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  • गणपति उत्सव में छाएगा भक्ति और जोश का रंग, बॉलीवुड के ये 10 गाने प्लेलिस्ट में जोड़कर बनाएं माहौल खास

    गणपति उत्सव में छाएगा भक्ति और जोश का रंग, बॉलीवुड के ये 10 गाने प्लेलिस्ट में जोड़कर बनाएं माहौल खास


    नई दिल्ली । गणपति उत्सव का माहौल भक्ति, उमंग और उत्साह से भरा होता है। बप्पा के स्वागत से लेकर आरती और विसर्जन तक हर पल में संगीत उत्सव की खुशी को और बढ़ा देता है। अगर पूजा-पाठ के साथ बॉलीवुड का रंग भी शामिल करना चाहते हैं, तो गणपति से जुड़े कई ऐसे गाने हैं जो लंबे समय से लोगों की पसंद बने हुए हैं। इन गीतों में भक्ति के साथ जोश, श्रद्धा और उत्सव की ऊर्जा भी महसूस होती है।

    गणपति उत्सव की शुरुआत के लिए ‘देवा श्री गणेशा’ को प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। फिल्म ‘अग्निपथ’ का यह गीत अपनी दमदार धुन और भक्तिमय अंदाज के कारण गणपति समारोह में जोश भरने वाला गाना माना जाता है। आरती या उत्सव के दौरान इसकी ऊर्जा माहौल को खास बना सकती है।

    ‘मोरया रे’ भी गणपति उत्सव के रंग में पूरी तरह फिट बैठता है। फिल्म ‘डॉन’ से जुड़ा यह गीत बप्पा के जयकारों और उत्सव की ऊर्जा को सामने लाता है। गणपति पंडाल में इसे बजाने से माहौल में उत्साह और उमंग का रंग बढ़ सकता है।

    ‘गणपति बप्पा मोरया’ जैसे भक्तिमय गीत गणपति आराधना की भावना को मजबूत करते हैं। बप्पा के जयकारों के बीच ऐसे गीत उत्सव में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बनाए रखते हैं। वहीं ‘श्री गणेशा देवा’ भी गणपति आराधना के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है।

    पूजा के दौरान ‘सिंदूर लाल चढ़ायो’ को भी प्लेलिस्ट में जगह दी जा सकती है। गणपति आराधना से जुड़े इस पारंपरिक भक्ति गीत का भाव पूजा के माहौल को भक्तिमय बनाने में मदद करता है।

    फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ का ‘गजानना’ गणपति उत्सव के लिए खास जोश लेकर आता है। इसकी तेज धुन और भव्य अंदाज समारोह के माहौल में उत्साह बढ़ा सकते हैं। घर में होने वाले छोटे आयोजन से लेकर बड़े गणपति समारोह तक यह गीत प्लेलिस्ट का हिस्सा बन सकता है।

    वहीं विसर्जन के समय ‘गणपती अपने गांव चले’ जैसे गीतों का भाव बिल्कुल अलग नजर आता है। बप्पा की विदाई के समय ऐसे गीत उत्सव की खुशी के साथ भावुक माहौल भी पैदा करते हैं।

    ‘हे गणराया’ भी गणपति भक्ति से जुड़ा गीत है। फिल्म ‘एबीसीडी 2’ का यह गाना आस्था और श्रद्धा की भावना को खूबसूरती से सामने लाता है। इसके अलावा ‘बप्पा मोरया रे’ जैसे जोशीले गीत भी गणपति समारोह में उत्साह बढ़ाने के लिए बजाए जा सकते हैं।

    गणपति विसर्जन के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ की भावना उत्सव को भावुक अंदाज में पूरा करती है। बप्पा को विदाई देते समय अगले वर्ष फिर आने की कामना इस भाव को और खास बना देती है।

    गणपति उत्सव में संगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि माहौल को यादगार बनाने का एक जरिया भी है। आरती के समय भक्तिमय गीत और सेलिब्रेशन के दौरान जोशीले गाने बजाकर भक्ति, उमंग और मस्ती का संतुलित रंग उत्सव में शामिल किया जा सकता है।

