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  • सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में टीम चयन को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है। किसी खिलाड़ी को टीम में जगह देना हो या किसी अनुभवी क्रिकेटर को बाहर बैठाने का फैसला लेना हो, चयनकर्ताओं के लिए यह जिम्मेदारी आसान नहीं होती। सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के करियर में भी ऐसे दौर आए, जब उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। इन फैसलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभवों के आधार पर इस तरह के फैसलों की परिस्थितियों पर चर्चा की है।

    संदीप पाटिल भारतीय क्रिकेट के उन पूर्व खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने मैदान पर खेलने के साथ-साथ चयनकर्ता की भूमिका भी निभाई। चयन समिति में रहते हुए उन्हें कई बार ऐसे फैसले लेने पड़े, जिनका सीधा असर स्थापित खिलाड़ियों के करियर पर पड़ता था। भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए प्रदर्शन, फिटनेस, टीम की जरूरत और उपलब्ध विकल्पों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है। किसी खिलाड़ी का बड़ा नाम या पुराना रिकॉर्ड हमेशा उसकी जगह सुनिश्चित नहीं करता। चयनकर्ताओं के सामने यह चुनौती रहती है कि वे व्यक्तिगत लोकप्रियता के बजाय टीम के हित और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

    सचिन तेंदुलकर का करियर भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक रहा है। उन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई रिकॉर्ड बनाए। इसके बावजूद उनके करियर में भी ऐसे मौके आए, जब उनके चयन या टीम में भूमिका को लेकर चर्चा हुई। युवराज सिंह ने भारत की कई महत्वपूर्ण जीतों में योगदान दिया और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं, गौतम गंभीर ने भी भारतीय टीम के लिए अहम पारियां खेलीं। इन खिलाड़ियों के अनुभव बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में जगह बनाए रखना लगातार चुनौतीपूर्ण रहता है।

    टीम चयन के फैसलों में केवल किसी खिलाड़ी का पिछला प्रदर्शन ही निर्णायक नहीं होता। चयनकर्ता यह भी देखते हैं कि टीम को किस तरह के संयोजन की जरूरत है, खिलाड़ी का हालिया प्रदर्शन कैसा है और आगामी मुकाबलों की परिस्थितियों के लिए कौन उपयुक्त होगा। कई बार किसी खिलाड़ी को बाहर रखने का फैसला अस्थायी होता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में टीम में बदलाव लंबे समय के लिए भी हो सकता है। ऐसे फैसलों के कारण प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच बहस होना स्वाभाविक है, क्योंकि लोकप्रिय खिलाड़ियों से दर्शकों की भावनाएं जुड़ी रहती हैं।

    संदीप पाटिल के अनुभवों के संदर्भ में चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी का एक और पहलू सामने आता है। खिलाड़ियों के साथ निजी संबंध, दोस्ती या व्यक्तिगत समीकरण चयन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने चाहिए। चयनकर्ता का दायित्व टीम के लिए उपयुक्त खिलाड़ियों का चुनाव करना है, भले ही किसी फैसले से लोकप्रिय खिलाड़ी या उनके प्रशंसक निराश हों। हालांकि, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर को टीम से बाहर किए जाने के अलग-अलग कारण रहे होंगे। इन तीनों के मामलों को एक जैसा मानना उचित नहीं है, क्योंकि उनके करियर, प्रदर्शन और टीम की जरूरतें अलग-अलग समय पर अलग थीं।

    भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर होने वाली चर्चाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि टीम बनाना केवल नामों का चुनाव नहीं, बल्कि परिस्थितियों और रणनीति के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। संदीप पाटिल जैसे पूर्व खिलाड़ियों के अनुभव इस प्रक्रिया को समझने का अवसर देते हैं। किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर रखने का फैसला उसके पूरे करियर का मूल्यांकन नहीं होता, बल्कि अक्सर किसी खास समय की जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों से जुड़ा होता है। इसलिए पुराने चयन फैसलों को समझने के लिए उस समय की परिस्थितियों और संबंधित खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

  • वैभव सूर्यवंशी के इंतजार की कहानी, VVS ने बड़े मैच में उतारा अब GG क्यों रोक रहे हैं बेबी बॉस का बल्ला

    वैभव सूर्यवंशी के इंतजार की कहानी, VVS ने बड़े मैच में उतारा अब GG क्यों रोक रहे हैं बेबी बॉस का बल्ला


    नई दिल्ली। वैभव सूर्यवंशी का नाम इन दिनों भारतीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले युवा खिलाड़ियों में शामिल है लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने के बाद उनके फैंस का इंतजार और बढ़ गया है। लखनऊ में खेले गए मुकाबले में टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी पर भरोसा बनाए रखा। भारत ने मुकाबला आसानी से जीत लिया और ऐसे में इस संयोजन को बदलने की कोई तत्काल जरूरत भी नजर नहीं आई। इसके बावजूद अब रांची में होने वाले दूसरे टी20 से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गौतम गंभीर वैभव सूर्यवंशी को मौका देंगे या फिर उन्हें एक और मैच बेंच पर बैठकर देखना पड़ेगा।

    वैभव की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि महज 15 साल की उम्र में उन्होंने जिस तरह क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है उसने उन्हें सामान्य युवा खिलाड़ी से कहीं आगे पहुंचा दिया है। आईपीएल में उनके आक्रामक अंदाज ने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी की झलक दिखाई है। जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में अर्धशतक लगाने के बाद यह साफ हो गया कि वैभव सिर्फ उम्र की वजह से चर्चा में नहीं हैं बल्कि उनके बल्ले में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता भी मौजूद है।

    एशियन गेम्स के दौरान वीवीएस लक्ष्मण की कोचिंग में वैभव को पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल मुकाबले जैसे बड़े मैच में प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया था। उस समय उम्र को उनकी कमजोरी नहीं माना गया और टीम ने उनकी क्षमता पर भरोसा जताया। अब भारतीय टीम की जिम्मेदारी गौतम गंभीर के पास है और उनका नजरिया मौजूदा संयोजन को मजबूत बनाए रखने पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। लखनऊ में संजू और अभिषेक से बड़ी पारी नहीं आई लेकिन भारत ने मुकाबला आसानी से अपने नाम कर लिया। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के पास विजयी संयोजन को बरकरार रखने का मजबूत तर्क मौजूद है।

    फिर भी वैभव को लेकर सवाल इसलिए बना हुआ है क्योंकि किसी खिलाड़ी की वास्तविक क्षमता का अंदाजा उसे लगातार मौके देने के बाद ही लगाया जा सकता है। अगर टीम में जगह बनाने के लिए हर बार मौजूदा खिलाड़ियों का अच्छा प्रदर्शन ही कसौटी बनेगा तो फिर नए खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर कब मिलेगा। वैभव को टीम में शामिल करने का मतलब सिर्फ किसी खिलाड़ी को बाहर करना नहीं होगा बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य के एक बेहद रोमांचक विकल्प को आजमाना भी होगा।

    अब नजरें रांची पर टिक गई हैं। यहां वैभव को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है। बिहार से आने वाले इस युवा बल्लेबाज को देखने के लिए दर्शकों की दिलचस्पी साफ दिखाई दे रही है। रांची महेंद्र सिंह धोनी का शहर है और यहां क्रिकेट को लेकर जुनून किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में दर्शक चाहते हैं कि उन्हें इस नए युवा सितारे का बल्ला भी मैदान पर देखने को मिले।

    हालांकि टीम मैनेजमेंट को सिर्फ दर्शकों की मांग के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। क्रिकेट में संतुलन और टीम की जरूरत सबसे महत्वपूर्ण होती है। लेकिन वैभव जैसे एक्स फैक्टर को ज्यादा समय तक बाहर रखना भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल वैभव तैयार हैं फैंस तैयार हैं और रांची का माहौल भी तैयार है। अब फैसला गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट को करना है कि प्लेइंग इलेवन की पर्ची में इस बार बेबी बॉस का नाम आएगा या उनका इंतजार एक मैच और लंबा होगा।

  • 2027 वर्ल्ड कप के लिए अभी से तैयारी में जुटी टीम इंडिया गंभीर ने बताया रोहित-विराट और हार्दिक-बुमराह का महत्व

    2027 वर्ल्ड कप के लिए अभी से तैयारी में जुटी टीम इंडिया गंभीर ने बताया रोहित-विराट और हार्दिक-बुमराह का महत्व


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम इस समय वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज की तैयारियों में जुटी है लेकिन टीम की नजरें सिर्फ मौजूदा मुकाबलों पर नहीं हैं। भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने साल 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को लेकर अपनी रणनीति पर खुलकर बात की है। गंभीर के बयान के बाद सबसे ज्यादा चर्चा रोहित शर्मा और विराट कोहली की भूमिका को लेकर हो रही है। दोनों दिग्गजों ने टेस्ट और टी20 क्रिकेट से संन्यास ले लिया है लेकिन वनडे फॉर्मेट में अभी भी टीम का हिस्सा हैं।

    गौतम गंभीर ने कप्तान शुभमन गिल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वनडे क्रिकेट में गिल बेहद भाग्यशाली हैं क्योंकि उन्हें रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का साथ मिल रहा है। गंभीर के मुताबिक रोहित और विराट सिर्फ मैदान पर ही नहीं बल्कि मैदान के बाहर भी गिल की मदद कर सकते हैं। ऐसे में युवा कप्तान को इन दोनों दिग्गजों के अनुभव से काफी कुछ सीखने का मौका मिल रहा है।

    गंभीर ने गिल के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कम उम्र में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद गिल ने मैदान पर शांत स्वभाव दिखाया है। वह टीम के हित में फैसले लेने से पीछे नहीं हटते और उनका रवैया निस्वार्थ रहा है। कोच के बयान से साफ है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट गिल की कप्तानी को भविष्य की बड़ी योजनाओं के लिहाज से देख रहा है।

