Tag: fuel price hike

  • दिल्ली से पटना तक पेट्रोल 110 के पार, गोल्ड-सिल्वर खरीदने वालों को मिली राहत

    दिल्ली से पटना तक पेट्रोल 110 के पार, गोल्ड-सिल्वर खरीदने वालों को मिली राहत



    नई दिल्ली। देशभर में आम जनता इस समय भीषण महंगाई के चक्रव्यूह में फंस चुकी है। एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी तरफ सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दाम सर्वकालिक उच्च स्तर के आसपास बने हुए हैं। आज यानी 28 मई 2026 को भी देश के अधिकांश हिस्सों में ईंधन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन से लेकर रोजमर्रा की जरूरी चीजों के महंगे होने का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर, रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद आज सोने और चांदी की कीमतों में बेहद मामूली नरमी देखी गई है, लेकिन यह गिरावट इतनी कम है कि इससे उपभोक्ताओं को कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही है।

    अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने पिछले 13 दिनों में चार बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। इस अल्पावधि में पेट्रोल और डीजल करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा असर दिल्ली-NCR और मुंबई जैसे महानगरों में देखा जा रहा है। दिल्ली में जो पेट्रोल कुछ समय पहले तक 95 रुपये के आसपास था, वह अब 102 रुपये के पार चला गया है। वहीं मुंबई और पटना जैसे शहरों में तो पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को भी पार कर चुकी हैं। इस बढ़ोतरी ने न केवल निजी वाहन चालकों बल्कि ऑटो, कैब और माल ढुलाई करने वाले कमर्शियल वाहनों की कमर तोड़ दी है।

    ईंधन की इस चौतरफा मार के बीच सर्राफा बाजार से आज हल्की गिरावट की खबर आई है। पिछले काफी समय से आसमान छू रहे सोने के भाव में आज थोड़ी सुस्ती रही, जिसके बाद 24 कैरेट सोना बाजार में ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,46,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी मामूली गिरावट आई है और यह ₹2,84,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। हालांकि, इस मामूली गिरावट के बावजूद मई के महीने में चांदी अब तक 11 प्रतिशत से ज्यादा महंगी हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी को तरजीह दे रहे हैं, जिससे लंबी अवधि में इनमें तेजी का रुख बना रहेगा। ऐसे में जानकारों की सलाह है कि इस उच्च स्तर पर एकमुश्त निवेश करने के बजाय छोटी-छोटी किश्तों में खरीदारी करना ही समझदारी होगी।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप


    नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। ईंधन दरों में हालिया बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंताओं को बढ़ा दिया है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर सरकार को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि देश में आम नागरिकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों के दौरान ईंधन की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ा है। उनके अनुसार यह केवल कीमतों में बढ़ोतरी का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई और रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    खड़गे ने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है और आम परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ा दिया है। उनका मानना है कि पेट्रोल और डीजल की दरों में तेजी केवल परिवहन लागत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर बाजार की लगभग हर वस्तु और सेवा पर पड़ता है। ऐसे में आम आदमी को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में ईंधन से जुड़े फैसलों के कारण जनता पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव बढ़ा है और लोगों की बचत तथा खर्च दोनों पर इसका असर देखने को मिला है।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय आम जनता महंगाई और बढ़ते खर्च से जूझ रही है, उस समय ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि लोगों की परेशानी को और बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी बनती जा रही है। उनका कहना है कि जब ईंधन महंगा होता है तो उसका असर हर वर्ग पर पड़ता है, चाहे वह नौकरीपेशा व्यक्ति हो, व्यापारी हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला किसान।

    उन्होंने यह भी कहा कि हालिया मूल्य वृद्धि के बाद सरकारी तेल कंपनियों के प्रदर्शन में तेजी देखने को मिली, जिसे लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उनका आरोप है कि नीतिगत फैसलों का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय कुछ विशेष क्षेत्रों को अधिक मिलता दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी की और कहा कि जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    ईंधन की कीमतें लंबे समय से देश में आर्थिक और राजनीतिक बहस का विषय रही हैं। जैसे-जैसे कीमतों में बदलाव होता है, वैसे-वैसे इसका असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी दिखाई देता है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम सामने आते हैं।

  • तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता: पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ा उछाल, आम आदमी की जेब पर फिर पड़ा भारी असर

    तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता: पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ा उछाल, आम आदमी की जेब पर फिर पड़ा भारी असर