  • गणपति उत्सव में इस बार प्रसाद में लाएं स्वाद का नया ट्विस्ट, मोदक-मिठाई के साथ ट्राई करें ये 5 खास नमकीन विकल्प

    गणपति उत्सव में इस बार प्रसाद में लाएं स्वाद का नया ट्विस्ट, मोदक-मिठाई के साथ ट्राई करें ये 5 खास नमकीन विकल्प

    नई दिल्ली । गणपति उत्सव में बप्पा के भोग और प्रसाद की अपनी खास परंपरा होती है। मोदक और मिठाइयां आमतौर पर प्रसाद का प्रमुख हिस्सा रहती हैं, लेकिन अगर इस बार कुछ अलग और स्वादिष्ट परोसने की इच्छा है तो नमकीन विकल्प भी आजमाए जा सकते हैं। खास बात यह है कि ऐसे कई व्यंजन कम मात्रा में आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और बच्चों से लेकर बड़ों तक इन्हें पसंद किया जा सकता है।

    नारियल और धनिया वाले चने प्रसाद के लिए एक आसान और पौष्टिक विकल्प हो सकते हैं। इसके लिए उबले हुए काले या सफेद चनों में ताजा नारियल और हरा धनिया मिलाया जा सकता है। हल्का जीरा या राई का तड़का इसका स्वाद बढ़ा देता है। इसे कम समय में तैयार करके बड़ी संख्या में लोगों को परोसा जा सकता है।

    अगर प्रसाद में कुछ ऐसा शामिल करना चाहते हैं जिसे आसानी से हाथ में लेकर खाया जा सके, तो मिनी समोसे अच्छा विकल्प हो सकते हैं। छोटे आकार के इन समोसों में आलू और मटर की हल्की मसालेदार फिलिंग रखी जा सकती है। पूजा के बाद इन्हें छोटे पोर्शन में प्रसाद के तौर पर परोसा जा सकता है।

    मीठे प्रसाद से अलग इस बार नींबू चावल भी तैयार किए जा सकते हैं। नींबू के स्वाद के साथ करी पत्ता और मूंगफली का हल्का तड़का इसे खास बनाता है। यह व्यंजन ज्यादा मात्रा में तैयार करना भी आसान है, इसलिए गणपति उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लिए इसे बनाया जा सकता है।

    मिनी ढोकला भी प्रसाद की थाली में स्वाद और हल्केपन का अच्छा मेल दे सकता है। सॉफ्ट ढोकले को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर परोसा जा सकता है। ऊपर से हरा धनिया या नारियल डालने से इसका स्वाद और प्रस्तुति दोनों बेहतर हो सकते हैं। बच्चों के लिए भी यह एक आसान विकल्प हो सकता है।

    अगर कम मेहनत में कुछ अलग तैयार करना चाहते हैं, तो मसाला नमकीन कप भी बनाया जा सकता है। छोटे कप में सेव, भुना चना, मूंगफली और पोहा मिलाकर क्रंची स्नैक तैयार किया जा सकता है। इसे छोटे हिस्सों में परोसना आसान होता है और उत्सव के माहौल में यह अलग तरह का स्नैक विकल्प बन सकता है।

    गणपति उत्सव में प्रसाद का मतलब केवल मिठाई तक सीमित नहीं है। हालांकि प्रसाद तैयार करते समय परिवार की परंपराओं और पूजा से जुड़े नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। इनके अनुरूप छोटे पोर्शन में नमकीन और हल्के व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं। इससे प्रसाद की थाली में स्वाद के साथ नया बदलाव भी देखने को मिलेगा और बप्पा के भोग के बाद परिवार व मेहमानों को कुछ अलग परोसने का अवसर मिलेगा।

  • गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    नई दिल्ली । मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थापित होने वाला ‘गिरगांव चा राजा’ गणपति अपनी भव्यता के साथ पर्यावरण-अनुकूल परंपरा के लिए भी खास पहचान रखता है। हर साल गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस गणपति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी मूर्ति मिट्टी से तैयार की जाती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लंबे समय से इस परंपरा का हिस्सा रहा है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1928 में दक्षिण मुंबई की निकडवारी लेन से हुई थी। उस समय पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय आज की तरह सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद इस गणपति मंडल से जुड़े लोगों ने मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने का फैसला किया।

    उस समय कई गणपति मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई जाती थीं, लेकिन ‘गिरगांव चा राजा’ के लिए मिट्टी को प्राथमिकता दी गई। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्ति विसर्जन से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना था। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी इसकी मूर्ति पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की जाती है।

    गणपति उत्सव के दौरान इस परंपरा को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से भी जोड़ा जाता है। मिट्टी से बनी मूर्ति के कारण विसर्जन के बाद इसके प्राकृतिक रूप से घुलने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है। यही वजह है कि यह गणपति पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव की चर्चा में विशेष स्थान रखता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ‘गिरगांव चा राजा’ का उल्लेख किया था। उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली इसकी परंपरा की सराहना की थी। इसके बाद यह गणपति प्रधानमंत्री मोदी के पसंदीदा गणपति के तौर पर भी चर्चित हुआ।

    इस गणपति की मूर्ति अपनी कलात्मक विशेषताओं के कारण भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। इसकी ऊंचाई करीब 24 फीट बताई जाती है। मूर्ति की सूंड पर भगवान कृष्ण की तस्वीर बनाई जाती है, जो इसे एक अलग और विशिष्ट स्वरूप देती है।

    गिरगांव चा राजा का विसर्जन भी गणेशोत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। विशाल मूर्ति को गिरगांव की ऐतिहासिक गलियों से होते हुए गिरगांव चौपाटी तक ले जाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुलूस में शामिल होते हैं।

    विसर्जन यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में युवा ढोल और लेजिम के साथ शामिल होते हैं। संगीत और पारंपरिक नृत्य के बीच गणपति को विदाई दी जाती है। गिरगांव की गलियों से अरब सागर तक पहुंचने वाली यह यात्रा स्थानीय गणेशोत्सव की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की खासियत केवल उसकी विशाल मूर्ति या कलात्मक सजावट तक सीमित नहीं है। करीब एक सदी से चली आ रही मिट्टी की मूर्ति बनाने की परंपरा इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़ती है। यही वजह है कि गणपति उत्सव के दौरान यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश देता है।

    वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आधुनिक समय के पर्यावरणीय सरोकार भी जुड़े हैं। मिट्टी की मूर्ति, अनोखी कलाकारी और पारंपरिक विसर्जन जुलूस ने ‘गिरगांव चा राजा’ को मुंबई के प्रमुख गणपति उत्सवों में अलग पहचान दिलाई है।

  • शाहरुख खान ने अंबानी परिवार की गणपति पूजा में की आरती, कैमरों से बनाई दूरी, सामने आया समारोह का वीडियो

    शाहरुख खान ने अंबानी परिवार की गणपति पूजा में की आरती, कैमरों से बनाई दूरी, सामने आया समारोह का वीडियो

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर अंबानी परिवार के घर एंटीलिया में आयोजित गणपति पूजा में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गणपति बप्पा की पूजा और आरती की। हालांकि, समारोह में पहुंचने के दौरान शाहरुख खान ने कैमरों से दूरी बनाए रखी और अन्य सितारों की तरह बाहर फोटोग्राफरों के सामने तस्वीरें नहीं खिंचवाईं। अब समारोह के अंदर की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद उनके शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

    सामने आए वीडियो में शाहरुख खान गणपति बप्पा की आरती करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वह हाथ में आरती की थाली लिए भगवान गणेश के सामने खड़े नजर आए। इस दौरान अभिनेता सफेद शर्ट और काली पैंट में दिखाई दिए। उनका सादगी भरा अंदाज वीडियो में साफ नजर आ रहा है। गणपति पूजा में उनके साथ अभिनेता रणवीर सिंह भी मौजूद थे।

    एक तस्वीर में रणवीर सिंह आरती करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि शाहरुख खान उनके पास खड़े नजर आ रहे हैं। रणवीर सिंह ने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ जैकेट पहनी थी। समारोह की सामने आई तस्वीरों और वीडियो में दोनों कलाकारों की मौजूदगी देखने को मिली है।

