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  • नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन की सराहना की। बातचीत के दौरान खिलाड़ियों ने अपने खेल करियर से जुड़े कई अनुभव भी साझा किए।

    इसी मुलाकात के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले हैवीवेट बॉक्सर नरेंदर बेरवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने पुराने मुकाबले से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। यह घटना वर्ष 2015 में आयोजित वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स की है, जब नरेंदर का सामना पाकिस्तान के एक बॉक्सर से हुआ था।

    नरेंदर बेरवाल ने बताया कि यह पाकिस्तान के बॉक्सर के खिलाफ उनकी पहली फाइट थी। मुकाबले से पहले भारतीय सेना की ओर से उन्हें खास तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हारना नहीं है। इसके बाद उन्होंने मुकाबले में पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन किया और शुरुआती दोनों राउंड में बढ़त बना ली।

    नरेंदर के मुताबिक उन्होंने पहला राउंड 4-1 से जीता, जबकि दूसरे राउंड में भी 3-2 से बढ़त हासिल की। मुकाबला काफी कड़ा था और इसी दौरान दोनों खिलाड़ियों के सिर आपस में जोर से टकरा गए। फाइट खत्म होने के बाद दोनों खिलाड़ियों को इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा और उन्हें टांके भी लगवाने पड़े।

    बेरवाल ने बताया कि मुकाबले के दौरान उनके साथ भारतीय सेना के कोच नरेंद्र राणा भी मौजूद थे। फाइट के बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने उनसे बातचीत की। कुछ देर सोचने के बाद उसने नरेंदर से कहा कि वह उनसे एक बात कहना चाहता है। नरेंदर ने उसे अपनी बात कहने के लिए कहा।

    इसके बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारतीय बॉक्सर का नाम नरेंदर है, उनके कोच का नाम नरेंद्र राणा है और भारत के प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है। उसने आगे कहा कि अब उसे नरेंद्र नाम से ही नफरत हो गई है। मुकाबले के तनाव के बीच कही गई इस बात ने माहौल को हल्का कर दिया था।

    नरेंदर बेरवाल ने जब प्रधानमंत्री मोदी के सामने यह पुराना किस्सा दोहराया तो प्रधानमंत्री भी हंस पड़े। खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान सामने आया यह प्रसंग मुलाकात के हल्के-फुल्के पलों में शामिल रहा। बेरवाल ने अपने अनुभव को सहज अंदाज में साझा किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद माहौल भी खुशनुमा हो गया।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद नरेंदर बेरवाल की प्रधानमंत्री के साथ हुई यह बातचीत उनके खेल सफर से जुड़े एक पुराने अनुभव को फिर सामने ले आई। एक तरफ यह मुकाबला भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच खेल प्रतिस्पर्धा से जुड़ा था, वहीं दूसरी ओर मुकाबले के बाद हुई बातचीत ने खेल के मैदान से बाहर का एक अलग मानवीय पहलू भी दिखाया।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया। नरेंदर बेरवाल का 2015 का यह किस्सा इसी बातचीत का खास हिस्सा बना, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी हंसी के साथ सुना।

  • आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारतीय एथलीटों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और उत्कृष्ट खेल भावना का लोहा मनवाया है। ग्लास्गो में 11 दिनों तक चले वैश्विक खेल आयोजन के समापन के साथ ही पदक तालिका की अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। मुख्य प्रतियोगिताओं और पारंपरिक विषयों की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय दल ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

    इस बार प्रतियोगिता का दायरा कुछ सीमित रखा गया था, जिसके तहत वे खेल शामिल नहीं थे जिनमें भारत आमतौर पर सर्वाधिक पदक जीतता रहा है। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाया। भारत के 38 खिलाड़ियों ने सामूहिक प्रयासों के बल पर 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक देश की झोली में डाले, जो विपरीत परिस्थितियों में भी खिलाड़ियों की मानसिक सुदृढ़ता को दर्शाता है।

