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  • तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना में गणेश उत्सव के समापन के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। हादसों की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं और अलग-अलग घटनाओं की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

    राज्य के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने विसर्जन के दौरान हुई इन घटनाओं की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, पूरे राज्य में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसे हुए। इनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। संबंधित घटनाओं के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक हादसा किस वजह से हुआ।

    गणेश उत्सव के दौरान इस वर्ष तेलंगाना में बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। शहरों और कस्बों के अलावा घरों, अपार्टमेंट परिसरों और गेटेड सोसाइटी में भी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। उत्सव समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर अलग-अलग विसर्जन स्थलों तक पहुंचे। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

    पुलिस और प्रशासन की ओर से विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हादसे हुए। इन घटनाओं में पुलिस विभाग से जुड़े एक सब-इंस्पेक्टर की भी मौत हुई है।

    पुलिस महानिदेशक के अनुसार, तेलंगाना में करीब 1.24 लाख गणेश प्रतिमाएं आधिकारिक रूप से स्थापित की गई थीं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्रतिमाएं लोगों ने अपने घरों, अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटी में स्थापित की थीं। इन सभी को मिलाकर राज्य में गणेश प्रतिमाओं की कुल संख्या करीब 3.5 लाख से 4 लाख तक होने का अनुमान लगाया गया है।

    इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के विसर्जन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों की भारी भीड़ जुटी। कई स्थानों पर श्रद्धालु जुलूस के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    हादसों में घायल हुए 26 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, मृतकों की घटनाओं और हादसों के कारणों को लेकर पूरी जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रहे हैं। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान हुई इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बीच हुए इन हादसों ने 13 लोगों की जान ले ली, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। आने वाले समय में जांच और विस्तृत जानकारी के बाद घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर नगर निगम की ओर से इस बार विशेष और हाईटेक व्यवस्था की गई है। विसर्जन के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के उद्देश्य से जवाहर टेकरी पर मानव रहित मशीनों के जरिए प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा रहा है। इसके लिए पोकलेन मशीन, बड़ी नाव और लिफ्ट सहित पांच प्रकार की मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    नगर निगम ने इस व्यवस्था के तहत 15 से 20 लाख गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का लक्ष्य रखा है। प्रतिमाओं को तालाब में विसर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं को सीधे पानी में जाने की जरूरत नहीं होगी। मशीनों और अन्य साधनों की मदद से प्रतिमाओं को तालाब में सुरक्षित तरीके से विसर्जित किया जा रहा है।

    विसर्जन के दौरान लोगों के पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जवाहर टेकरी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें श्रद्धालु तालाब के पानी से दूरी बनाए रखते हुए पूजा और विधि-विधान पूरा कर सकेंगे। इसके बाद प्रतिमा को निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से विसर्जित किया जाएगा।

    शहर के अलग-अलग कॉलोनियों और वार्ड स्तर पर भी प्रतिमाओं के एकत्रीकरण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए 140 से अधिक स्थान निर्धारित किए गए हैं। इन स्थानों पर प्रतिमाएं एकत्र की जा रही हैं और मौके पर ही जल कुंड बनाकर विसर्जन की व्यवस्था भी की गई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली प्रतिमाओं के विसर्जन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। पुलिसकर्मियों के साथ एनडीआरएफ की टीम और पांच विशेष तैराकों को तैनात किया गया है। इनकी मौजूदगी का उद्देश्य विसर्जन के दौरान किसी भी संभावित आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    श्रद्धालुओं को भी तालाब के कुंड से दूर रखा जा रहा है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान उन्हें पानी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। प्रतिमाओं को मशीनों और अन्य निर्धारित माध्यमों से तालाब में कुछ दूरी से ही विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इस तरह प्रतिमा विसर्जन की धार्मिक प्रक्रिया को बनाए रखते हुए लोगों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।

    तालाब और विसर्जन स्थल के आसपास निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इनके जरिए आयोजन स्थल और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मशीनों से होने वाले विसर्जन और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है।

    इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य गणेश प्रतिमा विसर्जन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है। खासतौर पर पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मानव रहित मशीनों और सुरक्षा दलों की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए एकत्रीकरण केंद्रों और जल कुंडों के जरिए विसर्जन व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर भी संचालित किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर पोकलेन, लिफ्ट, नाव और अन्य मशीनों के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा टीमों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को पानी से दूर रखकर प्रतिमाओं का विसर्जन कराने की व्यवस्था के जरिए इस धार्मिक आयोजन को सुरक्षित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • खंडवा में गणेश विसर्जन की धूम, मंत्री विजय शाह ने की आरती, क्रेन पर चढ़कर कृत्रिम कुंड का निरीक्षण

