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  • यूरोप झुलसा रिकॉर्ड गर्मी से, WHO ने दी गंभीर चेतावनी; कई देशों में जनजीवन प्रभावित, स्वास्थ्य और बिजली व्यवस्था पर बढ़ा संकट

    यूरोप झुलसा रिकॉर्ड गर्मी से, WHO ने दी गंभीर चेतावनी; कई देशों में जनजीवन प्रभावित, स्वास्थ्य और बिजली व्यवस्था पर बढ़ा संकट

    नई दिल्ली । यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है, जहां कई देशों में रिकॉर्ड स्तर का तापमान दर्ज किया जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी ने स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली व्यवस्था और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर गंभीर दबाव पैदा कर दिया है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जबकि कई स्थानों पर अत्यधिक तापमान के कारण सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का स्पष्ट संकेत है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। संगठन के अनुसार महाद्वीप का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है। वर्तमान हीटवेव से लगभग 15 करोड़ लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई देशों में स्कूलों के संचालन पर असर पड़ा है और बिजली की मांग अचानक बढ़ने से ऊर्जा प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है।

    जर्मनी में अत्यधिक गर्मी का असर परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। लीपज़िग में तेज तापमान के कारण ट्राम की पटरियों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं, जिससे सेवाएं प्रभावित हुईं। वहीं राजधानी बर्लिन में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पानी का छिड़काव किया गया। कई शहरों में प्रशासन ने लोगों से दोपहर के समय घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    फ्रांस में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह के दौरान सामान्य से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। अंतिम संस्कार से जुड़े संस्थानों पर भी काम का दबाव बढ़ा है। पेरिस सहित कई क्षेत्रों में श्मशान और कब्रिस्तानों की क्षमता पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की बात सामने आई है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

    युद्धग्रस्त यूक्रेन में यह हीटवेव नई चुनौती बनकर उभरी है। पहले से क्षतिग्रस्त ऊर्जा ढांचे पर बढ़ती बिजली मांग का दबाव बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए आपातकालीन कटौती लागू की गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध और भीषण गर्मी का संयुक्त प्रभाव देश की बिजली व्यवस्था के लिए गंभीर परीक्षा साबित हो रहा है।

    यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। कई स्थानों पर सड़कें, रेल ढांचा और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं भीषण गर्मी से प्रभावित हुई हैं। सोशल मीडिया पर अत्यधिक तापमान से जुड़ी अनेक तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, हालांकि प्रशासन लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती हीटवेव केवल मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलती जलवायु का गंभीर संकेत है। अत्यधिक गर्मी का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कृषि, ऊर्जा, परिवहन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसलिए दीर्घकालिक स्तर पर जलवायु अनुकूल नीतियों, हरित ऊर्जा के विस्तार और शहरी ढांचे को अत्यधिक तापमान के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। वर्तमान हालात यह संकेत देते हैं कि यदि वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में इस तरह की चरम मौसमी घटनाएं और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं।

  • जर्मनी के लीपजिग में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार कार भीड़ में घुसी, 2 की मौत, 22 घायल; पुलिस जांच में जुटी

    जर्मनी के लीपजिग में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार कार भीड़ में घुसी, 2 की मौत, 22 घायल; पुलिस जांच में जुटी


    नई दिल्ली। जर्मनी के लीपजिग शहर में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा हुआ, जब एक तेज रफ्तार कार भीड़भाड़ वाले शॉपिंग इलाके में घुस गई। इस घटना में 2 लोगों की मौत हो गई और 22 लोग घायल हो गए।

    कैसे हुआ हादसा?
    पुलिस के अनुसार, कार शहर के ऑगस्टसप्लात्ज क्षेत्र से होते हुए ग्रिमाइशे श्ट्रासे के शॉपिंग एरिया में घुसी और कई पैदल यात्रियों को टक्कर मारती चली गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    जानमाल का नुकसान
    इस हादसे में 63 वर्षीय महिला और 77 वर्षीय पुरुष की मौत हो गई, जबकि घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    आरोपी गिरफ्तार
    पुलिस ने मौके पर ही 33 वर्षीय जर्मन नागरिक को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह हादसा था या जानबूझकर किया गया हमला। जांच जारी है।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार बहुत तेज गति से आई और अचानक भीड़ में घुस गई। लोगों में भगदड़ मच गई और कई लोग जान बचाने के लिए दुकानों और इमारतों में छिप गए।

    सुरक्षा पर सवाल
    जर्मनी में पिछले कुछ वर्षों में भीड़भाड़ वाले इलाकों में वाहनों से टक्कर की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।

  • जर्मनी से 5000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी: बयानबाजी से बढ़ा तनाव, NATO पर मंडराया खतरा

    जर्मनी से 5000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी: बयानबाजी से बढ़ा तनाव, NATO पर मंडराया खतरा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और जर्मन चांसलर Friedrich Merz के बीच बढ़ते जुबानी टकराव के बीच अमेरिका ने जर्मनी से करीब 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने का बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार यह प्रक्रिया अगले 6 से 12 महीनों में पूरी की जाएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान मुद्दे पर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं।

    तनाव की शुरुआत उस वक्त हुई जब मर्ज ने एक कार्यक्रम में अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वॉशिंगटन के पास स्पष्ट योजना नहीं है और ईरान के साथ उसकी कोशिशें बेअसर साबित हो रही हैं। इस बयान से नाराज ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जर्मन नेतृत्व की आलोचना की और कहा कि उन्हें वैश्विक सुरक्षा की वास्तविक समझ नहीं है।

    दरअसल, जर्मनी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी लंबे समय से यूरोप में NATO की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा रही है। वर्तमान में जर्मनी में 36,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो यूरोप में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य मौजूदगी में से एक है। यहां के प्रमुख सैन्य ठिकाने जैसे Ramstein Air Base और स्टुटगार्ट स्थित कमांड सेंटर पूरे यूरोप, अफ्रीका और मध्य पूर्व में अमेरिकी अभियानों के लिए ‘लॉन्चिंग पैड’ का काम करते हैं।

    हालांकि, ट्रंप पहले भी जर्मनी से सैनिक हटाने की कोशिश कर चुके हैं। उन्होंने NATO के 2% रक्षा खर्च लक्ष्य को लेकर जर्मनी की आलोचना की थी और 12,000 सैनिकों की वापसी का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में Joe Biden प्रशासन ने रोक दिया था। अब एक बार फिर सैनिकों की वापसी का फैसला सामने आने से यूरोप-अमेरिका संबंधों में खटास बढ़ती दिख रही है।

    इस फैसले के पीछे एक बड़ी रणनीति भी मानी जा रही है। ट्रंप प्रशासन यूरोप से सैन्य फोकस हटाकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ओर बढ़ाना चाहता है, ताकि China के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह फैसला लागू होता है, तो इससे NATO की एकजुटता कमजोर हो सकती है और यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह संदेश भी जा सकता है कि अमेरिका अब अपने पारंपरिक सहयोगियों के प्रति पहले जितना प्रतिबद्ध नहीं है।

    कुल मिलाकर, जर्मनी से सैनिकों की संभावित वापसी सिर्फ एक सैन्य निर्णय नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन का संकेत है, जिसका असर आने वाले समय में यूरोप और दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई दे सकता है।

  • जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुलाएगा US…. ईरान युद्ध के बीच सहयोगियों से बिगड़े रिश्ते

    जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुलाएगा US…. ईरान युद्ध के बीच सहयोगियों से बिगड़े रिश्ते


    वाशिंगटन।
    ईरान (Iran) के साथ चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका (America) के उसके यूरोपियन सहयोगियों के साथ भी संबंध खराब होने लगे हैं। इसी बीच अमेरिका (America) ने जर्मनी (Germany) से अपने 5 हजार सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है। बता दें कि अभी गुरुवार को ही डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज (German Chancellor Friedrich Merz) पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अपने “टूटे हुए देश” पर ध्यान दें और ईरान युद्ध के बारे में सोचने में समय बर्बाद न करें।


