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  • सेंसेक्स और निफ्टी में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति: विदेशी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक, छोटे शेयरों में गिरावट ने बिगाड़ा बाजार का मूड!

    सेंसेक्स और निफ्टी में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति: विदेशी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक, छोटे शेयरों में गिरावट ने बिगाड़ा बाजार का मूड!


    नई दिल्ली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सीमित दायरे में उतार चढ़ाव के बाद लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ। दिनभर निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा, जिससे बाजार में कोई स्पष्ट दिशा देखने को नहीं मिली। शुरुआती सत्र में हल्की तेजी के बाद बाजार ने अपने ऊपरी स्तरों से फिसलते हुए अंत में मामूली बढ़त दर्ज की।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स करीब 26 अंकों की बढ़त के साथ 78,520 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी हल्की बढ़त के साथ 24,364 के आसपास पहुंच गया। दिन की शुरुआत सकारात्मक रही थी और दोनों सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में ऊंचे स्तरों को छुआ, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी के कारण बाजार पर दबाव बन गया।

    दिन के दौरान बाजार ने सीमित दायरे में कारोबार किया। निवेशक बड़े फैसले लेने से बचते नजर आए और ज्यादातर समय सतर्क रुख अपनाए रखा। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा संभावित संघर्षविराम को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। इसी कारण बाजार अपने उच्चतम स्तर को बनाए रखने में सफल नहीं हो सका।

    वृहद बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव बनाए हुए हैं। यह रुझान आमतौर पर तब देखने को मिलता है जब बाजार में अनिश्चितता अधिक होती है और निवेशक जोखिम कम करने की कोशिश करते हैं।

    सेक्टर स्तर पर बाजार का रुख मिला जुला रहा। कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली जबकि कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। ऑटो और बैंकिंग से जुड़े शेयरों में हल्की मजबूती रही, जबकि आईटी, मेटल और एफएमसीजी क्षेत्रों में कमजोरी दर्ज की गई। इस मिश्रित प्रदर्शन ने भी बाजार को किसी एक दिशा में आगे बढ़ने से रोके रखा।

    पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों ने वैश्विक निवेश माहौल को प्रभावित किया है। समुद्री मार्गों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ऐसी परिस्थितियों में बाजार आमतौर पर सतर्क रुख अपनाता है और उतार चढ़ाव सीमित दायरे में रहता है।

    आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल सतर्क बने हुए हैं और किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं जो बाजार को स्पष्ट दिशा दे सके।

  • ईरान की ट्रंप-हेगसेथ के 'स्टोन एज' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया, कहा- 'सभ्यताएं बमबारी से नष्ट नहीं होतीं'

    ईरान की ट्रंप-हेगसेथ के 'स्टोन एज' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया, कहा- 'सभ्यताएं बमबारी से नष्ट नहीं होतीं'


    तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के स्टोन एज वाले बयान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने कहा कि अमेरिका की धमकी उनकी ताकत नहीं बल्कि अज्ञानता को दर्शाती है।

    ईरान के स्थायी मिशन ने X पर बयान में लिखा ईरान की सभ्यता 7 000 वर्षों से अधिक पुरानी है जबकि अमेरिका का इतिहास मुश्किल से 250 साल का है। सभ्यताओं की पहचान उनके इतिहास संस्कृति और मानवता के योगदान से होती है। दुनिया आज भी उन ज्ञान और योगदान की ऋणी है जो ईरानी विद्वानों ने हजारों वर्षों में मानवता को दिए हैं। ऐसी सभ्यता को बमबारी से नष्ट नहीं किया जा सकता।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मिडिल ईस्ट में ईरान को स्टोन एज में वापस भेजने की धमकी दी थी। इसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने करारा तंज किया।

    ईरानी दूतावास ने कहा स्टोन एज? जब आप गुफाओं में आग की तलाश कर रहे थे तब हम साइरस सिलेंडर पर मानवाधिकारों के बारे में लिख रहे थे। हमने सिकंदर और मंगोलों के आक्रमणों को झेला और फिर भी कायम रहे क्योंकि ईरान सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक सभ्यता है।

    इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर सैयद माजिद मूसावी ने भी अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने X पर लिखा अमेरिका अपने सैनिकों को मौत की ओर धकेल रहा है और वॉशिंगटन की बयानबाजी हॉलीवुड की काल्पनिक फिल्मों जैसी है। आप अपनी 250 साल पुरानी इतिहास के दम पर 6 000 साल पुरानी सभ्यता को धमका रहे हैं। यह आपकी कमजोर सोच को दर्शाता है।

    ज्ञात हो कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़े हमले करेगा। उन्होंने कहा था कि अमेरिका जल्द ही अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर देगा और ईरान को ‘स्टोन एज’ में वापस भेजेगा।

  • इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें

    इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें


    नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कई देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ जगहों पर ईंधन की राशनिंग तक शुरू हो गई है।

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल महंगा

    नेपाल में नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने पेट्रोल, डीजल और केरोसीन की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं।

    पेट्रोल: 184.50 से 187 रुपये/लीटर (कैटेगरी के अनुसार)
    डीजल/केरोसीन: 164.50 से 167 रुपये/लीटर

    एनओसी ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण घरेलू कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था।

    बांग्लादेश में जेट फ्यूल 80% महंगा

    बांग्लादेश में हालात और ज्यादा गंभीर हैं। Bangladesh Energy Regulatory Commission ने जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 80% की भारी बढ़ोतरी की है।

    घरेलू उड़ानों के लिए: 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका/लीटर
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए: 0.738 डॉलर से बढ़कर 1.3216 डॉलर/लीटर

    इस बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई यात्रा और कार्गो लागत पर पड़ेगा।

    पाकिस्तान और यूरोप भी प्रभावित

    पाकिस्तान में पहले से आर्थिक संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20-25% तक उछाल दर्ज किया गया है। वहीं जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में गैस और पेट्रोल के दाम 10-15% तक बढ़ गए हैं।

    थाईलैंड में शुरू हुई राशनिंग

    थाईलैंड में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है, ताकि सप्लाई संतुलित बनी रहे।

    क्या है राशनिंग का मतलब?

    जब किसी देश में ईंधन की भारी कमी हो जाती है या कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो सरकार या पेट्रोल पंप यह तय कर देते हैं कि एक व्यक्ति एक बार में कितना तेल खरीद सकता है। इससे सीमित संसाधनों का संतुलित वितरण किया जाता है।

    आगे क्या असर पड़ेगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो:

    तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
    महंगाई में तेजी आएगी
    ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे
    आम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा

    ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण तेल महंगा हो रहा है, जिससे नेपाल, बांग्लादेश समेत कई देशों में ईंधन कीमतें बढ़ीं और कुछ जगह राशनिंग तक शुरू हो गई।