    गणपति उत्सव में बॉलीवुड के कई सितारे पहुंचे थे। इनमें से ज्यादातर कलाकारों ने बाहर मौजूद फोटोग्राफरों के सामने तस्वीरें खिंचवाईं, लेकिन शाहरुख खान ने ऐसा नहीं किया। वह बिना ज्यादा चर्चा के समारोह में पहुंचे और कैमरों से दूरी बनाए रखी। इसी वजह से शुरुआत में उनके आयोजन में शामिल होने को लेकर कोई तस्वीर या वीडियो सामने नहीं आया था।

    बाद में समारोह के अंदर की तस्वीरें और वीडियो सामने आए तो शाहरुख खान की मौजूदगी की जानकारी सामने आई। एक तस्वीर में वह मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के साथ भी दिखाई दिए। इससे पता चला कि अभिनेता अंबानी परिवार के गणपति उत्सव में शामिल हुए थे और उन्होंने पूजा में हिस्सा लिया।

    शाहरुख खान के आरती करते हुए वीडियो के सामने आने के बाद उनका यह अंदाज चर्चा में है। वीडियो में वह गणपति बप्पा के सामने आरती की थाली लिए दिखाई दे रहे हैं। समारोह के दौरान उन्होंने कैमरों से दूरी बनाए रखी, लेकिन अंदर की तस्वीरों में उनकी मौजूदगी दर्ज हुई।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो शाहरुख खान जल्द फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी बेटी सुहाना खान और अभिषेक बच्चन भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म की रिलीज 24 दिसंबर 2026 बताई जा रही है। ऐसे में गणपति उत्सव में शाहरुख की मौजूदगी के साथ उनकी आने वाली फिल्म ‘किंग’ भी चर्चा में बनी हुई है।

  • लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे अनंत अंबानी, लाल कुर्ते में दिखे और गणपति बप्पा का लिया आशीर्वाद

    लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे अनंत अंबानी, लाल कुर्ते में दिखे और गणपति बप्पा का लिया आशीर्वाद

    नई दिल्ली । गणपति विसर्जन के बाद अनंत अंबानी एक बार फिर भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचे। अनंत अंबानी मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे और बप्पा के सामने शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें वह कड़ी सुरक्षा के बीच गणपति पंडाल की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं।

    अनंत अंबानी अपने काफिले के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लाल रंग का कुर्ता पहना हुआ था। पंडाल में पहुंचने के बाद उन्होंने भगवान गणेश के चरणों में सिर झुकाया और आशीर्वाद लिया। दर्शन के दौरान उनकी भक्ति का अंदाज कैमरे में कैद हुआ। इसके बाद उनकी झलकियां सोशल मीडिया पर सामने आईं और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं।

    अनंत अंबानी की भगवान गणेश के प्रति आस्था पहले भी कई मौकों पर देखने को मिली है। गणेश उत्सव के दौरान अंबानी परिवार हर साल धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेता है। इस वर्ष भी अनंत अंबानी ने पत्नी राधिका मर्चेंट और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गणपति उत्सव में हिस्सा लिया था। परिवार ने घर पर गणपति बप्पा का स्वागत किया और पूजा-अर्चना के साथ उत्सव मनाया।

    गणपति उत्सव के बाद परिवार के सदस्यों ने बप्पा का विसर्जन भी किया था। इस दौरान परिवार के लोग उत्साह के साथ गणपति विसर्जन के लिए पहुंचे थे। अनंत अंबानी भी इस मौके पर नजर आए थे। विसर्जन के कुछ समय बाद उनका लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंचना सामने आया है।

    लालबागचा राजा मुंबई के प्रसिद्ध गणपति पंडालों में शामिल है और गणेश उत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अनंत अंबानी का इस गणपति मंडल से जुड़ाव भी रहा है। वर्ष 2024 में उन्हें लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की ओर से बोर्ड का मानद सलाहकार सदस्य नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई थी।

    इसके बाद से अनंत अंबानी लालबागचा राजा के दर्शन के लिए नियमित रूप से पहुंचते रहे हैं। पिछले वर्ष भी उन्होंने यहां पहुंचकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया था। अंबानी परिवार के अन्य सदस्य भी अलग-अलग मौकों पर लालबागचा राजा के दर्शन करते रहे हैं।

