राजील में चुनावों के बाद सरकार की निरंतरता से दक्षिण अमेरिकी व्यापारिक समूह मर्कोसुर के साथ भारत के मौजूदा वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते के विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

    नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान गोयल ने वहां के विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्री स्जोर्ड स्जोर्ड्स्मा, आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्री हेलेन हेर्बर्ट और नॉर्थ हॉलैंड के किंग्स कमिश्नर आर्थर वैन डाइक के साथ बैठकें कीं। उन्होंने डच संसद के प्रतिनिधि सदन की विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग समिति तथा सीनेट की यूरोपीय मामलों की समिति के सदस्यों से भी मुलाकात की।

    इन बैठकों में भारत और नीदरलैंड्स के आर्थिक संबंधों के साथ भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक साझेदारी पर चर्चा हुई। यात्रा का प्रमुख कार्यक्रम इंडिया-नीदरलैंड्स बिजनेस फोरम रहा, जिसकी सह-अध्यक्षता गोयल और स्जोर्ड्स्मा ने की। इसमें दोनों देशों की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित करीब 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

    फोरम में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से बनने वाले अवसरों, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश साझेदारी मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया गया। गोयल ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और खुदरा कारोबार से जुड़ी डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं।

    इसके अलावा उन्होंने द हेग में भारतीय दूतावास और एचएसबीसी नीदरलैंड्स की ओर से आयोजित 15 डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। इस बैठक में व्यापार और निवेश से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई।

    गोयल ने कहा कि भारत और नीदरलैंड्स के संबंध रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ एफटीए की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। उन्होंने नीदरलैंड्स को यूरोपीय बाजारों तक पहुंचने का प्रमुख प्रवेश द्वार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

  • रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली ।भारतीय रुपये में मौजूदा स्तर से स्थिरता आने के साथ आगे मजबूती की भी पर्याप्त गुंजाइश है। भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि आने वाले वर्षों में चालू खाते का घाटा कम होने की उम्मीद है। इसके साथ वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता और हाल के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसर रुपये की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

    31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 के बीच रुपया प्वाइंट-टू-प्वाइंट आधार पर कुल 13.1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऐसे में मौजूदा स्तर से भारतीय मुद्रा के स्थिर होने और मजबूत होने की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है। पूनम गुप्ता ने कहा कि जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी रुपये के स्थिर होने और मजबूती की उम्मीद जताई थी।

    मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन में पूनम गुप्ता ने कहा कि आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास कई दशकों के चालू खाते के घाटे या भुगतान संतुलन में दर्ज शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।

    भारत पारंपरिक रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है। इसी वजह से देश का कुल भुगतान संतुलन सामान्य तौर पर सकारात्मक रहा है। समय के साथ सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के मुकाबले चालू खाते का घाटा कम हुआ है, जिससे बाहरी क्षेत्र की स्थिति को मजबूती मिली है।

    पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे रहा है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उचित माना जाता है। देश के शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाला धन यानी प्रेषण भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं। इन दोनों के मजबूत होने से वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई करने में मदद मिलती है और चालू खाता घाटे को जीडीपी के एक प्रतिशत से नीचे बनाए रखने में सहायता मिलती है।

    हालांकि, हाल में तेल और सोने की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव के कारण चालू खाते का घाटा अस्थायी रूप से बढ़ा है। इसके अलावा पिछले दो वर्षों के दौरान पूंजी खाते का अधिशेष भी चालू खाते के घाटे की तुलना में कम रहा। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2025-26 में 23.6 अरब डॉलर का नकारात्मक भुगतान संतुलन दर्ज हुआ।

    उन्होंने कहा कि भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते इस्तेमाल और देश में तेल भंडार खोजने के प्रयासों से आयातित तेल पर भारत की निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे जीडीपी के मुकाबले तेल की मांग में लंबे समय से जारी गिरावट की प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।

    पूनम गुप्ता ने यह भी कहा कि यदि संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो बाहरी क्षेत्र को अतिरिक्त राहत मिल सकती है। इसके साथ हाल के मुक्त व्यापार समझौतों के सकारात्मक प्रभाव सामने आने और अनुकूल विनिमय दर की स्थिति बने रहने से आने वाले वर्षों में रुपये को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

  • भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को संसद की मंजूरी, पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने जताई खुशी, व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद

    भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को संसद की मंजूरी, पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने जताई खुशी, व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली ।भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिल गई है। बुधवार को हुए मतदान में समझौते के पक्ष में 93 वोट पड़े, जबकि 29 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। संसद से मंजूरी मिलने के बाद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने खुशी जताई और कहा कि इस समझौते से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

    प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि कई लोगों ने उनसे कहा था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता संभव नहीं होगा, लेकिन अब संसद ने इसे मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि उनकी नेशनल पार्टी ने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एफटीए करने का वादा किया था और सरकार ने उस लक्ष्य को पूरा किया है।

