Tag: Ganesh Puja

  • बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में बुधवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार को विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और कुछ विशेष वास्तु उपाय अपनाने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है। वहीं वास्तु शास्त्र भी इस दिन को सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और घर-परिवार में खुशहाली लाने के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। माना जाता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक होता है। घर के मुख्य द्वार को साफ रखकर वहां रंगोली बनाना या हरे रंग के पौधे लगाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है, इसलिए इसे अव्यवस्थित या गंदा नहीं रखना चाहिए।

    बुधवार को हरे रंग का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि यह रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घर में हरे रंग के पौधे लगाना, हरे वस्त्र पहनना या पूजा में हरे रंग की वस्तुओं का उपयोग करना लाभकारी माना जाता है। तुलसी का पौधा विशेष रूप से शुभ माना गया है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो बुधवार को उसकी पूजा करने और दीपक जलाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार बुधवार को घर के उत्तर दिशा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उत्तर दिशा को बुध ग्रह की दिशा माना गया है। इस दिशा को साफ-सुथरा और खुला रखना शुभ फलदायी माना जाता है। यदि उत्तर दिशा में अनावश्यक सामान रखा हो तो उसे हटा देना चाहिए। ऐसा करने से धन और करियर से जुड़े अवसरों में वृद्धि होने की मान्यता है।

    भगवान गणेश की पूजा भी बुधवार के दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। सुबह स्नान के बाद गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक और हरे रंग के फूल अर्पित करने से बुद्धि, विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। व्यवसाय और नौकरी से जुड़े लोगों के लिए यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

    आर्थिक उन्नति के लिए बुधवार को हरी मूंग का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को हरी सब्जियां, हरे वस्त्र या हरी मूंग दान करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलने की संभावना बढ़ती है। इसके साथ ही पक्षियों को दाना डालना और गाय को हरा चारा खिलाना भी पुण्यदायी माना गया है।

    यदि घर में लगातार तनाव या नकारात्मकता महसूस हो रही हो तो बुधवार को कपूर और लौंग जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध फैलाना लाभकारी माना जाता है। यह उपाय वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

    कुल मिलाकर बुधवार का दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वास्तु के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से इन उपायों का पालन करने से जीवन में संतुलन और सफलता के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

  • बुधवार के अचूक उपाय: गाय को खिलाएं हरा मूंग-हरी घास, बुध देव की बरसेगी कृपा

    बुधवार के अचूक उपाय: गाय को खिलाएं हरा मूंग-हरी घास, बुध देव की बरसेगी कृपा


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता और ग्रह को समर्पित है। बुधवार का दिन ग्रहों के राजकुमार बुध देव का माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह वाणी बुद्धि शिक्षा संचार और व्यापार के कारक हैं। जिनकी कुंडली में बुध कमजोर होता है या बुध दोष होता है उन्हें वाणी संबंधी समस्याएं निर्णय क्षमता में कमी और व्यापार में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन कुछ सरल और प्रभावी उपाय कर बुध ग्रह को मजबूत किया जा सकता है।

    मंत्र जाप करें

    बुधवार को ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना गया है। नियमित जाप से वाणी में मधुरता बुद्धि में तीक्ष्णता और व्यापार में वृद्धि के योग बनते हैं। विद्यार्थियों और संचार क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह उपाय विशेष लाभकारी बताया गया है।

    गाय को हरा चारा खिलाएं

    बुधवार के दिन गाय को हरा चारा विशेषकर हरी मूंग हरा धनिया या हरी घास खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे बुध ग्रह शांत होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। बुध दोष से पीड़ित लोगों को यह उपाय अवश्य करना चाहिए।

    हरे रंग का उपयोग करें

    हरा रंग बुध ग्रह का प्रिय रंग है। बुधवार को हरे रंग के वस्त्र पहनना या हरे रंग का रूमाल अपने पास रखना शुभ फलदायी होता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुध का दुष्प्रभाव कम होता है।