    खंडवा में गणेश विसर्जन की धूम, मंत्री विजय शाह ने की आरती, क्रेन पर चढ़कर कृत्रिम कुंड का निरीक्षण

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में गणेश उत्सव के समापन के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला धूमधाम से जारी है। विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। इस दौरान प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने विसर्जन स्थल पहुंचकर भगवान गणेश की आरती की और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

    मंत्री विजय शाह ने विसर्जन के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। उनके साथ खंडवा की महापौर अमृता यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता मौजूद रहे। इस दौरान अधिकारियों से विसर्जन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई।

    खंडवा में गणेश प्रतिमाओं के सुरक्षित विसर्जन के लिए नगर निगम की ओर से शहर में तीन कृत्रिम कुंड तैयार किए गए हैं। इन कुंडों के माध्यम से प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके और विसर्जन के दौरान आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए जा सकें।

    मंत्री विजय शाह ने महापौर अमृता यादव और नगर निगम परिषद के सदस्यों के साथ भैरव तालाब परिसर में बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और नगर निगम के प्रतिनिधियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री विजय शाह विसर्जन में इस्तेमाल की जा रही क्रेन पर भी चढ़े और वहां से कुंड की व्यवस्था का जायजा लिया। विसर्जन के लिए क्रेन के इस्तेमाल से प्रतिमाओं को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने और विसर्जन की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की व्यवस्था की गई है।

    गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन और नगर निगम की ओर से सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। नगर निगम की टीम विसर्जन स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं को सुविधाजनक तरीके से विसर्जन कराने में जुटी हुई है।

    मंत्री विजय शाह ने नगर निगम की ओर से बनाए गए कृत्रिम कुंडों की व्यवस्था पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप भगवान गणेश के विसर्जन के लिए कुंड तैयार करना सराहनीय पहल है। उन्होंने खंडवा नगर निगम की पूरी टीम को इस व्यवस्था के लिए बधाई दी।

    मंत्री ने कहा कि नगर निगम ने लोगों की भावनाओं और विश्वास के अनुरूप व्यवस्था की है। उन्होंने भगवान गणेश के विसर्जन को सम्मानपूर्वक संपन्न कराने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए विसर्जन की व्यवस्था की गई है।

    विजय शाह ने यह भी कहा कि भगवान गणेश का विसर्जन मां नर्मदा के पवित्र जल में सम्मानपूर्वक किया जा रहा है। गणेश उत्सव के अंतिम चरण में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंच रहे हैं।

    खंडवा में तीन कृत्रिम कुंडों की व्यवस्था और नगर निगम की तैयारियों के बीच गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन लगातार जारी है। प्रशासन और नगर निगम की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा तथा विसर्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी पर अगर इस बार भोग के लिए कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो चॉकलेट मोदक एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद वाला है और घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसमें डार्क चॉकलेट के साथ नारियल, काजू, बादाम और पिस्ता का इस्तेमाल किया जाता है। चॉकलेट का स्वाद बच्चों को भी पसंद आ सकता है।

    चॉकलेट मोदक तैयार करने के लिए 250 ग्राम डार्क चॉकलेट, 100 ग्राम नारियल का बुरादा, दो चम्मच बारीक कटे काजू, दो चम्मच बारीक कटे बादाम और दो चम्मच बारीक कटा पिस्ता चाहिए। इसके अलावा 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क और एक चम्मच घी की जरूरत होगी। इन सीमित सामग्रियों से मोदक का मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले डार्क चॉकलेट को पिघलाना होगा। इसके लिए एक पैन में थोड़ा पानी गर्म करें और उसके ऊपर एक कटोरी रखें। कटोरी में डार्क चॉकलेट डालकर धीमी आंच पर धीरे-धीरे पिघलाएं। चॉकलेट को सीधे तेज आंच पर गर्म करने से बचना चाहिए। डबल बॉयलर तरीके से चॉकलेट को धीरे-धीरे पिघलाया जा सकता है।

    इसके बाद दूसरे पैन में एक चम्मच घी गर्म करें। इसमें कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ता और नारियल का बुरादा डालें। सभी चीजों को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इस दौरान ध्यान रखें कि नारियल और ड्राई फ्रूट्स ज्यादा न भुनें।

