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  • पेट्रोल की कीमतों का रहस्य: अंतरराष्ट्रीय गिरावट का फायदा क्यों नहीं मिल रहा?

    पेट्रोल की कीमतों का रहस्य: अंतरराष्ट्रीय गिरावट का फायदा क्यों नहीं मिल रहा?


    नई दिल्ली । दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इसका फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि आम लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब ब्रेंट क्रूड सस्ता हो रहा है तो देश में पेट्रोल और डीजल महंगा क्यों हो रहा है।

    दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ चुका है, जिससे यह उम्मीद थी कि भारत में ईंधन सस्ता होगा। लेकिन इसके उलट हाल के हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर कई रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    इस स्थिति की एक बड़ी वजह तेल कंपनियों की मूल्य नीति और उनका वित्तीय संतुलन है। भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited पहले वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पाईं थीं। उस समय कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुद घाटा सहा था। अब माना जा रहा है कि वे उसी पुराने नुकसान की भरपाई कर रही हैं।

    इसके अलावा भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता भी कीमतों को प्रभावित करती है। देश अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव भी घरेलू कीमतों पर सीधा असर डालता है।

    एक और अहम कारण है डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी। भारत कच्चे तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करता है, इसलिए जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है। इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता क्यों न हो रहा हो।

    कीमतों में टैक्स का भी बड़ा योगदान होता है। पेट्रोल और डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के एक्साइज ड्यूटी और वैट जैसे टैक्स भी शामिल होते हैं। यही टैक्स अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत को काफी बढ़ा देते हैं।

    इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन खर्च, डीलर कमीशन और लॉजिस्टिक्स लागत भी अंतिम कीमत में जुड़ते हैं। इन सभी कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर तुरंत भारतीय बाजार में नहीं दिखता।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और नीचे नहीं आतीं, रुपया मजबूत नहीं होता और टैक्स संरचना में राहत नहीं मिलती, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी कमी की उम्मीद करना मुश्किल है।

  • ईंधन महंगाई का असर: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG के दाम भी बढ़े

    ईंधन महंगाई का असर: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG के दाम भी बढ़े


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं। शनिवार रात को थिंक एजेंसी द्वारा जारी नई दरों के मुताबिक CNG की कीमतों में ₹3 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद भोपाल में CNG का नया रेट ₹93.75 प्रति किलो तक पहुंच गया है। नई कीमतें आज से लागू हो चुकी हैं।

    भोपाल, सीहोर, राजगढ़ और विदिशा जैसे जिलों में CNG की सप्लाई मुख्य रूप से THINK Gas द्वारा की जाती है। कंपनी की ओर से पिछले दो महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है, जिससे कुल मिलाकर CNG करीब ₹5 प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है।

    लगातार बढ़ते ईंधन दामों से बढ़ी चिंता
    सीएनजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पहले ही पेट्रोल-डीजल और LPG के दामों में उछाल देखा जा चुका है। हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3 से ₹3.50 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई थी। इसके अलावा घरेलू गैस सिलेंडर और दूध की कीमतों में भी पिछले महीनों में इजाफा हुआ है। भोपाल में पेट्रोल अब ₹109.71 प्रति लीटर और डीजल ₹94.88 प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। वहीं CNG की बढ़ी हुई कीमतों ने ऑटो, टैक्सी और CNG वाहनों की चलने लागत बढ़ा दी है।

    CNG वाहनों की बढ़ती संख्या पर असर
    पिछले तीन वर्षों में भोपाल में CNG वाहनों की बिक्री में लगभग 50% तक की बढ़ोतरी हुई थी। रोजाना 10 से 15 नए CNG वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह कम रनिंग कॉस्ट और पेट्रोल-डीजल की तुलना में सस्ता ईंधन था। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने अब इस फायदे को कम कर दिया है। ऑटो चालकों और छोटे ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, जिससे किराए बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

    लगातार बढ़ती महंगाई का सिलसिला
    मार्च से मई 2026 के बीच मध्य प्रदेश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले LPG सिलेंडर महंगा हुआ, फिर दूध, उसके बाद पेट्रोल-डीजल और अब CNG की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम जनता की रसोई और यात्रा दोनों का बजट बिगाड़ दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट, सब्जियों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी असर डाल सकती है। CNG की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के लिए एक और झटका साबित हो रही हैं। पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए यह बढ़ोतरी बजट और अधिक बिगाड़ सकती है।