    गणेश जी की पूजा करें

    बुध ग्रह की शांति के लिए भगवान गणेश की आराधना करना विशेष लाभ देता है। बुधवार को गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। इससे बुध दोष दूर होता है और कार्यों में सफलता मिलती है।

    कच्चे सूत में 7 गांठें बांधें

    परीक्षा या इंटरव्यू में सफलता के लिए बुधवार को कच्चे सूत में सात गांठें लगाकर जय गणेश काटो क्लेश मंत्र का जाप करें और धागे को गणेश जी को अर्पित करें। इससे बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

    तुलसी को जल अर्पित करें

    बुधवार की सुबह तुलसी के पौधे को जल अर्पित करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इससे बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं।

    तांबे का दान और हरी वस्तुओं का दान

    धन लाभ की इच्छा रखने वाले व्यक्ति बुधवार से लगातार सात दिन तक गणेश पूजा कर तांबे का दान करें। साथ ही छोटे बच्चों को हरे फल हरे वस्त्र कॉपी-किताब या पेंसिल दान करना भी शुभ माना गया है। इन उपायों को श्रद्धा और नियमितता से करने पर बुध ग्रह की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में बुद्धि वाणी तथा व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं।

  • आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

    आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। 11 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है और साथ ही बुधवार का पावन संयोग भी बन रहा है। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के समस्त विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और उसे बुद्धि विवेक सफलता तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में बुध दोष होता है उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    आज के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके साथ ही मोदक और शमी के पत्ते चढ़ाने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के समय ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और कार्यों में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यदि कोई नया कार्य आरंभ करना चाहते हैं तो आज का दिन उपयुक्त साबित हो सकता है बशर्ते शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाए।

    आज का अमृत काल प्रातः 03:50 से 05:38 तक रहेगा। यह समय अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त ब्रह्म मुहूर्त 05:28 से 06:16 तक है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान जप और पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:41 से 2:04 तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। यम गण्ड प्रातः 8:29 से 9:53 तक रहेगा जबकि कुलिक काल 11:17 से 12:41 तक है। दुर्मुहूर्त 12:18 से 01:03 तक रहेगा और वर्ज्यम् सायं 05:07 से 06:54 तक है। इन समयों में शुभ कार्यों से परहेज करना ही उचित माना जाता है।

    सूर्योदय प्रातः 7:05 पर होगा और सूर्यास्त सायं 6:16 पर। चंद्रोदय 11 फरवरी को प्रातः 2:07 पर हुआ है जबकि चंद्रास्त दोपहर 12:48 पर होगा। ग्रह नक्षत्रों की यह स्थिति साधना और आराधना के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन सादगी और श्रद्धा के साथ गणेश पूजन करने से जीवन में स्थिरता आती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह दिन विशेष लाभकारी हो सकता है। व्यापार और करियर से जुड़े लोगों को भी आज भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    इस प्रकार 11 फरवरी 2026 का यह दिन आस्था विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। यदि शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए भगवान गणेश की आराधना की जाए तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

  • बुधवार 11 फरवरी शुभ-अशुभ समय पंचांग अनुसार सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग और राहुकाल

    बुधवार 11 फरवरी शुभ-अशुभ समय पंचांग अनुसार सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग और राहुकाल


    नई दिल्ली।11 फरवरी बुधवार को पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक प्रभावी रहेगी इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी नक्षत्र अनुराधा सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक रहेगा इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे

    सूर्योदय इस दिन 7 बजकर 3 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 8 मिनट पर होगा 11 फरवरी के प्रमुख योग की बात करें तो सुबह 7 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग दोनों एक साथ रहेंगे यह दुर्लभ संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है इस समय नए कार्य शुरू करना पूजा हवन दान और अन्य मंगल कार्य करने से विशेष लाभ होता है

    अन्य शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक रहेगा विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक रहेगा और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 6 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगा अमृत काल 12 फरवरी की सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा

    अशुभ समय का ध्यान रखना भी आवश्यक है योग व्याघात 12 फरवरी की देर रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगा वर्ज्य शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा और गंड मूल सुबह 10 बजकर 53 मिनट से अगले दिन सुबह तक प्रभावी रहेगा पंचांग अनुसार अशुभ काल से दूर रहना और महत्वपूर्ण कार्यों को शुभ समय में करना ही उत्तम माना गया है

    राहुकाल 11 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इस समय कोई भी शुभ कार्य करना निष्फल होता है और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है अन्य अशुभ समय में यमगंड सुबह 8 बजकर 26 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक गुलिक काल सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा बुधवार का दिन विघ्न विनाशन गणेश और बुध ग्रह को समर्पित है इस दिन गणपति और बुध ग्रह की विधि विधान से पूजन करने से बाधाओं का नाश होता है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार होता है बुध ग्रह भी शांत होने के कारण कार्यों में सफलता मिलती है

    इस प्रकार 11 फरवरी का दिन पंचांग अनुसार अत्यंत शुभ योगों वाला और कुछ विशेष समयों में सावधानी रखने वाला दिन है सुबह के सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग से नए कार्य शुरू करने के लिए सर्वोत्तम समय मिलता है राहुकाल और अन्य अशुभ समय में सावधानी बरतकर किसी भी प्रकार की बाधा से बचा जा सकता है गणेश और बुध ग्रह की पूजा विधिपूर्वक करने से दिन भर की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है

  • सकट चौथ पर इन चीजों का करें दान, मिलेगा पुण्य

    सकट चौथ पर इन चीजों का करें दान, मिलेगा पुण्य


    नई दिल्ली । माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के चतुर्थी व्रत को सकट चौथ का व्रत कहा जाता है।महिलाएं इस दिन व्रत रखकर संतान की दीर्घायु का वरदान मांगती है। साथ ही इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसे माघी चतुर्थी, तिल चौथ, संकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा
    हिंदू धर्म सकट चौथ व्रत का काफी महत्व होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के चतुर्थी व्रत को सकट चौथ का व्रत कहा जाता है।महिलाएं इस दिन व्रत रखकर संतान की दीर्घायु का वरदान मांगती है। साथ ही इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसे माघी चतुर्थी, तिल चौथ, संकटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। नए साल में सकट चौथ व्रत 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन दान का काफी महत्व होता है। माना जाता है कि इस किन कुछ चीजों का दान करने से

    तिल और गुड़ का दान

    सकट चौथ को कई जगहों पर तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में इस दिन तिल का दान बेहद शुभ फलदायी माना गया है। साथ ही इस दिन गुड़ का दान जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है।

    कपड़ों का दान
    शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या योग्य ब्राह्मण को कंबल, ऊनी वस्त्र या जूते-चप्पल का दान करने से पितृ दोष शांत होता है। साथ ही संतान से जुड़ी परेशानियों और कष्टों से भी राहत मिलती है।

    घी का दान
    सकट चौथ के दिन घी करना भी शुभ होता है। इससे सौभाग्य बढ़ता है। घी का दान घर में धन-धान्य लाता है जिससे समृद्धि आती है। इससे शुक्र की कृपा प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकता है।

    अन्न दान का महत्व

    सकट चौथ के अवसर पर अनाज का दान करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती। धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक संकट दूर होता है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।

    तांबे के पात्र

    शास्त्रों में कहा गया है कि दक्षिणा के बिना कोई भी पूजा अधूरी रहती है। इसलिए सकट चौथ की पूजा संपन्न होने के बाद किसी ब्राह्मण को तांबे का पात्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दें।

    अन्य चीजें

    इसके अलावा सकट चौथ पर नमक का दान, चांदी का दान, कंबल का दान करना भी शुभ फलदायी माना गया है।

    किन चीजों का दान ना करें

    सकट चौथ के दिन भूलकर भी नुकीली चीजों का दान नहीं करना चाहिए। इस दिन नुकीली चीजों का दान करने से व्यक्ति को नुकसान झेलना पड़ सकता है। सकट चौथ के दिन तेल का दान करना मना होता है और भूलकर भी तेल कर दान नहीं करना चाहिए। सकट चौथ के दिन हल्दी का दान नहीं करना चाहिए। इस दिन हल्दी दान करने से वैवाहिक जीवन में परेशानी आने का खतरा रहता है।