    हालांकि 2027 वर्ल्ड कप को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि उस समय रोहित शर्मा और विराट कोहली टीम में होंगे या नहीं। गंभीर ने इस सवाल पर सीधे तौर पर कोई अंतिम फैसला नहीं बताया लेकिन वनडे टीम में दोनों की मौजूदगी और गिल को मिल रहे उनके अनुभव को अहम बताया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल टीम मैनेजमेंट वनडे फॉर्मेट में उपलब्ध खिलाड़ियों के साथ आगे की तैयारी पर ध्यान दे रहा है।

    गंभीर ने 2027 वर्ल्ड कप की योजना में हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह को भी बेहद अहम बताया। उन्होंने हार्दिक को ऐसा ऑलराउंडर बताया जिसकी उपयोगिता किसी भी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। हार्दिक जरूरत पड़ने पर गेंद से पूरे दस ओवर का योगदान दे सकते हैं और नंबर छह या सात पर बल्लेबाजी करते हुए तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं।

    जसप्रीत बुमराह को लेकर भी टीम मैनेजमेंट की योजना महत्वपूर्ण दिखाई देती है। गंभीर ने संकेत दिया कि बड़े टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों को पर्याप्त मैच खेलने की जरूरत है। वर्कलोड मैनेजमेंट जरूरी है लेकिन लगातार क्रिकेट से दूरी भी खिलाड़ियों की लय को प्रभावित कर सकती है। इसलिए वर्ल्ड कप से पहले सही मात्रा में गेम टाइम देना भारतीय टीम की योजना का अहम हिस्सा होगा।

    2027 वनडे वर्ल्ड कप अभी दूर है लेकिन भारतीय टीम ने इसकी तैयारी को लेकर अपनी दिशा तय करनी शुरू कर दी है। रोहित और विराट का अनुभव गिल की कप्तानी के लिए कितना महत्वपूर्ण रहेगा और आने वाले समय में दोनों दिग्गज वर्ल्ड कप तक टीम का हिस्सा बने रहेंगे या नहीं यह आने वाले मुकाबलों और चयन संबंधी फैसलों के साथ स्पष्ट होगा। फिलहाल गंभीर का बयान भारतीय क्रिकेट के भविष्य और 2027 वर्ल्ड कप की तैयारियों को लेकर चर्चा जरूर तेज कर चुका है।

  • वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार! गौतम गंभीर ने साफ किया प्लान बोले मौका आएगा तो लंबे समय के लिए मिलेगा

    वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार! गौतम गंभीर ने साफ किया प्लान बोले मौका आएगा तो लंबे समय के लिए मिलेगा


    नई दिल्ली। वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के बाद अपनी बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा है। महज कम उम्र में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में जगह बनाने वाले इस युवा बल्लेबाज के नाम छह मुकाबलों में दो अर्धशतक भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल सकी। अब भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने वैभव की स्थिति को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। गंभीर के मुताबिक वैभव को फिलहाल अपनी बारी का इंतजार करना होगा।

    अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज में भारत ने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी। दोनों बल्लेबाजों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए शानदार प्रदर्शन किया। खासकर तीसरे टी20 मुकाबले में अभिषेक शर्मा ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 37 गेंदों में शतक जड़ दिया। उनके इस प्रदर्शन के दम पर भारत ने अफगानिस्तान को 127 रन से हराया और तीन मैचों की सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया।

    सीरीज के बाद गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर टीम मैनेजमेंट का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वैभव के साथ इस विषय पर बातचीत बिल्कुल साफ है। उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना होगा। टीम मैनेजमेंट उनकी प्रतिभा से पूरी तरह वाकिफ है और जानता है कि वह क्या कर सकते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अनुभव और लगातार प्रदर्शन की भी अपनी अहमियत होती है।

    गंभीर के मुताबिक जो खिलाड़ी पिछले दो तीन साल से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है वह उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जिसने अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा है। ऐसे में फिलहाल अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को हटाकर वैभव को मौका देने की जल्दबाजी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि टीम मैनेजमेंट वैभव को नजरअंदाज कर रहा है बल्कि उन्हें सही समय पर मौका देने की योजना है।

    गंभीर ने यह भी संकेत दिया कि जब वैभव को प्लेइंग इलेवन में जगह मिलेगी तो उन्हें सिर्फ एक या दो मैचों का मौका नहीं दिया जाएगा। टीम मैनेजमेंट उन्हें खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर देगा। यानी युवा बल्लेबाज को एक लंबी अवधि के मौके के लिए तैयार रहना होगा।

    गंभीर ने उम्र को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि क्रिकेट में इंतजार की स्थिति खिलाड़ी की उम्र देखकर नहीं बदलती। खिलाड़ी 15 साल का हो या 30 साल का उसे अगर अपनी बारी का इंतजार करना है तो करना होगा। टीम में प्रतिस्पर्धा और प्रतिभा होना जरूरी है लेकिन हर खिलाड़ी को अपने मौके के लिए इंतजार करना पड़ता है।

    अभिषेक और संजू को लगातार मौका देने के पीछे एक और वजह भी है। गंभीर के मुताबिक टीम मैनेजमेंट अफगानिस्तान सीरीज में उस ओपनिंग कॉम्बिनेशन को दोबारा आजमाना चाहता था जिसने टी20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन किया था। सिर्फ तीन चार मैचों के खराब प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी को बाहर करना उचित नहीं माना गया। दोनों बल्लेबाजों ने अफगानिस्तान के खिलाफ फिर साबित किया कि उन्हें लगातार मौके क्यों दिए जा रहे हैं।

    वैभव ने जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया था। इसके बाद छह मुकाबलों में दो अर्धशतक लगाकर उन्होंने अपनी क्षमता दिखाई है। गंभीर के संदेश से इतना स्पष्ट है कि टीम मैनेजमेंट युवा बल्लेबाज की प्रतिभा पर भरोसा करता है। फिलहाल वैभव को इंतजार करना होगा और जब उनकी बारी आएगी तो उन्हें खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त मौके दिए जाएंगे।

  • वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने पर संजू सैमसन ने समझाया टीम का फैसला बोले मुश्किल निर्णय लेना आसान नहीं

    वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने पर संजू सैमसन ने समझाया टीम का फैसला बोले मुश्किल निर्णय लेना आसान नहीं


    नई दिल्ली। दिल्ली में अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में संजू सैमसन ने बल्ले से शानदार वापसी की। उन्होंने महज 22 गेंदों में 57 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। लंबे समय से अपनी बल्लेबाजी को लेकर चर्चा में रहे संजू के लिए यह पारी खास रही। हालांकि मैच के बाद उन्होंने सिर्फ अपनी बल्लेबाजी को लेकर बात नहीं की बल्कि आलोचना और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं के असर को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी।

    संजू ने माना कि क्रिकेटरों को लेकर लगातार होने वाली चर्चाएं और आलोचनाएं खिलाड़ी को प्रभावित करती हैं। उनका कहना था कि अनुभव के साथ उन्होंने ऐसी परिस्थितियों से निपटना जरूर सीखा है लेकिन वह भी इंसान हैं। लगातार सामने आने वाली बातों का असर होना स्वाभाविक है। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि वह कई बार खुद को बाहरी शोर से दूर रखने की कोशिश करते हैं लेकिन कभी कभी सोशल मीडिया या दूसरी जगहों पर सामने आने वाली टिप्पणियां नजर आ ही जाती हैं।

    संजू ने बताया कि वह खुद को बाहरी शोर से दूर रखने के लिए वाईफाई बंद करने जैसी कोशिश करते हैं लेकिन कई बार वह दोबारा चालू हो जाता है और कुछ कमेंट सामने आ जाते हैं। उनके मुताबिक ऐसी चीजें मन को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि उनका फोकस इस बात पर रहता है कि मैदान पर उतरते समय उनका माइंडसेट साफ रहे और वह अपनी तैयारी तथा खेल पर ध्यान दें।

    उन्होंने साफ किया कि अगर वह बाहर की बातों को अपने खेल पर हावी होने देंगे तो गेंदबाजी के खिलाफ खुलकर बल्लेबाजी करना मुश्किल हो जाएगा। उनके अनुसार बल्लेबाज को हर गेंद पर सोच समझकर खेलना होता है और ज्यादा सोचने से स्वाभाविक खेल प्रभावित हो सकता है। इसलिए वह कोशिश करते हैं कि मैदान पर अपना ध्यान सिर्फ खेल और टीम की जरूरत पर रखें।

    इसी बातचीत के दौरान संजू सैमसन ने 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी अपनी राय रखी। वैभव ने हाल के मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया है और उनके प्रदर्शन ने भारतीय टीम में जगह बनाने की दावेदारी मजबूत की है। संजू ने माना कि वैभव के प्रदर्शन को देखते हुए उसे टीम में मौका मिलना स्वाभाविक था।

    संजू ने कहा कि भारतीय टीम को संभालना आसान काम नहीं है। एक तरफ अनुभवी खिलाड़ी होते हैं तो दूसरी तरफ युवा खिलाड़ियों का शानदार फॉर्म भी चयन के फैसले को प्रभावित करता है। उन्होंने वैभव के करीब 700 से 800 रन बनाने वाले प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे प्रदर्शन के बाद युवा खिलाड़ी को मौका देना टीम मैनेजमेंट के लिए समझ में आने वाला फैसला है।

    संजू ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने हाल के दो तीन मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया था जबकि वैभव अच्छी फॉर्म में थे। ऐसे में नेतृत्व समूह के सामने टीम के हित को देखते हुए फैसला लेने की स्थिति बनी। संजू ने इस फैसले को शिकायत की नजर से देखने के बजाय टीम मैनेजमेंट की मजबूरी और जिम्मेदारी को समझने की बात कही।

    उन्होंने हेड कोच गौतम गंभीर के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। संजू के मुताबिक सीरीज के दौरान इस मुद्दे पर टीम के भीतर बातचीत हुई थी और सीरीज शुरू होने से पहले भी गंभीर ने उनसे काफी बात की थी। उनके अनुसार ऐसे मामलों में स्पष्ट संवाद बेहद जरूरी होता है।

    संजू ने कहा कि लोकप्रिय फैसला लेना आसान होता है लेकिन टीम के हित में कठिन फैसला लेना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने नेतृत्व समूह की तारीफ करते हुए कहा कि टीम को सबसे आगे रखते हुए मुश्किल फैसले लिए जा रहे हैं। उनका बयान यह दिखाता है कि चयन की प्रतिस्पर्धा के बीच खिलाड़ी के लिए टीम का लक्ष्य और आपसी संवाद कितना महत्वपूर्ण है।

  • कोच बनने का ऑफर आया तो पहले पत्नी से पूछेंगे नेहरा! टीम इंडिया की जिम्मेदारी पर बोले ऐसा काम आसान नहीं 3-4 साल टिकना भी मुश्किल

    कोच बनने का ऑफर आया तो पहले पत्नी से पूछेंगे नेहरा! टीम इंडिया की जिम्मेदारी पर बोले ऐसा काम आसान नहीं 3-4 साल टिकना भी मुश्किल


    नई दिल्ली। टीम इंडिया का हेड कोच बनना क्रिकेट की दुनिया में किसी भी खिलाड़ी या कोच के लिए बड़े सम्मान की बात मानी जाती है लेकिन पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के लिए यह जिम्मेदारी फिलहाल इतनी आसान नजर नहीं आती। टीम इंडिया के कोच पद को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने अपने खास मजाकिया अंदाज में ऐसा जवाब दिया कि वहां मौजूद लोग हंस पड़े। नेहरा ने कहा कि अगर उन्हें भारतीय टीम की कोचिंग संभालनी पड़ी तो सबसे पहले घर की हाई कमीशन यानी अपनी पत्नी से बात करनी होगी वरना तलाक हो सकता है। हालांकि उनका यह बयान मजाकिया अंदाज में था और इसके पीछे उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट की बेहद व्यस्त जिंदगी को बड़ी वजह बताया।

    आशीष नेहरा को टीम इंडिया के अगले हेड कोच के संभावित दावेदारों में गिना जाता रहा है। इसकी बड़ी वजह आईपीएल में गुजरात टाइटन्स के साथ उनका शानदार कोचिंग रिकॉर्ड है। नेहरा ने 2022 में गुजरात टाइटन्स को उसके पहले ही सीजन में आईपीएल चैंपियन बनाया था। इसके बाद टीम ने 2023 और 2026 में भी फाइनल तक का सफर तय किया। इस प्रदर्शन ने नेहरा की कोच के तौर पर पहचान को और मजबूत किया है।

    कोलकाता में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के सालाना अवॉर्ड समारोह के दौरान नेहरा से पूछा गया कि क्या वह भविष्य में भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच की जिम्मेदारी संभालना चाहेंगे। नेहरा ने साफ किया कि वह इस पद को लेकर अभी कोई योजना नहीं बना रहे हैं। उनके मुताबिक टीम इंडिया को कोचिंग देना निश्चित तौर पर बड़े सम्मान और गर्व की बात होगी लेकिन फिलहाल वह गुजरात टाइटन्स के साथ अपनी भूमिका में खुश हैं और उन्होंने इस जिम्मेदारी को अपनी महत्वाकांक्षा नहीं बनाया है।

    इसके बाद नेहरा ने जिस अंदाज में अपनी पत्नी का जिक्र किया उसने पूरे बयान को मजेदार बना दिया। उन्होंने कहा कि अगर कभी टीम इंडिया के कोच पद का ऑफर आता है तो पहले पत्नी से बात करनी होगी। इसकी वजह भी उन्होंने खुद बताई। नेहरा के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट में कोच की नौकरी का मतलब साल के करीब आठ से नौ महीने तक लगातार यात्रा करना और परिवार से दूर रहना है। उनके मुताबिक यह काम सुनने में जितना आकर्षक लगता है असल में उतना ही चुनौतीपूर्ण है।

    नेहरा ने यह भी बताया कि इंटरनेशनल क्रिकेट की कोचिंग में लगातार यात्रा दबाव और काम की मांग इतनी ज्यादा होती है कि बहुत कम कोच तीन या चार साल से ज्यादा समय तक इस भूमिका में टिक पाते हैं। यही वजह है कि वह इस पद को लेकर तुरंत कोई फैसला या योजना बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

    नेहरा ने आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट की कोचिंग के बीच फर्क भी बताया। उनके मुताबिक आईपीएल में भी दबाव कम नहीं होता लेकिन नेशनल टीम को संभालने की जिम्मेदारी बिल्कुल अलग स्तर की होती है। राष्ट्रीय टीम का कोच सिर्फ एक फ्रेंचाइजी नहीं बल्कि पूरे देश की उम्मीदों के साथ जुड़ा होता है। लगातार दौरे मैचों का दबाव खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जिम्मेदारी और हर फैसले पर होने वाली आलोचना इस भूमिका को बेहद कठिन बना देती है।

    फिलहाल नेहरा गुजरात टाइटन्स के साथ खुश हैं और टीम इंडिया के कोच पद का दरवाजा उन्होंने पूरी तरह बंद भी नहीं किया है। उनका कहना है कि भविष्य में अगर ऐसा मौका आता है तो उस समय परिस्थितियों को देखकर फैसला लिया जाएगा। यानी नेहरा ने कोच बनने से इनकार नहीं किया है लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता यही है कि वह अपनी मौजूदा भूमिका में पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनका पत्नी वाला मजाक भले ही सुर्खियों में छा गया हो लेकिन इसके पीछे छिपी बात साफ है कि टीम इंडिया का कोच बनना सिर्फ क्रिकेट की रणनीति बनाने का काम नहीं बल्कि निजी जिंदगी से भी बड़ा समय और त्याग मांगने वाली जिम्मेदारी है।

  • टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन पर BCCI का मंथन! कप्तान और कोच पहुंचे बैठक में लेकिन चीफ सेलेक्टर अगरकर नहीं आए

    टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन पर BCCI का मंथन! कप्तान और कोच पहुंचे बैठक में लेकिन चीफ सेलेक्टर अगरकर नहीं आए


    नई दिल्ली । टीम इंडिया के हालिया विदेशी दौरों पर खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बड़ी रिव्यू मीटिंग की लेकिन इस अहम बैठक से चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए। मुंबई स्थित BCCI मुख्यालय में हुई इस बैठक में टीम इंडिया के आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे की समीक्षा की गई। भारतीय टीम को दोनों विदेशी दौरों पर लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली जिसके बाद बोर्ड ने प्रदर्शन से लेकर खिलाड़ियों की फिटनेस और लगातार सामने आ रही चोटों तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

    बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा अजीत अगरकर के शामिल नहीं होने को लेकर रही। अगरकर का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट सितंबर के अंत में समाप्त होने वाला है और ऐसे में यह माना जा रहा था कि बोर्ड की इस बैठक में उनके भविष्य और कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन को लेकर भी कोई बड़ा फैसला हो सकता है। हालांकि BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने साफ कर दिया कि इस रिव्यू मीटिंग में अगरकर के कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

    सैकिया ने चीफ सेलेक्टर की गैरमौजूदगी की वजह भी बताई। उनके मुताबिक बैठक काफी कम समय के नोटिस पर बुलाई गई थी और उस समय अजीत अगरकर मुंबई से बाहर थे। बताया गया कि वह ऐसी जगह मौजूद थे जहां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बैठक में शामिल होना संभव नहीं हो सका। अगरकर की अनुपस्थिति इसलिए भी सुर्खियों में रही क्योंकि टीम के खराब प्रदर्शन की समीक्षा करने वाली बैठक में चयन समिति के प्रमुख का मौजूद न होना क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया।

    दरअसल भारतीय टीम के लिए हाल के दोनों विदेशी दौरे निराशाजनक रहे। भारत ने आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की T20I सीरीज खेली जिसमें टीम को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। पांच मैचों की T20I सीरीज में भारत को 1-4 से हार मिली जबकि तीन मैचों की ODI सीरीज में भी टीम को 1-2 से शिकस्त झेलनी पड़ी। लगातार विदेशी दौरों पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में खराब नतीजों के बाद BCCI ने टीम के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण करने का फैसला किया।

    मुंबई में हुई इस अहम बैठक में भारतीय क्रिकेट के कई बड़े नाम मौजूद रहे। टेस्ट और ODI कप्तान शुभमन गिल T20I कप्तान श्रेयस अय्यर हेड कोच गौतम गंभीर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के क्रिकेट डायरेक्टर वीवीएस लक्ष्मण और BCCI के कई अधिकारी बैठक में शामिल हुए। बैठक के दौरान सिर्फ टीम के प्रदर्शन पर ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस और लगातार हो रही चोटों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आने वाले मुकाबलों को देखते हुए टीम मैनेजमेंट के सामने खिलाड़ियों को फिट रखने और बेहतर संयोजन तैयार करने की चुनौती भी अहम मानी जा रही है।

    अजीत अगरकर के कार्यकाल पर नजर डालें तो उनके नेतृत्व वाली चयन समिति के दौर में भारतीय टीम ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत ने 2023 ODI वर्ल्ड कप का फाइनल खेला और इसके बाद 2024 तथा 2026 में लगातार दो T20 वर्ल्ड कप जीतने में सफलता हासिल की। हालांकि इसी दौर में भारतीय क्रिकेट में कई बड़े बदलाव भी देखने को मिले और विराट कोहली तथा रोहित शर्मा ने टेस्ट और T20I क्रिकेट से संन्यास लिया जबकि दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

    अब सबकी नजर सितंबर के अंत पर टिकी है जब अजीत अगरकर का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होगा। फिलहाल BCCI ने उनके एक्सटेंशन को लेकर किसी चर्चा से इनकार किया है लेकिन आने वाले दिनों में चयन समिति और भारतीय टीम के भविष्य को लेकर बोर्ड का फैसला क्रिकेट जगत के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • टीम इंडिया के सामने फिटनेस का बड़ा संकट! गंभीर-अगरकर संग BCCI की अहम बैठक में हार, न्यूजीलैंड दौरे और 2027 वर्ल्ड कप पर चर्चा

    टीम इंडिया के सामने फिटनेस का बड़ा संकट! गंभीर-अगरकर संग BCCI की अहम बैठक में हार, न्यूजीलैंड दौरे और 2027 वर्ल्ड कप पर चर्चा


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए आने वाला समय बेहद अहम माना जा रहा है। हाल के दौरों में मिली हार, लगातार बढ़ती खिलाड़ियों की चोट की समस्या और 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अब गंभीर मंथन करने जा रहा है। 3 सितंबर को मुंबई में होने वाली BCCI की अहम बैठक में टीम इंडिया के मौजूदा प्रदर्शन से लेकर भविष्य की रणनीति तक कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इस बैठक में बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर, मुख्य कोच गौतम गंभीर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण समेत टीम प्रबंधन से जुड़े अन्य अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है।

    बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया को मिली हार की समीक्षा होगा। बोर्ड यह जानने की कोशिश करेगा कि आखिर टीम के प्रदर्शन में कहां कमी रही और भविष्य के बड़े मुकाबलों से पहले किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर टीम की जरूरतों तथा आगे की योजनाओं को बोर्ड के सामने रख सकते हैं। इसके साथ ही आगामी न्यूजीलैंड दौरे को लेकर भी रणनीति बनाई जाएगी क्योंकि इस सीरीज को भविष्य की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    BCCI के सामने इस समय खिलाड़ियों की फिटनेस सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। कई खिलाड़ी चोट से जूझ रहे हैं और उनकी रिकवरी में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुनी गई टीम में भी कुछ खिलाड़ियों की उपलब्धता फिटनेस टेस्ट पर निर्भर बताई गई है। ऐसे में चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों की मेडिकल स्थिति के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ अगले महीने शुरू होने वाले दौरे पर टीम प्रबंधन तेज गेंदबाजों का मजबूत समूह तैयार करना चाहता है। मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरुनूर बरार, जसप्रीत बुमराह और आकाशदीप जैसे तेज गेंदबाजों की फिटनेस, उपलब्धता और भूमिका पर विचार किया जा सकता है। लगातार क्रिकेट और खिलाड़ियों के कार्यभार को देखते हुए BCCI को यह तय करना होगा कि महत्वपूर्ण खिलाड़ियों को कैसे फिट और फ्रेश रखा जाए।

    हार्दिक पांड्या की फिटनेस भी टीम प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। वनडे विश्व कप की योजनाओं में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन लगातार फिटनेस से जुड़ी चिंताओं के कारण टीम संयोजन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बोर्ड, चयनकर्ता और टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों की चोट, वर्कलोड और मैचों की प्राथमिकता पर एक स्पष्ट नीति बनानी होगी।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर की यह बैठक केवल पिछली हार का रिव्यू भर नहीं होगी बल्कि टीम इंडिया के भविष्य की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण चर्चा भी साबित हो सकती है। इंग्लैंड और आयरलैंड में मिली निराशा से सबक लेने के साथ BCCI की नजर न्यूजीलैंड दौरे और 2027 विश्व कप पर होगी। आने वाले वर्षों में भारतीय टीम किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी, इसका संकेत इस अहम बैठक से मिल सकता है।

  • साइकिल चलाओ फिट रहो देश को मजबूत बनाओ मांडविया और गंभीर ने युवाओं को दिया फिटनेस मंत्र

    साइकिल चलाओ फिट रहो देश को मजबूत बनाओ मांडविया और गंभीर ने युवाओं को दिया फिटनेस मंत्र


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में रविवार को आयोजित फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल इवेंट में फिटनेस और खेलों को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर भी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना और फिटनेस को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा। बड़ी संख्या में बच्चों युवाओं और अलग अलग उम्र के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया और साइकिलिंग के साथ कई अन्य खेल गतिविधियों में भी भागीदारी की।

    केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने इस दौरान युवाओं को खास तौर पर मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से दूरी बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संडे ऑन साइकिल का यह 88वां संस्करण है और देशभर में अब तक 25 हजार से ज्यादा स्थानों पर इसका आयोजन किया जा चुका है। उनके मुताबिक साइकिल चलाने को लेकर देश में लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है और यह अभियान धीरे धीरे एक जुनून और पैशन का रूप ले रहा है। उन्होंने साइकिलिंग को व्यायाम का बेहतरीन माध्यम बताते हुए कहा कि इससे व्यक्ति खुद को फिट रखने के साथ पर्यावरण और यातायात से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में भी योगदान दे सकता है।

    मांडविया ने युवाओं से अपील की कि वे रोजाना कम से कम एक घंटे मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से दूर रहने की कोशिश करें। इस समय को साइकिल चलाने या किसी अन्य खेल गतिविधि में लगाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। उनका संदेश खास तौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बच्चों और युवाओं के बीच स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम होता जा रहा है।

