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  • गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    नई दिल्ली । गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक और अलग-अलग तरह की मिठाइयां तैयार की जाती हैं। इनमें मोतीचूर के लड्डू भी काफी पसंद किए जाते हैं। बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय इस बार घर पर ही बेसन से दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए किसी खास सांचे या बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं है। सामान्य रसोई में मौजूद सामग्री से भी इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

    मोतीचूर लड्डू बनाने के लिए एक कप बेसन, तीन-चौथाई कप पानी, एक कप चीनी, आधा कप पानी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, एक चुटकी ऑरेंज या येलो फूड कलर, एक बड़ा चम्मच मगज के बीज और तलने के लिए देसी घी या तेल की जरूरत होगी। चाशनी के लिए आधा छोटा चम्मच नींबू का रस भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे चाशनी जमने से बची रहती है।

    सबसे पहले एक बाउल में एक कप बेसन लें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए चिकना और बिना गुठलियों वाला पतला घोल तैयार करें। घोल बहुत ज्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसी से बूंदी के छोटे-छोटे दाने तैयार किए जाएंगे।

    अब कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। एक छेद वाली सामान्य कड़छी या कद्दूकस की मदद से बेसन का घोल गर्म तेल में डालें। कड़छी को कड़ाही के ऊपर हल्का थपथपाने पर घोल की छोटी-छोटी बूंदें तेल में गिरने लगेंगी। इन बूंदियों को केवल 10 से 15 सेकंड तक हल्का तलना है। इन्हें ज्यादा देर तक तलने से बूंदी कड़क हो सकती है, जबकि मोतीचूर लड्डू के लिए नरम दाने जरूरी होते हैं।

    इसके बाद चाशनी तैयार करें। एक पैन में एक कप चीनी और आधा कप पानी डालकर गर्म करें। इसमें एक चुटकी फूड कलर, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और आधा छोटा चम्मच नींबू का रस डालें। इसे तब तक गर्म करें जब तक चीनी पूरी तरह घुलकर हल्की चिपचिपी चाशनी न बन जाए। इसके लिए एक तार की चाशनी तैयार करने की जरूरत नहीं है।

    अगर तैयार बूंदी के दाने थोड़े बड़े या असमान हैं, तो उन्हें ठंडा होने के बाद मिक्सी के जार में डालकर केवल एक-दो सेकंड चलाया जा सकता है। इससे बूंदी बारीक और दानेदार हो जाएगी तथा मोतीचूर जैसा टेक्सचर तैयार होगा। ध्यान रखें कि मिक्सी को ज्यादा देर तक न चलाएं।

    अब तैयार बूंदी को गरमा-गरम चाशनी में डालें और धीमी आंच पर करीब दो मिनट तक पकाएं। इस दौरान बूंदी चाशनी को अच्छी तरह सोख लेगी। इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण में मगज के बीज डालकर मिला दें। मिश्रण को ढककर करीब 10 मिनट के लिए छोड़ दें।

    जब मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तो हाथों में थोड़ा सा घी लगाएं और इसे गोल आकार देते हुए लड्डू बांध लें। इस तरह घर पर ही दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार हो जाएंगे। इन्हें भगवान गणेश को भोग में चढ़ाने के साथ परिवार के सदस्यों को भी परोसा जा सकता है।

  • भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    नई दिल्ली ।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन बुधवार को गणेशोत्सव के बीच अपने पहले महाराष्ट्र दौरे पर मुंबई पहुंचे। भाजपा अध्यक्ष का पद संभालने के बाद यह उनका महाराष्ट्र का पहला दौरा है। मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद नितिन नबीन लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे और गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया।

    नितिन नबीन के मुंबई दौरे के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम भी उनके साथ मौजूद रहे। गणेशोत्सव के माहौल में हुए इस दौरे के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। दर्शन के बाद नितिन नबीन ने कहा कि गणेश उत्सव के अवसर पर महाराष्ट्र आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन को विशेष अनुभव बताया।