  • तिलकुट चौथ व्रत 2026: संतान की रक्षा और दीर्घायु का पावन संकल्प, माता-पिता अवश्य जानें कथा और महत्व

    तिलकुट चौथ व्रत 2026: संतान की रक्षा और दीर्घायु का पावन संकल्प, माता-पिता अवश्य जानें कथा और महत्व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है। इसी दिन तिलकुट चौथ व्रत रखा जाता है, जिसे सकट चौथ का ही एक रूप माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माता-पिता द्वारा संतान की लंबी आयु, उसके सुखद भविष्य और परिवार की सुरक्षा के लिए किया जाता है। वर्ष 2026 में भी श्रद्धा और आस्था के साथ यह व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा और कथा श्रवण से जीवन की बड़ी बाधाएं दूर होती हैं।

    तिलकुट चौथ का नाम ही इसके स्वरूप को दर्शाता है। इस दिन तिल और गुड़ से बने पकवानों का विशेष महत्व होता है। माताएं दिनभर व्रत रखकर शाम के शुभ समय में गणेश जी को तिलकुट लड्डू और दूर्वा अर्पित करती हैं। पूजा के बाद व्रत कथा सुनना और सुनाना अनिवार्य माना गया है क्योंकि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

    तिलकुट चौथ व्रत की पौराणिक कथा

    कथा के अनुसार, एक नगर में साहूकार और उसकी पत्नी रहते थे, जो धर्म-कर्म में विश्वास नहीं रखते थे। संतान न होने से वे दुखी रहते थे। एक दिन साहूकारनी ने पड़ोस में सकट चौथ की कथा सुनी जिसमें बताया गया कि इस व्रत से अन्न, धन, सुहाग और संतान की प्राप्ति होती है। साहूकारनी ने मन में संकल्प लिया कि यदि उसे पुत्र प्राप्त हुआ तो वह तिलकुट चौथ का व्रत करेगी।

    भगवान गणेश की कृपा से उसके घर पुत्र जन्मा, लेकिन समय बीतने के साथ वह अपना वचन भूल गई। जब पुत्र का विवाह तय हुआ, तब चौथ माता नाराज हो गईं और पुत्र को पीपल के पेड़ पर बैठा दिया। विवाह से पहले जब होने वाली बहू जंगल गई, तो उसे पेड़ से आवाज आई-ओ मेरी अर्धब्यहि। सच्चाई जानकर साहूकारनी को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने तुरंत ढाई मन तिलकुट चढ़ाकर विधिवत पूजा की। गणेश जी प्रसन्न हुए और पुत्र सुरक्षित विवाह मंडप में पहुंच गया।

    व्रत विधि और नियम

    इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। शाम को चंद्रमा और गणेश जी की पूजा की जाती है। तिल-गुड़ का भोग अर्पित कर कथा सुनी जाती है। व्रत का पारण संतान को तिलकुट खिलाकर किया जाता है। मान्यता है कि इससे संतान को नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है।

    तिलकुट चौथ व्रत का महत्व
    यह व्रत माता-पिता और संतान के बीच भावनात्मक व आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करता है। माना जाता है कि इससे संतान पर आने वाले संकट टलते हैं, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि तिलकुट चौथ व्रत को मातृत्व और संतान-सुरक्षा का विशेष पर्व माना गया है।

  • बुधवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना कमजोर हो सकता है बुध ग्रह; जानें बचाव के उपाय

    बुधवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना कमजोर हो सकता है बुध ग्रह; जानें बचाव के उपाय


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है और उसी के अनुसार उस दिन के नियम और सावधानियां भी निर्धारित की गई हैं। बुधवार का दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, शिक्षा, व्यापार, नौकरी और आर्थिक निर्णयों का कारक कहा गया है। ऐसे में यदि बुधवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन न किया जाए, तो इसका सीधा प्रभाव व्यक्ति के करियर, धन और मानसिक संतुलन पर पड़ सकता है।

