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  • अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें

    अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें


    तेहरान। अमेरिका ने ईरानी नेवी के दो सबसे महत्वपूर्ण नेवल बेस बंदर अब्बास नेवल बेस और कोनार्क नेवल बेस-पर भीषण हमले किए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इन दोनों नेवल बेस को लेकर कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में बंदर अब्बास नेवल बेस पर तैनात IRINS मकरान सी बेस-टाइप जहाज पर आग लगी हुई दिख रही है। बंदर अब्बास ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने के उद्देश्य से बनाया गया नौसेना बेस होने के साथ-साथ ईरानी नौसेना का मुख्य हेडक्वार्टर भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान की नौसेना फोर्स को खत्म करना अमेरिकी अधिकारियों का मुख्य मकसद है। अमेरिका ने अब तक 10 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाने की बात भी कही है।

    बंदर अब्बास नेवल बेस की तबाही
    प्लैनेट लैब्स की तरफ से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में रात को ली गई बंदर अब्बास नेवल बेस की स्थिति का पता चलता है। तस्वीरों में ईरानी नेवी का मुख्य हेडक्वार्टर और इसके कई सबसे काबिल जहाज और सबमरीन तैनात दिख रहे हैं। तस्वीरों में नेवल बेस के ज्यादातर हिस्सों में घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। फैसेलिटी के कई हिस्सों पर हमले का असर साफ देखा जा सकता है। तस्वीरों के आकलन से यह भी पता चलता है कि फ्लोटिंग डॉक को गंभीर नुकसान पहुंचा है, पेट्रोल बोट डैमेज हो चुके हैं और कई बिल्डिंग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं।

    तस्वीरों से स्पष्ट है कि IRINS मकरान जहाज पर हमला किया गया है। इसे नौसेना अड्डे के दक्षिणी छोर पर एक बर्थ पर डॉक किया गया था। यह जहाज मूल रूप से एक ऑयल टैंकर था जिसे ईरानी अधिकारियों ने “फॉरवर्ड बेस शिप” में बदल दिया था। इसके आगे का हिस्सा बड़ा खुला फ्लाइट डेक और कई अन्य खूबियों से लैस था। मकरान जहाज ने 2021 में कमीशन होने के बाद कई बार विदेश यात्राएं की हैं और यह उन कई समुद्री बेस जैसे जहाजों में से एक है जिन्हें ईरान ने हाल के सालों में सेवा में लगाया। 2 मार्च की तस्वीरों की तुलना पहले की तस्वीरों से करने पर लगता है कि एक या दो फ्रिगेट साइज के वॉरशिप पर भी हमला हुआ है। ये साफ तौर पर पोर्ट पर सबसे कीमती टारगेट में से एक थे। पोर्ट में जो एक किलो क्लास पनडुब्बी और छोटी पनडुब्बी हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। कुछ अन्य सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरानी नौसना के कई और मुख्य युद्धपोत शायद तबाह हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा है। बंदर अब्बास पोर्ट ईरान के होर्मोज़्गन प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य इसके बिल्कुल पास है।

    कोनार्क पोर्ट पर भी अमेरिकी हमले
    बंदर अब्बास की तस्वीर में धुएं की वजह से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पोर्ट में कितने जहाजों को नुकसान हुआ। 2 मार्च की तस्वीर की तुलना 26 फरवरी की तस्वीर से करने पर साफ पता चलता है कि कई छोटी नावें और कुछ बड़े जहाज पोर्ट से बाहर कर दिए गए। संभव है कि कुछ जहाज डूब गए हों, लेकिन इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। फिर भी ईरानी नौसेना के कई जहाज अभी भी बचे हैं और ड्राईडॉक में कई जंगी जहाज दिखाई दे रहे हैं।

    बंदर अब्बास के बाहर भी ईरानी नौसेना के एसेट्स पर हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिरे के पास कोनार्क में पोर्ट पर हमले हुए। कई जंगी जहाज नष्ट हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। शुरुआती अनुमान में यह अलवंद क्लास का फ्रिगेट बताया गया, लेकिन बाद में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे मौज क्लास के वॉरशिप के रूप में पहचाना, जिसे कभी-कभी जमरान क्लास भी कहा जाता है। कोनार्क पोर्ट ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और चाबहार बंदरगाह के ठीक बगल, ओमान की खाड़ी के पास स्थित है।

    युद्ध के चौथे दिन की 10 बड़ी बातें
    1. 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई।
    2. अमेरिका ने हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ द लॉयन’ नाम दिया।
    3. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, जिससे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ।
    4. पेंटागन ने 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 18 घायल होने की पुष्टि की, जबकि इजरायल में अब तक 12 लोगों की मौत हुई।
    5. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सरकार चलाने के लिए अंतरिम शासी परिषद का गठन किया गया।
    6. ईरान ने खाड़ी के कई देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत पर हमले किए।
    7. अमेरिका के बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के अंडरग्राउंड परमाणु केंद्रों और मिसाइल भंडारण सुविधाओं पर हमला किया।
    8. ईरान के रेड क्रेसेंट के अनुसार मरने वालों की संख्या 600 से अधिक पहुंच गई, जिनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं।
    9. अमेरिका ने खाड़ी देशों में स्थित प्रमुख दूतावासों जैसे इराक, जॉर्डन और कुवैत से अपने अधिकारियों को तुरंत निकालने का आदेश दिया।
    10. डोनाल्ड ट्रंप और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध 4-5 हफ्ते या उससे अधिक समय तक चल सकता है, और उन्होंने ईरान में सैनिकों को उतारने की संभावना से इनकार नहीं किया।

