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  • कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    कच्चा तेल 94 डॉलर के पार, फिर भी आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर; जानें दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रविवार को कोई बदलाव नहीं किया गया। तेल विपणन कंपनियों ने 23 अगस्त के लिए घरेलू बाजार में ईंधन के दाम पहले के स्तर पर ही बनाए रखे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था और आने वाले समय में ईंधन लागत को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

    अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की आपूर्ति तथा समुद्री परिवहन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    23 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में रविवार होने के कारण कारोबार बंद है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार के बंद भाव के आसपास ही बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 94.39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा, जबकि शुक्रवार को इसमें 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। दूसरी ओर, अमेरिकी WTI क्रूड 87.06 डॉलर प्रति बैरल पर रहा और इसमें शुक्रवार को 0.26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

    घरेलू बाजार की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल 111.12 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 113.43 रुपये और डीजल 99.78 रुपये प्रति लीटर है।

    चेन्नई में पेट्रोल 107.75 रुपये और डीजल 99.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का 98.79 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर पर है।

    अन्य प्रमुख शहरों में गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये प्रति लीटर है, जबकि गाजियाबाद में इसका भाव 101.80 रुपये है। पटना में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 113.35 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। गाजियाबाद में डीजल 95.29 रुपये और चंडीगढ़ में डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर है।

    भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने का असर देश की ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है। यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तेल विपणन कंपनियों की लागत और उनकी अंडर-रिकवरी पर दबाव बढ़ सकता है।

    पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम से तय नहीं होतीं। इनमें केंद्र और राज्य स्तर के कर, वैट, डीलर कमीशन तथा परिवहन लागत जैसे कई घटक शामिल होते हैं। इसी कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग रहते हैं।

    देश में तेल कंपनियां रोजाना सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव लागू करती हैं। कीमतों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर विनिमय दर सहित विभिन्न बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जाती है। फिलहाल 23 अगस्त को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत यह है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड महंगा होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी रहेंगी।

  • जुलाई में थोक महंगाई दर घटकर 9.78 प्रतिशत हुई, ईंधन कीमतों में नरमी के बावजूद खाद्य और विनिर्माण दबाव बढ़ा

    जुलाई में थोक महंगाई दर घटकर 9.78 प्रतिशत हुई, ईंधन कीमतों में नरमी के बावजूद खाद्य और विनिर्माण दबाव बढ़ा

    नई दिल्ली ।भारत में थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में जुलाई 2026 के दौरान मामूली नरमी देखने को मिली। जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 9.78 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 9.87 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस तरह मासिक आधार पर थोक महंगाई में हल्की कमी आई है, हालांकि कीमतों का दबाव अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

    2022-23 को आधार वर्ष मानकर जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार जुलाई में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक 110.0 रहा। जून में यह सूचकांक 110.2 दर्ज किया गया था। समग्र सूचकांक में मामूली गिरावट के बावजूद अलग-अलग श्रेणियों में कीमतों का रुझान एक जैसा नहीं रहा।

    प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई में बढ़कर 8.52 प्रतिशत हो गई, जबकि जून में यह 7.00 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि इस श्रेणी की वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में अधिक दबाव रहा। प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक भी जून के 116.1 से बढ़कर जुलाई में 117.2 हो गया।

    विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। जुलाई में इस श्रेणी की महंगाई दर 8.29 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 7.48 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों का सूचकांक जून के 107.8 से बढ़कर जुलाई में 108.4 हो गया। इससे उत्पादन क्षेत्र में लागत और कीमतों से जुड़ा दबाव बने रहने का संकेत मिलता है।

    इसके विपरीत ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। जून में 27.41 प्रतिशत रही यह दर जुलाई में घटकर 20.05 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि गिरावट के बावजूद इस श्रेणी में महंगाई अभी भी काफी ऊंची बनी हुई है। ईंधन और ऊर्जा का सूचकांक जून के 111.1 से घटकर जुलाई में 105.4 हो गया।

    जुलाई में थोक महंगाई को प्रभावित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में खनिज तेल और पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्य वस्तुएं, बेसिक मेटल्स, गैर-खाद्य प्राथमिक उत्पाद, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण तथा रसायन और रासायनिक उत्पाद शामिल रहे। इन क्षेत्रों में कीमतों की बढ़ोतरी का असर कुल थोक महंगाई के आंकड़े पर पड़ा।

