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  • गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग

    गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग


    नई दिल्ली ।
    आज सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गजानन संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत रखा जा रहा है। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत विघ्नों के नाश, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक गणपति की पूजा करने और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना और व्रत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

    पंचांग के अनुसार आज सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि 1 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 7 मिनट पर प्रारंभ हुई थी और 2 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। आज रविवार का दिन है तथा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बना हुआ है। दिनभर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए कई लोग शुभ कार्यों में पंचांग के अनुसार समय का विशेष ध्यान रखेंगे।

    आज सूर्य का उदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर हुआ, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। गजानन संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है। आज चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 44 मिनट पर होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करेंगे और इसके पश्चात ही व्रत का पारण करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रदर्शन के बिना संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

    पूजा और शुभ कार्यों के लिए आज सुबह का चौघड़िया सुबह 5 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम का चौघड़िया शाम 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। दूसरी ओर राहुकाल शाम 5 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में नए या मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यमगण्ड काल दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से 2 बजकर 24 मिनट तक तथा गुलिक काल शाम 4 बजकर 5 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

    ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार सूर्य और बुध कर्क राशि में, चंद्रमा तथा राहु कुंभ राशि में, मंगल वृषभ राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में और केतु सिंह राशि में विराजमान हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से इन ग्रह स्थितियों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखा जाता है। हालांकि किसी भी निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली का विचार करना अधिक उचित माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गजानन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को 11 अथवा 21 गांठ वाली दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय नैवेद्य अर्पित कर विघ्नहर्ता से सुख, समृद्धि और सफलता की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

  • बुध ग्रह की कृपा से चमक सकता है करियर और कारोबार, बुधवार के ये सरल उपाय बदल सकते हैं सफलता की दिशा

    बुध ग्रह की कृपा से चमक सकता है करियर और कारोबार, बुधवार के ये सरल उपाय बदल सकते हैं सफलता की दिशा

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, शिक्षा, व्यापार और संचार का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। मान्यता है कि व्यक्ति के जीवन में निर्णय लेने की क्षमता, संवाद कौशल, स्मरण शक्ति और व्यावसायिक सफलता पर बुध ग्रह का विशेष प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि कुंडली में बुध की स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब बुध ग्रह शुभ और मजबूत स्थिति में होता है, तब व्यक्ति को शिक्षा, करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं इसके कमजोर होने पर कई प्रकार की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

    ज्योतिषीय दृष्टि से बुध ग्रह व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता और व्यवहार को प्रभावित करता है। लेखन, पत्रकारिता, बैंकिंग, अकाउंटिंग, मार्केटिंग, मीडिया और व्यापार जैसे क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुध की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को तार्किक सोच, प्रभावी अभिव्यक्ति और बेहतर निर्णय क्षमता प्रदान करने वाली मानी जाती है। इसके विपरीत अशुभ बुध कई बार भ्रम, एकाग्रता की कमी, पढ़ाई में बाधा, संवाद संबंधी समस्याएं और व्यापारिक नुकसान जैसी स्थितियों का कारण बन सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन बुध देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष उपायों को अपनाकर बुध ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। माना जाता है कि हरे रंग का बुध ग्रह से विशेष संबंध है, इसलिए बुधवार को हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। यह उपाय मानसिक संतुलन और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

    बुध ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्र जाप का भी विशेष महत्व बताया गया है। बुधवार की सुबह स्नान के बाद श्रद्धापूर्वक “ॐ बुधाय नमः” अथवा “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नियमित मंत्र जाप से मानसिक एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। सूर्योदय के बाद शांत वातावरण में किए गए जाप को विशेष फलदायी माना जाता है।

    दान को भी बुध ग्रह को प्रसन्न करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। बुधवार के दिन हरी मूंग, हरी सब्जियां, हरे वस्त्र, फल अथवा कांस्य के बर्तनों का दान जरूरतमंद लोगों को करने की परंपरा बताई गई है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ कार्यों में शामिल माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में भगवान गणेश और बुध ग्रह का विशेष संबंध बताया गया है। इसलिए बुधवार को भगवान गणेश की पूजा, दुर्वा अर्पित करना तथा गणेश मंत्रों का जाप करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गणपति की आराधना से बुद्धि, विवेक और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

    बुध ग्रह के रत्न के रूप में पन्ना का विशेष महत्व बताया गया है। इसे धारण करने से बुद्धि, संवाद कौशल और निर्णय क्षमता में सुधार होने की मान्यता है। हालांकि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना आवश्यक माना जाता है ताकि व्यक्ति की कुंडली के अनुसार उचित निर्णय लिया जा सके।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध ग्रह को मजबूत बनाने के लिए मधुर वाणी का प्रयोग, माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान, सेवा कार्यों में भागीदारी तथा सकारात्मक सोच बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे उपाय व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ करियर और आर्थिक उन्नति के मार्ग को भी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं।