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  • गणेश जी की पूजा के लिए क्या है जरूरी? जानिए पूजा सामग्री और विधि

    गणेश जी की पूजा के लिए क्या है जरूरी? जानिए पूजा सामग्री और विधि


    नई दिल्ली -हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ, विवाह या नए कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण और पूजन करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और कार्य सफल होता है। इसलिए गणेश जी की पूजा में सही सामग्री और विधि का विशेष महत्व माना गया है।

    गणेश जी की पूजा के लिए सबसे पहले उनकी प्रतिमा या चित्र होना आवश्यक है। पूजा स्थान को स्वच्छ करके लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर गणेश जी की स्थापना करें। इसके बाद गंगाजल या शुद्ध जल से पूजा स्थल को पवित्र करें।

    गणेश पूजा में दूर्वा घास का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान 21 दूर्वा अर्पित करने से गणपति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसके साथ ही लाल या पीले फूल भी अर्पित किए जाते हैं।

    भगवान गणेश को मोदक और लड्डू विशेष रूप से प्रिय हैं। इसलिए पूजा में मोदक, बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा फल, नारियल, सुपारी, पान के पत्ते और अक्षत (चावल) भी पूजा सामग्री में शामिल किए जाते हैं।

    पूजा के समय दीपक और धूप अवश्य जलाएं। घी का दीपक जलाकर गणेश जी की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन और मौली भी पूजा में उपयोग की जाती हैं। चंदन का तिलक लगाने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।

    गणेश पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। इस मंत्र का 21, 51 या 108 बार जाप करने से बुद्धि, ज्ञान और सफलता की प्राप्ति होती है। गणेश चालीसा, गणेश अथर्वशीर्ष या संकटनाशन स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।

    धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा में श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो, तब भी सच्चे मन और विश्वास से की गई पूजा भगवान तक पहुंचती है। इसलिए पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूर्ण श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा का स्मरण करें।

    नियमित रूप से गणेश जी की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और घर-परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता कहा जाता है।

  • गुड़ी पड़वा पर आस्था का उत्सव: सिद्धिविनायक मंदिर में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त

    गुड़ी पड़वा पर आस्था का उत्सव: सिद्धिविनायक मंदिर में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त


    नई दिल्ली । हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में श्रद्धा भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस खास दिन मंदिर ट्रस्ट द्वारा बाप्पा को अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की भव्य नीलामी आयोजित की गई जिसमें देशभर से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हर कोई इस पावन अवसर पर भगवान गणेश के चरणों से जुड़े किसी भी आभूषण को अपने घर ले जाकर उसे आशीर्वाद के रूप में प्राप्त करना चाहता था।

    इस वर्ष की नीलामी खास इसलिए भी रही क्योंकि इसमें कुल 234 बहुमूल्य गहनों को शामिल किया गया था जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई। नीलामी में सोने के सिक्कों से लेकर आकर्षक जंजीरें नक्काशीदार लॉकेट कंगन चांदी की पादुका और भगवान गणेश के प्रिय वाहन मूषक की प्रतिमाएं भी शामिल थीं। जैसे ही नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई मंदिर परिसर में उत्साह और भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। भक्तों के बीच इन पवित्र वस्तुओं को प्राप्त करने की होड़ साफ दिखाई दी।

    भक्तों के लिए ये गहने केवल धातु के आभूषण नहीं बल्कि साक्षात बाप्पा का आशीर्वाद माने जाते हैं। मान्यता है कि गुड़ी पड़वा पर खरीदी गई कोई भी वस्तु विशेष शुभ फल देती है और यदि वह वस्तु सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी हो तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। एक श्रद्धालु ने बताया कि ऐसे पावन गहनों को घर में रखने से सुख-समृद्धि शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। यही वजह है कि लोग लाखों रुपये तक की बोली लगाने में भी पीछे नहीं हटते।

    इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू भी है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार नीलामी से प्राप्त होने वाली करोड़ों रुपये की राशि का उपयोग केवल मंदिर के रखरखाव तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसे समाजसेवा के विभिन्न कार्यों में भी लगाया जाता है। शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरतमंदों की सहायता के लिए यह धन एक मजबूत आधार बनता है। इस प्रकार भक्तों की आस्था से जुड़ी यह नीलामी समाज के कमजोर वर्गों के लिए आशा और सहयोग का माध्यम बन जाती है।

    गुड़ी पड़वा जैसे शुभ पर्व पर आयोजित यह नीलामी न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि भक्ति और सेवा का मेल समाज को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। सिद्धिविनायक मंदिर का यह अनूठा प्रयास आस्था को एक नई दिशा देता है जहां श्रद्धा केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर सामूहिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।