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  • गणेश चतुर्थी पर क्यों खास मानी जाती है गणपति पूजा जानिए बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक की पूरी जानकारी

    गणेश चतुर्थी पर क्यों खास मानी जाती है गणपति पूजा जानिए बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि विवेक सुख समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति का स्मरण करने की परंपरा है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों और सार्वजनिक स्थानों पर गणपति की प्रतिमा स्थापित करके विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पर्व के दौरान भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
    गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर और पूजा स्थल की साफ सफाई करनी चाहिए। पूजा के स्थान को स्वच्छ करके वहां गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करते समय श्रद्धा और शुद्ध भावना का विशेष महत्व होता है। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा अर्पित की जाती है। दूर्वा को भगवान गणेश का प्रिय माना जाता है। इसके साथ ही मोदक और अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

    गणपति पूजा में सिंदूर और लाल फूल अर्पित करने की भी परंपरा है। भक्त भगवान गणेश का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करते हैं और आरती करते हैं। पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य एक साथ शामिल होकर भगवान गणेश से अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्रार्थना कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा गया है इसलिए भक्त उनसे जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने की कामना करते हैं।

    गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। कई स्थानों पर बड़े पंडाल लगाए जाते हैं जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। घरों में भी कई परिवार अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार गणपति की स्थापना करते हैं। गणेश उत्सव के दौरान भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। गणपति की प्रतिमा और सजावट के लिए पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प माना जाता है।

    गणेश प्रतिमा का विसर्जन भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अलग अलग परिवार और परंपराएं अपनी मान्यता के अनुसार गणपति विसर्जन का दिन तय करती हैं। विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा और आरती की जाती है। भक्त गणपति से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हुए श्रद्धा के साथ प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों और कृत्रिम विसर्जन कुंडों का इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

    गणेश चतुर्थी का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन में बुद्धि विवेक अनुशासन और सकारात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। भगवान गणेश की पूजा करते समय दिखावे से अधिक श्रद्धा और स्वच्छ भावना को महत्व देना चाहिए। यही इस पावन पर्व की सबसे बड़ी भावना मानी जाती है।

  • संकटों को दूर करने वाला विकट गणेश व्रत, जानिए दिन का शुभ मुहूर्त और समय

    संकटों को दूर करने वाला विकट गणेश व्रत, जानिए दिन का शुभ मुहूर्त और समय


    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 5 अप्रैल रविवार को पड़ रहा है। भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक विकट स्वरूप की इस दिन विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि विकट गणेश अपने भक्तों को सभी प्रकार के ज्ञात और अज्ञात भय रोग शोक और दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखते हैं।

    भक्तों का विश्वास है कि यह व्रत न केवल व्यक्ति को निर्भीक बनाता है बल्कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने का साहस भी प्रदान करता है। घोर संकटों में भी भक्तों की रक्षा करने वाले विकट गणेश अपराजेयता का वरदान देते हैं। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

    इस वर्ष 5 अप्रैल को चतुर्थी तिथि दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को चंद्रमा के उदय के बाद पूजा और चंद्र दर्शन के साथ व्रत का पारण करते हैं।

    दिन का समय भी इस पूजा और व्रत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 9 बजकर 58 मिनट पर है। शुभ मुहूर्त के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल दोपहर 2 बजकर 24 मिनट से 4 बजकर 10 मिनट तक रहेगा जिसे अत्यंत शुभ समय माना जाता है।

    वहीं अशुभ समयों से बचना भी आवश्यक है। राहुकाल शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 41 मिनट तक यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 1 मिनट से 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। भद्रा सुबह 6 बजकर 7 मिनट से दोपहर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

    इस प्रकार विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल को भगवान गणेश की विशेष आराधना और व्रत रखने का दिन है। इस दिन की पूजा न केवल मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ाती है बल्कि जीवन में आने वाले संकटों और परेशानियों से सुरक्षा का भी मार्ग प्रशस्त करती है। शुभ मुहूर्त और समय का पालन कर भक्त इस दिन की विशेष महत्ता का लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन में सुख शांति और सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं।