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  • भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    नई दिल्ली । भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग के साथ एक नया इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का सशक्त प्रमाण बताते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस, इसरो और आईएन-स्पेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता, युवा प्रतिभा और निजी अंतरिक्ष उद्योग की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।

    गौतम अदाणी ने अपने संदेश में कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल उड़ान ने मिशन के सभी निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चंदाना, भारत डाका और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस मिशन की सफलता सामूहिक वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का परिणाम है।

    उन्होंने इस उपलब्धि को देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां सफलतापूर्वक ऑर्बिटल लॉन्च करने की क्षमता प्रदर्शित कर चुकी हैं। उनके अनुसार यह उपलब्धि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की मजबूत होती उपस्थिति और तकनीकी आत्मविश्वास को भी दर्शाती है।

    गौतम अदाणी ने विशेष रूप से मिशन से जुड़ी युवा टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। उन्होंने कहा कि इतनी युवा टीम द्वारा हासिल की गई यह सफलता पूरी दुनिया के सामने भारत की नई पीढ़ी की क्षमता और नवाचार की शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनका मानना है कि देश के युवाओं की प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच भारत को भविष्य की वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में नई पहचान दिला सकती है।

    हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। यह चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। मिशन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेज, लचीली और मांग आधारित लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष सेवाओं को नई गति मिल सके।

    विक्रम-1 का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रह मिशनों की बढ़ती वैश्विक मांग को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। सफल परीक्षण के बाद भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    करीब सात मंजिला ऊंचाई वाले इस रॉकेट को पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्षेपित किया गया। इस मिशन की सफलता ने यह संकेत दिया है कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी उपलब्धियां देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं और वैश्विक वाणिज्यिक स्पेस मार्केट में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में अदाणी ग्रुप का बड़ा निवेश, न्यू टाउन में 2,000 बेड के मेगा हॉस्पिटल की तैयारी, 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए होंगे समर्पित

    स्वास्थ्य क्षेत्र में अदाणी ग्रुप का बड़ा निवेश, न्यू टाउन में 2,000 बेड के मेगा हॉस्पिटल की तैयारी, 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए होंगे समर्पित

    नई दिल्ली । देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश को नई दिशा देने की दिशा में अदाणी ग्रुप ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र में 2,000 बेड क्षमता वाले अत्याधुनिक अस्पताल की स्थापना की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि अस्पताल के कुल 2,000 बेड में से 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों के निःशुल्क उपचार के लिए आरक्षित रखे जाएंगे। वहीं शेष 1,000 बेड का उपयोग व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए किया जाएगा।

    इस परियोजना को राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस यह अस्पताल न्यू टाउन और आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बड़े स्तर पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण यह संस्थान क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में शामिल हो सकता है।

    गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए आधी क्षमता आरक्षित रखने की योजना इस परियोजना को सामाजिक दृष्टि से भी विशेष बनाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही निजी और सामाजिक स्वास्थ्य सेवाओं के संतुलित मॉडल के रूप में यह परियोजना भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

    अदाणी ग्रुप पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सामाजिक भागीदारी का लगातार विस्तार कर रहा है। इसी क्रम में समूह ने हाल ही में बिहार में अखंड ज्योति हॉस्पिटल और अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से आंखों के उपचार और अनुसंधान को समर्पित एक विशेष केंद्र स्थापित करने की पहल की थी। इस संस्थान का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सुलभ और किफायती नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है, ताकि गुणवत्तापूर्ण उपचार अधिक से अधिक लोगों तक उपलब्ध हो सके।

    इसी पहल के अंतर्गत नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रशिक्षु चिकित्सकों और महिला स्वास्थ्यकर्मियों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में देशभर में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपचार के साथ-साथ चिकित्सा प्रशिक्षण पर दिया जा रहा यह जोर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

    अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा केवल इलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह लोगों के जीवन में विश्वास, सम्मान और नई उम्मीद लौटाने का माध्यम भी बनती है। समूह का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश समाज के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    इससे पहले भी समूह विभिन्न सामाजिक स्वास्थ्य परियोजनाओं के माध्यम से सार्वजनिक चिकित्सा ढांचे को सहयोग देता रहा है। राजधानी दिल्ली में गुर्दा रोग उपचार सुविधाओं के विस्तार सहित कई स्वास्थ्य संबंधी पहलों में उसकी भागीदारी रही है। कोलकाता में प्रस्तावित यह नया अस्पताल भी उसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करते हुए जरूरतमंद वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने के साथ हजारों मरीजों को उन्नत और सुलभ उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

  • गौतम अदाणी की ‘वंदे भारतम्’ पहल लॉन्च, देश के हर कोने से उभरते इनोवेटर्स और उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

    गौतम अदाणी की ‘वंदे भारतम्’ पहल लॉन्च, देश के हर कोने से उभरते इनोवेटर्स और उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

    नई दिल्ली । देश के स्टार्टअप और नवाचार परिदृश्य को व्यापक आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उद्योगपति गौतम अदाणी ने ‘वंदे भारतम्’ नामक नई पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के उन प्रतिभाशाली लोगों तक अवसर पहुंचाना है, जो बड़े शहरों से दूर रहते हैं लेकिन अपने विचारों, नवाचारों और उद्यमशीलता की क्षमता के बल पर समाज और अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का सामर्थ्य रखते हैं।

    अपने 64वें जन्मदिन के अवसर पर शुरू की गई इस पहल को देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। यह कार्यक्रम 800 से अधिक जिलों तक पहुंचेगा और विभिन्न भारतीय भाषाओं में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस पहल का उद्देश्य केवल स्थापित स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी अवसर देना है जिनके पास कोई नया विचार, समाधान या व्यवसाय शुरू करने की इच्छा है।

    गौतम अदाणी ने कहा कि उनका अपना सफर भी सीमित संसाधनों से शुरू हुआ था और जो कुछ उन्होंने हासिल किया है, उसमें भारत की मिट्टी और अवसरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अवसरों का समान वितरण अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ का लक्ष्य उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्हें अब तक उचित पहचान और सहयोग नहीं मिल पाया है।

    इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए किसी विशेष आयु, शैक्षणिक योग्यता, पेशे या व्यवसायिक अनुभव की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। प्रतिभागी अपने विचार, प्रोटोटाइप, शुरुआती चरण के स्टार्टअप या पहले से संचालित व्यवसाय के साथ आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी कंपनी का औपचारिक रूप से पंजीकृत होना भी आवश्यक नहीं होगा। इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को अवसर मिलेगा जो पारंपरिक ढांचे से बाहर रहकर भी नवाचार पर काम कर रहे हैं।

    पहल के तहत तकनीक, विनिर्माण, कृषि, पर्यावरणीय स्थिरता, पारंपरिक शिल्प, स्थानीय उद्योगों और सामुदायिक समाधान जैसे विविध क्षेत्रों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। विशेष रूप से महिलाओं, आदिवासी समुदायों, ग्रामीण क्षेत्रों के नवाचारकर्ताओं, दिव्यांग उद्यमियों और स्थानीय समस्याओं के समाधान विकसित करने वाले लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    आवेदनों के मूल्यांकन के दौरान नवाचार की गुणवत्ता, उद्यमशीलता की क्षमता, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव तथा विस्तार की संभावनाओं को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। चयन प्रक्रिया विभिन्न चरणों में पूरी होगी, जिसमें राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर मूल्यांकन शामिल रहेगा। इसके बाद चुने गए 75 फाइनलिस्ट को अहमदाबाद में आयोजित विशेष कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अनुभवी मेंटर्स, उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों और व्यवसायिक नेताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें इनक्यूबेशन सपोर्ट, रणनीतिक साझेदारी और संभावित निवेश तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनके विचारों को व्यवहारिक और टिकाऊ व्यवसाय में बदला जा सके।

    कार्यक्रम का ग्रैंड फिनाले स्वतंत्रता दिवस के आसपास आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से एक ऐसा राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जो नवाचारकर्ताओं, निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को एक साझा मंच पर जोड़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में उद्यमशीलता और नवाचार की व्यापक भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ जैसी पहलें देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।

  • अदाणी ग्रुप का बड़ा दांव: वित्त वर्ष 26 में 1.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश, निजी क्षेत्र के नए निवेश में 30% से ज्यादा हिस्सेदारी

    अदाणी ग्रुप का बड़ा दांव: वित्त वर्ष 26 में 1.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश, निजी क्षेत्र के नए निवेश में 30% से ज्यादा हिस्सेदारी

    नई दिल्ली । भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निजी निवेश को नई गति देते हुए अदाणी ग्रुप ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान हार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है। समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने वार्षिक आम बैठक में यह जानकारी देते हुए कहा कि यह केवल वित्तीय उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के भविष्य और राष्ट्र निर्माण के प्रति समूह की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह राशि वित्त वर्ष 26 में निजी क्षेत्र द्वारा किए गए कुल नए निवेश का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दर्शाती है।

    वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि किसी भी कॉर्पोरेट समूह के इतिहास में कुछ वर्ष ऐसे होते हैं जो केवल उपलब्धियों के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संगठन की क्षमता, दृष्टि और चुनौतियों से मुकाबला करने के संकल्प को परिभाषित करते हैं। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 अदाणी ग्रुप के लिए ऐसा ही एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है।

    उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर यह समय कई तरह की अनिश्चितताओं और चुनौतियों से भरा रहा। ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दुनिया भर में राष्ट्रीय रणनीतियों के केंद्र में लौटे, जबकि तकनीक और नवाचार किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत के महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरे। ऐसे माहौल में भी समूह ने भारत की विकास यात्रा में अपनी भूमिका को और मजबूत करने का निर्णय लिया।

    गौतम अदाणी ने कहा कि समूह का मानना है कि भारत की विकास आवश्यकताओं को टालकर नहीं देखा जा सकता। इसी सोच के तहत ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह, हवाई अड्डे और अन्य रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश जारी रखा गया। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को मजबूत आधार देने के लिए आधुनिक और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह प्रगति आसान परिस्थितियों में हासिल नहीं हुई। समूह को विभिन्न स्तरों पर लगातार जांच-पड़ताल और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद निवेश और विस्तार की योजनाओं को रोका नहीं गया। उनके अनुसार किसी भी संगठन की पहचान बाहरी शोर या आलोचनाओं से नहीं, बल्कि चुनौतियों के प्रति उसकी प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तय होती है।

    बैठक के दौरान गौतम अदाणी ने इस वर्ष की शुरुआत में सफलतापूर्वक संपन्न हुए 25,000 करोड़ रुपए के राइट्स इश्यू का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे केवल पूंजी जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि निवेशकों और शेयरधारकों के विश्वास की परीक्षा बताया। उनके अनुसार यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े राइट्स इश्यू में से एक था और इसमें निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने समूह की विश्वसनीयता को और मजबूत किया।

    उन्होंने कहा कि कुछ वर्गों द्वारा संदेह और सवाल उठाए जाने के बावजूद शेयरधारकों ने समूह पर भरोसा जताया और विकास परियोजनाओं में निरंतर निवेश के लिए समर्थन दिया। यह समर्थन न केवल व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका को भी मजबूत करता है।

    अदाणी ग्रुप का मानना है कि आने वाले वर्षों में देश में ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में बड़े निवेशों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को गति देने, रोजगार के अवसर सृजित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाने की दिशा में समूह अपनी भूमिका को और विस्तार देगा। वित्त वर्ष 26 में किया गया यह निवेश इसी दीर्घकालिक रणनीति और विकास दृष्टि का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • गौतम अडानी मामले में बड़ा मोड़, अमेरिकी न्याय विभाग ने आपराधिक जांच आगे न बढ़ाने का फैसला किया

    गौतम अडानी मामले में बड़ा मोड़, अमेरिकी न्याय विभाग ने आपराधिक जांच आगे न बढ़ाने का फैसला किया

    नई दिल्ली ।
    अडानी ग्रुप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है, जिसमें रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अडानी और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रही आपराधिक जांच को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। यह मामला कथित तौर पर फ्रॉड और रिश्वतखोरी से जुड़ा हुआ था, जिस पर पिछले काफी समय से वैश्विक बाजार और निवेशकों की नजर बनी हुई थी। इस फैसले को अडानी ग्रुप के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

    यह जांच मुख्य रूप से अडानी ग्रीन एनर्जी से जुड़ी परियोजनाओं पर केंद्रित थी, जहां आरोप लगाए गए थे कि भारत में बड़े सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए कथित तौर पर भारी रकम रिश्वत के रूप में दी गई थी। इसके अलावा जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही थीं कि क्या इस कथित लेनदेन से जुड़ी जानकारी अमेरिकी निवेशकों और वित्तीय संस्थानों से छिपाई गई थी। मामला अमेरिकी कानून के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की श्रेणी में आता था, जिसके कारण इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई थी।

    हालांकि अब रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी न्याय विभाग ने इस आपराधिक जांच को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है और संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी भी दी जा चुकी है। इस खबर के सामने आने के बाद अडानी ग्रुप के लिए लंबे समय से बना कानूनी दबाव काफी हद तक कम होता दिखाई दे रहा है। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग से जुड़ी कुछ नागरिक स्तर की प्रक्रियाएं अभी जारी रह सकती हैं, लेकिन सबसे गंभीर चरण यानी आपराधिक जांच का समाप्त होना ग्रुप के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    इस घटनाक्रम का असर भारतीय शेयर बाजार में भी साफ देखने को मिला, जहां अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों के बीच इस खबर के बाद भरोसे में सुधार देखा गया और बाजार में सकारात्मक भावना बनी। पिछले कुछ समय से जिस तरह से अडानी ग्रुप को लेकर वैश्विक स्तर पर सवाल उठ रहे थे, इस खबर ने उन आशंकाओं को काफी हद तक कम किया है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कानूनी अनिश्चितताओं का खत्म होना किसी भी बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे न केवल कंपनी की छवि पर असर पड़ता है बल्कि उसकी फंडिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। अब जब आपराधिक जांच का दबाव कम होता दिख रहा है, तो ग्रुप के लिए वैश्विक निवेशकों के बीच भरोसा फिर से मजबूत करने का अवसर बन सकता है।