    जब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तब इसमें 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क डालें। इसे अच्छी तरह मिलाते हुए तब तक चलाएं, जब तक सभी सामग्री आपस में मिलकर थोड़ा गाढ़ा मिश्रण न बना लें। इसके बाद इसमें पहले से पिघलाई गई डार्क चॉकलेट डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।

    चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स का मिश्रण तैयार होने के बाद इसे कुछ देर ठंडा होने दें। मिश्रण इतना ठंडा हो जाए कि उसे आसानी से सांचे में भरा जा सके, तब मोदक बनाने की प्रक्रिया शुरू करें।

    मोदक के सांचे पर पहले हल्की-सी घी की परत लगा दें। इससे तैयार मोदक को सांचे से निकालने में आसानी होगी। अब चॉकलेट मिश्रण को सांचे में भरकर हल्के हाथ से दबाएं। इसके बाद सांचे को खोलकर मोदक को सावधानी से बाहर निकाल लें।

    इसी तरह पूरे मिश्रण से मोदक तैयार करें और कुछ देर के लिए इन्हें सेट होने दें। इसके बाद इन्हें ठंडा करके परोसा जा सकता है। गणेश चतुर्थी के भोग के अलावा घर आए मेहमानों और बच्चों को भी ये मोदक खिलाए जा सकते हैं।

    चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स का संयोजन इस मिठाई को पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद देता है। खासतौर पर जिन बच्चों को सामान्य मोदक पसंद नहीं आते, उनके लिए यह चॉकलेट वाला विकल्प पसंद किया जा सकता है। चॉकलेट पिघलाते समय डबल बॉयलर का इस्तेमाल और सांचे पर हल्की घी की परत लगाना इसकी तैयारी को आसान बनाता है।

  • गणेश चतुर्थी पर अभिजीत सावंत ने रिलीज किया ‘गण धाव रे’ भक्ति गीत, बेटियों अहाना और समीरा ने भी दी अपनी आवाज

    गणेश चतुर्थी पर अभिजीत सावंत ने रिलीज किया ‘गण धाव रे’ भक्ति गीत, बेटियों अहाना और समीरा ने भी दी अपनी आवाज


    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी के मौके पर गायक अभिजीत सावंत ने अपना नया भक्ति गीत ‘गण धाव रे’ रिलीज किया है। इस गाने की खास बात यह है कि इसमें उनकी दोनों बेटियां अहाना और समीरा भी उनके साथ जुड़ी हैं। दोनों ने गाने में बैकग्राउंड वोकल्स दिए हैं। अभिजीत के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी संगीत यात्रा में पहली बार वह अपनी दोनों बेटियों के साथ एक ही गाने के लिए आवाज देते नजर आए हैं।

    अभिजीत सावंत ने बताया कि दोनों बेटियों के साथ ‘गण धाव रे’ रिकॉर्ड करना उनके लिए भावुक पल था। उन्होंने कहा कि गाने में बेटियों का उनके साथ होना बप्पा का दिव्य संयोग है। उनके मुताबिक, तीनों का एक साथ किसी गाने के लिए अपनी आवाज देना उनकी संगीत यात्रा का अलग अनुभव है और यह प्रोजेक्ट उनके दूसरे कामों से काफी अलग है।

    गाने को साझा करते हुए अभिजीत ने गणेश चतुर्थी और बप्पा के साथ लोगों के अलग-अलग रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का बप्पा के साथ अपना एक खास रिश्ता होता है। कोई उन्हें दोस्त मानता है, कोई परिवार का हिस्सा और कोई मुश्किल समय में सहारा मानता है। अभिजीत के अनुसार, ‘गण धाव रे’ के जरिए इसी रिश्ते को महसूस करने का मौका मिलेगा।

    अभिजीत ने यह भी कहा कि बेटियों की आवाज जुड़ने के कारण यह गाना उनके लिए केवल एक भक्ति गीत नहीं रह गया, बल्कि परिवार के साथ संजोकर रखने वाली याद बन गया है। इस तरह गणेश चतुर्थी पर रिलीज हुआ यह गीत उनके लिए संगीत और परिवार, दोनों से जुड़ा खास प्रोजेक्ट बन गया है।