  • ईरान के मिसाइल हमलों पर अमेरिका और खाड़ी देशों का कड़ा रुख, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा

    ईरान के मिसाइल हमलों पर अमेरिका और खाड़ी देशों का कड़ा रुख, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और खाड़ी देशों ने ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीखी आलोचना की है। घटनाक्रम तब तेज हुआ जब इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए। इसके बाद जारी संयुक्त बयान में अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों को “लापरवाही भरा और अस्थिर करने वाला” बताया।

    अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान द्वारा संप्रभु क्षेत्रों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। बयान के मुताबिक, इन हमलों का असर बहरीन, इराक (जिसमें इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र भी शामिल है), जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई पर पड़ा। देशों ने आरोप लगाया कि हमलों में आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली गई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

    ‘खतरनाक बढ़त’ से क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा
    संयुक्त बयान में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई कई देशों की संप्रभुता का उल्लंघन है और यह पूरे इलाके की स्थिरता को खतरे में डालती है। सरकारों ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने उन देशों को भी निशाना बनाया जो सीधे तौर पर किसी सैन्य टकराव में शामिल नहीं थे। इसे गैर-जिम्मेदाराना और उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया गया।

    बयान में साफ कहा गया कि आम नागरिकों और तटस्थ देशों को टारगेट करना अस्वीकार्य है। सातों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वे अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एकजुट हैं और आत्मरक्षा के अधिकार को दोहराते हैं।

    एयर डिफेंस सहयोग पर जोर, सुरक्षा रणनीति मजबूत
    क्षेत्र में बढ़ते मिसाइल और ड्रोन खतरों के बीच संयुक्त बयान में एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग की सराहना की गई। देशों ने कहा कि समन्वित प्रयासों के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सका। अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब व यूएई के साथ उसकी रक्षा साझेदारी लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा रही है।

    पश्चिमी और खाड़ी देशों का मानना है कि हाल के वर्षों में ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में उल्लेखनीय विस्तार किया है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हुआ है। हालांकि तेहरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है। मौजूदा घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कूटनीतिक प्रयास इस टकराव को कितना थाम पाते हैं या हालात और गंभीर मोड़ लेते हैं।

  • ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी

    ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी


    नई दिल्ली।/तेहरान।मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान इस समय अमेरिका, इजराइल और यूरोपीय देशों के साथ पूर्ण स्तर के टकराव की स्थिति में है। यह बयान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है, जिससे इसकी राजनीतिक और रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि मौजूदा हालात 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध से भी अधिक जटिल और खतरनाक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि आर्थिक राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चों पर भी ईरान को अभूतपूर्व दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    यह पारंपरिक युद्ध से अलग है

    अपने बयान में राष्ट्रपति ने कहा कि आज का संघर्ष केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, हम पर प्रतिबंध, राजनीतिक अलगाव, साइबर हमले और सैन्य धमकियां-सब एक साथ हैं। यह पारंपरिक युद्ध से कहीं अधिक कठिन स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन देश पहले से ज्यादा संगठित और मजबूत हुआ है।

    राष्ट्रीय एकता की अपील

    पेजेशकियन ने ईरानी जनता से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश के भीतर विभाजन पैदा करना चाहते हैं ताकि आंतरिक अस्थिरता के जरिए ईरान को कमजोर किया जा सके। राष्ट्रपति के अनुसार, राष्ट्रीय एकता ही इस चुनौतीपूर्ण दौर में सबसे बड़ा हथियार है।

    परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

    अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, ईरान लगातार इस आरोप को खारिज करता आया है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और ऊर्जा व शोध के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।जनवरी 2025 में अमेरिका में सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति को फिर से लागू किया। इसके तहत ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने और नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के कदम उठाए गए। वहीं, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने भी संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंधों को दोबारा लागू किया है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

    जून 2025 का ईरान-इजराइल युद्ध
    जून 2025 में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक सीधा सैन्य संघर्ष हुआ था। इस दौरान इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान में इस युद्ध में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि ईरानी मिसाइल हमलों में इजराइल में 28 लोग मारे गए।बाद में अमेरिका भी इस संघर्ष में शामिल हो गया और उसने नतांज, फोर्डो और इस्फहान स्थित ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद अमेरिकी मध्यस्थता से संघर्षविराम लागू हुआ और अप्रैल से चल रही परमाणु वार्ता ठप हो गई।

    सेना को लेकर राष्ट्रपति का दावा

    राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि हालिया हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना हथियारों और मानव संसाधनों—दोनों मामलों में पहले से अधिक मजबूत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फिर से हमला हुआ, तो ईरान कड़ा और निर्णायक जवाब देगा।

    संभावित युद्ध के असर

    विश्लेषकों के मुताबिक, यदि मौजूदा तनाव पूर्ण युद्ध में बदलता है तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक स्थिरता पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। हालांकि ईरान का नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि देश किसी भी हालात का सामना करने के लिए तैयार है।