    जर्मनी के चांसलर और ट्रंप में बयानबाजी

    ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मर्ज को “रूस-यूक्रेन को युद्ध समाप्त कराने” और “अपने टूटे हुए देश को ठीक करने (खास तौर पर आव्रजन और ऊर्जा के मामले में)” पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए तथा ईरान युद्ध के बारे में सोचने में कम समय खर्च करना चाहिए। इससे पहले बुधवार को ट्रंप ने धमकी दी थी कि अमेरिका जर्मनी में अपनी सैन्य मौजूदगी घटाने पर विचार कर रहा रहा है। जर्मनी उत्तर एटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का एक प्रमुख सहयोगी और यूरोपीय संघ (ईयू) की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जहां अमेरिका के कई अहम सैन्य अड्डा हैं।


    जर्मनी से बटालिय वापस बुलाएगा अमेरिका

    पेंटागन के एक सीनियर अधइकारी ने कहा था कि जर्मनी के चांसलर के बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे उन्हें नुकसान होने वाला है। अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि जिस तरह से यूक्रेन पर रूस के हमले के वक्त यूरोप से सैनिकों को वापस बुलाया गया था, उसी तरह का अभियान इस बार भी चलाया जाएगा। यूरोप में बड़ी संख्या में सैनिकों में कटौती की जाएगी। इसके अलावा जर्मनी में मौजूद ब्रिगेड कॉम्बैट टीम को भी वापस बुला लिया जाएगा। यहां लॉन्ग रेंज फायर बटालियन पर भी रोक लगा दी गई है।

    ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका के उसके यूरोपियन सहयोगियों के साथ भी संबंध खराब होने लगे हैं। इसी बीच अमेरिका ने जर्मनी से अपने 5 हजार सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है। बता दें कि अभी गुरुवार को ही डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अपने “टूटे हुए देश” पर ध्यान दें और ईरान युद्ध के बारे में सोचने में समय बर्बाद न करें।

    जर्मनी के चांसलर और ट्रंप में बयानबाजी
    ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मर्ज को “रूस-यूक्रेन को युद्ध समाप्त कराने” और “अपने टूटे हुए देश को ठीक करने (खास तौर पर आव्रजन और ऊर्जा के मामले में)” पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए तथा ईरान युद्ध के बारे में सोचने में कम समय खर्च करना चाहिए। इससे पहले बुधवार को ट्रंप ने धमकी दी थी कि अमेरिका जर्मनी में अपनी सैन्य मौजूदगी घटाने पर विचार कर रहा रहा है। जर्मनी उत्तर एटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का एक प्रमुख सहयोगी और यूरोपीय संघ (ईयू) की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जहां अमेरिका के कई अहम सैन्य अड्डा हैं।


    जर्मनी से बटालिय वापस बुलाएगा अमेरिका

    पेंटागन के एक सीनियर अधइकारी ने कहा था कि जर्मनी के चांसलर के बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे उन्हें नुकसान होने वाला है। अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि जिस तरह से यूक्रेन पर रूस के हमले के वक्त यूरोप से सैनिकों को वापस बुलाया गया था, उसी तरह का अभियान इस बार भी चलाया जाएगा। यूरोप में बड़ी संख्या में सैनिकों में कटौती की जाएगी। इसके अलावा जर्मनी में मौजूद ब्रिगेड कॉम्बैट टीम को भी वापस बुला लिया जाएगा। यहां लॉन्ग रेंज फायर बटालियन पर भी रोक लगा दी गई है।


    NATO में पैदा हो गया नया तनाव

    डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही नाटो को महत्व कम देते थे। वहीं जब होर्मुज बंद होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों का आह्वान किया तो किसी ने साथ नहीं दिया। ऐसे में ईरान संकट के बीच नाटो में भी काफी तनाव पैदा हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कहते रहे हैं कि नाटो देशों ने होर्मुज खुलवाने में उनका साथ नहीं दिया।