    वैश्विक पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अपनी सर्वोच्चता सिद्ध की। ऑस्ट्रेलियाई दल ने 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य सहित कुल 171 पदकों पर अपना कब्जा जमाया। वहीं 29 स्वर्ण के साथ कुल 110 पदक जीतकर इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कनाडा ने 19 स्वर्ण और कुल 62 पदकों के साथ तालिका में तीसरा स्थान हासिल किया।

    मेजबान देश और भारत के बीच अंतिम रैंकिंग को लेकर बेहद रोचक स्थिति देखने को मिली। भारत और स्कॉटलैंड दोनों ही देशों ने कुल 39-39 पदक अपने नाम किए और दोनों के पास 13-13 स्वर्ण पदक भी थे। हालांकि भारत द्वारा जीते गए 17 रजत पदकों की संख्या स्कॉटलैंड के 9 रजत पदकों से अधिक थी, जिसके आधार पर भारत को तालिका में चौथा और मेजबान स्कॉटलैंड को पांचवां स्थान प्रदान किया गया।

    भारतीय अभियान की सफलता में मुक्केबाजी प्रतियोगिता का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा। मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल 10 पदक हासिल किए। इसके अतिरिक्त भारोत्तोलन, एथलेटिक्स, जूडो और पैरा खेल स्पर्धाओं में भी एथलीटों ने अपनी छाप छोड़ी। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा खिलाड़ियों के योगदान ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं के विस्तार को रेखांकित किया है।

    निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेलों को इस बार आयोजन से बाहर रखा गया था। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये खेल प्रतियोगिता का हिस्सा होते, तो भारत की पदक तालिका और अधिक भव्य हो सकती थी। इसके बावजूद उपलब्ध स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारतीय खेल प्रणाली अब बहुआयामी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

    प्रतियोगिता के दौरान कुछ प्रशासनिक और नियम संबंधी चुनौतियां भी सामने आईं, जब जूडो वर्ग में एक एथलीट को प्रक्रियात्मक चूक के कारण अंतिम समय में प्रतिस्पर्धा से बाहर होना पड़ा। इस प्रकार के घटनाक्रमों के बावजूद भारतीय दल ने अपने ध्यान को केंद्रित रखा और अंतिम दिन तक पदकों की दौड़ में बने रहकर देश का गौरव बढ़ाया।

    ग्लास्गो में मिली इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब पूरे खेल जगत की निगाहें 2030 में आयोजित होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं। भारत के अहमदाबाद शहर में इन खेलों का आयोजन प्रस्तावित है, जिसे लेकर अभी से रणनीतिक तैयारियां और ढांचागत विकास की योजनाएं तैयार की जाने लगी हैं।

  • ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के आठवें दिन भारतीय एथलीटों ने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दो महत्वपूर्ण पदक डाले। ग्लास्गो में चल रहे इन खेलों में भारत को पुरुषों की भारोत्तोलन स्पर्धा में एक रजत और महिलाओं की डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में एक कांस्य पदक हासिल हुआ। इसके साथ ही एथलेटिक्स के कई अन्य आयोजनों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी और फाइनल दौर में प्रवेश कर आगामी दिनों में और अधिक पदकों की उम्मीदों को जीवंत कर दिया है।

    भारोत्तोलन के मैदान से भारत के लिए सबसे बड़ी सफलता पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग में आई, जहां लवप्रीत सिंह ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। लवप्रीत ने स्नैच श्रेणी में 176 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क श्रेणी में 212 किलोग्राम का वजन उठाते हुए कुल 388 किलोग्राम भार उठाया और रजत पदक अपने नाम किया। वह बेहद कड़े मुकाबले में महज एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए। वहीं, महिला वर्ग के 86+ किलोग्राम भार वर्ग में मार्टिना देवी मेबाम कुल 245 किलोग्राम भार उठाकर पांचवें स्थान पर रहीं।

