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  • PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता

    PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता


    नई दिल्ली। भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते FTA को लेकर एक बार फिर सकारात्मक हलचल शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को दो दिवसीय इजरायल दौरे से ठीक पहले दोनों देशों ने FTA पर औपचारिक चर्चा का पहला दौर शुरू कर दिया है।

    मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की गई कि द्विपक्षीय वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वार्ता आगे बढ़ाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष नवंबर में दोनों देशों ने इस समझौते के लिए संदर्भ की शर्तों टीओआर पर हस्ताक्षर किए थे।

    23 फरवरी से नई दिल्ली में शुरू हुई वार्ता

    वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत-इजरायल FTA के लिए बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ जो 26 फरवरी तक चलेगा। इससे पहले दोनों देशों के बीच आठ दौर की बातचीत हो चुकी थी लेकिन अक्टूबर 2021 के बाद यह प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। अब एक बार फिर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

    तकनीकी स्तर पर गहन चर्चा

    इस दौर में दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ अलग-अलग सत्रों में समझौते के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू कर रहे हैं जबकि इजरायल की ओर से वरिष्ठ निदेशक यिफ़ात अलोन पेरेल वार्ता की अगुवाई कर रही हैं।

    व्यापार में गिरावट समझौते से उम्मीद

    ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों में आमतौर पर अधिकतम वस्तुओं पर आयात शुल्क में भारी कटौती या पूरी तरह समाप्ति की व्यवस्था की जाती है। साथ ही सेवाओं और निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया जाता है।

    वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से इजरायल को निर्यात 52% घटकर 2.14 अरब डॉलर रह गया जबकि आयात भी 26.2% की गिरावट के साथ 1.48 अरब डॉलर पर आ गया। ऐसे में FTA से दोनों देशों के व्यापार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

  • भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम

    भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम


    नई दिल्ली । GCC छह खाड़ी देशों का संगठन है जिसमें सऊदी अरब UAE कतर कुवैत ओमान और बहरीन शामिल हैं। पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग 5000 साल पुराने हैं। वर्तमान में लगभग 1 करोड़ भारतीय इन देशों में रहते हैं और उनकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह FTA वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ाने निवेश को बढ़ावा देने और नीतिगत स्थिरता लाने का लक्ष्य रखता है।

    पाक-सऊदी रक्षा समझौते का प्रभाव
    भारत और GCC के बीच बातचीत उस समय शुरू हो रही है जब क्षेत्रीय भू-राजनीति जटिल है। सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ‘सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता’SMDA पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य गतिरोधऑपरेशन सिंदूर के कुछ महीनों बाद हुआ। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था।

    UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव
    जहां पाकिस्तान-सऊदी नजदीकियां बढ़ रही हैं वहीं UAE और पाकिस्तान के संबंधों में खटास देखी जा रही है। UAE ने पाकिस्तान के साथ एक विमानतल प्रबंधन सौदा रद्द कर दिया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार यह सौदा स्थगित किया गया क्योंकि पाकिस्तान ने स्थानीय साझेदार का नाम नहीं भेजा।

    विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते के बाद UAE-पाकिस्तान दूरी बढ़ी है।

    भारत-UAE के बढ़ते संबंध
    UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की दिल्ली यात्रा ने भारत-UAE संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। यात्रा के कुछ घंटों बाद दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार $200 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा। खाड़ी देशों में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी और UAE के साथ भारत के बढ़ते संबंध खाड़ी देशों की प्राथमिकताओं में बदलाव को दिखाते हैं।

  • भारत-चिली एफटीए जल्द होगा, महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र के खुलेंगे रास्ते : गोयल

    भारत-चिली एफटीए जल्द होगा, महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र के खुलेंगे रास्ते : गोयल


    नई दिल्‍ली।
    केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने शुक्रवार को कहा कि भारत और चिली (India and Chile) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) (Free Trade Agreements – FTAs) के लिए बातचीत जल्द ही पूरी हो जाएगी। इस समझौते से घरेलू व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