    इस बार भी अनंत अंबानी के दर्शन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद उनकी धार्मिक आस्था को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। वीडियो में वह सुरक्षा घेरे के बीच पंडाल में प्रवेश करते और भगवान गणेश के सामने श्रद्धा से सिर झुकाते दिखाई दे रहे हैं।

    अनंत अंबानी के लिए गणेश उत्सव केवल पारिवारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा है। वह अलग-अलग मौकों पर भगवान गणेश के दर्शन और पूजा में शामिल होते रहे हैं। लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान सामने आई उनकी ताजा झलकियों में भी यही धार्मिक जुड़ाव दिखाई दिया। गणपति विसर्जन के बाद उनका बप्पा के दरबार में पहुंचना इस साल के गणेश उत्सव से जुड़ी उनकी गतिविधियों में एक और प्रमुख अवसर रहा।

  • सुनीता आहूजा ने बेटे यश के साथ घर में किया गणपति बप्पा का स्वागत, गोविंदा की गैरमौजूदगी की बताई वजह

    सुनीता आहूजा ने बेटे यश के साथ घर में किया गणपति बप्पा का स्वागत, गोविंदा की गैरमौजूदगी की बताई वजह

    नई दिल्ली ।सुनीता आहूजा ने सोमवार को अपने बेटे यशवर्धन के साथ घर में गणपति बप्पा का स्वागत किया। हर साल गोविंदा और उनके बेटे यशवर्धन बप्पा को घर लेकर आते थे, लेकिन इस बार सुनीता खुद गणपति की प्रतिमा लेकर घर पहुंचीं। इस मौके पर उनके बच्चे भी उनके साथ नजर आए, जबकि गोविंदा परिवार के साथ मौजूद नहीं थे। सुनीता ने उनकी गैरमौजूदगी की वजह भी बताई।

    सुनीता आहूजा ने बताया कि गोविंदा इस समय अमेरिका में हैं और रात में वापस आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अगर गोविंदा यात्रा के बाद थके हुए होंगे तो वह सोमवार को गणपति के दर्शन के लिए नहीं आएंगे और अगले दिन दर्शन कर सकते हैं। सुनीता ने यह भी कहा कि यह उनका घर है, इसलिए उन्हें वहां आना ही है।

    सुनीता ने बताया कि हर साल गणपति बप्पा को घर लाने की जिम्मेदारी गोविंदा और उनके बेटे यशवर्धन निभाते थे। इस बार उन्होंने खुद बप्पा को घर लाने का फैसला किया। सुनीता के मुताबिक, उन्होंने गणपति को घर पर नाच-गाने के साथ लेकर आने का फैसला किया क्योंकि पिछले एक साल में उन्हें बप्पा का आशीर्वाद और अपने काम में सफलता मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में बप्पा ने उन्हें काफी फेम दिया और उनके लिए चीजें अच्छी रही हैं। इसी वजह से उन्होंने तय किया कि इस बार वह अपने हाथों से गणपति बप्पा को घर लेकर आएंगी। सुनीता ने इस परंपरा को अपने परिवार के लिए खास बताया।

    सुनीता के अनुसार, उनके घर में गणपति उत्सव की परंपरा उनकी दिवंगत सास निर्मला देवी ने शुरू की थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा यह तय किया है कि जब तक वह जीवित हैं, हर साल गणपति बप्पा को घर लेकर आएंगी। उनके मुताबिक यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।

    सुनीता ने बताया कि वह गणपति बप्पा को डेढ़ दिन के लिए घर लेकर आती हैं। उन्होंने कहा कि अगर बप्पा को अधिक दिनों के लिए घर में रखा जाए तो उसके अनुसार पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक प्रक्रियाएं भी करनी होती हैं। इसलिए उनके घर में डेढ़ दिन के गणपति उत्सव की परंपरा है।

    सुनीता आहूजा और गोविंदा के रिश्ते में पिछले कुछ समय से तनाव की खबरें भी सामने आती रही हैं। सुनीता को कुछ समय पहले फैमिली कोर्ट के बाहर देखा गया था, जहां वह गोविंदा के खिलाफ दायर तलाक का मामला वापस लेने पहुंची थीं। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुईं।