    नितिन नबीन ने कहा कि महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के दौरान आकर वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के बाद लालबागचा राजा के दर्शन उनके लिए बेहद खास क्षण है। उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों और देशवासियों के कल्याण की कामना करते हुए प्रार्थना की।

    महाराष्ट्र में इस वर्ष गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है। मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर, लालबागचा राजा समेत कई प्रमुख गणपति स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। लालबागचा राजा का गणेशोत्सव भी 14 सितंबर से शुरू हुआ है और 25 सितंबर तक चलेगा। ऐसे समय में नितिन नबीन का मुंबई दौरा गणेशोत्सव से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के बीच हुआ।

    मुंबई में दर्शन के बाद नितिन नबीन के एक दिवसीय महाराष्ट्र दौरे में पुणे जाने का कार्यक्रम भी शामिल रहा। उनके कार्यक्रम में मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति मंदिरों तथा गणेश मंडलों में दर्शन और पूजा-अर्चना रखी गई। मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के बाद उनका कार्यक्रम मालाबार हिल, बांद्रा रिक्लेमेशन और अन्य गणपति स्थलों पर दर्शन से जुड़ा था।

    मालाबार हिल में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के अलावा एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के आवास पर स्थापित गणपति के दर्शन का कार्यक्रम भी रखा गया था। इसके बाद बांद्रा रिक्लेमेशन में गणपति दर्शन का कार्यक्रम निर्धारित था। दौरे के अगले चरण में नितिन नबीन के पुणे पहुंचने का कार्यक्रम था, जहां कसबा गणपति और दगडूशेठ हलवाई गणपति समेत अन्य गणपति मंडलों में दर्शन किए जाने थे।

    पुणे के कार्यक्रम में साने गुरुजी तरुण मित्र मंडल और कोथरूड स्थित श्री साई मित्र मंडल के गणपति दर्शन भी शामिल रहे। इस दौरान गणेशोत्सव के धार्मिक माहौल में पूजा-अर्चना और भगवान गणेश के दर्शन उनके दौरे का प्रमुख हिस्सा रहे।

    नितिन नबीन के महाराष्ट्र दौरे की शुरुआत मुंबई में गणेश दर्शन से हुई। सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अमित साटम की मौजूदगी रही। भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद नबीन का यह पहला महाराष्ट्र दौरा गणेशोत्सव के दौरान हुआ, जिसमें उन्होंने मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और महाराष्ट्र तथा देश के कल्याण की कामना की।

  • प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने परिवार के साथ मुंबई के ऐतिहासिक चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दर्शन किए। दोनों ने गणपति की पूजा-अर्चना कर उत्सव में भाग लिया।

    प्रणव अदाणी अदाणी एंटरप्राइजेज में एग्रो, ऑयल एंड गैस कारोबार के प्रबंध निदेशक और निदेशक भी हैं। उन्होंने चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध विरासत भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रही है। यह उत्सव इस वर्ष अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि को मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति उत्सव के रूप में माना जाता है। इसकी परंपरा शहर के पुराने कपड़ा मिल क्षेत्रों परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी रही है। शुरुआती दौर में कपड़ा मिलों के श्रमिकों ने इस उत्सव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    इस सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस पहल से भी जुड़ी मानी जाती है, जिसके तहत 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को घरों तक सीमित धार्मिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप दिया गया था।

    इस वर्ष चिंचपोकली चा चिंतामणि का आयोजन दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला से प्रेरित विशेष थीम पर किया गया है। गणेश प्रतिमा को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की शैली में सजाया गया है। प्रतिमा की सजावट में गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया है।

