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  • 10 साल में कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹838 से ₹2810 तक पहुंचा, जानें अक्टूबर में कैसे बदलती रही 19 किलो सिलेंडर की कीमत

    10 साल में कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹838 से ₹2810 तक पहुंचा, जानें अक्टूबर में कैसे बदलती रही 19 किलो सिलेंडर की कीमत

    नई दिल्ली: कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में पिछले एक दशक के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत सितंबर 2016 में ₹838 थी, जो अक्टूबर 2026 में बढ़कर ₹2810 हो गई। यानी करीब 10 साल की अवधि में इसकी कीमत में बड़ा अंतर आया है। अक्टूबर के महीने में कई वर्षों के दौरान कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी देखने को मिली। 2026 में अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 62.50 रुपये से 71.50 रुपये तक बढ़ी और दिल्ली में इसका दाम ₹2810 पहुंच गया।

    2014 से कीमतों में बदलाव का सिलसिला देखा जाए तो सितंबर 2014 में दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1503 थी। 1 अक्टूबर को कीमत अपडेट होने के बाद यह ₹30.50 घटकर ₹1472.50 हो गई। 2015 में भी अक्टूबर में कीमत में कमी आई। सितंबर 2015 तक सिलेंडर की कीमत ₹1005.50 थी, जो अक्टूबर में ₹42.50 घटकर ₹963 रह गई। इसके बाद 2016 से 2021 के बीच अक्टूबर के दौरान कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का दौर देखने को मिला। सितंबर 2016 में ₹838 वाला सिलेंडर अक्टूबर में ₹57 महंगा होकर ₹895 हो गया।

    2021 तक यह बढ़ोतरी काफी आगे पहुंच चुकी थी। अक्टूबर 2021 में दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1736.50 हो गई। इसके बाद अक्टूबर 2022 में सितंबर की ₹1885 कीमत के मुकाबले सिलेंडर ₹25.50 सस्ता होकर ₹1859.50 पर आ गया। 2023 में सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹209 बढ़ी और यह ₹1522.50 से बढ़कर ₹1731.50 हो गई। इस तरह अलग-अलग वर्षों में कीमतों में बढ़ोतरी और कमी दोनों देखने को मिली।

    2024 में भी अक्टूबर के दौरान कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ। सितंबर की ₹1691.50 कीमत के मुकाबले अक्टूबर में इसमें ₹48.50 की बढ़ोतरी हुई और दाम ₹1740 हो गया। 2025 में भी अक्टूबर में कीमत ₹15.50 बढ़ी। सितंबर 2025 में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹1580 थी, जो अक्टूबर में बढ़कर ₹1595.50 हो गई। हालांकि सालाना आधार पर उस समय कीमत कम रही। इस तरह पिछले वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान कई बार कीमत बढ़ने का रुझान दिखाई देता है।

    कमर्शियल LPG की कीमत तय होने में अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों की भी भूमिका होती है। LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के लिए अरब गल्फ बेंचमार्क महत्वपूर्ण माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय LPG रेट में बदलाव का असर भारत में इसकी लागत पर पड़ता है। कीमत तय करने में पिछले महीने के औसत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विदेशी मुद्रा की दर जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है। इसी आधार पर तेल विपणन कंपनियां LPG की कीमतों में बदलाव करती हैं। पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में समय के साथ काफी उतार-चढ़ाव आया है और सितंबर 2016 के ₹838 से अक्टूबर 2026 के ₹2810 तक पहुंचने के बीच कई चरणों में बड़े बदलाव हुए।

  • पेट्रोल-डीजल महंगा होने के संकेत, 4–5 रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम, महंगाई का नया दबाव

    पेट्रोल-डीजल महंगा होने के संकेत, 4–5 रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम, महंगाई का नया दबाव

    नई दिल्ली। ईंधन की कीमतों को लेकर एक बार फिर बाजार में हलचल बढ़ गई है। ताजा संकेतों के अनुसार आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों ईंधनों की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो सकता है, जिससे आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।

    यह संभावित वृद्धि ऐसे समय में सामने आ रही है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वैश्विक परिस्थितियों में अस्थिरता और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल के दामों में तेजी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।

    ईंधन की कीमतों में लंबे समय से स्थिरता बनी हुई थी, लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ने की वजह से कीमतों में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने पर सबसे पहले परिवहन लागत प्रभावित होती है। इसके बाद इसका असर माल ढुलाई पर पड़ता है, जिससे बाजार में उपलब्ध हर वस्तु की कीमत बढ़ने लगती है। सब्जी, दूध, अनाज और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी महंगी हो सकती हैं।

    इसके अलावा कृषि क्षेत्र पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि सिंचाई पंप और अन्य उपकरणों में डीजल का उपयोग होता है। कीमत बढ़ने पर किसानों की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। इसी तरह डिलीवरी सेवाएं और छोटे व्यवसाय भी बढ़ती लागत से प्रभावित होते हैं।

    हालांकि अभी तक इस संभावित बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बाजार के रुझान और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इस ओर संकेत कर रही हैं कि आने वाला समय ईंधन की कीमतों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और आर्थिक नीतियों में बदलाव आने वाले दिनों में इस स्थिति को और स्पष्ट करेंगे। यदि कीमतों में वृद्धि होती है, तो इसका असर सीधे तौर पर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।

    फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और सभी की नजरें आने वाले आर्थिक संकेतों पर टिकी हैं। ईंधन की कीमतों में संभावित बदलाव एक बार फिर महंगाई की दिशा तय कर सकता है और आम जीवन को प्रभावित कर सकता है।

  • गैस कीमतों में बड़ा बदलाव, व्यापारियों की लागत बढ़ी, आम उपभोक्ताओं को राहत बरकरार

    गैस कीमतों में बड़ा बदलाव, व्यापारियों की लागत बढ़ी, आम उपभोक्ताओं को राहत बरकरार

    नई दिल्ली।  एलपीजी कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने व्यावसायिक क्षेत्र की लागत को सीधे प्रभावित किया है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 993 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद राजधानी सहित देश के कई हिस्सों में इसकी कीमत 3,071.5 रुपए के स्तर तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और कच्चे तेल तथा गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

    इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग जैसे व्यवसायों पर पड़ने की संभावना है, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में एलपीजी का उपयोग होता है। लागत बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में संचालन खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर सेवाओं और उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी एक अतिरिक्त आर्थिक दबाव के रूप में सामने आई है।

    हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर पहले की तरह ही पुराने दामों पर उपलब्ध रहेंगे। इससे करोड़ों परिवारों को महंगाई के इस दौर में कुछ राहत मिली है और घरेलू बजट पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है।

    पिछले कुछ महीनों के आंकड़े देखें तो यह स्पष्ट होता है कि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में यह लगातार तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले भी दो बार कीमतों में इजाफा हो चुका है, जिससे व्यावसायिक क्षेत्र पहले से ही दबाव में चल रहा था। लगातार बढ़ती लागत ने कारोबारियों के लिए चुनौतियां और अधिक बढ़ा दी हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुनाफा पहले से ही सीमित रहता है।

    दूसरी ओर, ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के प्रयास भी जारी हैं। पेट्रोल, डीजल और अन्य प्रमुख ईंधनों की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसके साथ ही सरकार और संबंधित व्यवस्था यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि घरेलू ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें।

    यह स्थिति दो अलग-अलग प्रभाव दिखाती है, जहां एक ओर व्यापारिक क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा ही यह तय करेगी कि एलपीजी की कीमतों में आगे क्या रुझान देखने को मिलेगा।