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  • UNSC सुधारों पर बड़ा दबाव: G4 की कोशिशें, चीन-पाकिस्तान की रुकावट

    UNSC सुधारों पर बड़ा दबाव: G4 की कोशिशें, चीन-पाकिस्तान की रुकावट




    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर एक बार फिर वैश्विक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील वाले G4 समूह की मांग है कि परिषद का विस्तार किया जाए और नए स्थायी सदस्यों को शामिल किया जाए। भारत लंबे समय से स्थायी सीट की मांग करता आ रहा है।

    इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने भी सुधारों का समर्थन करते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को ठीक से नहीं दर्शातीं और इनमें बदलाव “अनिवार्य” है।

    UNSC का मौजूदा ढांचा
    वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य हैं:

    अमेरिका

    रूस

    चीन

    फ्रांस

    यूनाइटेड किंगडम

    इन सभी के पास वीटो पावर है, जो किसी भी प्रस्ताव को रोक सकती है। इसके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं जिन्हें 2 साल के लिए चुना जाता है।

    G4 का नया प्रस्ताव क्या है?
    भारत और उसके सहयोगी देशों (G4) ने एक नया प्रस्ताव दिया है जिसमें शामिल हैं:

    UNSC का विस्तार कर 25–26 सदस्य करना

    11 स्थायी सदस्य बनाने का सुझाव

    नए सदस्यों को तुरंत वीटो पावर न देना

    लगभग 15 साल का “ट्रांजिशन पीरियड” जिसमें वीटो फ्रीज रहेगा

    समान जिम्मेदारी और जवाबदेही का ढांचा

    भारत की ओर से इस मुद्दे पर राजनयिक स्तर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

    भारत की राह में सबसे बड़ी बाधा कौन?
    विश्लेषण के अनुसार भारत की स्थायी सदस्यता की राह में सबसे बड़ा अवरोध है:

    चीन
    एशिया में केवल वही एकमात्र वीटो पावर वाला देश है

    वह नहीं चाहता कि भारत जैसे नए प्रतिस्पर्धी को स्थायी सीट मिले

    UNSC विस्तार पर अक्सर विरोध या बाधा डालता रहा है

    पाकिस्तान
    भारत की सदस्यता का खुला विरोध करता है

    चीन के साथ मिलकर कई कूटनीतिक प्रयासों में रुकावट डालता है

    मुद्दा क्यों अटका हुआ है?
    UNSC सुधार के लिए:

    सभी स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी है

    किसी एक देश का वीटो भी पूरी प्रक्रिया रोक सकता है

    यही वजह है कि लंबे समय से सुधार प्रस्ताव अटके हुए हैं, जबकि भारत जैसे बड़े देशों की भूमिका वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रही है।

  • UN में बड़ा सत्ता संग्राम: भारत की स्थायी सीट पर अटका ‘वैश्विक वीटो’ का खेल

    UN में बड़ा सत्ता संग्राम: भारत की स्थायी सीट पर अटका ‘वैश्विक वीटो’ का खेल

    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लंबे समय से चले आ रहे सुधारों को लेकर एक बार फिर वैश्विक बहस तेज हो गई है। भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील जैसे देशों के समूह G4 ने परिषद के ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 11 करने और परिषद को 25-26 सदस्यों का विस्तार देने की बात कही गई है।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने भी इस सुधार की खुलकर वकालत करते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं अब बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुसार प्रभावी नहीं रह गई हैं। उन्होंने साफ कहा कि UNSC में बदलाव “अनिवार्य” है, क्योंकि यह संस्था अब पुरानी हो चुकी शक्ति संरचना पर आधारित है।

    G4 का नया प्रस्ताव: वीटो पर अस्थायी रोक का सुझाव
    G4 Nations ने इस बार एक नया और व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है। इसके अनुसार, नए स्थायी सदस्यों को पहले 15 वर्षों तक वीटो पावर नहीं दी जाएगी। इस दौरान वे केवल जिम्मेदारी निभाएंगे लेकिन वीटो अधिकार सीमित रहेगा।

    भारत के प्रतिनिधि हारिश परवाथनेनी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेने का समय आ गया है। उनका कहना है कि मौजूदा ढांचा वैश्विक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता।

    सबसे बड़ा विवाद: वीटो पावर और स्थायी सदस्यता
    UNSC में अभी 5 स्थायी सदस्य हैं—
    United States, United Kingdom, France, Russia और China।

    इन सभी के पास वीटो पावर है, जो किसी भी बड़े वैश्विक निर्णय को रोक सकती है। यही कारण है कि सुधार प्रक्रिया दशकों से अटकी हुई है।

     भारत की राह में सबसे बड़ी रुकावट कौन?
    भारत और G4 के प्रस्तावों का सबसे मजबूत विरोध चीन कर रहा है। चीन का कहना है कि एशिया में पहले से ही उसका प्रतिनिधित्व है और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने से शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा।साथ ही Pakistan Government भी भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर विरोध कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ेगा।

    विश्लेषकों के अनुसार, चीन और पाकिस्तान का संयुक्त विरोध ही भारत की UNSC स्थायी सीट की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

     वैश्विक राजनीति में भारत की चुनौती
    भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के बावजूद अब तक UNSC में स्थायी सदस्य नहीं बन पाया है। G4 देशों का मानना है कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब पुराने ढांचे से मेल नहीं खाता।

    हालांकि, यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश सुधार के पक्ष में हैं, लेकिन सहमति की कमी के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

    UNSC सुधार अब केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बन चुका है। G4 देशों का दबाव और महासचिव का समर्थन भारत के लिए उम्मीद जरूर बढ़ाता है, लेकिन चीन-पाकिस्तान का विरोध इस राह में सबसे बड़ी दीवार बना हुआ है।