    ग्रेटर नोएडा में भारतीय सनदी लेखागार संस्थान (आईसीएआई) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि हम कई विकसित देशों के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं और जल्द ही चिली के साथ एफटीए को अंतिम रूप देंगे। यह हमारे लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रास्ते खोल देगा।भारत और चिली ने 2006 में एक तरजीही व्यापार समझौते (पीटीए) को लागू किया था और अब इसे एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) में बदलने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इस नए समझौते का उद्देश्य डिजिटल सेवाओं, निवेश प्रोत्साहन, एमएसएमई और महत्वपूर्ण खनिजों सहित विभिन्न क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करना है।

    वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री ने यह भी बताया कि पिछले चार वर्षों में भारत ने मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, न्यूजीलैंड, ओमान, ईएफटीए (ईएफटीए), ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) सहित आठ विकसित राष्ट्रों और समूहों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से 32 प्रमुख यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है। गोयल ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्‍त व्‍यापार समझौते (एफटीए) के असर के बारे में बात करते हुए कहा कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

    दक्षिण अमेरिकी देश चिली के पास लिथियम, तांबा, रेनियम, मोलिब्डेनम और कोबाल्ट जैसे प्रमुख खनिजों का विशाल भंडार है। ये इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन और सौर ऊर्जा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत और चिली के बीच द्विपक्षीय व्यापार अभी मध्यम स्तर पर है। वित्त वर्ष 2024-25 में चिली को भारत का निर्यात 2.46 फीसदी घटकर 1.15 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 72 फीसदी बढ़कर 2.60 अरब डॉलर हो गया।

  • भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला  एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार

    भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार


    नई दिल्ली । 2025 का वर्ष वैश्विक व्यापार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर साबित हुआ खासकर भारत के लिए जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट नीति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए भारत पर 50% आयात शुल्क लगा दिए। इस टैरिफ ने भारत के निर्यातकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था। खासकर कपड़ा रत्न-आभूषण दवा समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों पर इस फैसले का असर पड़ा।

    लेकिन भारत ने इस चुनौती का सामना बड़े ही समझदारी से किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को मजबूत करते हुए मुक्त व्यापार समझौतों का सहारा लिया जिससे न केवल निर्यात में वृद्धि हुई बल्कि कई देशों के साथ संबंध भी मजबूत हुए। नतीजतन नवंबर 2025 में भारत के कुल निर्यात में 19.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अमेरिका को निर्यात में 22% से ज्यादा उछाल आया जो एक बड़ा आश्चर्य था।

    भारत ने एफटीए पर काम तेज किया

    अमेरिकी टैरिफ से जूझते हुए भारत ने तेजी से मुक्त व्यापार समझौतों पर काम करना शुरू कर दिया। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भारत इस समय यूरोपीय संघ न्यूजीलैंड और चिली के साथ उन्नत स्तर की एफटीए वार्ता कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने ओमान के साथ पहला एफटीए समझौता करने की योजना बनाई जिस पर नवंबर में हस्ताक्षर किए गए। यह एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने खासकर इंजीनियरिंग उत्पादों वस्त्र फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण था।

    एफटीए भारत की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा

    भारत की आर्थिक रणनीति में एफटीए अब एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। ये समझौते भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहरी हिस्सेदारी दिलाने निर्यात में निरंतर वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करते हैं। एफटीए के माध्यम से व्यापार टैरिफ में कटौती और स्थिर व्यापार नियम भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करते हैं साथ ही नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियां

    अमेरिकी टैरिफ की चुनौती के बावजूद भारत ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं से बचने के लिए एफटीए पर तेजी से काम किया। व्यापार विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव के मुताबिक भारत एफटीए को एक रणनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है जिससे निर्यात बाजारों में विविधता लाई जा सके और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के असर को कम किया जा सके। भारत के पास फिलहाल 26 देशों के साथ 15 एफटीए हैं और 26 अन्य देशों के साथ प्राथमिकता व्यापार समझौते हैं।