    दिन की दूसरी बड़ी उपलब्धि महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में मिली, जहां अनुभवी एथलीट सीमा ने भारत को कांस्य पदक दिलाया। सीमा ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 58.65 मीटर दूर थ्रो फेंककर पोडियम पर तीसरा स्थान पक्का किया। इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी निधि रानी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और 57.10 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहीं। एथलेटिक्स में भारत का यह मिला-जुला प्रदर्शन वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती धाक को प्रदर्शित करता है।

    एथलेटिक्स के अन्य ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह तीनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष-12 में जगह बनाई और फाइनल में प्रवेश किया। इसके अतिरिक्त, पुरुषों की त्रिकूद स्पर्धा में प्रवीण चित्रावले और सेल्वा प्रभु ने क्वालिफाइंग दौर में क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान हासिल कर फाइनल का टिकट पक्का किया, जबकि डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर ने हाई जंप और लॉन्ग जंप में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बेहतरीन अंक बटोरे।

    हालांकि, कुछ स्पर्धाओं में भारत को निराशा का सामना भी करना पड़ा। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में अनिमेष कुजुर और 400 मीटर दौड़ में विशाल टीके फाइनल में जगह बनाने से चूक गए। गोला फेंक में तजिंदर पाल सिंह तूर पांचवें स्थान पर रहे। दूसरी ओर, लॉन बॉल्स में पुरुषों की पेयर्स टीम ने जीत दर्ज की, जबकि ट्रैक साइकिलिंग में भारतीय टीम पदक दौर तक नहीं पहुंच सकी। कुल मिलाकर आठवां दिन भारत के लिए पदकों और नए अवसरों से भरा रहा।

  • ग्लास्गो में गरजेंगे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी, नीरज चोपड़ा की अगुआई में तीनों एथलीटों ने फाइनल में बनाई जगह।

    ग्लास्गो में गरजेंगे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी, नीरज चोपड़ा की अगुआई में तीनों एथलीटों ने फाइनल में बनाई जगह।


    नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए एथलेटिक्स के मैदान से बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। ग्लास्गो के प्रसिद्ध स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में आयोजित पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा की अगुआई में भारत की तीन सदस्यीय जेवलिन टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। नीरज चोपड़ा के साथ-साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी शीर्ष-12 में जगह बनाई है, जिससे इस स्पर्धा में हिस्सा ले रहा पूरा भारतीय दल अब सीधे पदक की दौड़ में शामिल हो गया है।

    प्रतियोगिता के दौरान स्कॉटस्टाउन स्टेडियम का माहौल खिलाड़ियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग 18 डिग्री सेल्सियस का कम तापमान और सामने से लगातार आ रही तेज हवाओं ने थ्रोअर्स की राह कठिन बना दी। विपरीत परिस्थितियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे क्वालिफिकेशन राउंड में भाग ले रहे 18 प्रतिभागियों में से एक भी एथलीट 84 मीटर के ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क को नहीं छू सका। केवल चार खिलाड़ी ही 80 मीटर की दूरी तय कर पाए, जिसके चलते प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष-12 खिलाड़ियों को अंतिम चरण के लिए चुना गया।

    पूर्व राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने अत्यंत संयमित रणनीति के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 79.61 मीटर की दूरी दर्ज कर क्वालिफिकेशन में पांचवां स्थान प्राप्त किया। शुरुआती प्रयासों में ही स्थान सुरक्षित हो जाने के कारण उन्होंने अपनी ऊर्जा बचाते हुए अंतिम थ्रो नहीं करने का फैसला किया। उनके साथी भारतीय एथलीट रोहित यादव ने 78.37 मीटर थ्रो के साथ नौवां और यशवीर सिंह ने 78.36 मीटर के थ्रो के साथ दसवां स्थान हासिल कर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।