    अडानी ग्रुप की ओर से पहले भी इन सभी आरोपों को खारिज किया गया था और इसे निराधार बताया गया था। अब अमेरिकी जांच एजेंसियों के इस रुख को ग्रुप के लिए एक तरह की नैतिक और कानूनी मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में कंपनी का ध्यान अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहने की संभावना है, जिससे उसकी वैश्विक बाजार में स्थिति और मजबूत हो सकती है।

  • अरबपतियों की दुनिया में महा-उलटफेर: मार्क जुकरबर्ग ने बेजोस को पछाड़ा, टॉप-20 से फिसले गौतम अडानी!

    अरबपतियों की दुनिया में महा-उलटफेर: मार्क जुकरबर्ग ने बेजोस को पछाड़ा, टॉप-20 से फिसले गौतम अडानी!


    नई दिल्ली।दुनिया के सबसे अमीर शख्सियतों की संपत्ति और उनकी रैंकिंग के लिए मशहूर ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार को आए आंकड़ों के अनुसार वैश्विक अमीरों की सूची में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली है जिसका सीधा असर अमेरिकी टेक दिग्गजों से लेकर भारतीय उद्योगपतियों तक पड़ा है। इस फेरबदल की सबसे बड़ी सुर्खी मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग रहे जिनकी संपत्ति में एक ही दिन में 5.58 अरब डॉलर का भारी इजाफा दर्ज किया गया। इस उछाल के साथ जुकरबर्ग अब 239 अरब डॉलर की कुल नेटवर्थ के साथ दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस को पीछे छोड़ दिया है जिन्हें इस दौरान 822 मिलियन डॉलर का घाटा सहना पड़ा और वे अब पांचवें पायदान पर खिसक गए हैं।

    दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के सिंहासन पर अब भी टेस्ला और एक्स (X) के मालिक एलन मस्क मजबूती से काबिज हैं। मस्क की दौलत में 4.35 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है जिससे उनकी कुल संपत्ति अब 676 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है। उनके ठीक बाद गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज 278 अरब डॉलर के साथ दूसरे और सर्गी ब्रिन तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। हालांकि संपत्ति में सबसे बड़ी छलांग ओरेकल के लैरी एलिसन ने लगाई जिनकी दौलत में 14.5 अरब डॉलर का अविश्वसनीय इजाफा हुआ लेकिन रैंकिंग के गणित के कारण वे फिलहाल छठे स्थान पर ही बने हुए हैं। टेक सेक्टर के अन्य दिग्गजों की बात करें तो एनवीडिया के सीईओ जेनसेन हुआंग की किस्मत भी चमकी है और वे अब 157 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।

    भारतीय संदर्भ में देखें तो यह रिपोर्ट गौतम अडानी के लिए किसी झटके से कम नहीं है। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की संपत्ति में हालांकि 370 मिलियन डॉलर की मामूली वृद्धि हुई लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अन्य अरबपतियों की तेज रफ्तार के कारण वे टॉप-20 की प्रतिष्ठित सूची से बाहर हो गए हैं। अब 86 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ अडानी 21वें स्थान पर पहुंच गए हैं। इसके उलट रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के लिए सोमवार का दिन राहत लेकर आया। अंबानी की संपत्ति में 595 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई जिससे उनकी कुल नेटवर्थ अब 99 अरब डॉलर हो गई है और वे रैंकिंग में सुधार करते हुए 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    यह ताजा बदलाव स्पष्ट करता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की अस्थिरता किस तरह पलक झपकते ही अरबपतियों की किस्मत पलट देती है। जहां एक ओर अमेरिकी टेक कंपनियां एआई (AI) और डिजिटल विज्ञापनों के बूते अपनी तिजोरियां भर रही हैं वहीं भारतीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव ने घरेलू दिग्गजों की रैंकिंग को प्रभावित किया है। वॉल्टन परिवार जैसे दिग्गजों को भी इस बार नुकसान उठाना पड़ा है फिर भी वे टॉप-10 में अपनी जगह बचाने में सफल रहे। ब्लूमबर्ग की यह सूची दर्शाती है कि आने वाले समय में तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र के बीच की यह जंग और भी दिलचस्प होने वाली है।