    अभिजीत सावंत को ‘इंडियन आइडल’ के पहले सीजन से घर-घर में पहचान मिली थी। शो के जरिए उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और इसके बाद उनकी संगीत यात्रा आगे बढ़ी। साल 2005 में उनका पहला सोलो एल्बम ‘आपका अभिजीत सावंत’ रिलीज हुआ। इसी साल उन्होंने फिल्म ‘आशिक बनाया आपने’ के लिए प्लेबैक सिंगिंग की और ‘मर जावां मिट जावां’ गाना गाया।

    इसके बाद साल 2007 में उनका दूसरा एल्बम ‘जुनून’ रिलीज हुआ। करीब छह साल बाद 2013 में उन्होंने अपना तीसरा स्टूडियो एल्बम ‘फरीदा’ पेश किया। संगीत के अलावा अभिजीत ने अभिनय में भी हाथ आजमाया। साल 2009 में उन्होंने फिल्म ‘लॉटरी’ से एक्टिंग डेब्यू किया। इसके बाद वह ‘तीस मार खान’ में भी छोटे अपीयरेंस में नजर आए।

    हाल ही में अभिजीत सावंत ‘इंडियन आइडल’ के मंच पर दोबारा दिखाई दिए थे। 4 जुलाई को शो के 75वें एपिसोड यानी डायमंड जुबली स्पेशल में पहले सीजन के कंटेस्टेंट्स का रीयूनियन हुआ था। इस दौरान अभिजीत सावंत और अमित सना करीब 22 साल बाद एक बार फिर मंच पर साथ नजर आए। गणेश चतुर्थी पर ‘गण धाव रे’ की रिलीज के साथ अभिजीत ने अब अपनी बेटियों को भी इस संगीत यात्रा का हिस्सा बनाया है।

  • अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने मनाई गणेश चतुर्थी, बोले- बप्पा हर साल परिवार को करीब लाते हैं

    अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने मनाई गणेश चतुर्थी, बोले- बप्पा हर साल परिवार को करीब लाते हैं

    नई दिल्ली ।अभिनेता वर्धन पुरी ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने परिवार की पुरानी परंपराओं और इस त्योहार से जुड़ी बचपन की यादों को साझा किया है। वर्धन के लिए गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के एक साथ आने और रिश्तों को मजबूत करने का खास अवसर भी है। इस दौरान उन्होंने अपने दिवंगत दादा और दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ बिताए बचपन के पलों को भी याद किया।

    वर्धन ने बताया कि उनके परिवार में जब पहली बार घर पर बप्पा को लाने की परंपरा शुरू हुई थी, तब पूरा परिवार मिलकर गणपति के पसंदीदा मोदक अपने हाथों से तैयार करता था। इस परंपरा में उनके दादा-दादी, माता-पिता, बहन साची और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल होते थे। परिवार के सभी लोगों का साथ मिलकर त्योहार मनाना उनके बचपन की सबसे खास यादों में शामिल है।

    उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी परिवार की यह परंपरा उसी तरह जारी है। हर साल बप्पा के घर आने के साथ परिवार में खुशी और उत्सव का माहौल बनता है। वर्धन के मुताबिक, इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ मौजूद होना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।

    वर्धन ने अपने परिवार के गणेश उत्सव मनाने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गणपति उत्सव के दौरान परिवार के लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से एक जगह इकट्ठा होते हैं। वह मंदिर में स्थापित गणपति की उसी मूर्ति को अपने घर के बैठक वाले कमरे में लेकर आते हैं। इसके बाद दो दिनों तक बप्पा का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घर में महाराष्ट्रीयन व्यंजन और अलग-अलग तरह के मोदक तैयार किए जाते हैं।

    दो दिन के उत्सव के बाद परिवार के सभी सदस्यों की मौजूदगी में गणपति की मूर्ति को वापस मंदिर ले जाया जाता है। इसके बाद विसर्जन के लिए नारियल से बनी पर्यावरण के अनुकूल गणपति की मूर्ति लाई जाती है। वर्धन का कहना है कि बप्पा का उत्सव मनाने के साथ धरती और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    उनके मुताबिक, गणेश चतुर्थी की सबसे खास बात यह है कि हर साल यह त्योहार परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के और करीब लाता है। उनके लिए यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि साथ समय बिताने, पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी है।

    वर्धन पुरी दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के पोते हैं। अमरीश पुरी ने हिंदी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में निभाया उनका ‘मोगैम्बो’ का किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनका किरदार और उससे जुड़ा अंदाज हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों में गिना जाता है।