    ग्लास्गो की ठंड और कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों का सबसे ज्यादा समर्थन भारतीय स्टार नीरज चोपड़ा को मिला। पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट के कारण लंबे समय तक मैदान से दूर रहने के बाद हाल ही में प्रतिस्पर्धी खेल में वापसी करने वाले नीरज के लिए यह पड़ाव बेहद खास है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस सफलता से खिलाड़ी के गृहनगर हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित खंडरा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है और पूरे देश को अब फाइनल मुकाबले में उनसे एक और ऐतिहासिक स्वर्ण पदक की उम्मीद है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों की बात करें तो श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 82.84 मीटर के थ्रो के साथ क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अरशद नदीम 78.63 मीटर के साथ सातवें स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंचे। वहीं पूर्व राष्ट्रमंडल चैंपियन केन्या के जूलियस येगो 13वें स्थान पर रहने के कारण प्रतियोगिता से बाहर हो गए। भारतीय दल का यह प्रदर्शन एथलेटिक्स में भारत की बढ़ती धमक को दर्शाता है और अब शुक्रवार देर रात होने वाले खिताबी मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के जिम्नास्टिक पुरुष टीम फाइनल मुकाबले के दौरान एक बेहद गंभीर और भयावह हादसा देखने को मिला। ब्रिटेन के उन्नीस वर्षीय युवा जिम्नास्ट गेब्रियल लैंगटन हाई बार स्पर्धा में अपना प्रदर्शन प्रस्तुत कर रहे थे, तभी अचानक ग्रिप छूट जाने के कारण वे बेहद अनियंत्रित होकर सिर के बल सीधे फ्लोर पर गिर पड़े। इस अचानक घटी घटना के बाद एरिना में मौजूद दर्शक, कोच और साथी खिलाड़ी स्तब्ध रह गए और परिसर में कुछ देर के लिए गहरा सन्नाटा छा गया।

    घटना के तुरंत बाद आयोजन स्थल पर मौजूद मेडिकल टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोर्चा संभाला। चोटिल खिलाड़ी जमीन से उठने में पूरी तरह असमर्थ थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार शुरू किया। खिलाड़ी की गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित रखने के लिए विशेष मेडिकल सपोर्ट लगाया गया और उन्हें तुरंत स्ट्रेचर के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। इस गंभीर आपात स्थिति के कारण प्रतियोगिता को कुछ समय के लिए रोक देना पड़ा।

    चिकित्सकीय जांच और अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद खिलाड़ी पूरी तरह होश में आ गए थे और डॉक्टरों से संवाद कर रहे थे। उनके सिर और रीढ़ की हड्डी के कई विस्तृत स्कैन और परीक्षण किए गए, जिनकी रिपोर्ट सकारात्मक आई है। किसी भी प्रकार की गंभीर या जानलेवा आंतरिक चोट की पुष्टि न होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी, जिसके बाद वे अपनी टीम के पास वापस लौट आए हैं जहां डॉक्टरों की देखरेख जारी है।

    इस दुर्घटना के कारण प्रतियोगिता में भाग ले रहे अन्य खिलाड़ियों के मनोबल पर गहरा असर पड़ा। इसके बावजूद टीमों ने अपने खेल को आगे बढ़ाया और फाइनल मुकाबला पूरा किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की टीम ने अपने नाम किया, जबकि पूर्व विजेता ब्रिटेन को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ऑस्ट्रेलियाई दल ने इस मुकाबले में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

    खेल विशेषज्ञों और साथी एथलीटों ने इस घटना के बाद कहा कि जिम्नास्टिक एक अत्यधिक जोखिम भरा और कठिन खेल है, जिसमें मामूली सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है। हालांकि खिलाड़ी की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है। खेल प्रतियोगिता के चौथे दिन भारतीय दल ने कुल तीन पदक अपने नाम किए और ये तीनों ही सफलताएं भारोत्तोलन स्पर्धा में हासिल हुईं। स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय बादशाहत साबित करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि पुरुषों के वर्ग में ऋषिकांता सिंह और आर मुथुपांडी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए देश के लिए रजत पदक जीते। इन सफलताओं के साथ ही प्रतियोगिता में भारत के कुल पदकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर अपने वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया। शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता से बिना विचलित हुए उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों चरणों में जबरदस्त वापसी की और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को भारी अंतर से पछाड़ते हुए रिकॉर्ड कायम किया। यह मौजूदा खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक भी साबित हुआ।

