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  • ट्रंप बनाम मेलोनी: फोटो विवाद के बाद ईरान मुद्दे पर आमने-सामने आए अमेरिका और इटली

    ट्रंप बनाम मेलोनी: फोटो विवाद के बाद ईरान मुद्दे पर आमने-सामने आए अमेरिका और इटली


    नई दिल्ली । अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर नई टिप्पणी करते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े सुरक्षा खतरों के मुद्दे पर इटली के रुख पर सवाल उठाए हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि नाटो पर खरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद इटली और उसकी प्रधानमंत्री ईरान से जुड़े गंभीर परमाणु खतरे के मुद्दे पर अमेरिका के साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि दशकों से अमेरिका अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है लेकिन जब वैश्विक सुरक्षा और ईरान के परमाणु खतरे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की बात आती है तो कुछ सहयोगी देश अपेक्षित समर्थन नहीं देते। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंता का विषय है और इससे साझेदारी की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं।

    ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में जी7 शिखर सम्मेलन को लेकर उनके और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच जुबानी जंग देखने को मिली थी। ट्रंप ने दावा किया था कि जी7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए बार-बार आग्रह किया था। इस बयान के सामने आने के बाद इटली में राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रंप के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि न तो वह और न ही इटली कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रंप की बातें पूरी तरह काल्पनिक हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के नेताओं के बारे में इस तरह की टिप्पणियां क्यों करते हैं।

    मेलोनी ने आगे कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं लेकिन किसी लोकतांत्रिक देश के निर्वाचित नेता का सार्वजनिक रूप से अपमान करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अपने सहयोगियों के बजाय पश्चिमी देशों के विरोधियों के प्रति अधिक सख्त रवैया अपनाना चाहिए।

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप और मेलोनी के बीच बढ़ती बयानबाजी केवल व्यक्तिगत मतभेदों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे वैश्विक सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग प्राथमिकताएं भी दिखाई देती हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका लंबे समय से कड़ा रुख अपनाता रहा है जबकि यूरोपीय देशों का दृष्टिकोण कई बार अधिक संतुलित और कूटनीतिक रहा है।

    हालांकि अमेरिका और इटली नाटो के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे के करीबी सहयोगी माने जाते हैं लेकिन हालिया घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच कुछ विषयों पर उभरते मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बढ़ी यह तल्खी कूटनीतिक स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ती है।

  • भारत-इटली रिश्तों में नई गर्मजोशी: मेलोनी ने हिंदी में कहा-परिश्रम ही सफलता की कुंजी है

    भारत-इटली रिश्तों में नई गर्मजोशी: मेलोनी ने हिंदी में कहा-परिश्रम ही सफलता की कुंजी है



    नई दिल्ली। रोम में इस सप्ताह भारत और इटली के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा देखने को मिली। प्रधानमंत्री Narendra Modi की इटली यात्रा में कई अहम समझौते हुए, लेकिन इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा दोनों देशों के रिश्तों या डील्स से ज्यादा, पीएम मोदी और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की “केमिस्ट्री” को लेकर रही।

    रोम में संयुक्त प्रेस बयान के दौरान मेलोनी ने हिंदी में एक प्रसिद्ध कहावत “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” का उल्लेख कर सभी का ध्यान खींच लिया। उन्होंने कहा कि लगातार प्रयासों से ही भारत और रोम के बीच साझेदारी मजबूत हुई है और दोनों देश कई क्षेत्रों में साथ आगे बढ़ रहे हैं।

    दौरे के दौरान पीएम मोदी ने मेलोनी को भारत की प्रसिद्ध “मेलोडी” टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद मेलोनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया और इसे “बहुत स्वादिष्ट टॉफी” बताया। यह छोटा सा सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी चर्चा का विषय बन गया।

    सोशल मीडिया पर मेलोनी की एक पुरानी तस्वीर फिर वायरल हो गई, जिसमें वह पारंपरिक भारतीय झुमके पहने नजर आ रही हैं। इस तस्वीर को कई यूजर्स ने भारत से उनके जुड़ाव का प्रतीक बताया। इसके अलावा मेलोनी पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “नमस्ते” करते हुए भारतीय परंपरा का सम्मान दिखा चुकी हैं, खासकर जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान।

  • मोदी-मेलोनी मुलाकात का असर? भारत की चेतावनी के बाद क्या पाकिस्तान को हथियार बेचना रोकेगा इटली

    मोदी-मेलोनी मुलाकात का असर? भारत की चेतावनी के बाद क्या पाकिस्तान को हथियार बेचना रोकेगा इटली