    अमरीश पुरी का 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। उनके निधन के वर्षों बाद भी फिल्मों में उनके निभाए किरदार दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए हैं। वर्धन के लिए गणेश चतुर्थी उनके परिवार की परंपराओं के साथ-साथ दादा अमरीश पुरी से जुड़ी पुरानी यादों को संजोने का भी अवसर है।

  • मुस्लिम बॉलीवुड और टीवी स्टार्स भी मनाते हैं गणेश चतुर्थी, सलमान से सारा अली खान तक बप्पा की भक्ति में रहते हैं लीन

    मुस्लिम बॉलीवुड और टीवी स्टार्स भी मनाते हैं गणेश चतुर्थी, सलमान से सारा अली खान तक बप्पा की भक्ति में रहते हैं लीन

    Bollywood Ganpati Celebration: गणेश चतुर्थी का त्योहार आते ही पूरा देश भक्ति के रंग में रंग जाता है। हवाओं में ‘गणपति बाप्पा मोरिया’ की गूंज होती है और हर तरफ एक अलग ही पॉजिटिव वाइब देखने को मिलती है। भारत में त्यौहार सिर्फ किसी एक धर्म के नहीं होते, बल्कि ये सबको आपस में जोड़ने का काम करते हैं। हमारी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड और टीवी जगत में भी यह खूबसूरती साफ दिखाई देती है। स्क्रीन पर अपने अभिनय से दिल जीतने वाले कई मुस्लिम सेलेब्स हर साल अपने घरों में गणपति बप्पा का स्वागत बहुत ही धूमधाम से करते हैं। वे न सिर्फ अपने घर में बप्पा की स्थापना करते हैं, बल्कि पूरे विधि-विधान से पूजा और आरती भी करते हैं।

    सलमान खान

    बॉलीवुड के ‘दबंग’ यानी सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट में हर साल गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत ही ग्रैंड लेवल पर मनाया जाता है। सलमान की मां सुशीला चरक (सलमा खान) और पूरा खान परिवार बप्पा का स्वागत बहुत ही भक्ति-भाव से करता है। सलमान खान खुद आरती करते हैं, ढोल-नगाड़ों पर डांस करते हैं और विसर्जन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उनके घर का गणेशोत्सव पूरे बॉलीवुड में फेमस है।

    शाहरुख खान

    बॉलीवुड के ‘किंग’ शाहरुख खान भी हर साल अपने घर ‘मन्नत’ में गणपति बाप्पा को लेकर आते हैं। शाहरुख अपने छोटे बेटे अबराम और पूरे परिवार के साथ मिलकर बप्पा की पूजा करते हैं। सोशल मीडिया पर जब भी वे बप्पा के साथ अपनी फोटो शेयर करते हैं, तो फैंस उनके इस सेक्युलर अंदाज़ और सोच की जमकर तारीफ करते हैं। शाहरुख का मानना है कि हर त्यौहार हमें खुशियां और प्यार बांटना सिखाता है।

    सारा अली खान

    यंग जनरेशन की फेवरेट एक्ट्रेस सारा अली खान हमेशा से ही अपनी धार्मिक आस्था को लेकर खुलकर बात करती हैं। सारा हर साल अपने घर पर गणपति बाप्पा की मूर्ति स्थापित करती हैं और पीले या लाल पारंपरिक कपड़ों में बप्पा की पूजा करती हैं। वह लालबागचा राजा के दर्शन करने भी जाती हैं। सारा के लिए गणेश चतुर्थी का मतलब बप्पा से आशीर्वाद लेना और घर में पॉजिटिविटी लाना है।

    सैफ अली खान

    पटौदी खानदान के नवाब और बेहतरीन एक्टर सैफ अली खान भी गणेशोत्सव को बहुत ही सादगी और प्यार से मनाते हैं। करीना कपूर खान और अपने बच्चों तैमूर व जेह के साथ मिलकर सैफ घर पर क्ले (मिट्टी) के गणपति बनाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। सैफ का मानना है कि बच्चों को हर धर्म के त्यौहारों का सम्मान करना और उनसे जुड़ी अच्छी बातें सीखना बहुत जरूरी है।

    हिना खान

    टीवी और बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस हिना खान भी बप्पा की बहुत बड़ी भक्त हैं। हिना हर साल गणेश चतुर्थी के मौके पर अपने दोस्तों के घर बप्पा के दर्शन करने जाती हैं और सोशल मीडिया पर फैंस को विश भी करती हैं। मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी हिना की बप्पा पर श्रद्धा कभी कम नहीं हुई और वे हमेशा बप्पा से सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं।

