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  • अतीक के टूटे पुश्तैनी घर से कब्रिस्तान तक जाएगा अबान का शव, आज पिता की कब्र के बगल में होगा दफन

    अतीक के टूटे पुश्तैनी घर से कब्रिस्तान तक जाएगा अबान का शव, आज पिता की कब्र के बगल में होगा दफन


    प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद को शनिवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी स्थित पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अबान का शव फिलहाल कसारी-मसारी के पास हटवा गांव में रखा गया है, जहां उसकी बुआ प्रवीन कुरैशी रहती हैं। शुक्रवार को आखिरी दीदार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

    झांसी में पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को अबान का शव हटवा गांव लाया गया था। अब शनिवार को अंतिम संस्कार से पहले शव को अतीक अहमद के उस पुश्तैनी घर की जगह पर भी रखा जाएगा, जो अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद मलबे में तब्दील हो चुका है।

    मलबे में तब्दील घर में लगाया गया टेंट
    कसारी-मसारी स्थित अतीक अहमद का पुश्तैनी मकान कभी उसके परिवार की पहचान हुआ करता था। माफिया और बाहुबली के खिलाफ कार्रवाई के दौरान इस मकान को बुलडोजर से गिरा दिया गया था। अब यहां सिर्फ जमीन और मलबा बचा है।

    बताया जाता है कि अतीक परिवार में किसी सदस्य की मौत होने पर कब्रिस्तान ले जाने से पहले शव को इसी घर में रखा जाता रहा है। वर्ष 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अतीक के बेटे असद का शव भी अंतिम संस्कार से पहले यहां लाया गया था। अबान के शव को रखने के लिए मलबे के बीच बची जमीन पर टेंट लगाया गया है। यहां डीप फ्रीजर की व्यवस्था भी की गई है। अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस की तैनाती की गई है।

    अतीक की कब्र के ठीक बगल में खोदी गई कब्र
    अबान को कसारी-मसारी के खानदानी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। इसी कब्रिस्तान में अतीक अहमद, उसके पिता हाजी फिरोज अहमद, मां, भाई अशरफ और बेटे असद अहमद की कब्रें हैं। अबान के लिए अतीक अहमद की कब्र के ठीक बगल में कब्र खोदी गई है।

    अंतिम संस्कार में शामिल होंगे अली और उमर
    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद अतीक के दोनों बेटों अली और उमर को छोटे भाई अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल दी। अली झांसी जेल में, जबकि उमर लखनऊ जेल में बंद है।

    अदालत ने निर्देश दिया है कि अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद दोनों को पुलिस कस्टडी में संबंधित जेलों में वापस ले जाया जाएगा। दोनों भाइयों को किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करने और मीडिया, सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बातचीत करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत के आदेश के अनुसार, वे केवल अंतिम संस्कार कराने वाले व्यक्ति, अपनी बुआ और भाई अहजम अहमद से बातचीत कर सकेंगे।

    झांसी में सड़क हादसे में हुई अबान की मौत
    अबान अहमद की मौत गुरुवार को झांसी-कानपुर हाईवे पर सड़क हादसे में हुई थी। पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास तेज रफ्तार कार अचानक सड़क पर आए जानवर को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। हादसे में अबान और उसके साथी सोनू की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कार में सवार तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सभी को झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। अबान अतीक अहमद के पांच बेटों में सबसे छोटा था।

    असद की भी झांसी में हुई थी मौत
    अतीक अहमद का एक और बेटा असद अप्रैल 2023 में झांसी के पास पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उमेश पाल हत्याकांड में वांछित असद पर पुलिस ने इनाम घोषित किया था। इसके दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी तीन हमलावरों ने उन पर हमला किया था।

  • ईरान-इराक युद्ध के 38 साल बाद बदले हालात: खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में इराक के पवित्र शहरों में होंगी

    ईरान-इराक युद्ध के 38 साल बाद बदले हालात: खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में इराक के पवित्र शहरों में होंगी


    नई दिल्ली। कभी आठ वर्षों तक भीषण युद्ध लड़ने वाले ईरान और इराक के रिश्तों में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है। इसी बदले हुए परिदृश्य की झलक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भी देखने को मिल रही है। कार्यक्रम के अनुसार, ईरान में प्रारंभिक रस्मों के बाद उनके पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शिया शहरों नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा, जहां धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे।

    आठ साल के युद्ध से धार्मिक जुड़ाव तक
    ईरान और इराक के बीच वर्ष 1980 से 1988 तक चला युद्ध पश्चिम एशिया के सबसे विनाशकारी संघर्षों में गिना जाता है। उस समय इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद ईरान पर हमला किया था। माना जाता है कि उन्हें आशंका थी कि क्रांति का प्रभाव इराक के शिया बहुल क्षेत्रों तक फैल सकता है। इसके अलावा शत्त-अल-अरब जलमार्ग और सीमा विवाद भी दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण था।

    आठ वर्षों तक चले इस युद्ध में दोनों देशों को भारी जन-धन का नुकसान उठाना पड़ा। लाखों लोगों की जान गई और रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप भी लगे। युद्ध समाप्त होने के बाद भी दोनों देशों के संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे।

    अंतिम संस्कार का कार्यक्रम
    जानकारी के अनुसार, 7 जुलाई को खामेनेई के पार्थिव शरीर को ईरान के धार्मिक शहर कोम ले जाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में पूरी होंगी। इसके बाद 8 जुलाई को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें क्षेत्र के प्रमुख शिया धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। अंतिम चरण में उन्हें ईरान के मशहद शहर स्थित इमाम रजा के मकबरे के निकट दफनाया जाएगा।

    नजफ और कर्बला का धार्मिक महत्व
    नजफ और कर्बला दुनिया भर के शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। किसी प्रमुख शिया धर्मगुरु के पार्थिव शरीर को इन शहरों में ले जाना केवल अंतिम संस्कार की परंपरा नहीं माना जाता, बल्कि इसे शिया इतिहास, धार्मिक विरासत और इमामों की परंपरा से जोड़कर भी देखा जाता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्यक्रम ईरान और इराक के बीच बदले राजनीतिक एवं धार्मिक संबंधों का भी प्रतीक है। आज इराक में कई शिया राजनीतिक और धार्मिक समूहों का प्रभाव है, जिनके ईरान से करीबी संबंध माने जाते हैं। ऐसे में यह अंतिम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और शिया समुदाय के बीच ईरान की भूमिका का भी महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है।