    नई दिल्ली। रोम में प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की पीएम Giorgia Meloni की मुलाकात के बाद भारत-इटली रक्षा संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा देने की बात कही है। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इटली अब पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई सीमित करेगा या उस पर रोक लगाएगा।

    भारत ने हाल के महीनों में इटली के सामने अपनी सुरक्षा चिंताओं को मजबूती से रखा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने अपने इतालवी समकक्ष Guido Crosetto से साफ कहा था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली उन्नत रक्षा तकनीक भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। भारत ने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, इसलिए संवेदनशील सैन्य तकनीक उसके हाथों तक नहीं पहुंचनी चाहिए।

    सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुई रक्षा वार्ता में भारत ने पाकिस्तान को इटली द्वारा की गई पूर्व हथियार आपूर्ति का मुद्दा भी उठाया। भारत ने खासतौर पर नौसेना प्रणालियों, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और रडार तकनीक को लेकर चिंता जताई। इसके जवाब में इतालवी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भारत को मिलने वाली अत्याधुनिक रक्षा तकनीक किसी तीसरे देश के साथ साझा नहीं की जाएगी।

    दरअसल पाकिस्तान और इटली के बीच रक्षा कारोबार काफी पुराना और मजबूत रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार चीन के बाद इटली पाकिस्तान को हथियार देने वाले बड़े देशों में शामिल रहा है। पाकिस्तान अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए इटली से नौसैनिक उपकरण, रडार, सैन्य हेलीकॉप्टर, आर्टिलरी सिस्टम और गोला-बारूद खरीदता रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2018 में इटली ने पाकिस्तान को करीब 762 मिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात की मंजूरी दी थी। वहीं हालिया आंकड़ों में इटली से पाकिस्तान को हथियार और सैन्य उपकरणों के निर्यात का आंकड़ा 541 मिलियन डॉलर से ज्यादा बताया गया है। पाकिस्तानी सेना में इतालवी हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है, जिसमें Beretta 92FS पिस्तौल भी शामिल है।

    अब स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि इटली की बड़ी रक्षा कंपनी Leonardo भारत में रक्षा और नौसेना परियोजनाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य की रक्षा साझेदारी तभी मजबूत होगी, जब इटली भारत की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी के इटली दौरे को इसी नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत-इटली रक्षा सहयोग और गहरा हो सकता है, लेकिन पाकिस्तान को हथियार सप्लाई का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी परीक्षा बना रहेगा।

  • रोम में मोदी–मेलोनी की दोस्ती चर्चा में, भारत की ‘मेलोडी टॉफी’ गिफ्ट से मुस्कुराईं इटली PM, वीडियो वायरल

    रोम में मोदी–मेलोनी की दोस्ती चर्चा में, भारत की ‘मेलोडी टॉफी’ गिफ्ट से मुस्कुराईं इटली PM, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली । इटली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की मुलाकात एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। रोम में हुई इस मुलाकात के दौरान एक हल्के-फुल्के पल ने सोशल मीडिया पर खास ध्यान खींचा, जब प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की।

    यह अनौपचारिक लेकिन भावनात्मक पल दोनों नेताओं के बीच बढ़ती व्यक्तिगत और कूटनीतिक नजदीकी को दर्शाता है। गिफ्ट मिलने के बाद मेलोनी की प्रतिक्रिया को लेकर वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी खुशी और सहजता साफ देखी जा सकती है। इस घटना ने भारत और इटली के संबंधों को एक नए मानवीय और मित्रतापूर्ण रंग में प्रस्तुत किया है।

    रोम में इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने डिनर भी किया और बाद में ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं की बातचीत और सहजता ने कूटनीतिक रिश्तों से आगे बढ़कर एक मजबूत व्यक्तिगत तालमेल को भी उजागर किया। यह तस्वीरें और वीडियो दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की प्रतीक बनकर सामने आए हैं।

    भारत और इटली के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी क्रम में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, उन्नत तकनीक और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। यह मुलाकात केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे भविष्य की साझेदारी की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

    इस दौरान भारत की ओर से वैश्विक कनेक्टिविटी परियोजनाओं, खासकर India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC) पर भी चर्चा की संभावना जताई गई। यह परियोजना भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ने की एक बड़ी पहल के रूप में देखी जा रही है, जिससे वैश्विक व्यापार नेटवर्क में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

    सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की यह मुलाकात पहले से ही चर्चा में थी, और ‘#Melodi’ जैसे हैशटैग ने इसे और लोकप्रिय बना दिया है। समर्थक इसे भारत–इटली रिश्तों में बढ़ती गर्मजोशी के रूप में देख रहे हैं, जबकि विश्लेषक इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत मानते हैं।

    रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत इटली के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया था, जिसके बाद उनकी मुलाकातें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर पर तय हुईं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना, साथ ही वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाना बताया जा रहा है।

