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  • जवायदा और नुसेइरात में इजरायली कार्रवाई से गाजा में फिर बिगड़े हालात, नागरिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

    जवायदा और नुसेइरात में इजरायली कार्रवाई से गाजा में फिर बिगड़े हालात, नागरिकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल


    नई दिल्ली ।गाजा में इजरायल और हमास के बीच जारी तनाव के बीच ताजा इजरायली सैन्य हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत होने की खबर है। मृतकों में चार साल का एक बच्चा भी शामिल बताया गया है। हमलों में सात अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, घायलों का इलाज अस्पतालों में कराया जा रहा है।

    ताजा घटनाक्रम ने गाजा में लागू युद्धविराम की स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मध्य गाजा के जवायदा शहर में एक इमारत को निशाना बनाया गया, जिससे उसे काफी नुकसान पहुंचा। हमले से पहले इलाके के नागरिकों को अपनी संपत्ति और क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक, हमले के बाद घटनास्थल से मलबा और छर्रे काफी दूरी तक फैल गए। इस घटना में कई लोग घायल हुए। घायलों में चार वर्षीय मोहम्मद अब्देल सलाम ताहा भी शामिल था। बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना में अन्य घायल लोगों का उपचार जारी रहने की जानकारी है।

    गाजा के स्थानीय निवासी अबू अहमद ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जमीन पर हालात युद्धविराम जैसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनके मुताबिक, क्षेत्र के लोग ऐसा स्थायी समाधान चाहते हैं जिससे उन्हें लगातार हिंसा और असुरक्षा के बीच जीवन न बिताना पड़े। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण गाजा में बड़ी संख्या में लोग विस्थापन और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।

    स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक अन्य हमले की जानकारी नुसेइरात शरणार्थी शिविर से भी दी है। बताया गया कि यहां भी हवाई हमला हुआ। नुसेइरात शिविर गाजा में लंबे समय से विस्थापित लोगों की आबादी का प्रमुख क्षेत्र रहा है। ऐसे में वहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर आम नागरिकों पर पड़ने की आशंका रहती है।

    ताजा हमलों से पहले भी इजरायली सेना और हमास के बीच युद्धविराम के उल्लंघन को लेकर आरोप लगते रहे हैं। इजरायली पक्ष की ओर से कहा गया है कि हमास से जुड़े लोग सैन्य गतिविधियां जारी रख रहे हैं। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी क्षेत्रों में नागरिकों की मौत और विस्थापन को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।

    इजरायली सेना ने इससे पहले देर अल-बलाह में हमास के एक वरिष्ठ सशस्त्र सदस्य शरीफ अल हसनत को मार गिराने का दावा किया था। सेना के मुताबिक, वह हमास के भूमिगत बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा था। इजरायली पक्ष ने उस पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

    गाजा में ताजा हिंसा ऐसे समय सामने आई है जब क्षेत्र में संघर्ष को नियंत्रित करने और युद्धविराम को बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। आम नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाओं ने मानवीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही हिंसा के बीच स्थायी शांति और सुरक्षित माहौल स्थापित करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • गाजा में युद्धविराम की अमेरिकी पहल को झटका, नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ अभियान रोकने से इनकार किया

    गाजा में युद्धविराम की अमेरिकी पहल को झटका, नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ अभियान रोकने से इनकार किया

    नई दिल्ली ।गाजा में जारी संघर्ष को खत्म करने और स्थायी शांति की दिशा में अमेरिका की कोशिशों को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के रुख से नया झटका लग सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित गाजा फेस-2 योजना को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आने की बात कही जा रही है। नेतन्याहू ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण तक इजरायली सैन्य कार्रवाई समाप्त नहीं होगी।

    अमेरिका की पहल के तहत गाजा में युद्ध को रोकने, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी और हमास के हथियार छोड़ने जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप की प्रस्तावित 15 सूत्रीय योजना का उद्देश्य संघर्ष को एक नए चरण में ले जाना और गाजा में सुरक्षा तथा प्रशासन से जुड़ी व्यवस्था तैयार करना है।