    खाद्य क्षेत्र में भी कीमतों का दबाव बढ़ा है। जुलाई में डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स आधारित महंगाई दर 6.65 प्रतिशत रही, जो जून के 6.14 प्रतिशत से अधिक है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक बाजार के साथ आगे चलकर अन्य कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

    इस बीच मई 2026 के थोक महंगाई आंकड़ों में भी संशोधन किया गया है। मई का अंतिम थोक मूल्य सूचकांक 109.9 के प्रारंभिक अनुमान से संशोधित होकर 110.1 हो गया। इसके साथ मई की थोक महंगाई दर भी 9.68 प्रतिशत के प्रारंभिक आंकड़े से संशोधित होकर 9.88 प्रतिशत हो गई।

    मई के अंतिम आंकड़े 98.14 प्रतिशत वेटेड रिस्पॉन्स रेट के आधार पर तैयार किए गए हैं। इसके अलावा आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स का मई का अंतिम आंकड़ा 109.6 के प्रारंभिक अनुमान से बढ़कर 109.9 हो गया है।

    विनिर्माण क्षेत्र के ऑल इंडिया ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स की बात करें तो जुलाई में यह 105.9 दर्ज किया गया। मई के इनपुट पीपीआई के अंतिम आंकड़े में भी संशोधन हुआ और यह शुरुआती 104.9 से बढ़कर 106.5 हो गया।

    कुल मिलाकर जुलाई में थोक महंगाई दर में मामूली राहत जरूर मिली, लेकिन प्राथमिक वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों में बढ़ता मूल्य दबाव अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। वहीं ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई नरमी ने समग्र महंगाई दर को नीचे लाने में मदद की है।

  • प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का बड़ा फैसला, मध्यरात्रि से सस्ते मिलेंगे पेट्रोल के दाम

    प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का बड़ा फैसला, मध्यरात्रि से सस्ते मिलेंगे पेट्रोल के दाम

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मजबूती को देखते हुए प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल की खुदरा कीमतों में कटौती करने का निर्णय लिया है। कंपनियों द्वारा की गई इस कटौती के तहत पेट्रोल के दामों में औसतन 56 पैसे प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई है। नई दरें मध्यरात्रि से देश भर में प्रभावी हो जाएंगी, जिससे वाहन चालकों और आम जनता को कुछ हद तक आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    कीमतों में संशोधन के बाद देश की राजधानी दिल्ली में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की नई दरें 67.90 रुपये प्रति लीटर तय की गई हैं, जो इससे पहले 68.46 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर दर्ज की जा रही थीं। देश की अन्य प्रमुख तेल विपणन कंपनियों भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा भी इसी तर्ज पर अपने खुदरा मूल्यों में संशोधन किया जाता है। स्थानीय करों और भिन्न व्यवस्थाओं के कारण अलग-अलग कंपनियों के आउटलेट पर कीमतों में एक से दो पैसे का मामूली अंतर देखा जा सकता है।

    तेल कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों और वैट की दरों के आधार पर अलग-अलग शहरों में कटौती की राशि भिन्न रखी गई है। वित्तीय राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दामों में 71 पैसे प्रति लीटर की कमी की गई है, जिसके बाद वहां नया मूल्य 74.43 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। इसी प्रकार कोलकाता में 70 पैसे प्रति लीटर की कटौती के साथ नई दर 75.44 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 71 पैसे की कमी के साथ नया दाम 71.48 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।

    उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक सुधारों के तहत पेट्रोल के मूल्य निर्धारण को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया था, जिससे तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लागत और विनिमय दर के अनुरूप कीमतें तय करने का अधिकार मिला है। इससे पहले जून माह के अंत में पेट्रोल की दरों में 70 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

    तेल विपणन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में सुधार दर्ज किया गया है, जिसके कारण आयात लागत पर आंशिक राहत मिली है। हालांकि, वैश्विक बाजार में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। कंपनियों का कहना है कि पूर्ण स्वतंत्रता मिलने के बावजूद बाजार की अनिश्चितताओं के कारण लागत के अनुपात में दरें नहीं बढ़ाई जा सकी थीं, जिससे चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनियों को संभावित राजस्व में काफी घाटे का सामना करना पड़ा है।