    शहीर शेख

    टीवी के बेहद हैंडसम और मशहूर एक्टर शहीर शेख भी गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े ही प्यार से मनाते हैं। अपनी पत्नी रुचिका कपूर के साथ मिलकर शहीर घर को दीयों और फूलों से सजाते हैं। शहीर का मानना है कि गणपति बाप्पा घर में खुशियां और नई शुरुआत की एनर्जी लाते हैं, इसलिए वे इस त्यौहार को हर साल खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

    जैन इमाम

    टीवी के पॉपुलर एक्टर जैन इमाम भी उन सितारों में शामिल हैं जो गणेशोत्सव की रौनक को दिल से एन्जॉय करते हैं। जैन अक्सर अपने दोस्तों के घर जाकर बप्पा की आरती में शामिल होते हैं और विसर्जन के दौरान जमकर डांस भी करते हैं। उनका मानना है कि बप्पा सभी के विघ्न हर लेते हैं और मुंबई की गणेश चतुर्थी की बात ही कुछ अलग है।

    अदा खान

    ‘नागिन’ फेम एक्ट्रेस अदा खान बप्पा की बहुत बड़ी फैन और भक्त हैं। अदा हर साल गणेश चतुर्थी पर अपने घर में इको-फ्रेंडली गणपति लाती हैं या फिर अपने करीबी दोस्तों के घर जाकर बप्पा के सामने माथा टेकती हैं। वे बप्पा के लिए मोदक बनाती हैं और बप्पा का आशीर्वाद लेकर ही अपने नए कामों की शुरुआत करती हैं।

    रक्षंदा खान

    टीवी की सीनियर और टैलेंटेड एक्ट्रेस रक्षंदा खान भी गणेश चतुर्थी को बहुत ही उत्साह के साथ सेलिब्रेट करती हैं। अपने पति सचिन त्यागी और परिवार के साथ मिलकर रक्षंदा घर में बप्पा का स्वागत करती हैं। वे इस त्योहार के जरिए अपने फैंस और समाज को एकता और भाईचारे का बहुत ही खूबसूरत मैसेज देती हैं।

    टीवी के अन्य मुस्लिम सेलेब्स का सपोर्ट

    इन बड़े सितारों के अलावा टीवी इंडस्ट्री के कई और मुस्लिम एक्टर्स और एक्ट्रेसेस भी हैं जो गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के अलग-अलग पंडालों में जाकर बप्पा के दर्शन करते हैं। इनमें आमना शरीफ और अली गोनी जैसे सितारे भी शामिल हैं जो अपने दोस्तों के साथ बप्पा की भक्ति में लीन नजर आते हैं। यह दिखाता है कि मुंबई का गणेशोत्सव सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक ऐसा इमोशन है जो हर मजहब के इंसान को एक धागे में पिरो देता है।

  • Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी पर घर में भगवान गणेश की स्थापना को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बप्पा के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाने से लेकर पूजा की सामग्री जुटाने तक कई काम पहले से करने पड़ते हैं। यदि आप भी इस बार घर पर गणपति स्थापना करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की पूरी सूची पहले ही तैयार कर लेना बेहतर रहेगा। इससे स्थापना के समय किसी जरूरी सामान की कमी नहीं होगी और पूजा की तैयारी व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

    गणपति को विराजमान करने के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी की जरूरत होती है। चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पूजा के अनुकूल साफ कपड़ा रखा जा सकता है। इसी स्थान पर गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है। मूर्ति के साथ अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी की गांठ और सिक्का जैसी पूजा सामग्री भी पहले से तैयार रखी जा सकती है।

    गणेश स्थापना में कलश का भी महत्व बताया गया है। इसके लिए तांबे या पीतल का कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल और कलावा जैसी सामग्री जुटाकर रखी जा सकती है। पूजा के समय इन चीजों की जरूरत पड़ती है, इसलिए इन्हें पहले से एक स्थान पर रखना सुविधाजनक रहेगा।

    गणपति पूजा की सामग्री में दूर्वा और सुपारी भी खास तौर पर शामिल की जाती है। बप्पा को अर्पित करने के लिए ताजे फूल भी तैयार रखें। इसके अलावा जनेऊ, पानी वाला नारियल और गुड़-नारियल का गोला भी पूजा की सामग्री में रखा जा सकता है। इनका इस्तेमाल पूजा और भोग की तैयारी में किया जाता है।

    भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक या लड्डू, फल और पंचमेवा तैयार रखना चाहिए। यदि घर पर मोदक बनाने की तैयारी है तो उन्हें पूजा के समय से पहले बनाकर रख लेना बेहतर रहेगा। पंचामृत भी पूजा के लिए तैयार किया जा सकता है। इससे स्थापना और पूजा के दौरान जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रहेगी।

    पूजा की थाली में घी का दीपक और धूप भी जरूर रखें। आरती और पूजा के दौरान इनकी जरूरत होती है। पूजा की सभी छोटी-बड़ी चीजों को एक साथ व्यवस्थित करके रखने से स्थापना के समय सामान तलाशने में परेशानी नहीं होगी।

    गणेश चतुर्थी की पूजा में कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल होता है। इसलिए आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के लिए पूजा का सामान एक दिन पहले ही जुटा लेना बेहतर रहेगा। चौकी, कपड़ा, गणपति मूर्ति, अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, सिक्का, कलश, गंगाजल, पत्ते, नारियल, कलावा, सुपारी, दूर्वा, फूल और जनेऊ जैसी सामग्री की तैयारी पहले की जा सकती है।

    इसी तरह भोग के लिए मोदक या लड्डू, फल, पंचमेवा और पंचामृत भी समय से तैयार रखें। दीपक और धूप को भी पूजा की सामग्री के साथ रख दें। इस तरह गणपति स्थापना के समय जरूरी सामान पहले से तैयार रहेगा और पूजा की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

  • Besan Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं खस्ता मावा मोदक, बेसन और मेवों से तैयार करें स्वादिष्ट भो

    Besan Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं खस्ता मावा मोदक, बेसन और मेवों से तैयार करें स्वादिष्ट भो


    नई दिल्ली ।
    गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। आमतौर पर मोदक चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं, लेकिन इस बार घर में मौजूद बेसन से भी स्वादिष्ट मोदक बनाए जा सकते हैं। बेसन का सोंधापन और मावा-मेवों की भरावन इस मिठाई को अलग स्वाद देती है। गणेश चतुर्थी के मौके पर घर पर तैयार किए गए इन मोदक को बप्पा को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

    बेसन मावा मोदक बनाने के लिए सबसे पहले इसकी बाहरी परत के लिए सामग्री तैयार करनी होगी। इसके लिए डेढ़ कप बेसन, आधा कप देसी घी, दो बड़े चम्मच सूजी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और तीन चौथाई कप पिसी चीनी की जरूरत होगी।

    मोदक के अंदर भरने वाली स्टफिंग के लिए आधा कप मावा या खोया लिया जाता है। इसमें दो बड़े चम्मच कद्दूकस किया हुआ नारियल, दो बड़े चम्मच बारीक कटे काजू-बादाम, एक छोटा चम्मच चिरौंजी, चुटकी भर जायफल और इलायची पाउडर तथा दो बड़े चम्मच पिसी चीनी मिलाई जाती है।

    मोदक की स्टफिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक पैन में मावा डालकर धीमी आंच पर करीब दो से तीन मिनट तक भूनें। मावा हल्का गुलाबी होने लगे तो इसमें कटे हुए काजू-बादाम, चिरौंजी और कद्दूकस किया हुआ नारियल डालें। इसके बाद जायफल और इलायची पाउडर मिलाकर गैस बंद कर दें।

    मिश्रण को हल्का गुनगुना होने दें। इसके बाद इसमें दो बड़े चम्मच पिसी चीनी डालकर अच्छी तरह मिला लें। तैयार मावा-मेवे की स्टफिंग को एक तरफ रख दें।

    अब मोदक की बाहरी परत तैयार करने की बारी है। इसके लिए भारी तले की कढ़ाई में देसी घी गर्म करें। इसमें दो बड़े चम्मच सूजी और डेढ़ कप बेसन डालें। दोनों को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। करीब आठ से दस मिनट तक भूनने के बाद बेसन से सोंधी खुशबू आने लगेगी और उसका रंग हल्का सुनहरा हो जाएगा।

    बेसन अच्छी तरह भुन जाने के बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें। जब यह हाथ लगाने लायक गुनगुना रह जाए, तब इसमें पिसी चीनी और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।

