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  • पेट्रोल-डीजल को लेकर बड़ा मोड़: चुनाव के बाद कीमतों पर फैसला संभव, आम जनता की नजरें टिकी

    पेट्रोल-डीजल को लेकर बड़ा मोड़: चुनाव के बाद कीमतों पर फैसला संभव, आम जनता की नजरें टिकी

    नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से स्थिर रखी गई ईंधन दरें अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलते हालात और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण दबाव में आ चुकी हैं। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और सप्लाई में बाधाओं ने भारत की ऊर्जा नीति के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। स्थिति यह है कि सरकार पर हर दिन करीब एक हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है।

    पिछले कई महीनों से भारत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई थी। लेकिन इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। शुरुआत में उम्मीद थी कि वैश्विक तनाव कम होने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, लेकिन हालात इसके उलट बने हुए हैं और दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    सरकार फिलहाल ईंधन की बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है ताकि जनता पर सीधा असर न पड़े। इससे सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है। तेल कंपनियों को भी इस स्थिति में बड़ा घाटा झेलना पड़ रहा है, जो लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले जब कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थीं, तब टैक्स में कटौती कर स्थिति को संभालने की कोशिश की गई थी, लेकिन मौजूदा हालात पहले से ज्यादा जटिल हैं।

    सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि रसोई गैस पर भी सरकार को भारी सब्सिडी देनी पड़ रही है। हर घरेलू सिलेंडर पर सरकार बड़ी राशि वहन कर रही है, जिससे वित्तीय संतुलन पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा गैस आपूर्ति और आयात लागत में बढ़ोतरी ने भी सरकार की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

    वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। समुद्री मार्गों पर बढ़ी लागत, लंबी दूरी की ढुलाई और बीमा खर्च में वृद्धि ने कच्चे तेल की वास्तविक कीमत को और बढ़ा दिया है। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर सीधा असर पड़ा है और ऊर्जा लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

    अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जनता को राहत देती रहे या फिर बढ़ते खर्च का बोझ कुछ हद तक उपभोक्ताओं पर डाले। अगर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर सिर्फ वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और महंगाई के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। वहीं दूसरी ओर लगातार भारी बोझ उठाना भी लंबे समय तक संभव नहीं माना जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश पहले ही ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी कर चुके हैं और वहां महंगाई का दबाव बढ़ा है। भारत अब तक कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक हालात में सरकार के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।

    फिलहाल सरकार इस मुद्दे पर गंभीर विचार-विमर्श कर रही है कि आगे क्या कदम उठाया जाए। आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। यह निर्णय न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता की जेब और पूरे देश की महंगाई पर पड़ेगा।

  • मई की शुरुआत में आम जनता को झटका, कमर्शियल LPG महंगा, सोना-चांदी में गिराव..

    मई की शुरुआत में आम जनता को झटका, कमर्शियल LPG महंगा, सोना-चांदी में गिराव..

    नई दिल्ली।
    मई 2026 की शुरुआत देश के उपभोक्ताओं और बाजार पर अलग-अलग प्रभाव छोड़ते हुए हुई है। एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वहीं दूसरी ओर कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके साथ ही सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भी हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है, जिससे बाजार में मिला-जुला माहौल बना हुआ है।

    तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है। प्रमुख महानगरों में ईंधन के दाम पहले जैसे ही बने हुए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की गई है, ताकि महंगाई पर नियंत्रण रखा जा सके।

    हालांकि, कमर्शियल LPG सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका सामने आया है। 19 किलो वाले गैस सिलेंडर की कीमत में तेज बढ़ोतरी की गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं की लागत बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर सेवा क्षेत्र की लागत पर पड़ सकता है, जो अंततः उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है। राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे घरों पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है।

    दूसरी ओर सर्राफा बाजार में भी हलचल देखने को मिली है। सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि चांदी लगातार तीसरे दिन सस्ती हुई है। सोने और चांदी की कीमतों में यह गिरावट निवेशकों के लिए मिश्रित संकेत लेकर आई है। जहां कुछ लोग इसे खरीदारी का अवसर मान रहे हैं, वहीं कुछ निवेशक अभी भी वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सतर्क बने हुए हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर कीमती धातुओं और ऊर्जा बाजार दोनों पर देखा जा रहा है। वैश्विक निवेश और केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव भी इन कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले समय में बाजार में और उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।

    आर्थिक जानकारों का यह भी मानना है कि कच्चे तेल और कीमती धातुओं की कीमतें वैश्विक घटनाओं से सीधे जुड़ी होती हैं, इसलिए इन बाजारों में स्थिरता फिलहाल चुनौती बनी हुई है। सोने की कीमतों में दीर्घकालिक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अल्पकाल में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • सोना और पेट्रोल डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी बाजार में हलचल के बीच उपभोक्ताओं पर दिख रहा सीधा असर

    सोना और पेट्रोल डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी बाजार में हलचल के बीच उपभोक्ताओं पर दिख रहा सीधा असर