  • सरकारी तेल कंपनियों ने अपडेट किए ईंधन के भाव, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बना अंतर

    सरकारी तेल कंपनियों ने अपडेट किए ईंधन के भाव, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बना अंतर

    नई दिल्ली । देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें 26 जुलाई के लिए जारी कर दी गई हैं। सरकारी तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन सुबह ईंधन के दाम अपडेट करती हैं, जिसके तहत आज भी प्रमुख महानगरों समेत विभिन्न शहरों के ताजा रेट सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले करों के आधार पर ईंधन की कीमतों में समय-समय पर बदलाव देखने को मिलता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य स्थानीय करों की दरें भिन्न होने के कारण प्रत्येक शहर में पेट्रोल और डीजल के दाम अलग-अलग बने रहते हैं।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। पूर्वी भारत के प्रमुख महानगर कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में पेट्रोल का दाम 107.76 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

    ईंधन की कीमतों में दिखाई देने वाला यह अंतर मुख्य रूप से राज्यों के कर ढांचे के कारण होता है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क के अलावा प्रत्येक राज्य अपनी कर नीति के अनुसार वैट और अन्य स्थानीय शुल्क निर्धारित करता है। इसी वजह से एक ही दिन देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं। परिवहन लागत और स्थानीय प्रशासनिक शुल्क भी कुछ क्षेत्रों में खुदरा कीमतों को प्रभावित करते हैं।

    तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन सुबह छह बजे नई कीमतें जारी करती हैं। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते या घटते हैं अथवा विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उल्लेखनीय परिवर्तन होता है, तो उसका प्रभाव घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल बदलाव नहीं होता और कंपनियां समग्र बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती हैं।

    वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं के लिए यात्रा या ईंधन भरवाने से पहले अपने शहर के ताजा रेट की जानकारी लेना उपयोगी माना जाता है। इसके लिए संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप और एसएमएस सेवा का उपयोग किया जा सकता है। इन माध्यमों पर प्रतिदिन अपडेट किए गए रेट उपलब्ध रहते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र की वास्तविक कीमत की जानकारी मिल जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रा विनिमय दर में होने वाले बदलाव आने वाले समय में भी ईंधन की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए नियमित रूप से ताजा रेट पर नजर रखना आवश्यक है। फिलहाल 26 जुलाई के लिए जारी नई कीमतों में प्रमुख महानगरों के बीच पहले की तरह अंतर बना हुआ है और राज्यवार कर संरचना इसका प्रमुख कारण बनी हुई है।

  • दुनिया में ईंधन महंगा, लेकिन भारत ने संभाली रफ्तार, पेट्रोल-डीजल कीमतों में राहत भरी तस्वीर

    दुनिया में ईंधन महंगा, लेकिन भारत ने संभाली रफ्तार, पेट्रोल-डीजल कीमतों में राहत भरी तस्वीर

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि अन्य तेल आयातक देशों की तुलना में काफी कम रही है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब कई देश ईंधन संकट और महंगाई की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं।

    मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा और देश में तेल कंपनियों ने मई महीने के दौरान कई बार कीमतों में बदलाव किया। इन संशोधनों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग साढ़े सात प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि यह वृद्धि अन्य देशों की तुलना में काफी सीमित मानी जा रही है।

    राजधानी में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईंधन कीमतों में बदलाव के कारण आम उपभोक्ताओं पर असर महसूस किया जा रहा है, लेकिन वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है। दुनिया के कई देशों में पेट्रोल की कीमतें पहले ही बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं और कई अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

    विकसित देशों और यूरोप के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं। कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम भारतीय बाजार की तुलना में काफी अधिक हैं। वहीं भारत के पड़ोसी देशों में भी ईंधन कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कम आय वाले कई देशों में पेट्रोल की कीमतें तेजी से ऊपर पहुंची हैं, जिससे वहां महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने ईंधन कीमतों को लेकर अपेक्षाकृत संतुलित रणनीति अपनाई है। अन्य बड़े आयातक देशों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी लागत का सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया, जबकि भारत में वृद्धि नियंत्रित स्तर पर देखने को मिली। इसी कारण देश में कीमतों में वृद्धि की रफ्तार सीमित रही है।