    उत्सव के लिए तैयार किए गए भव्य पंडाल की वास्तुकला हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर, स्वर्णगिरि की शैली से प्रेरित है। पंडाल में ऊंचे गोपुरम, दीप स्तंभ और याली तथा व्याल जैसे संरक्षक शिल्प बनाए गए हैं, जो इसकी विशेष थीम का हिस्सा हैं।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि की परंपरा ने मुंबई में हुए बड़े सामाजिक और औद्योगिक बदलावों के दौर को भी देखा है। वर्ष 1982 की ऐतिहासिक बॉम्बे कपड़ा मिल हड़ताल और उसके बाद शहर में हुए बदलावों के बावजूद यह उत्सव अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    करीब 5,000 योगदानकर्ताओं के सहयोग से संचालित चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल की गतिविधियां केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं हैं। मंडल की ओर से स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं।

    वर्ष 1939 से चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के पास गणेशोत्सव का आयोजन लगातार किया जा रहा है। चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल ही इन वर्षों में इस आयोजन का संचालन करता रहा है। गणेशोत्सव के अलावा मंडल रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यक्रम और बच्चों के लिए विभिन्न कल्याणकारी पहल भी आयोजित करता है।

  • गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    नई दिल्ली ।मुंबई में आगामी गणेश उत्सव को देखते हुए गणेश पंडालों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पंडालों को घरेलू दर पर अस्थायी बिजली कनेक्शन देने की सुविधा मिलेगी। आवेदन जमा करने के 48 घंटे के भीतर कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि उत्सव के दौरान पंडालों में बिजली आपूर्ति को लेकर परेशानी न हो।

    गणेश उत्सव के दौरान शहरभर में बड़ी संख्या में पंडाल लगाए जाते हैं, जहां रोशनी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए बिजली की जरूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति से जुड़ी तैयारियां की गई हैं। पंडाल आयोजक अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए ‘न्यू कनेक्शन’ सेक्शन के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

    बिजली कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य गणेश पंडालों को भरोसेमंद अस्थायी बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है, ताकि उत्सव के दौरान बिजली व्यवस्था निर्बाध बनी रहे। कंपनी ने बताया कि पिछले वर्ष पूरे मुंबई में 1,000 से अधिक गणेश पंडालों को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई गई थी।

    इस वर्ष कनेक्शन की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने और पूरे उत्सव के दौरान भरोसेमंद बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या का तेजी से समाधान करने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम को रणनीतिक रूप से तैनात किया जाएगा।

    पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों से बिजली की वायरिंग के लिए केवल अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पंडाल स्थल पर बिजली की वायरिंग पूरी तरह तैयार हो और मीटर केबिन में केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश मिले।

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत कनेक्शन में मानक वायर और स्विच का इस्तेमाल करने, आपात स्थिति के लिए एक सिंगल आइसोलेशन पॉइंट रखने और तारों को मानक इंसुलेशन टेप से सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मीटर केबिन और स्विच तक पहुंचने का रास्ता भी साफ रखने को कहा गया है।

    इसके अलावा पंडाल आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कनेक्टेड लोड स्वीकृत लोड से अधिक न हो। मीटर केबिन के पास स्पष्ट संचालन निर्देशों वाला फायर एक्सटिंग्विशर और डेंजर बोर्ड रखने के साथ उचित अर्थिंग सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।

    पंडालों में अनधिकृत एक्सटेंशन या सीधे बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल नहीं करने तथा वायरिंग में अनावश्यक जोड़ से बचने की हिदायत दी गई है। मीटर केबिन के प्रवेश द्वार तक पहुंच भी बाधित नहीं होनी चाहिए।

    सुरक्षा निर्देशों के तहत आम लोगों को फ्लडलाइट्स, पेडेस्टल्स, पंखों या इंसुलेटेड वायरिंग जॉइंट्स तक पहुंचने की अनुमति नहीं देने को कहा गया है। इसके साथ ही स्वीकृत सीमा से अधिक बिजली का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है।

    गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान रोशनी की व्यवस्था के लिए 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स लगाए जाने की भी जानकारी दी गई है। इस तरह गणेश पंडालों के अस्थायी बिजली कनेक्शन के साथ विसर्जन स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था की भी तैयारी की गई है।