Tag: Fugitive

  • गोल्डी बराड़ FBI की टॉप-10 मोस्ट वांटेड सूची में शामिल, गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम

    गोल्डी बराड़ FBI की टॉप-10 मोस्ट वांटेड सूची में शामिल, गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम

    नई दिल्ली ।अमेरिका की जांच एजेंसी ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपनी 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया है। उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 9 करोड़ रुपये बताई गई है।

    गोल्डी बराड़ पर हत्या की साजिश, फिरौती के लिए कारोबार में दखल देने और नशीले पदार्थों की तस्करी समेत कई गंभीर आरोप हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है और उत्तरी अमेरिका में इस आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियों को संभालने का आरोप उस पर है।

    गोल्डी बराड़ को 28 सितंबर को 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया गया। वह इस सूची में जगह पाने वाला 543वां भगोड़ा है। फिलहाल वह फरार है और अमेरिकी एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं।

    गोल्डी बराड़ के खिलाफ लॉस एंजिल्स की फेडरल कोर्ट में मामला दर्ज है। उस पर गैंग बनाकर साजिश रचने, फिरौती के लिए कारोबार में हस्तक्षेप करने और ड्रग्स की तस्करी जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले में अदालत ने पिछले साल 1 जुलाई को उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

    अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि गोल्डी बराड़ लॉरेंस बिश्नोई गैंग के जरिए उत्तरी अमेरिका में आपराधिक नेटवर्क का संचालन करता है। इस नेटवर्क पर सुनियोजित तरीके से हत्याएं करने, गोलीबारी और लोगों को डराकर वसूली करने जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। हालांकि, इन आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

    जुलाई 2026 में अमेरिका में ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत भारत से जुड़े तीन आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में 37 लोगों के खिलाफ आरोप सार्वजनिक किए गए थे। इनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आरोपी भी शामिल थे। कार्रवाई के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गोल्डी बराड़ समेत कुछ अन्य आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं।

    अमेरिकी जांच एजेंसी के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर भारत के पंजाब से जुड़े एक प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेता की हत्या का आदेश देने का भी आरोप है। यह नेता हत्या के समय कनाडा में रह रहा था।

    अभियोग के अनुसार, 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक सिख मंदिर से बाहर निकलते समय दो हमलावरों ने उस नेता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले की जांच में अमेरिका, कनाडा और लॉस एंजिल्स की पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय की बात सामने आई है।

    गोल्डी बराड़ की तलाश के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसी ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर किसी व्यक्ति के पास उसके ठिकाने या गतिविधियों से जुड़ी कोई जानकारी है तो वह तुरंत अधिकारियों को उपलब्ध कराए। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखने की बात कही गई है।

    गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का इनाम घोषित किया गया है। इस कदम के बाद उसकी तलाश को लेकर अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।

  • ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता प्राप्त करने का दावा किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बीते सात वर्षों में 36 विभिन्न देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। इन भगोड़ों में आतंकवाद, वित्तीय धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, हत्या और पोक्सो जैसे अति गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में पहचान बदलकर रह रहे अपराधियों को खोजने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट, सैटेलाइट इनपुट और जियो-लोकेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई महीने तक 45 अन्य अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता मिली है।

    आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने के लिए चलाए गए इस अभियान के तहत धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अलावा लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी रिकवर की जा चुकी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित अवैध कमाई को पूरी तरह से कुर्क कर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों को घेरने के लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की दर में भी अप्रत्याशित तेजी आई है। अकेले वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि पिछले तीन सालों में यह संख्या 401 तक पहुंच गई है। वैश्विक पुलिस संस्थाओं के साथ बेहतर तालमेल के कारण भगोड़ों की गिरफ्तारी अब पहले से काफी सुगम हो गई है।

    अभियान को और अधिक धार देने के लिए जनवरी 2026 में एक विशेष खुफिया समन्वय समूह का गठन किया गया था, जो विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले मामलों पर काम कर रहा है। इसके साथ ही देश में लागू नए और संशोधित आपराधिक कानूनों ने आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी अदालती प्रक्रिया चलाकर न्याय सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया है।

  • काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता का दावा किया है। सरकार के अनुसार पिछले सात वर्षों में 36 देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। इन अपराधियों में आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत कानूनी व्यवस्था के कारण प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में अलग-अलग पहचान के साथ छिपे अपराधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट इनपुट, डिजिटल फुटप्रिंट, प्रोफाइल ट्रैकिंग और जियो-लोकेशन जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कई बड़े अपराधियों को भारत लाया गया। सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में सबसे अधिक 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण हुआ, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई तक 45 अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

    सरकार ने यह भी जानकारी दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत भगोड़े अपराधियों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी वापस लाई गई है। अधिकारियों के अनुसार आर्थिक अपराधों से अर्जित अवैध संपत्ति पर कार्रवाई को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है ताकि अपराध से अर्जित लाभ को समाप्त किया जा सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।

    इंटरपोल के सहयोग से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 नोटिस जारी हुए हैं, जिनमें वित्तीय अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी, यौन अपराध और साइबर अपराध जैसे मामले प्रमुख रहे। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग से भगोड़ों की तलाश और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण मदद मिली है।

    जनवरी 2026 में खुफिया समन्वय को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष समूह का गठन भी किया गया, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्राथमिकता वाले मामलों में कार्रवाई तेज करने का कार्य कर रहा है। सरकार के अनुसार जटिल मामलों में तकनीकी निगरानी और कूटनीतिक प्रयासों के संयोजन से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को गति मिली है। इसी क्रम में कई चर्चित मामलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

    सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों और संशोधित कानूनी प्रावधानों ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया है। अब कुछ मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाने की व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित नहीं होती। केंद्र का दावा है कि आधुनिक तकनीक, वैश्विक सहयोग, खुफिया समन्वय और सख्त कानूनी ढांचे के माध्यम से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक मजबूत बनाया गया है तथा भविष्य में भी ऐसे अभियानों को प्राथमिकता के साथ जारी रखा जाएगा।