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  • पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक

    पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) बचाने के लिए कई फैसले लागू किए हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में अब सभी दुकानें बाज़ार, किराना स्टोर, ग्रोसरी और जनरल स्टोर, शॉपिंग मॉल पूरे हफ़्ते रात 9 बजे बंद हो जाएंगे. शादी हॉल और मैरिज टेंट रात 10 बजे तक बंद हो जाने चाहिए. रेस्टोरेंट और खाने-पीने की जगहें रात 11 बजे तक बंद हो जानी चाहिए. यही नहीं शादी समारोहों (Wedding Ceremonies) में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जा सकेगी. पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है।

    पाकिस्तान ईरान जंग की वजह से भीषण ईंधन संकट से गुजर रहा है. किफ़ायत के ये नए उपाय फ़िलहाल इस्लामाबाद तक ही सीमित हैं, लेकिन पाकिस्तान की फेडरल सरकार ने राज्यों को कहा है कि वे भी इस उपाय को अपनाएं। यही नहीं पाकिस्तान में अपनाए गए नए उपायों में सरकारी गाड़ियां खरीदने पर पूरी तरह रोक, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन आवंटन में 50% की कटौती शामिल है।

    खर्चा बचाने के लिए पाकिस्तान ने फ़ेडरल सरकार के कर्मचारियों के विदेश यात्रा करने पर तीन महीने की रोक लगा दी है. अगर मंत्री विदेश यात्रा पर जाएंगे तो उन्हें इकोनॉमी क्लास में ट्रेवल करने को कहा गया है. बता दें कि ईरान युद्ध, इकोनॉमी की खस्ताहालत और कर्जों ने पाकिस्तान को बुरा हाल कर रखा है. इसलिए पाकिस्तान सरकार को ये फैसले लेने पड़े हैं।

    पाकिस्तान ने मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इसी तरह के खर्च में कटौती के उपाय लागू किए थे. उन उपायों के तहत इस्लामाबाद ने दो हफ़्ते के लिए स्कूल बंद कर दिए थे, सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन की खपत कम कर दी थी, और ईंधन बचाने व सरकारी खर्च घटाने के मकसद से ऑफ़िस कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा था. अब पाकिस्तान एक बार फिर से ऐसे ही उपायों को अपना रहा है।

    पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीज़न ने गुरुवार को इस बारे में नोटिफ़िकेशन जारी किया और ये उपाय तुरंत लागू हो गए. ईंधन की खपत में कटौती और फ़ेडरल अधिकारियों के विदेश यात्रा पर प्रतिबंध समेत कुछ पाबंदियां कम से कम तीन महीने तक लागू रहेंगी।

    PAK के एक अखबार के अनुसार आम लोगों पर असर डालने वाले उपायों में पाकिस्तान सरकार ने निर्देश दिया है कि शादी से जुड़े सभी कार्यक्रमों और आयोजनों में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जाए. सरकार ने कहा है कि कमर्शियल जगहों के लिए जल्दी बंद होने का समय भी तय किया गया है. दुकानों, बाज़ारों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल और ग्रोसरी स्टोर को रात 9 बजे तक बंद करना होगा।

    शादी-ब्याह के हॉल, टेंट और दूसरे कमर्शियल वेन्यू जहां जश्न वाले कार्यक्रम होते हैं, उन्हें रात 10 बजे तक बंद करना होगा, जबकि रेस्टोरेंट, कैफ़े, खाने-पीने की जगहों और फ़ूड आउटलेट को रात 11 बजे तक बंद करना होगा. टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को इस पाबंदी से छूट दी गई है।


    सरकारी खर्च में 5% की कटौती

    – पाकिस्तान ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान कर्मचारियों से जुड़े खर्चों को छोड़कर अन्य खर्चों (Non-ERE) में हर महीने 5% की कटौती की जाएगी.
    – यह नियम पाकिस्तान के विदेशी मिशनों और विदेशों में तैनात अधिकारियों पर भी लागू होगा. विकास परियोजनाओं को खर्च में कटौती के दायरे से बाहर रखा गया है.
    – सरकार ने तीन महीने के लिए विदेश दौरों और यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगाने की भी घोषणा की है, जिसमें अनिवार्य दौरे भी शामिल हैं.
    – जिन मामलों में विदेश यात्रा ज़रूरी है वहां सरकारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों को इकॉनमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है.
    – एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये पाबंदियां मंत्रियों, सलाहकारों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के विशेष सहायकों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों पर लागू होती हैं.


