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  • पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती

    पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब सुरक्षा बलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने ईंधन की खपत कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें वाहनों के उपयोग से लेकर प्रशासनिक यात्राओं तक में सख्त बदलाव शामिल हैं।

    CRPF ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए अपने पूरे वाहनों के ईंधन बजट में 10 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। इसके तहत अब किसी भी अधिकारी को एक से अधिक सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। साथ ही मुख्यालय ने सभी इकाइयों से ईंधन बचत के नए सुझाव भी मांगे हैं ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

    सबसे दिलचस्प बदलाव ग्राउंड लेवल पर देखने को मिल रहा है, जहां CRPF ने तय किया है कि जिन इलाकों में संभव होगा, वहां मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग की जगह साइकिल से गश्त की जाएगी। इसका उद्देश्य न सिर्फ ईंधन की बचत करना है, बल्कि जवानों की फिटनेस को भी बेहतर बनाना है। हालांकि यह नियम संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लागू नहीं होगा।

    इसी तरह ITBP ने भी सख्त कदम उठाते हुए अपने अधिकारियों के सभी विदेशी दौरों पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही प्रशासनिक कार्यों और स्थिर तैनाती वाले क्षेत्रों में वाहनों के उपयोग को भी सीमित करने का निर्देश जारी किया गया है, ताकि अनावश्यक ईंधन खपत को रोका जा सके।

    दोनों सुरक्षा बलों ने यह स्पष्ट किया है कि ईंधन बचत के इन उपायों का असर किसी भी हालत में देश की सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों पर नहीं पड़ेगा। आतंकवाद-रोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा जैसी अहम ड्यूटी में लगे वाहनों को इस कटौती से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

  • पीएम मोदी की अपील का असर, लग्जरी कार छोड़ साइकिल से दफ्तर पहुंचने लगे जीएसटी अधिकारी

    पीएम मोदी की अपील का असर, लग्जरी कार छोड़ साइकिल से दफ्तर पहुंचने लगे जीएसटी अधिकारी

    नई दिल्ली । देशभर में ईंधन बचत को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिशों के बीच अब इसका असर सरकारी अधिकारियों के व्यवहार में भी दिखाई देने लगा है। राजधानी में तैनात एक वरिष्ठ जीएसटी अधिकारी ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से अपनी लग्जरी कार का इस्तेमाल बंद कर दिया है और अब वह रोजाना साइकिल से दफ्तर पहुंच रहे हैं। उनकी यह पहल चर्चा का विषय बन गई है और लोग इसे एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।

    जीएसटी विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत
    Narendra Yadav का मानना है कि मौजूदा समय में दुनिया कई आर्थिक और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने स्तर पर ऐसे कदम उठाए जिससे देश को लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए भी बेहद जरूरी है।

    उनके अनुसार, अगर लोग धीरे-धीरे छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाना शुरू करें तो इसका असर बड़े स्तर पर दिखाई दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि साइकिल का इस्तेमाल केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है। नियमित रूप से साइकिल चलाने से शरीर सक्रिय रहता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है।

    उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटी दूरी तय करने के लिए निजी वाहनों की बजाय साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग किया जाए। बाजार जाने, आसपास के काम निपटाने या छोटी यात्राओं के लिए साइकिल एक बेहतर विकल्प हो सकती है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या भी कम हो सकती है।

    फिटनेस अभियानों से जुड़े होने के कारण वह लंबे समय से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। उनका कहना है कि आज का युवा देश का भविष्य है और वही विकसित भारत के सपने को साकार करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। यदि युवा पीढ़ी फिटनेस और पर्यावरण दोनों के प्रति जागरूक बनेगी, तो इसका असर पूरे समाज पर दिखाई देगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई देशों में ऊर्जा संकट जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में हर व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि वह अपने स्तर पर क्या योगदान दे सकता है। उनके अनुसार बड़े बदलाव हमेशा छोटी शुरुआत से ही आते हैं और व्यक्तिगत प्रयास मिलकर एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं।

    उनकी यह पहल अब लोगों के बीच प्रेरणा का विषय बन रही है। सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चा तक, लोग इसे एक जिम्मेदार नागरिक के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। यह संदेश भी सामने आ रहा है कि यदि आम लोग और सरकारी अधिकारी मिलकर छोटे-छोटे बदलाव अपनाएं, तो ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा असर पैदा किया जा सकता है।

  • उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती

    उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Ujjain में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्रशासन ने ईंधन बचत की दिशा में एक अनोखी और अनुकरणीय पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
    अब सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही ट्रैवलर बस में यात्रा कर रहे हैं। बुधवार को संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त सहित करीब 15 अधिकारी एक साथ बस में बैठकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे।
    पहले स्थिति यह थी कि हर दिन विभिन्न विभागों के अधिकारी 15 अलग-अलग इनोवा वाहनों से निरीक्षण के लिए निकलते थे, जिससे भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता था। अनुमान के अनुसार, केवल एक दिन के निरीक्षण में लगभग 6750 रुपये तक का ईंधन खर्च हो जाता था।
    नई व्यवस्था के तहत अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा कर रहे हैं, जिससे खर्च में भारी कमी आई है। ट्रैवलर बस के उपयोग से यह पूरा सफर अब लगभग 250 रुपये के डीजल खर्च में पूरा हो रहा है, हालांकि बस का दैनिक किराया करीब 4100 रुपये है।
    प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव घटेगा। पहले कई वाहनों के काफिले से सड़कों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती थी, अब एक ही वाहन से यात्रा होने पर यह समस्या कम हो गई है।
    निरीक्षण के दौरान अधिकारी सुबह 6 बजे से घाटों और प्रस्तावित एप्रोच रोड का जायजा लेते हैं और कई किलोमीटर पैदल भी चलते हैं। इस दौरान निर्माण कार्यों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे टीम भावना भी मजबूत होगी। सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे तो समन्वय बेहतर होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
    कलेक्टर ने इसे एक अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आगे चलकर अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बन सकती है।

  • BJP शासित राज्यों ने अपनायी PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील, कई बड़े फैसले लागू

    BJP शासित राज्यों ने अपनायी PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील, कई बड़े फैसले लागू

    नई दिल्ली । देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें सक्रिय हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील के बाद बीजेपी शासित कई राज्यों ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

    दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में सरकारें अलग-अलग स्तर पर नए निर्देश जारी कर रही हैं। कहीं सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाई जा रही है, तो कहीं अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।


    दिल्ली में वाहनों के इस्तेमाल पर नियंत्रण

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभागीय कामकाज में वाहनों के सीमित उपयोग के निर्देश दिए हैं। अब मंत्री, विधायक और अधिकारी जरूरत के अनुसार कम से कम वाहनों का इस्तेमाल करेंगे। साथ ही कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।


    राजस्थान में फिजूलखर्ची पर रोक

    राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का आदेश दिया है। उन्होंने अनावश्यक वाहनों के उपयोग पर रोक लगाने और सरकारी कामकाज में सादगी अपनाने की बात कही है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी जरूरत के हिसाब से ही वाहन उपयोग करने की सलाह दी गई है।


    उत्तर प्रदेश में 50% तक कटौती

    उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में 50 प्रतिशत तक वाहन कम करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मेट्रो, बस, सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, कारपूलिंग और साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकारी बैठकों को ऑनलाइन करने और कुछ संस्थानों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की भी सलाह दी गई है, ताकि यात्रा और ईंधन खर्च कम किया जा सके।

    मध्य प्रदेश में CM ने घटाए वाहन

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में ईंधन बचाना जरूरी है। साथ ही मंत्रियों और निगम-मंडल पदाधिकारियों से सादगी अपनाने की अपील की गई है। प्रदेशवासियों को भी सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    गुजरात में विदेश दौरा रद्द

    गुजरात में डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया। इसे ईंधन बचत अभियान के प्रति सरकार की गंभीरता के तौर पर देखा जा रहा है।

    ‘नो व्हीकल डे’ जैसे सुझाव भी चर्चा में

    कई राज्यों में अब ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, स्कूल बसों के बेहतर उपयोग और बिजली बचत जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है। दफ्तरों के समय में बदलाव और अलग-अलग शिफ्ट में काम शुरू करने जैसे सुझाव भी सामने आए हैं, ताकि पीक आवर्स में ट्रैफिक और ईंधन खपत कम की जा सके।