    अब मोदक का सांचा लें और उसमें हल्का सा घी लगा दें। सांचे में बेसन का मिश्रण दोनों तरफ दबाकर भरें और बीच में थोड़ी जगह बना लें। इसी खाली जगह में तैयार मावा और मेवों की स्टफिंग भरें। इसके बाद ऊपर से थोड़ा बेसन का मिश्रण लगाकर सांचे को नीचे की तरफ से बंद कर दें।

    सांचे को खोलने पर बेसन मावा मोदक तैयार हो जाएगा। इसी प्रक्रिया से बाकी मोदक भी बनाए जा सकते हैं। बेसन से तैयार बाहरी परत का सोंधापन और मावा, नारियल, काजू, बादाम तथा चिरौंजी से बनी स्टफिंग इसके स्वाद को खास बनाती है। गणेशोत्सव के दौरान इन मोदक को बप्पा को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

    इस तरह घर में उपलब्ध बेसन से बिना पारंपरिक चावल के आटे के भी मोदक तैयार किए जा सकते हैं। रेसिपी में बेसन को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनना और स्टफिंग को सही तरीके से तैयार करना इसके स्वाद और बनावट का अहम हिस्सा है। तैयार मोदक देखने में आकर्षक और खाने में खस्ता तथा सोंधे होते हैं।

  • लक्ष्मी के साथ सरस्वती और गणेश की पूजा क्यों है जरूरी धन बुद्धि और ज्ञान का संतुलन ही बनाता है जीवन सफल

    लक्ष्मी के साथ सरस्वती और गणेश की पूजा क्यों है जरूरी धन बुद्धि और ज्ञान का संतुलन ही बनाता है जीवन सफल


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा केवल आस्था का विषय नहींबल्कि जीवन में संतुलन और सही दिशा पाने का माध्यम मानी जाती है। विशेष रूप से मां लक्ष्मीमां सरस्वती और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि केवल धन की देवी मां लक्ष्मी की उपासना की जाए और ज्ञान व बुद्धि की अधिष्ठात्री शक्तियों को असंतुलित हो सकता है।
    मां लक्ष्मी को धनवैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य की कामना करता हैजिसके लिए धन आवश्यक है। लेकिन धर्मशास्त्रों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धन अपने आप में न तो शुभ है और न ही अशुभबल्कि उसका उपयोग ही उसे शुभ या अशुभ बनाता है। धन का सही उपयोग तभी संभव है जब व्यक्ति के पास ज्ञान और विवेक हो। यहीं पर मां सरस्वती और भगवान गणेश का महत्व सामने आता है। मां सरस्वती ज्ञानविद्या और विवेक की देवी हैं। उनके आशीर्वाद से व्यक्ति सही-गलत में भेद करना सीखता है और अपने निर्णयों को समझदारी से ले पाता है। वहीं भगवान गणेश को बुद्धिविवेक और विघ्नहर्ता माना जाता है। वे व्यक्ति को सोचने-समझने की शक्ति देते हैंजिससे वह जीवन में आने वाली बाधाओं को पार कर सके।
    मान्यता है कि यदि किसी घर में केवल मां लक्ष्मी की पूजा की जाए और ज्ञान व बुद्धि की उपेक्षा की जाएतो धन आने के बावजूद उसका सदुपयोग नहीं हो पाता। ऐसा धन व्यक्ति को अहंकारलालच और मोह की ओर ले जा सकता है। परिणामस्वरूप न केवल बुद्धि भ्रष्ट होती हैबल्कि व्यक्ति की नीयत और व्यवहार में भी नकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। धन की ऊर्जा अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती हैऔर यदि इसे संतुलित ढंग से न संभाला जाए तो यह जीवन में अशांति और पतन का कारण भी बन सकती है।
    इसी कारण धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी के साथ मां सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया है। इन तीनों की संयुक्त आराधना से व्यक्ति को धन के साथ-साथ ज्ञान और बुद्धि का भी आशीर्वाद मिलता है। इससे न केवल आर्थिक समृद्धि आती हैबल्कि जीवन में संतुलनविवेक और सद्बुद्धि भी बनी रहती है। कलियुग में धन की आवश्यकता से कोई इनकार नहीं कर सकतालेकिन केवल धन के पीछे भागना जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। जब धनज्ञान और बुद्धि का संतुलन बनता हैतभी व्यक्ति सच्चे अर्थों में सुखी और सफल बन पाता है। यही कारण है कि धार्मिक दृष्टि से मां लक्ष्मीमां सरस्वती और भगवान गणेश की एक साथ पूजा को जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग माना गया है।