    कुल मिलाकर, ‘मेलोडी’ टॉफी का यह छोटा-सा गिफ्ट एक बड़े कूटनीतिक संदेश में बदल गया है, जो यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं होते, बल्कि व्यक्तिगत तालमेल भी उनकी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर

    इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर



    नई दिल्ली। इटली दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात इस बार खास अंदाज में चर्चा का विषय बन गई। रोम में दोनों नेताओं के बीच न सिर्फ औपचारिक बातचीत हुई, बल्कि उनका दोस्ताना अंदाज भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

    पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को एक खास “मेलोडी” नाम की टॉफी गिफ्ट की, जिसे लेकर मेलोनी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए खुशी जताई और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए हैं, इसके लिए उन्होंने धन्यवाद भी दिया।

    इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता रोम की सड़कों पर एक ही कार में साथ नजर आए और करीब 2000 साल पुराने ऐतिहासिक कोलोजियम का दौरा किया। वहां दोनों ने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।

    इससे पहले दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी की। मेलोनी ने मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए लिखा “वेलकम माय फ्रेंड”, जिसने दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को और भी उजागर किया।

    सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी, रक्षा, ऊर्जा और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।

    भारत और इटली के बीच वर्तमान में 14 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है और दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मा और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस दौरे में स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात की, जिसमें भारत में निवेश और नई औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

    इसके अलावा दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों जैसे मिडिल-ईस्ट तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विचार साझा किए।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी 2024 में इटली का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का अंतिम पड़ाव रहा, जिसमें यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे शामिल रहे।

  • यूरोप में नए शक्ति संतुलन का उदय: फ्रांस से बढ़ी दूरी, इटली बना जर्मनी का नया 'पावर पार्टनर'

    यूरोप में नए शक्ति संतुलन का उदय: फ्रांस से बढ़ी दूरी, इटली बना जर्मनी का नया 'पावर पार्टनर'


    नई दिल्ली।द्वितीय विश्व युद्ध की राख से उबरकर जिस फ्रांस-जर्मनी की जोड़ी ने आधुनिक यूरोप की नींव रखी थी, आज वही ऐतिहासिक धुरी डगमगाती नजर आ रही है। बर्लिन और पेरिस के बीच बढ़ते कूटनीतिक गतिरोध ने यूरोपीय संघ (EU) के भीतर एक बड़े सत्ता परिवर्तन के संकेत दे दिए हैं। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच बढ़ती तल्खी ने अब जर्मनी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ओर झुकने पर मजबूर कर दिया है। दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान चांसलर मर्ज के बयानों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अब यूरोप का संचालन पुराने ढर्रे पर नहीं बल्कि नए और अलग तरीके से होगा।

    इस दरार की सबसे बड़ी वजह आर्थिक और रक्षा रणनीतियों में विरोधाभास है। जर्मनी की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ प्रस्तावित ‘मर्कोसुर’ व्यापार समझौता संजीवनी की तरह है। इसके विपरीत राष्ट्रपति मैक्रों अपने देश के नाराज किसानों को शांत करने के लिए इस डील का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। फ्रांस को डर है कि सस्ते लैटिन अमेरिकी कृषि उत्पाद उसके घरेलू बाजार को बर्बाद कर देंगे। यह आर्थिक टकराव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े प्रोजेक्ट फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम FCAS को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने हैं। फ्रांस जहां इस 100 अरब यूरो के फाइटर जेट प्रोजेक्ट पर अपना एकाधिकार और तकनीकी नियंत्रण चाहता है वहीं जर्मनी बराबरी की हिस्सेदारी और अपनी कंपनी एयरबस के लिए समान अधिकारों पर अड़ा है।

    इन्हीं मतभेदों के बीच इटली एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। मेलोनी और मर्ज के बीच न केवल वैचारिक तालमेल दिख रहा है बल्कि अमेरिका के प्रति उनके व्यवहारिक नजरिए ने भी उन्हें करीब लाया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ संबंधों को लेकर जहां फ्रांस आक्रामक रुख अपना सकता है वहीं जर्मनी और इटली मिलकर एक बैलेंस बनाने की कोशिश में हैं। 23 जनवरी को रोम में होने वाली इटली-जर्मनी शिखर बैठक इस नए गठजोड़ की आधिकारिक मुहर बन सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्रांस-जर्मनी के रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं होंगे लेकिन यूरोप के नेतृत्व का वह दौर अब बीत चुका है जहां सिर्फ पेरिस और बर्लिन की मर्जी चलती थी। अब यूरोप की राजनीति की नई पटकथा रोम के रास्तों से होकर गुजरेगी।