    भारत की एफटीए नीति से बढ़ा भरोसा

    हाल के वर्षों में भारत ने यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते किए हैं जिससे इन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी साल मई में भारत और ब्रिटेन ने भी लंबे समय से लंबित एफटीए पर सहमति की घोषणा की थी जिसके तहत भारतीय खाद्य उत्पादों और मसालों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इन समझौतों ने तेज और स्पष्ट व्यापार ढांचे की जरूरत को और मजबूत किया है।

    सरकार का रुख और भविष्य की दिशा

    भारत सरकार वैश्विक व्यापार में चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद एफटीए वार्ताओं को आगे बढ़ा रही है। व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि आगामी वर्ष में इन समझौतों से अच्छे नतीजे मिलेंगे। हालांकि भारत के व्यापारिक साझेदारों से ज्यादा बाजार पहुंच की मांग और छोटे किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

    भारत और अमेरिका के रिश्ते

    भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव आए हैं खासकर रूस से रियायती कच्चे तेल की निरंतर खरीद को लेकर। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में नरमी के संकेत मिले हैं। पीएम मोदी ने ट्रंप की शांति योजना की सराहना की और दोनों नेताओं ने फोन पर व्यापार और अन्य मुद्दों पर बातचीत की।

    कई देशों से हाथ मिलाने का कारण

    वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के दौर में भारत अब एक स्थिर और आकर्षक पार्टनर के रूप में उभर रहा है। विकसित देशों जैसे ब्रिटेन यूरोपीय संघ और ईएफटीए के देशों के लिए भारत का बड़ा बाजार और सस्ते उत्पाद आकर्षण का कारण बन रहे हैं जबकि उभरते बाजार जैसे ओमान चिली क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग देख रहे हैं
    भारत की एफटीए नीति वैश्विक व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच उसके निर्यात और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक मजबूत रणनीतिक कदम साबित हो रही है। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।

  • US को भारत का ऑफर पसंद है तो उसे तुरंत कर देना चाहिए FTA पर साइन: पीयूष गोयल

    US को भारत का ऑफर पसंद है तो उसे तुरंत कर देना चाहिए FTA पर साइन: पीयूष गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री (Minister of Commerce and Industry) पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने गुरुवार को कहा कि अगर वॉशिंगटन (Washington) को भारत का ऑफर (India’s offer) पसंद है, तो अमेरिका ((America) को भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free trade agreements- FTA) पर तुरंत साइन कर देने चाहिए. पीयूष गोयल ने ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत के प्रस्ताव की सराहना किए जाने का स्वागत किया, लेकिन भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित इस ट्रेड डील पर साइन होने की कोई समयसीमा बताने से इनकार कर दिया.

    पीयूष गोयल अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को भारत की ओर से ‘अब तक का सबसे अच्छा ऑफर’ मिला है. उन्होंने कहा, ‘अगर वे खुश हैं, तो उन्हें तुरंत साइन कर देना चाहिए.’ उन्होंने भारत के प्रस्ताव के बारे में बताने से मना कर दिया.

    ‘भारत-US में ट्रेड डील जल्द…’, अब ट्रंप के अधिकारी बोले- दोनों हैं अच्छे दोस्त
    मंत्री ने बताया कि ट्रेड डील पर अब तक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है और वर्तमान में भारत आए अमेरिका के डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव रिक स्विट्जर की यात्रा किसी नए दौर की बातचीत के लिए नहीं है, बल्कि एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने के लिए है.

    ‘डेडलाइन के दबाव में डील नहीं होनी चाहिए’
    पीयूष गोयल हाल के महीनों में चिली, इजरायल और न्यूजीलैंड समेत कई देशों के साथ FTA पर काम कर रहे हैं. इस बीच, जब उनसे मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की उस टिप्पणी पर सवाल पूछा गया कि यह डील अगले साल मार्च तक साइन हो जाएगी, तो गोयल ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है और वे किसी समयसीमा पर टिप्पणी नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा, ‘डील तभी होती है जब दोनों पक्षों को फायदा हो. डेडलाइन के दबाव में समझौता नहीं होना चाहिए.’