    योजना में हमास के हथियारों को धीरे-धीरे गाजा के लिए प्रस्तावित नए प्रशासनिक ढांचे को सौंपने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही इजरायली सेना को कुछ निर्धारित क्षेत्रों से पीछे हटाने की बात भी शामिल है। इस व्यवस्था में एक तथाकथित येलो लाइन का जिक्र किया गया है, जिसके आसपास सैन्य स्थिति में बदलाव प्रस्तावित है।

    अमेरिकी योजना के तहत इजरायल की सैन्य कार्रवाई को उन लोगों तक सीमित करने की बात भी सामने आई है, जिन्हें तत्काल सुरक्षा खतरा माना जाए। इसका उद्देश्य व्यापक सैन्य अभियान को कम करना और गाजा में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में आगे बढ़ना बताया जा रहा है।

    हालांकि, नेतन्याहू का रुख इन प्रस्तावों से अलग दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा है कि जब तक हमास अपने हथियार पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इस रुख का सीधा अर्थ यह है कि इजरायल हमास के सैन्य ढांचे और हथियारों को पूरी तरह समाप्त करने को अपनी कार्रवाई रोकने की प्रमुख शर्त मान रहा है।

    नेतन्याहू की स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब गाजा में युद्धविराम और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत जारी है। अमेरिका इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इजरायल की सुरक्षा संबंधी शर्तें और हमास के हथियारों का मुद्दा किसी भी समझौते के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं।

    इजरायल का कहना है कि हमास के पास हथियार और सैन्य क्षमता रहने की स्थिति में भविष्य में फिर से हमले का खतरा बना रहेगा। इसी कारण इजरायली नेतृत्व किसी ऐसे समझौते को स्वीकार करने से बच रहा है, जिसमें सैन्य वापसी तो हो लेकिन हमास की हथियारबंद क्षमता पूरी तरह समाप्त न हो।

    दूसरी ओर, गाजा में लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष ने मानवीय संकट को गंभीर बनाया है। युद्धविराम की किसी भी पहल में नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता की पहुंच और भविष्य के प्रशासन का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका की योजना को लागू कराने के लिए इजरायल और अन्य संबंधित पक्षों के बीच सहमति जरूरी होगी।

    फिलहाल गाजा फेस-2 योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अमेरिका युद्धविराम और सैन्य वापसी की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, जबकि नेतन्याहू हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण को प्राथमिक शर्त मान रहे हैं। दोनों पक्षों के रुख में यह अंतर आने वाले दिनों में बातचीत की दिशा और गाजा में सैन्य गतिविधियों पर असर डाल सकता है।

  • ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता

    ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संघर्ष को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की मध्यस्थता में हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सशस्त्र संगठनों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर एक “ऐतिहासिक समझौता” हुआ है। ट्रंप के अनुसार, इस प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही इजरायल अपनी सेना को गाजा से चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाएगा।

    निरस्त्रीकरण के साथ होगी सेना की वापसी
    ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि जैसे-जैसे हमास और अन्य हथियारबंद संगठनों का निरस्त्रीकरण पूरा होगा, इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी। इसके बाद गाजा की सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस संभालेगी। उनका कहना है कि इससे इजरायल की सुरक्षा मजबूत होगी और गाजा का इस्तेमाल भविष्य में किसी आतंकी हमले के लिए नहीं हो सकेगा।

    नई फिलिस्तीनी सरकार बनाने की योजना
    ट्रंप के मुताबिक, समझौते के तहत गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा, जो ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ मिलकर प्रशासन, पुनर्निर्माण और सामान्य जनजीवन बहाल करने का काम करेगी। उन्होंने इसे अपने 20-सूत्रीय शांति योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है।