    सरकारी डिनर और सेमिनार पर भी रोक

    – पाकिस्तान ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है, लेकिन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े कार्यक्रमों में इसमें छूट दी गई है. पाकिस्तान ने अपने सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के भीतर होने वाली बैठकों को छोड़कर, ज़्यादातर टेलीकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए बैठकें करें. सरकार के फ़ंड से होने वाले सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ़्रेंस पर भी रोक लगा दी गई है. अगर ऐसे कार्यक्रम करना ज़रूरी हो, तो विभागों से कहा गया है कि वे बाहरी जगहों पर पैसे खर्च करने के बजाय सरकारी सुविधाओं, जैसे ऑडिटोरियम और कमिटी रूम का इस्तेमाल करें।

  • सार्वजनिक परिवहन बनाम वीआईपी संस्कृति: आशुतोष की अपील से फिर केंद्र में आए अरविंद केजरीवाल

    सार्वजनिक परिवहन बनाम वीआईपी संस्कृति: आशुतोष की अपील से फिर केंद्र में आए अरविंद केजरीवाल

    नई दिल्ली । देश और दुनिया में बढ़ते ऊर्जा संकट और राजनीतिक सादगी की बहस के बीच एक बार फिर सार्वजनिक जीवनशैली और नेताओं की यात्रा शैली चर्चा के केंद्र में आ गई है। इसी संदर्भ में आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और वरिष्ठ पत्रकार Ashutosh ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की है जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। आशुतोष ने केजरीवाल से अपील की है कि वे एक बार फिर मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन की सादगी को दोहराएं।

    यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर तनाव गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति से जुड़े मार्गों में आई बाधाओं के कारण कई देशों में ईंधन की कीमतों पर असर देखा जा रहा है, जिसका प्रभाव भारत में भी महसूस किया जाने लगा है। ऐसे माहौल में सार्वजनिक जीवन में ईंधन की खपत और वीआईपी काफिलों की लागत पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में आशुतोष का बयान और अधिक राजनीतिक महत्व रखता है।

    आशुतोष ने अपने बयान में उस पुराने क्षण को भी याद दिलाया जब अरविंद केजरीवाल ने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दौरान मेट्रो से यात्रा की थी। उस समय इसे सादगी और जनता से जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा गया था। अब आशुतोष का कहना है कि यदि वर्तमान परिस्थितियों में राजनीतिक नेतृत्व सादगी का संदेश देता है, तो यह जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और ईंधन बचत जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी असर पड़ेगा।

    इस बीच देश के कई राज्यों में शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपने काफिलों और सरकारी वाहनों के उपयोग में कटौती के निर्णय भी सामने आए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से वीआईपी काफिलों के आकार को सीमित करने की अपील के बाद विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव देखे जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सरकारी वाहनों के उपयोग को अधिक नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं, जबकि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या में कटौती की है।

    इसी तरह अन्य राज्यों में भी प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सादगी और संसाधन बचत को लेकर नए कदम उठाए जा रहे हैं। बिहार में उपमुख्यमंत्री स्तर के नेतृत्व ने भी अपने काफिले को सीमित करने की दिशा में निर्णय लिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सार्वजनिक जीवन में संयम और खर्च नियंत्रण को लेकर एक व्यापक संदेश उभर रहा है।

    आशुतोष की यह टिप्पणी केवल एक व्यक्तिगत अपील नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राजनीतिक प्रतीकवाद के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का उपयोग नेताओं द्वारा किया जाना जनता के बीच एक मजबूत संदेश देता है कि शासन और नेतृत्व केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आम नागरिक के अनुभवों से भी जुड़ा है।

    हालांकि इस पूरे मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है, लेकिन इतना तय है कि सादगी, ऊर्जा संकट और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को लेकर यह बहस आगे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी रहेगी।

  • क्या भारत में लागू होगा पेट्रोल-डीजल कोटा सिस्टम? जानिए Fuel Rationing का पूरा मतलब

    क्या भारत में लागू होगा पेट्रोल-डीजल कोटा सिस्टम? जानिए Fuel Rationing का पूरा मतलब


