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  • गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए रखें बुधवार का व्रत! जानें क्या खाएं क्या न खाएं और किन बातों का रखें ध्यान

    गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए रखें बुधवार का व्रत! जानें क्या खाएं क्या न खाएं और किन बातों का रखें ध्यान

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। गणेश जी को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है इसलिए उनकी पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होने और शुभ कार्यों में सफलता मिलने की धार्मिक मान्यता है। बुधवार को व्रत रखने वाले भक्त भगवान गणेश की पूजा के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा गया व्रत मन को शांति देने के साथ व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करता है।

    बुधवार व्रत रखने के लिए सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा लाल फूल चढ़ाकर मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है। पूजा के बाद गणेश जी की आरती करें और अपनी मनोकामना उनके सामने रखें।

    व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन भगवान गणेश का ध्यान और मंत्र जाप करना चाहिए। ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश मंत्र का जाप करने से मन एकाग्र होता है और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाने में मदद मिलती है। व्रत के दौरान क्रोध झूठ और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। मन को शांत रखते हुए अच्छे विचारों और अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।

    बुधवार के व्रत में खानपान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। अलग अलग परिवारों और परंपराओं में व्रत के नियम अलग हो सकते हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। फल दूध दही और व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का सेवन अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार किया जा सकता है। अगर स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी हो तो व्रत रखने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन हरी मूंग का दान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य जरूरी वस्तुएं दान की जा सकती हैं। हालांकि दान का उद्देश्य दिखावा नहीं बल्कि सेवा और परोपकार की भावना होना चाहिए।

    व्रत के दौरान कुछ लोग नमक या अनाज का सेवन नहीं करते हैं लेकिन यह सभी के लिए अनिवार्य नियम नहीं है। व्रत की समाप्ति पर भगवान गणेश की पूजा और आरती करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है। गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाकर परिवार के लोगों में प्रसाद बांटना शुभ माना जाता है।

    बुधवार व्रत से जुड़े नियम मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन नियमों में अंतर हो सकता है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखना उचित माना जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि व्रत के दौरान श्रद्धा के साथ भगवान गणेश का स्मरण करें और जरूरतमंदों की मदद करने का प्रयास करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार सच्ची श्रद्धा से गणेश जी की पूजा करने से जीवन में सुख शांति बुद्धि और समृद्धि की कामना की जाती है।

  • आज का पंचांग: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर गणेश उपासना का विशेष योग…

    आज का पंचांग: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर गणेश उपासना का विशेष योग…


    नई दिल्ली।आज गुरुवार 5 फरवरी 2026, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि है। यह दिन भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत और रात्रि में चंद्र दर्शन से बुद्धि, विवेक और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गुरुवार है, जो देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। गुरु के प्रभाव से आज ज्ञान, शिक्षा, सलाह और सम्मान से जुड़े कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है।

    तिथि, योग और करण:
    पंचांग के अनुसार, आज कृष्ण चतुर्थी तिथि रात्रि 12:22 बजे (6 फरवरी) तक रहेगी। सुकर्मा योग रात्रि 12:04 बजे तक प्रभावी रहेगा। करण की बात करें तो दोपहर 12:10 बजे तक बव करण और इसके बाद बालव करण रहेगा।

    सूर्य-चंद्र की स्थिति:
    सूर्योदय प्रातः 7:07 बजे और सूर्यास्त सायं 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 9:35 बजे तथा चंद्रास्त सुबह 9:05 बजे होगा। व्रती चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करेंगे।

    नक्षत्र और ग्रह स्थिति:
    आज चंद्रमा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो रात्रि 10:57 बजे तक रहेगा। यह नक्षत्र दान, सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। ग्रहों की स्थिति के अनुसार सूर्य, मंगल और शुक्र मकर राशि में हैं, जबकि चंद्रमा कन्या राशि में स्थित है। गुरु मिथुन, शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं।

    शुभ और अशुभ समय:
    आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक रहेगा, जो संपत्ति, निवेश और प्रशासनिक कार्यों के लिए अनुकूल है। वहीं राहुकाल दोपहर 1:57 से 3:19 बजे तक रहेगा, इस दौरान शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

    द्विजप्रिय संकष्टी का धार्मिक महत्व:
    इस दिन भगवान गणेश को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर और मोदक अर्पित करने का विधान है। यह व्रत पारिवारिक बाधाओं को दूर करता है और जीवन में स्थिरता लाता है। ब्राह्मण सेवा और दान का आज विशेष महत्व है।यह पंचांग धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत निर्णय हेतु विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।