    लक्सन के मुताबिक समझौते से न्यूजीलैंड के लोगों के लिए अधिक नौकरियां और आय के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के करीब 1.4 अरब उपभोक्ताओं तक पहुंच बनने से न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अवसर बढ़ेंगे। उनके अनुसार यह समझौता न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

    न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने समझौते से जुड़े शुल्क प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि एफटीए लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। समझौते के पूरी तरह लागू होने पर 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क या तो समाप्त कर दिया जाएगा या उसे काफी कम कर दिया जाएगा।

    मैक्ले ने कहा कि समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में भी सुविधा बढ़ेगी। इसके तहत सीमा पर क्लीयरेंस प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उन्होंने भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग तक न्यूजीलैंड के कारोबारियों की बेहतर पहुंच को भी समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

    उन्होंने कहा कि भारत में भोजन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, पर्यटन, प्रोफेशनल सेवाओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में मुक्त व्यापार समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में अपने कारोबारी संबंधों का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस व्यापार समझौते की बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी। न्यूजीलैंड सरकार को उम्मीद है कि संसद की मंजूरी के बाद एफटीए इस साल के अंत तक लागू हो जाएगा। हालांकि इसके लिए समझौते में निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होगा।

    मैक्ले ने कहा कि एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लक्ष्य को भी समर्थन देगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। नए समझौते को इसी लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

    संसद की मंजूरी के साथ भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक नया ढांचा तैयार हुआ है। समझौते के लागू होने के बाद शुल्क में बदलाव और बाजार तक पहुंच से जुड़े प्रावधानों का असर दोनों देशों के निर्यातकों और कारोबारियों पर पड़ने की उम्मीद है।

  • भारत-ईयू एफटीए से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद, यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ सहयोग को उत्साहित

    भारत-ईयू एफटीए से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद, यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ सहयोग को उत्साहित

    नई दिल्ली ।भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के कारोबार और निवेश के लिए नए अवसर खोल सकता है। फिनलैंड दूतावास के ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी ने कहा कि यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ अधिक गहराई से सहयोग करने को लेकर उत्साहित हैं और समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी व्यावहारिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी होने की उम्मीद कर रही हैं।

    हेरलेवी के मुताबिक भारत और यूरोप के कारोबारी संबंधों के लिए मौजूदा वर्ष महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों क्षेत्रों की कंपनियों के बीच व्यापार विस्तार, निवेश और व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाएं बढ़ी हैं। यूरोपीय कारोबारी भारतीय बाजार और यहां के उद्योगों के साथ अधिक नजदीकी से काम करने में रुचि दिखा रहे हैं।

    मुक्त व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच कारोबार को आसान बनाना और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ने की संभावना है। साथ ही भारत और यूरोप के बीच निवेश तथा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ा सहयोग भी मजबूत हो सकता है।

    हेरलेवी ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के संदर्भ में भी भारत और यूरोप के बीच बढ़ते सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। बदलते वैश्विक कारोबारी वातावरण में कंपनियां अपनी आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में भारत और यूरोपीय देशों के बीच औद्योगिक सहयोग दोनों पक्षों के लिए उपयोगी हो सकता है।

    फिनलैंड के ट्रेड काउंसलर ने भारत के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में फिनलैंड के अनुभव को भी महत्वपूर्ण बताया। चक्रीय अर्थव्यवस्था में संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल, उत्पादों का लंबे समय तक उपयोग और कचरे को कम करने पर जोर दिया जाता है। इस मॉडल में इस्तेमाल हो चुकी सामग्री को दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश की जाती है।

    उनके अनुसार फिनलैंड और अन्य यूरोपीय देशों ने संसाधनों के पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों के विकास में लंबे समय तक काम किया है। भारत और फिनलैंड की कंपनियों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से संसाधनों की खपत कम करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

    चक्रीय अर्थव्यवस्था का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता। संसाधनों का कम इस्तेमाल करने से कंपनियों की लागत घट सकती है और उत्पादन प्रक्रिया में ऊर्जा तथा पानी की खपत भी कम की जा सकती है। साथ ही नई कच्ची सामग्री पर निर्भरता कम होने से उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव को घटाने में मदद मिल सकती है।

    हेरलेवी ने इस बदलाव की शुरुआत उत्पाद के डिजाइन चरण से करने पर जोर दिया। उनके अनुसार कंपनियों को ऐसे उत्पाद तैयार करने चाहिए जिनमें कम सामग्री की जरूरत हो, जिनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सके और जिन्हें इस्तेमाल के बाद आसानी से पुनर्चक्रित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और शुरुआती स्तर पर सही उत्पाद डिजाइन चक्रीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन सकता है। इस दृष्टिकोण से कंपनियां उत्पादन के साथ-साथ उत्पाद के पूरे जीवनचक्र को ध्यान में रखकर काम कर सकती हैं।