    मध्यस्थ देशों की सराहना
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते में मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की सराहना की। हालांकि, ट्रंप के दावों पर हमास की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    हिंसा अब भी जारी
    समझौते के दावे के बीच गाजा में हिंसा थमने के संकेत नहीं मिले हैं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।

    व्हाइट हाउस ने भी किया समर्थन
    व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर ऐतिहासिक समझौता कराया है। इसे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

    क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
    ट्रंप के अनुसार, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वर्ष 2026 में गठित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसे गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रंप इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उनका दावा है कि यह पहल गाजा में नई शासन व्यवस्था स्थापित करने और भविष्य में 7 अक्टूबर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में अहम साबित होगी।

  • युद्धविराम के बीच फिर दहला गाजा इस्राइली हवाई हमलों में दो मासूम समेत आठ की मौत कई घायल

    युद्धविराम के बीच फिर दहला गाजा इस्राइली हवाई हमलों में दो मासूम समेत आठ की मौत कई घायल


    नई दिल्ली। गाजा पट्टी में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को इस्राइल ने दक्षिणी और मध्य गाजा के कई इलाकों में हवाई हमले किए जिनमें दो बच्चों समेत कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और राहत एजेंसियों के अनुसार घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है।

    सबसे बड़ा हमला दक्षिणी गाजा के खान यूनिस स्थित अल मवासी इलाके में हुआ जहां विस्थापित लोगों के तंबू को निशाना बनाया गया। इस हमले में 23 वर्षीय महिला और उसकी एक साल की बेटी की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक हमले से पहले इलाके में चेतावनी जारी की गई थी। इसी क्षेत्र के करारा कस्बे में हुए एक अन्य हवाई हमले में 31 वर्षीय व्यक्ति की जान चली गई जिसकी कुछ महीने पहले ही शादी हुई थी और उसकी पत्नी गर्भवती है।

    खान यूनिस के तटीय क्षेत्र में विस्थापित लोगों के तंबुओं पर हुए एक अन्य हमले में दो लोगों की मौत हो गई जबकि 13 अन्य घायल हो गए। घायलों को फलस्तीनी रेड क्रिसेंट द्वारा संचालित फील्ड अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका उपचार चल रहा है।

    मध्य गाजा के दीर अल बलाह में ड्रोन हमले में तीन फलस्तीनियों की मौत हुई। मृतकों में आठ वर्षीय एक बच्चा उसका दादा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। अस्पताल अधिकारियों के अनुसार बच्चा अपनी घायल मां से मिलने आया था और हमले में उसकी मां भी घायल हो गई। इस्राइली सेना ने कहा कि यह हमला एक उग्रवादी को निशाना बनाकर किया गया था लेकिन उसने न तो उस व्यक्ति की पहचान बताई और न ही उसके मारे जाने की पुष्टि की।

    युद्धविराम लागू होने के बाद बड़े स्तर पर लड़ाई भले कम हुई हो लेकिन गाजा में लगभग रोजाना हवाई हमले जारी हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक 1045 फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है जिनमें 360 से अधिक महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। वहीं इस्राइल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल उन उग्रवादियों के खिलाफ है जो उसके सैनिकों पर हमले की तैयारी कर रहे थे। इस्राइली सेना के अनुसार युद्धविराम के बाद उग्रवादी हमलों में उसके पांच सैनिक भी मारे गए हैं।

    गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अक्टूबर 2023 में शुरू हुए युद्ध के बाद अब तक 73 हजार से अधिक फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर इस्राइल का कहना है कि सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1200 लोगों की जान गई थी और 251 लोगों को बंधक बनाया गया था।

    उधर वेस्ट बैंक में भी तनाव बना हुआ है। रामल्लाह के पास इस्राइली सेना की छापेमारी के दौरान 15 वर्षीय एक फलस्तीनी किशोर के सिर में गोली लगने से मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के अनुसार इस वर्ष वेस्ट बैंक में इस्राइली सैनिकों और बसने वालों की कार्रवाई में कम से कम 59 फलस्तीनियों की जान जा चुकी है।

  • पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की चिंगारी, बेरूत में हिजबुल्ला कमांडर ढेर; कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला

    पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की चिंगारी, बेरूत में हिजबुल्ला कमांडर ढेर; कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। युद्धविराम और कूटनीतिक कोशिशों के बीच Israel ने दावा किया है कि बेरूत के दक्षिणी इलाके में किए गए हवाई हमले में हिजबुल्ला के कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। वहीं कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले से नया संकट खड़ा हो गया है।

    बेरूत हमले में हिजबुल्ला कमांडर मारे जाने का दावा
    इज़राइल रक्षा बल ने दावा किया कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हुए हमले में हिजबुल्ला की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत मारे गए। इसके अलावा नासेर यूनिट के इंटेलिजेंस प्रमुख मोहम्मद अली बाजी और एयर डिफेंस अधिकारी हुसैन हसन रोमानि के भी मारे जाने की बात कही गई है।रिपोर्ट्स के अनुसार गाज़ा शहर में अलग कार्रवाई के दौरान हमास नेता खलील अल-हय्या के बेटे अज्जाम अल-हय्या के मारे जाने का भी दावा किया गया है।

    कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला
    कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद ईंधन टैंक में आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती जांच में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। दमकल और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर काबू पाने में जुटी हैं।

    ईरान-इस्राइल तनाव जारी
    इस बीच ईरान  और इस्राइल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। तेल अवीव के पास बनेई बराक में एक इमारत ईरानी मिसाइल हमले की चपेट में आने से ढह गई, जिसमें कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है और जल्द समझौता संभव है। दूसरी ओर ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने अमेरिकी रणनीति का मजाक उड़ाते हुए उसे “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” बताया।

    लेबनान और गाजा में बढ़ा संकट
    रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 24 घंटों में लेबनान में इस्राइली हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। वहीं लेबनान की ओर से दागे गए रॉकेट हमलों में उत्तरी इस्राइल में भी हताहत होने की खबरें हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष फिलहाल थमता नहीं दिख रहा और आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

  • युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण के लिए US ने की 'बोर्ड ऑफ पीस' की घोषणा, इन्हें मिली बड़ी जिम्मेदारी

    युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण के लिए US ने की 'बोर्ड ऑफ पीस' की घोषणा, इन्हें मिली बड़ी जिम्मेदारी


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने गाजा पट्टी (Gaza Strip) में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, शासन और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय निकाय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) (New International Body, ‘Board of Peace’) की स्थापना की घोषणा की है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। वाइट हाउस ने शुक्रवार को इस बोर्ड के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों की सूची जारी की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।

    यह बोर्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त करना, गाजा में स्थायी शांति स्थापित करना, पुनर्निर्माण करना और समृद्धि लाना है। योजना के दूसरे चरण में प्रवेश हो चुका है, जिसमें हमास द्वारा शासन छोड़ने, पूर्ण हथियार डालने और एक तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना शामिल है।

    यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी निगरानी में गाजा को शासित करने वाली फिलिस्तीनी तकनीकी समिति की पहली बैठक शुक्रवार को मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित की गई। इस समिति के प्रमुख अली शाथ हैं जो गाजा से ताल्लुक रखने वाले इंजीनियर और पूर्व फिलिस्तीनी अथॉरिटी अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि समिति जल्द से जल्द काम शुरू करेगी। उन्होंने माना कि गाजा के पुनर्निर्माण और पुनर्बहाली में लगभग तीन साल का समय लग सकता है। फिलहाल उनकी प्राथमिकता तत्काल जरूरतों पर रहेगी, जिनमें लोगों के लिए अस्थायी और स्थायी आश्रय की व्यवस्था शामिल है। मिस्र के सरकारी चैनल Al-Qahera News को दिए इंटरव्यू में अली शाथ ने कहा- फिलिस्तीनी लोग इस समिति के गठन और कामकाज की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे, ताकि उन्हें इस तबाही से उबारा जा सके।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप गाजा में शासन व्यवस्था संभालने के लिए इस तकनीकी समिति के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। 10 अक्टूबर को संघर्षविराम लागू होने के बाद इजरायली सेना गाजा के कुछ हिस्सों से पीछे हटी, जिसके चलते हजारों विस्थापित फिलिस्तीनी अपने तबाह हो चुके घरों की ओर लौटे। हालांकि आगे की राह आसान नहीं मानी जा रही है। सबसे बड़ी चुनौतियों में संघर्षविराम की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और हमास को निरस्त्र करने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया शामिल है।