    कार्यक्रम में गौतम गंभीर ने भी फिटनेस को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने फिट इंडिया अभियान को सरकार की एक बेहतरीन पहल बताते हुए कहा कि जिस तरह देश के लोग स्वस्थ होंगे उसी तरह देश मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। गंभीर ने फिटनेस को किसी एक दिन या आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक अभियान के रूप में देखने की जरूरत बताई। उन्होंने युवाओं और इस अभियान से जुड़े लोगों से अपील की कि वे फिटनेस का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

    गंभीर ने इस बात पर जोर दिया कि स्वस्थ नागरिक किसी भी मजबूत देश की नींव होते हैं। उनके अनुसार फिटनेस को केवल खेल खेलने या व्यायाम करने तक सीमित नहीं समझना चाहिए बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। नियमित खेल गतिविधियां व्यक्ति को सक्रिय रखने के साथ अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करती हैं।

    जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए इस आयोजन में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल प्रतिनिधियों और अतिथियों का सम्मान किया। मुख्य अतिथि गौतम गंभीर के अलावा पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह तथा अभिनेत्री मुधरिमा तुली भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। अतिथियों का फूल और बुके देकर स्वागत किया गया।

    साइकिलिंग के अलावा कार्यक्रम में कई अन्य खेल गतिविधियां भी आयोजित की गईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक अलग अलग आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी ने इसे सामूहिक फिटनेस उत्सव का रूप दिया। आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि फिट रहना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बल्कि स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण से भी जुड़ा विषय है। मांडविया और गंभीर की अपील ने युवाओं को खेल और नियमित शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने के अभियान को नई ऊर्जा दी।

  • बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर

    बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर


    नई दिल्ली। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने सिर्फ सीरीज जीतकर ही नहीं बल्कि अपने बदले हुए अंदाज से भी सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस बदलाव के केंद्र में अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण रहे जिन्होंने बिना किसी बयानबाजी और विवाद के केवल तीन मैचों में टीम के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा कर दिया। खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी शैली और शांत नेतृत्व ने यह साबित किया कि सफल कोचिंग केवल रणनीति तक सीमित नहीं होती बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम लगातार हार और आलोचनाओं का सामना कर रही थी। टीम चयन से लेकर रणनीति तक कई फैसलों पर सवाल उठे थे। ऐसे समय में जब गौतम गंभीर उपलब्ध नहीं थे तब वीवीएस लक्ष्मण ने अंतरिम कोच की जिम्मेदारी संभाली और खिलाड़ियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया। उन्होंने किसी भी खिलाड़ी पर सार्वजनिक दबाव बनाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया।

    इसका असर मैदान पर भी साफ दिखाई दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत कई खिलाड़ियों ने खुलकर लक्ष्मण के मार्गदर्शन की सराहना की। टीम के भीतर आत्मविश्वास और सहजता का माहौल बना जिससे खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके। लंबे समय बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट नजर आई।

    वीवीएस लक्ष्मण की चयन नीति भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने टीम में बदलाव जरूर किए लेकिन केवल प्रयोग करने के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की क्षमता और टीम की जरूरत को ध्यान में रखकर फैसले लिए। दूसरे टी20 मुकाबले में यश ठाकुर को मौका दिया गया जबकि सीरीज अपने नाम करने के बाद तीसरे मैच में सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। इससे खिलाड़ियों को यह संदेश मिला कि प्रदर्शन और तैयारी के आधार पर सभी को अवसर मिलेगा।

    युवा खिलाड़ियों के साथ लक्ष्मण का जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक काम करने के कारण वह उभरते क्रिकेटरों की मानसिकता और उनकी जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे कई खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा है। यही अनुभव अंतरिम कोच के रूप में भी उनके काम आया।

    हालांकि तीन मैचों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि टीम की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े जिससे फील्डिंग अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लेबाजी और रणनीति में सुधार जरूर दिखाई दिया लेकिन फील्डिंग में निरंतरता लाने की जरूरत बनी हुई है।

    वीवीएस लक्ष्मण इससे पहले भी कई बार अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं और हर बार उनके काम की सराहना हुई है। इसके बावजूद उन्होंने स्थायी मुख्य कोच बनने के बजाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। अब उनके हालिया प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य में अलग अलग प्रारूपों के लिए अलग मुख्य कोच की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल इतना तय है कि जिम्बाब्वे दौरे ने यह साबित कर दिया है कि टीम की सफलता केवल रणनीति या तकनीक पर निर्भर नहीं करती बल्कि खिलाड़ियों के भीतर विश्वास जगाने और उन्हें खुलकर खेलने का माहौल देने वाला नेतृत्व भी उतना ही अहम होता है। वीवीएस लक्ष्मण ने अपने शांत स्वभाव और संतुलित फैसलों से यही संदेश पूरी क्रिकेट दुनिया को दिया है।