    इसी बीच वाइट हाउस ने संसद को लिखे एक पत्र में कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सशस्त्र बलों की निरंतर उपस्थिति के बावजूद वह ईरान के साथ युद्ध को खत्म ही मानता है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस संदेश के जरिए ईरान के साथ युद्ध जारी रखने के लिए संसद सदस्यों की मंजूरी प्राप्त करने की एक मई की कानूनी समय सीमा को प्रभावी ढंग से दरकिनार कर दिया गया है।

  • ईरान के मुद्दे पर US-जर्मनी आमने-सामने….. ट्रंप की चेतावनी के बाद जर्मन विदेश मंत्री का पलटवार

    ईरान के मुद्दे पर US-जर्मनी आमने-सामने….. ट्रंप की चेतावनी के बाद जर्मन विदेश मंत्री का पलटवार


    बर्लिन।
    जर्मनी (Germany) ने अमेरिका (America) द्वारा अपने सैनिकों की संख्या घटाने की किसी भी संभावना के लिए खुद को पूरी तरह ‘तैयार’ बताया है। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल (German Foreign Minister Johann Wadephul) ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) की धमकी के बावजूद नाटो और ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि ट्रंप ने बुधवार को ईरान मुद्दे पर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ विवाद के बीच जर्मनी में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों को कम करने का संकेत दिया था।

    जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने मोरक्को की यात्रा के दौरान कहा कि हम इसके लिए तैयार हैं। हम नाटो के सभी निकायों में इस मुद्दे पर गहन और विश्वासपूर्ण चर्चा कर रहे हैं तथा अमेरिका से निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले पर सहयोगियों के साथ उचित परामर्श किया जाएगा। इससे पहले चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी कहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को लेकर जर्मनी का रुख एक मजबूत और एकीकृत नाटो तथा विश्वसनीय ट्रांसअटलांटिक साझेदारी पर केंद्रित है। मर्ज ने ट्रंप के बयान का सीधा जिक्र किए बिना कहा कि बर्लिन वाशिंगटन समेत अपने सभी सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है।


    जर्मनी का भरोसा: पुराना मुद्दा, कोई नई चिंता नहीं

    विदेश मंत्री वाडेफुल ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने का विचार ईमानदारी से कहें तो बिल्कुल नया नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों के समय भी यह मुद्दा उठ चुका है। वाडेफुल ने जर्मनी में बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किसी भी तरह की चर्चा से इनकार किया। उन्होंने रामस्टीन एयर बेस का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अमेरिका और जर्मनी दोनों के लिए अपूरणीय है। उन्होंने कहा कि जर्मनी इस पूरे मामले पर पूरी तरह निश्चिंत है।

    ट्रंप का गुस्सा और सैनिकों की तैनाती पर सवाल
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि ईरान संबंधी मुद्दे पर चांसलर मर्ज के साथ विवाद के चलते अमेरिका जर्मनी में तैनात हजारों सैनिकों में से कुछ को वापस बुलाने या फिर से तैनात करने पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने मर्ज पर आरोप लगाया था कि उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सही जानकारी नहीं है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए इस बात की पुष्टि की। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने कहा था कि ईरान वाशिंगटन को अपमानित कर रहा है।

  • ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    बर्लिन। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर ईरान से हमले रोकने और कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है। तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हालिया घटनाएं हालात को और गंभीर बना सकती हैं।
    संयुक्त बयान में हमलों की निंदा
    तीनों देशों के नेताओं—फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर—ने संयुक्त बयान जारी कर क्षेत्र के अन्य देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। बयान में कहा गया कि हालात को बिगाड़ने वाले कदमों से बचना जरूरी है और संवाद ही समाधान का रास्ता है।
    परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर भी चिंता
    नेताओं ने ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने, बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों पर रोक लगाने और अपने नागरिकों के खिलाफ कथित दमन व हिंसा बंद करने की अपील की।
    उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए विश्वास बहाली के कदम आवश्यक हैं।
    सैन्य भागीदारी से किया इनकार
    तीनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे हालिया हमलों में किसी भी तरह शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका, इजरायल और क्षेत्र के अन्य साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।