    पुरुषों के भारोत्तोलन मुकाबलों में मणिपुर के युवा भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह ने अपनी शारीरिक चोटों की परवाह न करते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 60 किलोग्राम वर्ग में भाग लेते हुए उन्होंने स्नैच स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की। हालांकि घुटने की तकलीफ के चलते क्लीन एंड जर्क के अंतिम प्रयासों में उन्हें संघर्ष करना पड़ा, इसके बावजूद उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपनी झोली में डाला। इसी स्पर्धा के एक अन्य मुकाबले में आर मुथुपांडी ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम भार उठाया और भारत के लिए एक और रजत पदक सुनिश्चित किया।

    मुक्केबाजी रिंग से भी भारतीय दल के लिए सकारात्मक खबरें सामने आईं, जहां महिला और पुरुष मुक्केबाजों ने अपने-अपने मुकाबलों में दबदबा बनाया। महिला 54 किलोग्राम वर्ग में मुक्केबाज प्रीति ने शानदार खेल दिखाते हुए विपक्षी खिलाड़ी को दूसरे ही दौर में परास्त कर दिया और क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के एक बेहद रोमांचक और एकतरफा मुकाबले में जादूमणि सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी को सर्वसम्मत फैसले से हराकर अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की की। हालांकि 65 किलोग्राम वर्ग में आदित्य प्रताप यादव को कड़े संघर्ष के बाद अंकों के आधार पर हार का सामना करना पड़ा।

    अन्य खेल स्पर्धाओं में भारत का दिन मिला-जुला रहा। तैराकी के पुरुषों की 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले वर्ग में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम दौर में कड़े मुकाबले के बीच वे छठे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। इसके अलावा लॉन बॉल्स, जिम्नास्टिक और व्हीलचेयर बास्केटबॉल की स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ओर से कड़ी चुनौती पेश की, हालांकि वे अंतिम चरण तक पहुंचने में असफल रहे। तपन मोहंती ने आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक के फाइनल में संघर्ष किया, पर वे पदक तालिका में स्थान बनाने से थोड़ा पीछे रह गए।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले नीरज का दमदार संदेश, कहा- विदेशी खिलाड़ियों से अब नहीं घबराते भारतीय

    कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले नीरज का दमदार संदेश, कहा- विदेशी खिलाड़ियों से अब नहीं घबराते भारतीय


    नई दिल्ली । भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारतीय खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास को देश के खेलों के लिए सबसे बड़ा बदलाव बताया है। ग्लासगो पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में नीरज ने कहा कि अब भारतीय खिलाड़ी विदेशी एथलीटों से डरते नहीं हैं, बल्कि पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करते हैं। उनका मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खेलों की तस्वीर बदली है और इसका सबसे बड़ा कारण खिलाड़ियों का मानसिक रूप से मजबूत होना है।

    नीरज ने कहा कि पहले भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विदेशी खिलाड़ियों को खुद से बेहतर मान लेते थे। इससे प्रदर्शन पर भी असर पड़ता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज भारतीय एथलीट कड़ी मेहनत, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर तैयारी के दम पर दुनिया के किसी भी खिलाड़ी को चुनौती देने का माद्दा रखते हैं। यही आत्मविश्वास अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी तैयारियों को लेकर नीरज ने कहा कि ग्लासगो की ठंडी हवाएं और मौसम निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन ये परिस्थितियां सभी खिलाड़ियों के लिए समान हैं। ऐसे में मौसम को बहाना बनाने के बजाय मानसिक रूप से मजबूत रहना ज्यादा जरूरी है। उनका कहना है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में यह सोचना चाहिए कि उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे किया जाए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में उनका लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं होता, बल्कि अपनी तकनीक और रणनीति को पूरी तरह लागू करना होता है। यदि खिलाड़ी मैदान पर अपना शत-प्रतिशत दे देता है तो परिणाम अपने आप बेहतर आते हैं। नीरज ने कहा कि वह हर बार भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतरते हैं तो वह प्रतियोगिता उनके लिए खास बन जाती है और इस बार भी उनका प्रयास देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का रहेगा।