    नई दिल्ली। ईरान संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल सप्लाई को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में जानिए क्या होता है फ्यूल राशनिंग और क्या भारत में इसकी जरूरत पड़ सकती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के बीच वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच भारत में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में पेट्रोल-डीजल पर कोटा सिस्टम यानी फ्यूल राशनिंग लागू हो सकता है।
    क्या होता है Fuel Rationing सिस्टम?
    फ्यूल राशनिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सरकार सीमित ईंधन आपूर्ति की स्थिति में हर व्यक्ति या वाहन के लिए पेट्रोल, डीजल या गैस की एक तय सीमा निर्धारित कर देती है। इसका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का संतुलित और आवश्यक उपयोग सुनिश्चित करना होता है।
    यह व्यवस्था आमतौर पर तब लागू की जाती है जब-

    युद्ध या अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण सप्लाई बाधित हो
    कच्चे तेल की भारी कमी हो जाए
    लॉजिस्टिक या सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो
    देश में ऊर्जा संकट जैसी स्थिति बन जाए
    ऐसे हालात में सरकार प्राथमिकता तय करती है, जैसे कि एंबुलेंस, पुलिस, सार्वजनिक परिवहन और जरूरी सेवाओं को पहले ईंधन उपलब्ध कराना।
    क्या भारत में लागू हो सकता है कोटा सिस्टम?

    विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारत में फ्यूल राशनिंग लागू होने की कोई स्थिति नहीं है। देश के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर जरूर पड़ता है, लेकिन अभी सप्लाई व्यवस्था स्थिर बनी हुई है। सरकार का फोकस फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने और वैकल्पिक स्रोतों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने पर है।


    विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारत में फ्यूल राशनिंग लागू होने की कोई स्थिति नहीं है। देश के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर जरूर पड़ता है, लेकिन अभी सप्लाई व्यवस्था स्थिर बनी हुई है। सरकार का फोकस फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने और वैकल्पिक स्रोतों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने पर है।

    आगे क्या हो सकता है?
    अगर भविष्य में पश्चिम एशिया का तनाव लंबा चलता है और तेल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित होती है, तो ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि कोटा सिस्टम जैसी सख्त व्यवस्था अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाई जाती है। फिलहाल सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा रखने की अपील की है।
  • यूरोप पर मंडरा रहा ‘फ्यूल संकट’ का खतरा: सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन, उड़ानें रद्द होने की आशंका

    यूरोप पर मंडरा रहा ‘फ्यूल संकट’ का खतरा: सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन, उड़ानें रद्द होने की आशंका

    वाशिंगटन। मिडल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप लेता दिख रहा है।
    अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास जेट ईंधन का भंडार बेहद सीमित रह गया है—सिर्फ करीब छह सप्ताह या उससे थोड़ा अधिक। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में फ्लाइट्स कैंसल होने की नौबत आ सकती है।

    होर्मुज बना संकट का ‘गला दबाने वाला पॉइंट’

    बिरोल ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को इस पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण बताया। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। मौजूदा युद्ध के चलते यहां आपूर्ति बाधित है, जिससे तेल, गैस और अन्य जरूरी संसाधनों की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ रहा है।

    उन्होंने साफ कहा—अगर यह मार्ग जल्द नहीं खुला, तो यह “अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” साबित हो सकता है।

    यूरोप में ईंधन की किल्लत, दुनिया पर असर

    IEA प्रमुख के मुताबिक, यूरोप में जेट ईंधन की कमी सबसे पहले नजर आएगी।

    फ्लाइट्स रद्द होने लगेंगी
    पेट्रोल, गैस और बिजली महंगी होगी
    सप्लाई चेन प्रभावित होगी

    इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा—महंगाई बढ़ेगी और विकास दर धीमी पड़ सकती है।

    गरीब देशों पर सबसे ज्यादा मार

    बिरोल ने चेताया कि इस संकट का असर सभी देशों पर पड़ेगा, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को झेलना पड़ेगा।

    उनके मुताबिक,

    आर्थिक नुकसान असमान होगा
    कमजोर अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा प्रभावित होंगी
    कुछ देशों में मंदी तक की स्थिति बन सकती है
    ‘टोल बूथ’ सिस्टम पर आपत्ति

    ईरान द्वारा होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल) लगाने की कोशिश पर भी बिरोल ने कड़ी आपत्ति जताई।

    उन्होंने कहा कि अगर यह व्यवस्था स्थायी हो गई, तो भविष्य में अन्य अहम समुद्री रास्तों—जैसे मलक्का स्ट्रेट—पर भी ऐसा हो सकता है, जो वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक संकेत है।

    टैंकर फंसे, उत्पादन ठप
    फारस की खाड़ी में 110+ तेल टैंकर और 15+ LNG जहाज फंसे हुए हैं
    युद्ध में 80 से ज्यादा ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित
    उत्पादन सामान्य होने में कई महीने, पूरी रिकवरी में 2 साल तक लग सकते हैं
    आगे क्या?