    भारत-ईयू एफटीए और टिकाऊ उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से आने वाले समय में दोनों पक्षों के कारोबारी संबंधों को व्यापक आधार मिलने की संभावना है। व्यापार, निवेश, तकनीक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन में साझेदारी बढ़ने से भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी रास्ते खुल सकते हैं।

  • पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    नई दिल्ली । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि बिहार की प्रतिभा और राज्य में तैयार होने वाले उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे नए मुक्त व्यापार समझौतों यानी एफटीए के माध्यम से बिहार के किसानों, छोटे उद्योगों, उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

    गोयल ने कहा कि बिहार के कृषि और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के साथ टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के लिए दुनिया के विभिन्न बाजारों के दरवाजे खुल रहे हैं। इससे राज्य के उत्पादों को घरेलू बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस बदलाव को बिहार की आर्थिक क्षमता और स्थानीय प्रतिभा के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।

    केंद्र सरकार के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया है। सरकार लगातार भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और मौजूदा बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों को विभिन्न देशों में व्यापार करने के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इससे निर्यात को अधिक विविध बनाने के साथ श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी मजबूत करने की उम्मीद है।

    सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक साझेदार देशों के साथ कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है। इनमें भारत-मॉरीशस सीईसीपीए, भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए, भारत-यूके सीईटीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए जैसे समझौते शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना है।

    एफटीए के तहत व्यापारिक साझेदार देशों के बीच शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में काम किया जाता है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ सकती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ऐसे समझौते रोजगार और उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    सरकार का कहना है कि व्यापार समझौतों को तैयार करते समय भारतीय उद्योग, किसानों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के हितों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी बाजारों में तकनीकी मानकों और नियमों से जुड़ी बाधाओं को कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों के मानकों को समझने और भारतीय उत्पादों को उनके अनुरूप तैयार करने से निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार निर्यात संवर्धन मिशन, विदेशों में भारतीय मिशनों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है। द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर लगातार बातचीत के जरिए भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में बिहार के कृषि, विनिर्माण और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

  • रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस उपलब्धि में विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली, शुल्क रियायतों का लाभ बढ़ा और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए। सरकार का कहना है कि एफटीए की बदौलत भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई है और निर्यात के नए क्षेत्रों में विस्तार संभव हुआ है।

    लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन से देश का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों के उपयोग की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि भारतीय निर्यातकों को इनका अधिकतम लाभ मिल सके।

    सरकार के अनुसार भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का व्यापक रूप से उपयोग किया है। यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या भी वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर 2025-26 में 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत माना जा रहा है।

    भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत भी भारतीय निर्यातकों को उल्लेखनीय लाभ मिला है। समझौते के बाद अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या बढ़कर 5,668 हो गई है, जिनके माध्यम से 7.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। इसी प्रकार भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भी टैरिफ लाइनों और निर्यात मूल्य दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारतीय उत्पादों की पहुंच नए क्षेत्रों तक विस्तारित हुई है।

    सरकार ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। समझौता लागू होने के बाद ओमान को निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जून 2026 में ओमान को 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो मई 2026 की तुलना में 54.7 प्रतिशत और जून 2025 की तुलना में 189.6 प्रतिशत अधिक रहा। इसके अलावा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ लागू समझौते के बाद भी हजारों सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क रियायतों का व्यापक लाभ मिला है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए एफटीए में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजारों के द्वार खोले हैं। सरकार का कहना है कि इन समझौतों में घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा के साथ संतुलित रणनीति अपनाई गई है, जिससे निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिली है।

  • भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड ने आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रस्तावित यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते (ईयू-भारत एफटीए) को इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है। दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं ने हेलसिंकी में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान व्यापार, निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की।

    फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री रिक्का पुर्रा और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई बैठक में आर्थिक संबंधों को अधिक विविध, मजबूत और दीर्घकालिक बनाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि ईयू-भारत एफटीए लागू होने के बाद व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य भी अधिक व्यावहारिक माना गया।

    बैठक के बाद फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री रिक्का पुर्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भारत और फिनलैंड की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उनके अनुसार डिजिटल और टिकाऊ प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने में फिनलैंड की विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    रिक्का पुर्रा ने यह भी कहा कि भविष्य में स्पेस, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी नवाचार और औद्योगिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि उनकी बैठकों में आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा डिजिटलाइजेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी का विस्तार करने पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंने फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री साकारी पुइस्तो से भी मुलाकात की, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी संचार, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक और सस्टेनेबिलिटी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

    फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक प्रगति और ईयू-भारत एफटीए की संभावनाएं फिनलैंड की कंपनियों के लिए नए अवसर लेकर आएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार का विशाल आकार पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में भी निवेश और व्यावसायिक विस्तार के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।

    अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी और औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और निर्यात आधारित उत्पादन में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों का मानना है कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश पर आधारित यह साझेदारी आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ व्यापक आर्थिक एवं मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगा। इसके साथ ही ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। समझौते के प्रभाव से भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा, जबकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का दायरा भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगा।

    भारत की सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे डिजिटल व्यापार, नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। विशेष रूप से आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल समाधान जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए कार्य करने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा नहीं करना होगा। वे निर्धारित अवधि तक भारत में ही अपना योगदान जारी रख सकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों और उनके कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा तथा अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जा सकेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय प्रतिभाओं की वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देगी।

    दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित संस्थागत मंच भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन मंचों के माध्यम से सरकार, उद्योग और नवाचार से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय बढ़ेगा। साथ ही डिजिटल व्यापार, प्रौद्योगिकी सुरक्षा, अनुसंधान और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को गति मिलेगी। इससे नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने की संभावना है।

    उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां पहले से ही ब्रिटेन में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं और हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो राजधानी से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, कौशल विकास और नई तकनीकों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिला है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग और अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।

    सरकार का कहना है कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के अधिकांश निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग संगठनों का मानना है कि यह समझौता विनिर्माण, सेवाओं, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा। साथ ही भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी।

    आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। बेहतर बाजार पहुंच, निवेश में वृद्धि, तकनीकी सहयोग, प्रतिभा के आदान-प्रदान और उद्योगों के विस्तार से भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई गति मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि उद्योग जगत इस समझौते को भारत की वैश्विक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है।

  • पीएम मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से पहले बड़ा व्यापारिक संकेत, 57% उत्पादों पर टैरिफ हटाने की घोषणा से मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध

    पीएम मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से पहले बड़ा व्यापारिक संकेत, 57% उत्पादों पर टैरिफ हटाने की घोषणा से मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित न्यूजीलैंड यात्रा से पहले दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के तहत अपने देश के 57 प्रतिशत निर्यातित उत्पादों पर पहले दिन से टैरिफ नहीं लगाने की घोषणा की है। इस फैसले को दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर न्यूजीलैंड पहुंचेंगे। लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा होगी। ऐसे समय में व्यापार समझौते को लेकर न्यूजीलैंड की ओर से आया यह संकेत दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को दर्शाता है। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और कृषि सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर व्यापक चर्चा होगी।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा है कि भारत के साथ होने वाला व्यापार समझौता उनके देश के निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उनका मानना है कि भारतीय बाजार तक आसान पहुंच मिलने से न्यूजीलैंड के उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक लाभ का आधार बनेगा।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कई वर्षों से जारी रही है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद वार्ताएं ठहर गई थीं। बाद में दोनों देशों ने दोबारा बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया और कई दौर की चर्चाओं के बाद समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। अब दोनों सरकारें इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए अवसर भी विकसित होंगे। कृषि उत्पाद, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों को भी न्यूजीलैंड के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

    आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ऐसे समझौते दोनों देशों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नए बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक रणनीतिक सहयोग को भी नई गति दे सकते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी की आगामी यात्रा को केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय वार्ताओं से व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे में टैरिफ में प्रस्तावित राहत का यह फैसला दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नई दिल्ली । भारत के नए मुक्त व्यापार समझौते देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का मानना है कि वैश्विक बाजारों तक बढ़ती पहुंच भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के नए रास्ते खोलेगी। इसी उद्देश्य के तहत छात्रों को तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। नए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से देश के उद्योगों को नए बाजार मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ इनोवेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अवसर भी बढ़ाएगा।

    उन्होंने छात्रों से पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान आज के प्रतिस्पर्धी दौर में पर्याप्त नहीं है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी दक्षता, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक अनुभव ही भविष्य की सफलता का आधार बनेंगे।

    डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने का अवसर प्रदान करती है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब देश के दूरदराज क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सकती है, जिससे भौगोलिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने ऑनलाइन द्विभाषी प्रबंधन शिक्षा कार्यक्रम को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच मौजूद अवसरों की खाई को कम करेंगे। अब छोटे शहरों और दूरस्थ इलाकों के छात्र भी घर बैठे उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठा पाएंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध पाठ्यक्रम देश के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करेंगे। इससे भाषा संबंधी बाधाएं कम होंगी और अधिक संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे। डिजिटल माध्यमों के जरिए पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी और विश्वसनीय मूल्यांकन प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित किए जाने की व्यवस्था भी प्रभावी मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उनका कहना था कि ऑनलाइन अध्ययन के साथ समय-समय पर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद भी आवश्यक है। इससे छात्रों को टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, विचारों के आदान-प्रदान और नेटवर्किंग जैसे महत्वपूर्ण प्रबंधन कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौतों, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास की संयुक्त रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने से देश की उत्पादन क्षमता, नवाचार और आर्थिक विकास को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।