    फिटनेस को लेकर नीरज ने भरोसा जताया कि वह पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि विश्व चैंपियनशिप और दोहा प्रतियोगिता के बाद उन्होंने अपनी कमजोरियों पर लगातार काम किया है। अब वह खुद को पहले से ज्यादा फिट और तैयार महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के तुरंत बाद एशियन गेम्स होने हैं, इसलिए लगातार फिट रहना और प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

    90 मीटर से ज्यादा का थ्रो करने के बाद हर प्रतियोगिता में उसी प्रदर्शन को दोहराने के दबाव के सवाल पर नीरज ने कहा कि उनका ध्यान किसी एक दूरी पर नहीं रहता। उनका लक्ष्य हर बार अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करना और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच अपनी पहचान मजबूत बनाए रखना है। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्लासगो में मुकाबला बेहद कठिन होगा क्योंकि यहां ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और डायमंड लीग के कई चैंपियन खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन वह पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे।

    नीरज चोपड़ा ने खिलाड़ियों को मिल रहे सरकारी सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रशिक्षण, विदेशों में अभ्यास और अन्य सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। इससे भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में बड़ी मदद मिली है। उनका मानना है कि यदि यही समर्थन और तैयारी आगे भी जारी रही तो भारतीय खिलाड़ी आने वाले वर्षों में वैश्विक खेल मंच पर और अधिक बड़ी सफलताएं हासिल करेंगे।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के शुभारंभ के साथ भारत ने भी अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दल को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि देश के खिलाड़ी पूरे जोश, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ प्रतियोगिता में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलीट केवल पदक जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनुशासन, मेहनत और समर्पण से देश के करोड़ों लोगों को प्रेरित करने के लिए भी पहचाने जाते हैं। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारतीय खेल जगत की निगाहें ग्लासगो में होने वाले मुकाबलों पर टिकी हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभा और कठिन परिश्रम हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी भारतीय दल खेल भावना का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन करेगा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाएगा। उनके संदेश को खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है।

    स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का उद्घाटन रंगारंग समारोह के साथ हुआ। उद्घाटन की औपचारिक घोषणा किंग चार्ल्स तृतीय ने की। वर्ष 2014 के बाद दूसरी बार ग्लासगो इस बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है। उद्घाटन समारोह में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में भाग लिया और अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन किया।

    भारतीय दल की अगुवाई इस बार ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने की। मीराबाई चानू ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय खिलाड़ियों का नेतृत्व किया, जबकि लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह और बढ़ा दिया।

    भारत ने इस बार 126 सदस्यीय दल भेजा है, जो पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में चुनौती पेश करेगा। भारतीय खिलाड़ियों का लक्ष्य कॉमनवेल्थ खेलों में अपने मजबूत प्रदर्शन की परंपरा को आगे बढ़ाना है। प्रतियोगिता के शुरुआती चरण में ही भारत का अभियान शुरू हो चुका है और कुछ खिलाड़ियों ने प्रभावशाली शुरुआत भी की है। मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन पहले ही सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक पदक सुनिश्चित कर चुकी हैं, जिससे दल का आत्मविश्वास बढ़ा है।