    बिरोल के अनुसार, अगर मई के अंत तक हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया को

    ऊंची महंगाई
    धीमी आर्थिक वृद्धि
    और संभावित मंदी
    का सामना करना पड़ सकता है।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह संकट भविष्य में परमाणु ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर दुनिया को तेजी से मोड़ सकता है।

    ऊर्जा और भू-राजनीति का यह टकराव अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है। अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द नहीं खुला, तो आने वाले हफ्तों में इसका असर सीधे लोगों की जेब और यात्रा दोनों पर दिखेगा।

  • फ्यूल संकट के बीच सरकार दे रही PNG को बढ़ावा, अब 24 घंटे में मिलेगा नया कनेक्शन

    फ्यूल संकट के बीच सरकार दे रही PNG को बढ़ावा, अब 24 घंटे में मिलेगा नया कनेक्शन


    नई दिल्ली।
    ईंधन संकट (Fuel Crisis) के बीच भारत सरकार (Indian Government) PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस (Piped Natural Gas) को बढ़ावा देती नजर आ रही है। खबर है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार को कहा है कि नए PNG कनेक्शन को 24 घंटों के अंदर ही मंजूरी दे दी जाए। अधिकारी ने बताया है कि घरेलू पीएनजी और सीएनजी ग्राहकों को 100 प्रतिशत सप्लाई की जा रही है। जबकि, कमर्शियल एलपीजी बिक्री को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का सीधा असर दुनिया के ईंधन सप्लाई पर पड़ा है। दुनिया के सबसे अहम जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने रोक लगा दी थी, जिसके चलते दोनों ओर गैस के कई जहाज अटक गए हैं। हालांकि, हाल में ही भारत के तीन जहाज जलमार्ग को पार करने में सफल रहे हैं।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने ईंधन आपूर्ति और पीएनजी तक पहुंच बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘क्रूड की उपलब्धता मुद्दा नहीं है।’ उन्होंने जानकारी दी है रिफाइनरीज अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहीं हैं और रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की कोई भी कमी नहीं है।


    PNG को बढ़ावा दे रही केंद्र सरकार

    जनता को PNG की तरफ प्रोत्साहित करने को लेकर केंद्र ने राज्य सरकारों को और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि पाइपलाइन गैस से जुड़े आवेदनों पर तुरंत काम किया जाए। मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने राज्यों से पीएनजी (PNG) से संबंधित नई अनुमतियों को 24 घंटे के भीतर मंजूरी देने और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी में तेजी लाने के लिए कहा है।

    खबर है कि बड़े शहरों में कमर्शियल एलपीजी ग्राहकों और शहरी इलाकों के उपभोक्ताओं से पीएनजी का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। कई CGD कंपनियां नए कनेक्शन पर इन्सेंटिव भी दे रहीं हैं।


    कैसे कर सकते हैं आवेदन

    खास बात है कि सरकार कंपनियों को ही ग्राहकों तक पहुंचने के लिए कह रही है। शर्मा ने कहा कि CGD कंपनियों को सलाह दी गई है कि संभावित ग्राहकों तक पहुंचें और नए कनेक्शन्स में तेजी लाएं। इसके अलावा ग्राहक ईमेल, कस्टमर पोर्टल, लैटर या कॉल सेंटर समेत कई माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं।

    एलपीजी सप्लाई को लेकर जारी चिंताओं पर भी उन्होंने बात की। शर्मा ने कहा कि कुछ स्थानों पर यह मुद्दा है, लेकिन अब तक संसाधन पूरी तरह खत्म होने की खबर नहीं है। व्यावसायिक मांग संभालने के लिए, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मणिपुर, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार गैर-घरेलू एलपीजी आवंटित करने के आदेश जारी किए हैं।