    ट्रंप की योजना के तहत, गाजा में रोजमर्रा के प्रशासन का काम अली शाथ की तकनीकी समिति करेगी, जबकि उसकी निगरानी ट्रंप के नेतृत्व में बनने वाला एक उच्चस्तरीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ करेगा। फिलहाल इस बोर्ड के सभी सदस्यों की घोषणा नहीं की गई है।


    वाइट हाउस ने घोषित किए बोर्ड के सदस्य

    व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस के संस्थापक कार्यकारी बोर्ड में सात सदस्य शामिल हैं:
    अध्यक्ष: डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति)
    मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)
    जेरेड कुशनेर (ट्रंप के दामाद और पूर्व सलाहकार)
    स्टीव विटकॉफ (मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी विशेष दूत)
    सर टोनी ब्लेयर (पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री)
    अजय बंगा (विश्व बैंक के अध्यक्ष)
    मार्क रोवन (अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ)
    रॉबर्ट गेब्रियल (अमेरिकी उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार)

    ट्रंप ने इसे कभी भी, कहीं भी गठित सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड करार दिया है। बोर्ड के प्रत्येक सदस्य को गाजा की स्थिरता और दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र सौंपे जाएंगे, जैसे शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षण, बड़े पैमाने पर फंडिंग और पूंजी जुटाना।


    अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां

    निकोलाय म्लादेनोव (बुल्गारियाई राजनेता और पूर्व यूएन मध्य पूर्व दूत) को गाजा के लिए हाई रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त किया गया है, जो बोर्ड की ओर से जमीन पर काम करेंगे। अमेरिकी मेजर जनरल जास्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर बनाया गया है, जो सुरक्षा स्थापित करने, शांति बनाए रखने और आतंक-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा। गाजा में दैनिक प्रशासन के लिए नेशनल कमिटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) गठित की गई है, जिसके प्रमुख फिलिस्तीनी इंजीनियर और पूर्व मंत्री अली शाथ हैं। यह तकनीकी और गैर-राजनीतिक समिति हमास के स्थान पर सार्वजनिक सेवाएं संचालित करेगी।

    ट्रंप की यह योजना पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई थी, जिसके तहत बचे हुए बंधकों की रिहाई और युद्धविराम हुआ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नवंबर 2025 में प्रस्ताव 2803 पारित कर इस योजना और बोर्ड को समर्थन दिया। हालांकि, टोनी ब्लेयर की नियुक्ति विवादास्पद है, क्योंकि इराक युद्ध (2003) में उनकी भूमिका के कारण मध्य पूर्व में वे विभाजनकारी व्यक्तित्व माने जाते हैं। ट्रंप ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि वे ब्लेयर को पसंद करते हैं, लेकिन उनकी स्वीकार्यता जांचेंगे।

    कई विशेषज्ञों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस बोर्ड को औपनिवेशिक संरचना जैसा बताया है, क्योंकि एक विदेशी नेता (ट्रंप) किसी अन्य क्षेत्र के शासन की निगरानी कर रहा है। फिलिस्तीनी गुटों और हमास की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन योजना के तहत हमास ने शासन छोड़ने पर सहमति जताई है, हालांकि निरस्त्रीकरण पर असहमति बनी हुई है।