    भारत की पदक उम्मीदें कई अनुभवी और स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हैं। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा, वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू और मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन से शानदार प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही है। इनके अलावा कई युवा खिलाड़ी भी पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं तो इस बार भी पदक तालिका में भारत मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 74 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी 11 दिनों तक विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के कौशल की परीक्षा है, बल्कि खेल भावना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। भारतीय दल का लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन के साथ देश का गौरव बढ़ाना और वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना रहेगा।

  • ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ

    ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ


    नई दिल्ली । स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक शहर ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शानदार आगाज हो गया। रंगों रोशनी संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी भव्य उद्घाटन समारोह ने दुनिया भर से पहुंचे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। ओवीओ हाइड्रो एरिना में आयोजित इस समारोह में स्कॉटलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसी के साथ अगले 11 दिनों तक चलने वाले खेलों के इस महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ हुआ जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पदकों के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

    कॉमनवेल्थ की परंपरा के अनुरूप ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय ने आधिकारिक रूप से खेलों का उद्घाटन किया। वर्ष 2014 के बाद एक बार फिर ग्लासगो को इन प्रतिष्ठित खेलों की मेजबानी का अवसर मिला है। उद्घाटन समारोह में स्कॉटलैंड की संस्कृति लोक परंपराओं और आधुनिक कला का अनूठा प्रदर्शन हुआ। प्रसिद्ध कलाकारों केटी टुनस्टॉल नाथन इवांस और सेंट फीनिक्स की शानदार प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया। संगीत नृत्य और रोशनी के शानदार संयोजन ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

    भारत के लिए उद्घाटन समारोह बेहद गर्व का क्षण साबित हुआ जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ने भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए परेड ऑफ नेशंस में तिरंगा थामा। जैसे ही भारतीय दल एरिना में पहुंचा पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रीय ध्वज को गर्व के साथ थामा जबकि टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ भारत की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।

    इस बार भारत ने 125 सदस्यीय मजबूत दल ग्लासगो भेजा है जो पैरा खेलों सहित 13 विभिन्न खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा। हालांकि इस संस्करण में प्रतियोगिताओं की संख्या पिछले संस्करणों की तुलना में कम रखी गई है लेकिन भारतीय दल में कई ओलंपिक और विश्व स्तरीय पदक विजेता खिलाड़ियों की मौजूदगी देश की पदक उम्मीदों को मजबूत बनाती है। भारत का लक्ष्य एक बार फिर कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी खेल शक्ति का दम दिखाना और पदक तालिका में मजबूत स्थान हासिल करना है।

    दिलचस्प बात यह रही कि उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत का अभियान शुरू हो चुका था। भारतीय लॉन बॉल्स टीम सबसे पहले मैदान पर उतरी और उससे बर्मिंघम 2022 जैसे ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद की जा रही है। पिछली बार लॉन बॉल्स में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल कर पूरे देश को गौरवान्वित किया था और इस बार भी खिलाड़ियों से वैसी ही उम्मीदें हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें संस्करण में 74 देशों और क्षेत्रों के हजारों खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिताएं 10 खेलों में आयोजित की जाएंगी जिनके मुकाबले स्कॉटिश इवेंट कैंपस स्कॉटस्टाउन स्टेडियम टोलक्रॉस इंटरनेशनल स्विमिंग सेंटर और ग्लासगो एरिना जैसे विश्वस्तरीय मैदानों पर खेले जाएंगे। आयोजन का दायरा भले ही पहले की तुलना में थोड़ा छोटा हो लेकिन प्रतियोगिता का स्तर पहले की तरह बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रहने की उम्मीद है।

    भारत की नजरें इस बार कई बड़े सितारों पर टिकी होंगी। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में देश की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे जबकि मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग में और लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा भारतीय मुक्केबाजी दल भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। उद्घाटन समारोह के साथ अब नजरें मैदान पर होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा पर टिक गई हैं जहां पदकों रिकॉर्ड और नए इतिहास का इंतजार पूरी दुनिया को रहेगा।