Tag: fuel price increase India

  • जेब पर फिर बोझ: MP में CNG की कीमतों में लगातार उछाल, भोपाल में दूसरे हफ्ते में दूसरी बार बढ़े दाम

    जेब पर फिर बोझ: MP में CNG की कीमतों में लगातार उछाल, भोपाल में दूसरे हफ्ते में दूसरी बार बढ़े दाम


    भोपाल    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आम जनता और वाहन चालकों को एक बार फिर महंगे ईंधन का झटका लगा है। शहर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के दामों में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद नए रेट 94.75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। यह बढ़ोतरी 10 दिनों के भीतर दूसरी बार हुई है, जिससे सीएनजी पर निर्भर वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

    यह नई बढ़ोतरी थिंक गैस एजेंसी द्वारा की गई है, जो भोपाल समेत आसपास के कई जिलों में सीएनजी की सप्लाई करती है। इससे पहले 16 मई को भी करीब ₹3 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी। यानी पिछले लगभग दो महीनों में तीन बार कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं और कुल मिलाकर सीएनजी करीब 6 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है।

    जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन पर दबाव के चलते यह वृद्धि देखने को मिल रही है। हालांकि इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जो सीएनजी वाहनों का इस्तेमाल रोजमर्रा के आवागमन या व्यावसायिक कार्यों के लिए करते हैं।

    भोपाल में वर्तमान में करीब 25 सीएनजी स्टेशन सक्रिय हैं, जिनमें मैनिट, नीलबड़, होशंगाबाद रोड और बैरागढ़ रोड जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। शहर के कुल 152 पेट्रोल पंपों में से कुछ पर सीएनजी की सुविधा उपलब्ध है। इन स्टेशनों पर बढ़े हुए दामों का असर साफ दिखाई दे रहा है।

    सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद पिछले कुछ वर्षों में इसके उपयोग में तेजी आई है। भोपाल में बीते तीन सालों में सीएनजी वाहनों की बिक्री लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ी है। रोजाना शोरूम से 10 से 15 सीएनजी बेस्ड वाहन बिक रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह पेट्रोल-डीजल की तुलना में बेहतर माइलेज और अपेक्षाकृत कम लागत मानी जाती रही है। लेकिन अब सीएनजी के दाम बढ़ने से यह लाभ धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है।

    इसी बीच प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में 11 दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल में चार बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भोपाल में पेट्रोल 114.65 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.74 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। कई अन्य शहरों जैसे उज्जैन, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी कीमतें इसी तरह के उच्च स्तर पर बनी हुई हैं।

    लगातार बढ़ते ईंधन दामों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सीएनजी, पेट्रोल और डीजल तीनों के दामों में उछाल ने परिवहन लागत को प्रभावित किया है, जिसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए आने वाला समय और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

  • पेट्रोल-डीजल फिर महंगा: 5 दिन में दूसरी बार बढ़े दाम, जनता पर बढ़ा बोझ

    पेट्रोल-डीजल फिर महंगा: 5 दिन में दूसरी बार बढ़े दाम, जनता पर बढ़ा बोझ


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। मंगलवार से राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह महज 5 दिनों में दूसरी बढ़ोतरी है, जिससे ईंधन के दामों में तेजी से इजाफा हो रहा है और आम लोगों के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।

    इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल-डीजल के दामों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। लगातार बढ़ते दामों के बाद अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 110.75 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.91 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इंदौर और जबलपुर में भी कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि उज्जैन में पेट्रोल 111 रुपये के पार पहुंच चुका है।

    दूसरी ओर, छिंदवाड़ा जिले में ईंधन संकट और आपूर्ति दबाव को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। यहां पेट्रोल पंपों पर खरीद की सीमा तय कर दी गई है। दोपहिया वाहनों को अधिकतम 200 रुपये तक और छोटी कारों को 500 रुपये तक ही पेट्रोल दिया जा रहा है। वहीं बड़ी गाड़ियों के लिए भी फ्यूल लिमिट तय कर दी गई है। तेल कंपनियों की ऑनलाइन निगरानी के चलते तय सीमा से अधिक बिक्री पर मशीन लॉक होने की चेतावनी दी गई है।

    इसी बीच उज्जैन में एक अलग ही पहल देखने को मिली, जहां एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान कथावाचक ने श्रद्धालुओं को पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने लोगों से सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहनों के बजाय साइकिल या ई-वाहन का उपयोग करने की अपील की।

    बढ़ते ईंधन दामों का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी पड़ने की आशंका है। ट्रक भाड़ा बढ़ने से सब्जियां, फल और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। साथ ही किसानों की उत्पादन लागत और बस-ऑटो किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

    जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज उछाल इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह है। वैश्विक तनाव और सप्लाई बाधाओं के चलते क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं, जिससे भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है।

    सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ रुपये के घाटे का सामना करना पड़ रहा है, जिसे संतुलित करने के लिए कीमतों में संशोधन किया जा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक बाजार की हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है।

    कुल मिलाकर, ईंधन की बढ़ती कीमतें आने वाले दिनों में महंगाई की रफ्तार और तेज कर सकती हैं, जिससे आम जनता की जेब पर और दबाव बढ़ने की आशंका है।