    नई दिल्ली। देशभर में एक बार फिर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई ताजा वृद्धि ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। बीते कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों के बीच सोमवार को फिर बड़ा इजाफा किया गया, जिसने आम उपभोक्ताओं से लेकर व्यापारिक गतिविधियों तक हर क्षेत्र पर असर डालना शुरू कर दिया है। लगातार बढ़ते दामों ने यह संकेत दे दिए हैं कि आने वाले समय में महंगाई का दायरा और अधिक बढ़ सकता है।

    ताजा संशोधन के बाद पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार हुआ बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लगातार बढ़ रही कीमतों ने वाहन चालकों, परिवहन क्षेत्र और व्यापार जगत की चिंता को बढ़ा दिया है। ईंधन कीमतों में हर वृद्धि का सीधा असर बाजार व्यवस्था और आम लोगों की दैनिक जरूरतों पर दिखाई देता है। ऐसे में इस बार हुई बढ़ोतरी को भी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें अब 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर चुकी हैं, जिससे लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। परिवहन लागत में बढ़ोतरी की आशंका के चलते आने वाले दिनों में वस्तुओं और सेवाओं के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माल ढुलाई महंगी होने से खाद्य सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य उपभोक्ता सामानों की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है। ऐसे हालात में बढ़ती महंगाई को लेकर आम परिवारों की चिंता स्वाभाविक मानी जा रही है।

    दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में नई कीमतें लागू होने के बाद लोगों के बीच चर्चा का विषय केवल ईंधन महंगाई बन गई है। लगातार चौथी बार बढ़े दामों ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल राहत की उम्मीद करना आसान नहीं दिखाई दे रहा। ईंधन की बढ़ती लागत से निजी वाहन उपयोग करने वाले लोगों के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। इसका व्यापक प्रभाव आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है।

    दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के समय में कुछ नरमी जरूर देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है और कई कूटनीतिक घटनाक्रम इसके पीछे बड़ी वजह माने जा रहे हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में गिरावट के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल पाना लोगों के बीच सवाल खड़े कर रहा है। माना जा रहा है कि आपूर्ति संबंधी चुनौतियां और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताएं अभी भी ईंधन बाजार को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • भोपाल में पेट्रोल ₹114.65, उज्जैन में डीजल ₹100 के पार-आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ा

    भोपाल में पेट्रोल ₹114.65, उज्जैन में डीजल ₹100 के पार-आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ा


    Madhya Pradesh। मध्य प्रदेश में ईंधन की कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल दरों ने न सिर्फ परिवहन व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि महंगाई के नए संकेत भी दे दिए हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद राज्य में पेट्रोल ₹116 प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि डीजल कई शहरों में ₹100 के आंकड़े को पार कर चुका है।

    राजधानी Bhopal में नए रेट के मुताबिक पेट्रोल ₹114.65 प्रति लीटर और डीजल ₹99.74 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। वहीं राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। Ujjain में डीजल ₹100.11 प्रति लीटर पहुंच गया है, जो इसे प्रदेश का सबसे महंगा शहर बनाता है। यहां पेट्रोल ₹115.03 प्रति लीटर बिक रहा है।

    इसी तरह Indore में पेट्रोल ₹114.54 और डीजल ₹99.57 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। Jabalpur और Gwalior में भी कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

    तेल कंपनियों ने सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई हैं। 25 मई को ही पेट्रोल में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इस महीने की पहली बढ़ोतरी 15 मई को हुई थी, उसके बाद 19 मई और 23 मई को भी लगातार रेट बढ़ाए गए। कुल मिलाकर इस छोटे से अंतराल में पेट्रोल-डीजल करीब ₹8 प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।

    इस तेज बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, फल और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। ट्रक और टेम्पो किराए में बढ़ोतरी से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर जल्द ही बाजारों में दिखाई दे सकता है।

    किसानों के लिए भी यह बढ़ोतरी चिंता का विषय है क्योंकि ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और अन्य कृषि उपकरणों में डीजल की खपत अधिक होती है। इससे खेती की लागत बढ़ने और अनाज महंगा होने की संभावना है। वहीं बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

    तेल कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इसी दबाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है।

    तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। कीमतों में कच्चे तेल की लागत, रिफाइनिंग खर्च, टैक्स, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट का बड़ा योगदान होता है। Madhya Pradesh में वैट अधिक होने के कारण यहां ईंधन की कीमतें कई अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा हैं।

    अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े

    मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े


    नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। इस संघर्ष ने खासतौर पर तेल बाजार को हिला दिया है, जिससे अमेरिका और खाड़ी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30 से 72 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    अमेरिका में गैसोलीन और डीजल महंगे

    अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन (लगभग 380 रुपए) के पार चली गई हैं। यह बीते तीन वर्षों में पहला मौका है जब अमेरिकी उपभोक्ताओं को इतने महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, देश में औसत गैसोलीन की कीमत 4.018 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।

    डीजल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। डीजल अब 5 डॉलर प्रति गैलन (करीब 475 रुपए) के पार बिक रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर संभावित हमलों और मध्य पूर्व में तनाव के कारण गैसोलीन और डीजल की कीमतों में क्रमशः 30 और 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

    खाड़ी देश यूएई में रिकार्ड बढ़ोतरी

    यूएई की फ्यूल प्राइस कमेटी ने 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई कीमतों का ऐलान किया है। नए दामों के अनुसार:

    सुपर 98 पेट्रोल की कीमत 30% बढ़कर 3.39 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 87 रुपए) हो गई है, जो पहले 2.59 दिरहम थी।
    स्पेशल 95 पेट्रोल का दाम 32% बढ़कर 3.28 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 84 रुपए) हो गया है, जो पहले 2.48 दिरहम था।
    डीजल की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई, जो 72% बढ़कर 4.69 दिरहम प्रति लीटर (करीब 120 रुपए) पहुंच गई है, जबकि पहले यह 2.72 दिरहम थी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई में डीजल की यह सबसे तेज और रिकॉर्ड बढ़ोतरी है, जो घरेलू और वाणिज्यिक वाहनों के लिए महंगी होगी।

    कच्चे तेल की कीमत में उछाल

    मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत में जबरदस्त तेजी देखी गई है। पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड के दाम 48 प्रतिशत बढ़कर 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गए हैं। इस उछाल का सीधा असर ग्लोबल फ्यूल प्राइस पर पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ा है।

    वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

    विश्लेषकों का कहना है कि इस बढ़ोतरी का असर केवल अमेरिका और यूएई तक सीमित नहीं है। यूरोप, एशिया और भारत सहित कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उभरते देशों में तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।

  • इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें

    इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें


    नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कई देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ जगहों पर ईंधन की राशनिंग तक शुरू हो गई है।

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल महंगा

    नेपाल में नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने पेट्रोल, डीजल और केरोसीन की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं।

    पेट्रोल: 184.50 से 187 रुपये/लीटर (कैटेगरी के अनुसार)
    डीजल/केरोसीन: 164.50 से 167 रुपये/लीटर

    एनओसी ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण घरेलू कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था।

    बांग्लादेश में जेट फ्यूल 80% महंगा

    बांग्लादेश में हालात और ज्यादा गंभीर हैं। Bangladesh Energy Regulatory Commission ने जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 80% की भारी बढ़ोतरी की है।

    घरेलू उड़ानों के लिए: 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका/लीटर
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए: 0.738 डॉलर से बढ़कर 1.3216 डॉलर/लीटर

    इस बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई यात्रा और कार्गो लागत पर पड़ेगा।

    पाकिस्तान और यूरोप भी प्रभावित

    पाकिस्तान में पहले से आर्थिक संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20-25% तक उछाल दर्ज किया गया है। वहीं जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में गैस और पेट्रोल के दाम 10-15% तक बढ़ गए हैं।

    थाईलैंड में शुरू हुई राशनिंग

    थाईलैंड में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है, ताकि सप्लाई संतुलित बनी रहे।

    क्या है राशनिंग का मतलब?

    जब किसी देश में ईंधन की भारी कमी हो जाती है या कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो सरकार या पेट्रोल पंप यह तय कर देते हैं कि एक व्यक्ति एक बार में कितना तेल खरीद सकता है। इससे सीमित संसाधनों का संतुलित वितरण किया जाता है।

    आगे क्या असर पड़ेगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो:

    तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
    महंगाई में तेजी आएगी
    ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे
    आम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा

    ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण तेल महंगा हो रहा है, जिससे नेपाल, बांग्लादेश समेत कई देशों में ईंधन कीमतें बढ़ीं और कुछ जगह राशनिंग तक शुरू हो गई।