    मान्यताओं के अनुसार बुधवार को धन का लेन-देन करना अशुभ माना जाता है। इस दिन उधार देना या लेना, नए निवेश करना या किसी साझेदारी में प्रवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। कहा जाता है कि बुधवार को किया गया गलत आर्थिक निर्णय धन फंसने या हानि का कारण बनता है। इसलिए इस दिन बड़े आर्थिक सौदों से बचना ही बेहतर माना गया है। इसके अलावा बुधवार को घर की महिलाओं का अपमान करना भी बुध दोष को बढ़ाता है। बेटी, बहन, बुआ या मौसी जैसे रिश्तों के साथ कठोर व्यवहार या अनादर पारिवारिक अशांति के साथ-साथ आर्थिक और मानसिक परेशानियों को जन्म दे सकता है। बुध ग्रह वाणी और व्यवहार से जुड़ा होता है, इसलिए इस दिन रिश्तों में मधुरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

    वाणी पर नियंत्रण रखना बुधवार का सबसे महत्वपूर्ण नियम बताया गया है। झूठ बोलना, कटु शब्दों का प्रयोग करना, बेवजह बहस या विवाद में उलझना बुध को कमजोर करता है। शांत, संयमित और सकारात्मक भाषा का प्रयोग करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और व्यक्ति की संवाद क्षमता में सुधार आता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार बुधवार को बाल और नाखून काटने से भी बचना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से मानसिक अस्थिरता और निर्णय क्षमता कमजोर हो सकती है। इसी तरह इस दिन काले रंग के कपड़े पहनना भी अशुभ माना गया है। इसके स्थान पर हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि हरा रंग बुध ग्रह का प्रतिनिधि रंग है।

    बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा को दिशाशूल माना गया है। यदि यात्रा अत्यंत आवश्यक हो, तो धनिया खाकर या साथ लेकर निकलने की परंपरा बताई गई है। वहीं इस दिन दवाइयां, बर्तन, साबुन, तेल, दूध से बनी चीजें और कुछ हरी सब्जियों की खरीदारी से भी बचने की सलाह दी जाती है। भूमि से जुड़े कार्य या नए व्यापार की शुरुआत भी बुधवार को टालना बेहतर माना गया है। यदि बुध ग्रह को मजबूत करना तो बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करें और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करें। मूंग दाल धनिया जैसी हरी वस्तुओं का दान या उपयोग भी शुभ फल देता है। मान्यता है कि इन छोटे-छोटे नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और शिक्षा, व्यापार व करियर में स्थिरता और प्रगति मिलती है।

  • विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

    विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । आज 24 दिसंबर को विघ्नेश्वर चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है जो विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह पर्व पौष माह की विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है और इसे विघ्नेश्वर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सारे विघ्न दूर होते हैं और समृद्धि सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का शुभ मुहूर्त चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त

    सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक वर्जित चंद्रोदय काल सुबह 10:16 बजे से रात 9:26 बजे तक इस दौरान चंद्र दर्शन न करें

    गणेश जी की पूजा विधि

    ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। पूजा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करके पंचामृत से भगवान गणेश का अभिषेक करें। इसके बाद वस्त्र जनेऊ चंदन दूर्वा फूल धूप और दीप अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक गुड़ या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।

    गणेश जी के मंत्र:
    ॐ गण गणपतये नमः कम से कम 108 बार जाप करें श्री गणेशाय नम: ऊं गं गणपतये नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

    गणेश गायत्री मंत्र:

    ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
    गणेश जी की आरती
    जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
    एक दंत दयावंत चार भुजा धारी माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी। यह आरती भगवान गणेश के गुणों और उनकी कृपा के बारे में है जो भक्तों के जीवन में सुख समृद्धि और शांति लाती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का महत्व

    इस दिन का व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से नौकरी व्यापार शिक्षा और वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं से राहत मिलती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। आज के दिन गणेश जी की पूजा विधि और मंत्रों के जाप से न केवल आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।