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  • मप्र के सिवनी जिले के सीताफल को मिला जीआई टैग, अब राष्ट्रीय ब्रांड बनाने की तैयारी

    मप्र के सिवनी जिले के सीताफल को मिला जीआई टैग, अब राष्ट्रीय ब्रांड बनाने की तैयारी


    सिवनी।
    मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के प्रसिद्ध सीताफल को जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग मिलने के बाद अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में गुरुवार को कलेक्टर नेहा मीना ने छपारा विकासखंड के बकौड़ासिवनी और भूतबंधानी गांव का दौरा किया।

    कलेक्टर नेहा मीना ने सीताफल उत्पादक किसानों एवं कृषक उत्पादक संगठन के सदस्यों से आत्मीय संवाद कर जिले के सीताफल को जीआई टैग मिलने पर उन्हें बधाई दी तथा इस उपलब्धि का पूरा श्रेय किसानों की मेहनत और वर्षों से विकसित पारंपरिक उत्पादन पद्धति को दिया। इस दौरान उन्होंने एफपीओ की गतिविधियों, किसानों के अनुभवों तथा सीताफल उत्पादन की वर्तमान स्थिति की विस्तार से जानकारी ली।

    उन्होंने कहा कि जीआई टैग केवल सम्मान नहीं, बल्कि सिवनी के सीताफल को देशभर में विशिष्ट पहचान दिलाने का अवसर है। इस अवसर का लाभ उठाते हुए उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता बनाए रखने, वैज्ञानिक खेती अपनाने तथा संगठित विपणन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

    बैठक में सीताफल की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग तथा देश के विभिन्न महानगरों तक इसकी त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। एफपीओ सदस्यों, उत्पादक किसानों एवं प्रसंस्करण कार्य से जुड़ी महिला समूहों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विपणन, भंडारण और प्रसंस्करण से संबंधित आवश्यकताओं से कलेक्टर को अवगत कराया।

    किसानों द्वारा सिंचाई संसाधनों की आवश्यकता बताए जाने पर कलेक्टर ने ग्राम पंचायत को अधिक से अधिक खेत तालाब बनाने एवं अमृत सरोवर निर्माण के प्रस्ताव प्रस्तुत के करने निर्देश दिए, ताकि वर्षाजल का बेहतर संरक्षण हो सके और सीताफल उत्पादन का रकबा लगातार बढ़ाया जा सके।

    उन्होंने सीताफल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही बायर-सेलर मीट आयोजित करने के निर्देश दिए, जिससे किसानों का सीधा संपर्क बड़े खरीदारों और विपणन संस्थाओं से स्थापित हो सके। कलेक्टर ने सीताफल आधारित प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने पल्प निर्माण सहित अन्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने, कोल्ड स्टोरेज जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की आवश्यकता बताई। साथ ही जिले में उत्पादित समस्त जीआई टैग प्राप्त सीताफल का एक समान ब्रांड एवं साझा ब्रांडिंग बैनर के माध्यम से विपणन किए जाने पर भी सहमति बनी, जिससे बाजार में सिवनी सीताफल की विशिष्ट पहचान और अधिक सशक्त हो सके।

    दौरे के दौरान कलेक्टर नेहा मीना भूतबंधानी ग्राम भी पहुंचीं। यहां उन्होंने प्राकृतिक रूप से उपलब्ध सीताफल के पौधों के साथ-साथ विभाग द्वारा कराए गए पौधरोपण कार्य का अवलोकन किया तथा किसानों से चर्चा कर उन्हें अधिकाधिक सीताफल पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कृषक राजकुमार भलावी के खेत में किए जा रहे पौधरोपण का निरीक्षण किया तथा स्वयं भी सीताफल का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण एवं बागवानी विस्तार का संदेश दिया।

    कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पौधरोपण और वैज्ञानिक बागवानी को बढ़ावा देकर सिवनी जिले को देश में सीताफल उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाया जा सकता है। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष सदम सिंह वरकड़े, सीईओ अंजली शाह, सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग आशा उपवंशी सहित अन्य क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और कृषकों की उपस्थिति रही।

  • MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे

    MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त हो गया है। यह उपलब्धि न केवल सिवनी की कृषि पहचान को मजबूत करेगी बल्कि यहां के हजारों किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई संभावनाएं भी उपलब्ध कराएगी। लंबे समय से अपने अनोखे स्वाद और विशाल आकार के लिए पहचाने जाने वाले इस फल को अब आधिकारिक रूप से विशिष्ट उत्पाद का दर्जा मिल गया है।

    जीआई टैग किसी उत्पाद की विशेष भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्ट गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उस नाम का उपयोग केवल उसी क्षेत्र में उत्पादित वस्तु के लिए किया जा सके। सिवनी के जम्बो सीताफल को यह मान्यता मिलने के बाद इसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित हो जाएगी और अन्य क्षेत्रों में उत्पादित फल इसके नाम का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    सिवनी का जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। सामान्य रूप से एक सीताफल का वजन 200 से 650 ग्राम तक होता है लेकिन जिले के भूतबंधानी क्षेत्र में उत्पादित कई सीताफल 800 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक वजन के पाए जाते हैं। यही विशेषता इसे सामान्य सीताफलों से अलग बनाती है।

    इसके अलावा इस फल का स्वाद भी इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। इसमें बीज अपेक्षाकृत कम होते हैं जबकि सफेद और गाढ़ा गूदा अधिक मात्रा में पाया जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद मीठा स्वाद इसे उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनाता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत आसपास के राज्यों में इसकी काफी मांग रहती है।

    पोषण के लिहाज से भी यह फल बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और विभिन्न आवश्यक विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। इसी वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

    जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। अब वे अपने उत्पाद को विशेष पहचान के साथ बाजार में बेच सकेंगे जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी। साथ ही निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सिवनी के जम्बो सीताफल की अलग पहचान बनेगी।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इससे सीताफल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को गुणवत्ता आधारित खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कुल मिलाकर सिवनी के जम्बो सीताफल को मिला जीआई टैग जिले की कृषि विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट प्लान पर साझा किया मजाकिया वीडियो, किसानों के लिए उठाई बासमती चावल की जीआई टैग की मांग


    भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महिला दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव होता रहा है और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को एपीडा से जीआई टैग नहीं दिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जीआई टैग नहीं दिलाती है तो वे अनशन पर बैठने को भी तैयार हैं।

    दिग्विजय सिंह ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखने और संसद में उठाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर असंतोष जताया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों में किसान उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न मिलने के कारण उनका उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य नहीं पा रहा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन 2016 में वर्तमान केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। अब जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग मिल चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के किसानों को वंचित रखा गया।

    इस अवसर पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा बैंक से रिटायरमेंट लेने के बाद कार को घर बनाकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले हैं। दिग्विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह देखकर प्रेरणा मिली और रिटायरमेंट के बाद की योजना पर भी सोचा।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे राज्यसभा के सेकंड टर्म के बाद तीसरे टर्म के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी का काम जीवन के अंतिम क्षण तक करेंगे, लेकिन आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती किसानों को उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग बेहद जरूरी है, ताकि उनका उत्पाद पाकिस्तान और अन्य देशों के बासमती चावल के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को अब तक किसानों के हित में ठोस कदम नहीं उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और मंत्री मंडल से अपील की कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जल्द से जल्द जीआई टैग दिलवाया जाए और किसानों के आर्थिक नुकसान को रोका जाए।