    तलाक का मामला वापस लेने के बाद सुनीता और राखी सावंत की बातचीत से जुड़ा एक ऑडियो-वीडियो भी सामने आया था। इसमें सुनीता ने दावा किया था कि गोविंदा दूसरी शादी करने की योजना बना रहे हैं और इसी वजह से उन्होंने तलाक का मामला वापस लेने का फैसला किया।

    इसके अलावा गोविंदा की सह-कलाकार रानी स्वर्णकार के साथ तस्वीरें और मुलाकात को लेकर भी सुनीता की प्रतिक्रिया सामने आई थी। उन्होंने गोविंदा पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद अभिनेता की ओर से भी प्रतिक्रिया आई थी। दोनों के बीच रिश्ते को लेकर सामने आए इन बयानों के बावजूद सुनीता ने अपने घर की गणपति परंपरा जारी रखने की बात कही है।

  • Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी पर घर में भगवान गणेश की स्थापना को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बप्पा के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाने से लेकर पूजा की सामग्री जुटाने तक कई काम पहले से करने पड़ते हैं। यदि आप भी इस बार घर पर गणपति स्थापना करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की पूरी सूची पहले ही तैयार कर लेना बेहतर रहेगा। इससे स्थापना के समय किसी जरूरी सामान की कमी नहीं होगी और पूजा की तैयारी व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

    गणपति को विराजमान करने के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी की जरूरत होती है। चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पूजा के अनुकूल साफ कपड़ा रखा जा सकता है। इसी स्थान पर गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है। मूर्ति के साथ अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी की गांठ और सिक्का जैसी पूजा सामग्री भी पहले से तैयार रखी जा सकती है।

    गणेश स्थापना में कलश का भी महत्व बताया गया है। इसके लिए तांबे या पीतल का कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल और कलावा जैसी सामग्री जुटाकर रखी जा सकती है। पूजा के समय इन चीजों की जरूरत पड़ती है, इसलिए इन्हें पहले से एक स्थान पर रखना सुविधाजनक रहेगा।

    गणपति पूजा की सामग्री में दूर्वा और सुपारी भी खास तौर पर शामिल की जाती है। बप्पा को अर्पित करने के लिए ताजे फूल भी तैयार रखें। इसके अलावा जनेऊ, पानी वाला नारियल और गुड़-नारियल का गोला भी पूजा की सामग्री में रखा जा सकता है। इनका इस्तेमाल पूजा और भोग की तैयारी में किया जाता है।

    भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक या लड्डू, फल और पंचमेवा तैयार रखना चाहिए। यदि घर पर मोदक बनाने की तैयारी है तो उन्हें पूजा के समय से पहले बनाकर रख लेना बेहतर रहेगा। पंचामृत भी पूजा के लिए तैयार किया जा सकता है। इससे स्थापना और पूजा के दौरान जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रहेगी।

    पूजा की थाली में घी का दीपक और धूप भी जरूर रखें। आरती और पूजा के दौरान इनकी जरूरत होती है। पूजा की सभी छोटी-बड़ी चीजों को एक साथ व्यवस्थित करके रखने से स्थापना के समय सामान तलाशने में परेशानी नहीं होगी।

    गणेश चतुर्थी की पूजा में कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल होता है। इसलिए आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के लिए पूजा का सामान एक दिन पहले ही जुटा लेना बेहतर रहेगा। चौकी, कपड़ा, गणपति मूर्ति, अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, सिक्का, कलश, गंगाजल, पत्ते, नारियल, कलावा, सुपारी, दूर्वा, फूल और जनेऊ जैसी सामग्री की तैयारी पहले की जा सकती है।

    इसी तरह भोग के लिए मोदक या लड्डू, फल, पंचमेवा और पंचामृत भी समय से तैयार रखें। दीपक और धूप को भी पूजा की सामग्री के साथ रख दें। इस तरह गणपति स्थापना के समय जरूरी सामान पहले से तैयार रहेगा और पूजा की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।