    नई दिल्ली: देशभर में आज सोने और पेट्रोल डीजल की कीमतों में हल्का उतार चढ़ाव देखने को मिला है जिससे बाजार में एक बार फिर सक्रियता बढ़ गई है। कीमती धातु और ईंधन दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं जिनकी कीमतों पर वैश्विक आर्थिक स्थिति, मांग और आपूर्ति तथा मुद्रा विनिमय दरों का सीधा प्रभाव पड़ता है। इसी कारण हर दिन इनके भाव में हल्का बदलाव देखने को मिलता रहता है जिसका असर आम लोगों की दैनिक जीवन लागत पर साफ दिखाई देता है।

    सोने के बाजार में आज विभिन्न श्रेणियों के अनुसार कीमतों में स्थिरता के साथ हल्की हलचल दर्ज की गई है। चौबीस कैरेट सोना प्रति दस ग्राम लगभग एक लाख इक्यावन हजार रुपये से ऊपर के स्तर पर बना हुआ है जबकि तेईस कैरेट सोना भी इसी के आसपास दर्ज किया गया है। बाईस कैरेट सोना एक लाख अड़तीस हजार रुपये के करीब और अठारह कैरेट सोना एक लाख तेरह हजार रुपये के आसपास बना हुआ है। चौदह कैरेट सोने की कीमत भी अपेक्षाकृत कम स्तर पर स्थिर बनी हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि सोने के दामों में अचानक बड़ी तेजी या गिरावट नहीं बल्कि सीमित दायरे में उतार चढ़ाव जारी है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव में हल्का अंतर देखने को मिला है। राजधानी क्षेत्र में चौबीस कैरेट सोना सबसे ऊंचे स्तर के करीब दर्ज किया गया है। मुंबई और कोलकाता में भी कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में सोने के दाम अपेक्षाकृत अधिक रहे हैं। वहीं उत्तर भारत के लखनऊ नोएडा और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में भी कीमतें लगभग समान रुझान के साथ बनी हुई हैं। यह अंतर स्थानीय कर और बाजार मांग के कारण देखने को मिलता है।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी आज विभिन्न शहरों में मामूली बदलाव दर्ज किया गया है। राजधानी में पेट्रोल की कीमत लगभग चौानवे रुपये के आसपास और डीजल लगभग सत्तासी रुपये के करीब बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल एक सौ चार रुपये से ऊपर और डीजल बानवे रुपये के आसपास दर्ज किया गया है। कोलकाता और चेन्नई में भी ईंधन के दाम इसी तरह के स्तर पर बने हुए हैं। लखनऊ में पेट्रोल की कीमत लगभग चौरानवे रुपये के करीब और डीजल अठासी रुपये के आसपास देखा गया है। पटना और हैदराबाद जैसे शहरों में ईंधन के दाम अपेक्षाकृत अधिक स्तर पर बने हुए हैं।

    ईंधन की कीमतों में बदलाव का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और कर संरचना को माना जाता है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव होता है तो उसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को प्रभावित करता है जिससे अलग अलग समय पर दामों में हल्का बदलाव देखने को मिलता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और ईंधन दोनों की कीमतें आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर रहेंगी। सोना जहां सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता है वहीं पेट्रोल डीजल की कीमतें सीधे आम उपभोक्ता के दैनिक खर्च को प्रभावित करती हैं। वर्तमान स्थिति में दोनों ही बाजारों में बड़े बदलाव की बजाय सीमित दायरे में उतार चढ़ाव का रुझान बना हुआ है।

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में करीब एक महीने से भीषण संघर्ष जारी है। अमेरिका और इजरायल (America and Israel.) जैसे देश तेहरान पर रोज मिसाइल हमले कर रहे हैं। ईरान भी इसका माकूल जवाब दे रहा है। इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर दिखा है, जहां से कच्चे तेल के जहाज गुजरते हैं। भारत भी इसी रूट से खाड़ी देशों से तेल आयात करता है। पहले की तुलना में जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) शनिवार को जब उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर रहे थे तब उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई उथल-पुथल पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि आखिर भारत में ईंधन की कीमतें कैसे स्थिर है।


    एथेनॉल मिश्रण से मिली राहत

    उन्होंने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रण को एक अहम रणनीति बताया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति लागू नहीं होती तो भारत को हर साल अतिरिक्त 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता, जो करीब 700 करोड़ लीटर के बराबर है। उन्होंने किसानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से इस वैश्विक संकट के समय देश को बड़ी राहत मिली है।


    किसानों की भी बढ़ी आमदनी

    पीएम मोदी ने बताया कि एथेनॉल उत्पादन ने न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि की है। इस पहल के चलते भारत को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। जेवर क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक इलाकों के करीब है, जहां से एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होता है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में दिए अपने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया था कि पिछले एक दशक में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भारत ने 2025 में ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो निर्धारित समय से पहले की उपलब्धि है।


    विद्युतीकरण से भी लाभ

    उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे के विद्युतीकरण से हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है, जबकि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ईंधन की खपत कम हुई है। वर्तमान में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर है, जिसमें से 1,000 करोड़ लीटर से अधिक पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से जुड़े संघर्ष और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद भारत सरकार ने ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की है ताकि आम जनता पर कीमतों का अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने कहा, “हम भी युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से ईंधन आयात करते हैं। हर देश इस चुनौती से निपटने के लिए कदम उठा रहा है और हम भी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।” आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इसका सीधा असर देखने को नहीं मिला है।

    प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय एकता की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक संकट है और इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि ऐसे संवेदनशील समय में गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से बचें।