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट के इस दौर में ईंधन की कीमतें आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रह सकती हैं। फिलहाल भारत में हालात अन्य देशों की तुलना में कुछ हद तक नियंत्रित दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति में बदलाव भविष्य में नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है। ऐसे में देश की नजरें अब वैश्विक तेल बाजार की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • पेट्रोल-डीजल से लेकर गैस तक पर जैकी श्रॉफ का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

    पेट्रोल-डीजल से लेकर गैस तक पर जैकी श्रॉफ का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस


    नई दिल्ली। अभिनेता Jackie Shroff एक बार फिर अपने अलग अंदाज और बेबाक बयान की वजह से चर्चा में आ गए हैं। इस बार उन्होंने पेट्रोल, डीजल और गैस जैसे जरूरी संसाधनों को लेकर अपनी राय जाहिर की है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती चुनौतियों और ऊर्जा संकट को देखते हुए अभिनेता ने लोगों से ईंधन के जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल की अपील की है। उनके बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और यह चर्चा का विषय बन गया है।

    हाल के दिनों में दुनियाभर में ऊर्जा संसाधनों को लेकर चिंता लगातार बढ़ी है। कई देशों में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसी बीच जैकी श्रॉफ ने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियों को समझने की जरूरत है और संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब जरूरी चीजें उपलब्ध हैं तो उन्हें अनावश्यक रूप से बर्बाद करने के बजाय जिम्मेदारी के साथ उपयोग करना अधिक जरूरी है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील का समर्थन भी किया, जिसमें ईंधन की बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया था। अभिनेता ने अपने अंदाज में यह संदेश देने की कोशिश की कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में हर व्यक्ति की छोटी जिम्मेदारी भी बड़ा असर पैदा कर सकती है। उनका यह बयान अब तेजी से लोगों के बीच चर्चा का हिस्सा बन चुका है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग नजर आ रही हैं। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं और इसे जिम्मेदार सोच बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे लेकर अपनी अलग राय भी रख रहे हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब जैकी श्रॉफ किसी सामाजिक मुद्दे पर खुलकर सामने आए हों। इससे पहले भी वह पर्यावरण, प्रकृति और सामाजिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो जैकी श्रॉफ जल्द ही अपनी नई फिल्म के जरिए दर्शकों के बीच दिखाई देने वाले हैं। उनकी आगामी फिल्म को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है। लंबे समय से अपनी अलग शैली और अभिनय के लिए पहचान बनाने वाले जैकी श्रॉफ आज भी दर्शकों के बीच खास लोकप्रियता रखते हैं। इस बार उनका बयान मनोरंजन जगत से बाहर निकलकर सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है और ईंधन बचत जैसे मुद्दे पर नई बहस को जन्म देता दिखाई दे रहा है।

  • भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी : हरदीप सिंह पुरी

    भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी : हरदीप सिंह पुरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम पदार्थों (पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी) की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

    केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में ये भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वैश्विक तनाव के बावजूद निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि भारत में घरेलू कंज्यूमर्स के लिए एनर्जी की कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई बात नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का ऊर्जा आयात अलग-अलग सोर्स और रास्तों से लगातार हो रहा है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह पक्का करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100 फीसदी सप्लाई हो, और पश्चिम एशिया के मौजदा हालात के बावजूद दूसरी इंडस्ट्रीज़ को उनकी सप्लाई का 70 से 80 फीसदी मिलता रहे। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि सरकार देश के घरेलू उपभोक्तओं को सस्ती एनर्जी की बिना रुकावट सप्लाई पक्का करने के लिए कमिटेड है।

    हरदीप सिंह पुरी ने जारी बयान में कहा कि आज मीडिया के लोगों के साथ इनफॉर्मल बातचीत में हमने इस बात पर चर्चा की कि भारत में एनर्जी का इंपोर्ट अलग-अलग सोर्स और रास्तों से लगातार हो रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू कंज्यूमर्स के लिए कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई बात नहीं है।