    क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
    बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि अंततः ईरान की जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अवसर मिलना चाहिए।

  • भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते

    भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते


    अहमदाबाद।
    जर्मनी (Germany) ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए अपने एयरपोर्ट (Indian Passport holders) से वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा (Visa-free Transit facility) शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। इसकी घोषणा सोमवार को भारत-जर्मनी संयुक्त बयान में की गई। इस नई सुविधा से भारतीय यात्रियों को जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने के लिए अलग से ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सुगम और तेज हो जाएगी। जर्मनी के इस फैसले से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि भारत और जर्मनी के बीच आपसी संबंध और पर्यटन को भी नई मजबूती मिलेगी।


    19 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और जर्मनी ने सोमवार को डिफेंस, ट्रेड, जरूरी मिनरल्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का वादा किया। नेताओं के बीच वार्ता के बाद दोनों देशों ने कुल 19 समझौतों पर साइन किए। इसमें डिफेंस इंडस्ट्रियल सहयोग के लिए एक रोडमैप और हायर एजुकेशन सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर समझौता भी शामिल है।


    डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में बड़ा समझौता

    भारत और जर्मनी ने डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में अपने आपसी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। भारत और जर्मनी ने सीमा पार ई-कॉमर्स और समयबद्ध अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिहाज से डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य सीमा पार होने वाले ई-कॉमर्स व्यापार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान की समय पर आपूर्ति को बेहतर बनाना है। समझौता आपसी व्यापार को और अधिक सरल और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।


    बढ़ेगा निर्यात, लॉजिस्टिक सिस्टम को मिलेगी मजबूती

    बयान में बताया गया है कि इस सहयोग से निर्यात बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा जिससे भारतीय लॉजिस्टिक सिस्टम को मजबूती मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होने से भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर अपने कारोबार को बढ़ाने और नई पहचान बनाने में काफी मदद मिलेगी। यह कदम भारतीय व्यवसायों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।


    व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

    समझौते के जरिए भारत और जर्मनी मिलकर एक प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवा शुरू करेंगे। इस सेवा के तहत इंडिया पोस्ट के विशाल नेटवर्क और जर्मनी के डॉयचे पोस्ट-डीएचएल ग्रुप के वैश्विक एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वैश्विक लॉजिस्टिक ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे भारत से विदेश भेजे जाने वाले सामान की डिलीवरी अब पहले से ज्यादा तेज और भरोसेमंद होगी। साथ ही ग्राहकों के लिए सामान भेजने से लेकर मिलने तक की पूरी निगरानी करना भी काफी आसान हो जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।


    रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर सहमति जताई है। व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार के 50 अरब डॉलर के पार पहुंचने पर खुशी जाहिर की। इसके साथ ही दोनों देशों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने का समर्थन किया है ताकि आर्थिक रिश्तों को और मजबूती दी जा सके।


    सेमीकंडक्टर, खनिज और इनोवेशन पर भी सहयोग

    दोनों देशों ने बातचीत में टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और इनोवेशन के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने रिन्यूएबल इनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लाइमेट ऐक्शन में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत में फ्री और नियम आधारित नेवीगेशन व्यवस्था का समर्थन किया। साथ ही वैश्विक शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर समान विचार व्यक्त किए।


    वीजा-मुक्त ट्रांजिट सुविधा की घोषणा

    दोनों देशों ने अपने नागरिकों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की। जर्मनी की ओर से भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा की घोषणा की गई। वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा का मतलब है कि दूसरे देश जाते समय जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने वाले भारतीय यात्रियों को अलग से ट्रांजिट वीजा के लिए आवेदन नहीं करना होगा। इस कदम से भारतीय नागरिकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्रा आसान हो जाएगी। इससे दोनों देशों के नागरिकों के आपसी संबंध मजबूत होंगे। पीएम मोदी ने इस फैसले का स्वागत किया है।